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आम है खास

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फल तो सभी अच्छे लगते है, पर आम सभी के दिलों का राजा है, पर सभी के लिए खास है आम, बच्चें,बूढ़े और जवान सबकी एक ही पसंद फलों का राजा आम। आम के है बहुत से फायदे, आम का आचार सबको भाए, कच्चे आम की चटनी चटखारे लगा के सब खाएं। आम का मुरब्बा,और आम का पन्ना खाएं गर्मी को दूर भगाएं। आमों को देख कर सबका मन ललचाए, आमों से भरता नहीं दिल किसी का कभी मैंगो शेक पिए तो कभी आम चूसें। यही है आम की कहानी, प्रीत की जुबानी।  जो सुने रहा न जाए,दिल ललचाए खाए बिना रहा न जाए। हरप्रीत कौर दिल्ली

योग

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आसन से शरीर को स्वस्थ हम बनाएं, योग करें और भारत को निरोग हम बनाएं, घर घर में योग हम पहुंचाएँ। प्राणायाम से सारे रोगों को दूर भगाएं, अपने जीवन को फूलों सा महकाएं, योग करके रोगों से छुटकारा हम पाएं, और पूरे विश्व में योग की जोत जलाएं। सेहतमंद होने से बनेगा विश्व मजबूत, बोना होगा हमें योग का बीज। सींचनी होगी हमें योग की फुलवारी, सारी दुनिया रहेगी हमारी आभारी। आत्मा और परमात्मा से जोड़ता है योग, योग दिवस पर हमेशा जलती रहे इसकी जोत, करें योगाभ्यास करने की तैयारियाँ, हरी भरी रखना हमेशा योग की क्यारियां। हरप्रीत कौर दिल्ली

मुस्कान

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हर किसी के चेहरे पर मुस्कान अच्छी लगती है। चेहरे पर अलग सी खुबसूरती देती हैं मुस्कान। किसी की जिंदगी को संवार देती है मुस्कान,किसी के दुख को सुख में बदल देती है मुस्कान। चिंता से मुक्त कर देती है मुस्कान किसी के जीवन में उमंग भर देती है मुस्कान। मुस्कुरा कर कोई तकलीफ में पूछ ले आपका हाल तो चेहरे पर सुकून देती है मुस्कान। कोई हाथ पकड़ कर मुस्कुराते हुए कहे मै तुम्हारे साथ हूं तो उस अकेलेपन के डर को दूर करती है मुस्कान। हरप्रीत कौर दिल्ली

दुनिया का मेला

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दुनिया एक मेला है, यहां हर कोई अकेला है। यहां हर कोई मुसाफिर है, थोड़े समय का। यहां हर कोई वक्त गुजारेगा, कोई दुख पायेगा तो कोई सुख पाएगा कोई मोह माया के चक्कर में पड़ जायेगा। यहां किसी के पास वक्त नहीं, सभी अपने काम में मशगूल है। यहां हर कोई पैसों के पीछे भाग रहा है कोई ऐशो आराम से जी रहा है। किसी को किसी की परवाह नही है, अगर इस दुनिया में रहना है तो आंखे खोल कर रख, कानों से सुन। जब ऊपर से बुलावा आएगा तो सब यहीं रह जायेगा। खाली हाथ ही ऊपर जायेगा। ये दुनिया का मेला फिर पीछे रह जायेगा। हरप्रीत कौर शाहदरा, दिल्ली

स्त्री

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जब भगवान स्त्री को बनाता है उसमे कूट कूट कर सक्षमता भरता है, और जब पुरुष को बनाता है तो उसे हर तरह से सक्षम बनाता है।फिर पुरुष स्त्री से अपनी तुलना क्यों करता है अगर पुरुष समुंद्र है तो स्त्री समर्पण है। बिना स्त्री के पुरुष का कोई वजूद नहीं है तो फिर भी पुरुष स्त्री पर हावी क्यों रहता है। वो स्त्री को प्रेम में जीतना चाहता है,पर पुरुष को स्त्री के प्रेम में हार जाना चाहिए।उसे स्त्री के प्रेम के साथ साथ सम्मान भी करना चाहिए।तभी वो अच्छा पुरुष बन सकता है।जिस प्रकार एक स्त्री एक भावुक पुरुष को देख कर आकर्षित होती है उसी तरह एक पुरुष भी एक मजबूत स्त्री पर आकर्षित होता है। जितना आसान स्त्री का मजाक उड़ाना और उस पर छींटाकशी करना है उतना ही मुश्किल स्त्री होना है। और जितना आसान पुरषों को कठोर और अभद्र कहना है उतना ही मुश्किल पुरुष होना है।तभी तो भगवान ने स्त्री और पुरुष को एक दूसरे के पूरक बनाया है।स्त्री को सही गलत स्वीकारने की सोच दे रखी है।पर पुरुष स्त्री की सक्षमता को स्वीकारता ही नही है। अगर पुरुष स्त्री की सक्षमता को स्वीकारता तो पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी न बनता। हरप्रीत कौर द...

सरदार पटेल

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गुजरात में बहुत गरीब किसान परिवार में जन्में, हर दर्द से गुजरे,किसान के दर्द को भी बहुत करीब से जाना उन्होंने, नमन है सरदार जी को इतिहास द्वारा जाना हमने, सुना है उनके बारे में तभी उन्हें पहचाना हमने, लौह पुरुष सरदार पटेल कहलाते थे, अंग्रेजों को भारत से बाहर भगाया, भारत देश को आजाद करवाया, आज भी हमें वही लौह पुरुष चाहिए, जिसने किसानों के लिए लड़ाई लड़ी, सरदार पटेल भारत को अच्छा उत्पादक बनाना चाहते थे, कोई भूखा न रहे ऐसा भारत चाहते थे, वकील वकालत छोड़,देश सेवा में जुट गया, भारत को एकता की डोर में बांधने  लग गया, सम्मान दिया एकता की मूर्ति बनाकर, जिसको नाम दिया स्टैचू ऑफ़ यूनिटी, तुम देश की हो आन, बान और शान, तुम्हीं से बनी है देश की पहचान, सारा देश करता तुम्हें शत शत प्रणाम। हरप्रीत कौर दिल्ली

करवाचौथ

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हाथ में लगी मेंहदी, कर के सोलह श्रृंगार, सिर पर लाल चुनरिया ओढ़े, भूखी,प्यासी अपने पिया के लिए, मांग में सिंदूर सजाए। सज संवर कर, पूजा का थाल सजाए, बैठी पिया के इंतजार में,चांद को निहारती हुई, अपने चांद का इंतजार करती हुई, कि कब आयेंगे पिया अपने हाथ से पानी पिलाने, इंतजार हुआ पूरा निकल आया चांद, छलनी से पहले चांद को देखा, फिर अपने बलमा को प्यार से निहारती हुई, लोटे से जल चढ़ाती हुई चांद को, पिया ने प्यार से पानी पिलाया और मीठा खिलाया, और गोद में उठाकर छत से नीचे लाते हुए करवाचौथ मनाया। हरप्रीत कौर दिल्ली

गलियां उनकी

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छोड़ आए हम वो गलियां जहां हमारा बचपन बीता, जहां दोस्तों से रोज मुलाकातें हुआ करती थी, खेल खेल में एक दूसरे से लड़ाई वो हसी मजाक सब पीछे छोड़ आए हम। उन गलियों में प्यार था बेशुमार, हम बेफिक्र होकर उन गलियों में घूमते, न वो गलियां रही न वो दोस्त, पुराने दोस्त जुदा हो गए, रह गई बस उनकी यादें। वो गलियां अब सुनी हो गई है जो गलियां कभी अपनी हुआ करती थी। वो अंजान हो गई हैं। हरप्रीत कौर दिल्ली

नटखट कान्हा

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बंदी गृह में जन्म लिया कान्हा ने, तोड़ दिए बंदी गृह के बंधन, देवकी,वासुदेव का नंदन, चल पड़ा यशोदा और नंद बाबा के गांव के अंदर, मोर मुकुट सिर पर साजे, बांसुरी हाथ में मोहत बाजे, नदिया के तट पर करे शरारत, गोपियों संग रास लीला रचावत, कान्हा का बाल रूप है बहुत प्यारा, जिसे देख हर्षित जग सारा। घर घर से वो माखन चुराते, बड़े चाव से उसको खाते, उनका सुंदर रूप देखकर हर्षित होते नर नारी, ऐसे है कान्हा मनोहारी, असुरों को मार गिराया, कालिया नाग को सबक सिखाया, एक उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया, दोस्ती का भी फर्ज निभाया, गीता का भी पाठ पढ़ाया, भटके हुए की राह हो तुम, चारों दिशाओं में कान्हा तुम ही तुम। हरप्रीत कौर दिल्ली

सफर

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मैने तय कर लिया है तेरे बिना कोई सफर नही करूंगी, तेरे साथ ही जीवन का हर सफर गुजारूंगी, वो प्यार भरे खुशनुमा पल तेरे आगोश में बिताऊंगी, वो तेरे साथ कितना रोमांचक सफर होगा, ये सोच कर ही दिल को सुकून मिल जाता है, अब तो उस पल का इंतजार है कि, ये हसीन सफर कब होगा, कब मिलेगा चैन दिले बेकरार को, कब सुकूं से नींद आयेगी तेरी बाहों में, वो हसीन सफर का इंतजार कब खत्म होगा। हरप्रीत कौर दिल्ली

दहेज

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बेटियों के सुविधा के लिए, दिया जाता है ये,जो कहलाता दहेज ये। लड़के वालों ने दहेज पर अपना हक जमाया, मुंह मांगे दामों पर अपने आप को बिकवाया, बाजार में अलग अलग दूल्हों के अलग अलग दाम है। वाह री दुनिया दूल्हों की भी अपनी अलग पहचान है। जब तक ये अभिशाप रहेगा, तब तक दूल्हा बिकता बेहिसाब रहेगा। बंद करों ये दहेज लेना और देना,कुछ तो सोचो, दहेज लेना और देना पाप होगा तू भी किसी दिन किसी बेटी का बाप होगा। अपनी सोच को बदलो, दुल्हन ही दहेज है।  इस बात को समझो और इसे अपनाओ, दहेज जैसी कुप्रथा को खत्म करों, समाज में हो रही भ्रूणहत्या को रोको, बेटियों को अपनाओ और उन्हें पढ़ाओ। हरप्रीत कौर दिल्ली

लिखती हूं दर्द

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जब भी दर्द को महसूस करती हूं, अपने दर्द को पन्नो पर उतार देती हूं, कुछ देर के लिए दर्द कम तो हो जाता है, पर पूरी तरह जाता नही। आंखों से बहते रहते है आंसू, जो दर्द पन्ने पर उतारा था, मेरा दर्द, मेरे आंसू उसका सारा बोझ, वो पन्ना उठा लेता है, दर्द से और आंसुओं से भीगा हुआ वो पन्ना अपनी अलग कहानी सुनाता है। शायद कोई समझे ना समझे वो पन्ना मेरा दर्द समझता है, मेरे आंसुओं को देखकर वो भी रो पड़ता है, अब वो पन्ना ही मेरे दिल के करीब है वो ही मेरा सहारा है जो, मेरे आंसुओं,और मेरे दर्द का बोझ उठाते हुए अपना वजूद खो देता है। हरप्रीत कौर दिल्ली

आग

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न तुमने मुझे समझा, न मैने तुम्हें समझा, तुम छोड़ कर चले गए, और पलट कर देखा भी नहीं, कुछ तो कहा होता, कुछ तो समझा होता, कि तेरे बिना कैसे जियूंगी मैं, एक बार भी नही सोचा, जो मोहब्बत की आग दिल में भड़का कर गए थे, वो बुझी है की नही, एक बार वापिस आ जाओ, एक बार फिर से जी लें हम, कुछ तुम झुको, कुछ हम झुके, और जो मोहब्बत की आग अब तक सीने में लगी है, आज उसे बुझा ले हम, एक बार फिर से जी लें हम। हरप्रीत कौर दिल्ली

पावन पर्व

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सावन के महीने में आता ये पावन पर्व जो कहलाता रक्षा बंधन। साल भर रहे भाई की कलाई सूनी। जिसे प्यार के धागे से बांधती बहने। रेशम का धागा होता है कच्चा, पर बहन का प्यार होता है सच्चा। बहन को ना चाहिए धन,दौलत और न ही उपहार। यू ही बना रहे भाई बहन का अटूट प्यार। बहन बड़ी हो या छोटी भाई को करती प्यार। और उसके लिए दुआ मांगती अपार। भाई हमेशा खुश रहे होती रहे उस पर खुशियों की बोछार। खुशनसीब होती है वो बहने जिसके सिर पर होता है भाई का हाथ। भाई की हो लंबी उम्र रहे हमेशा बहन के साथ। अगस्त के महीने में पड़े रिमझिम फुहार। सबको मुबारक हो ये राखी का त्योहार। हरप्रीत कौर दिल्ली

पिकनिक

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जिंदगी की इस भागम भाग से दूर कहीं चले जाते है, चलो थोड़ी देर के लिए पिकनिक मना आते है, कहीं दूर तुम और मैं सुकून के दो पल बिता आते है, बच्चों की तरह बचपन जी आते है, रोज की जद्दोजहद से दूर प्यार के कुछ पल गुजारते है, चलों दूर एकांत में पिकनिक मना आते है, कुछ दिनों के लिए अपने आप को तरो ताजा कर आते है, फिर से संघर्ष से भरी जिंदगी को जीने के लिए चार्ज होकर आते है, चलों कहीं दूर हम दोनो मिलकर पिकनिक मना आते है। हरप्रीत कौर दिल्ली

देश का लाडला नीरज

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हरियाणा का बेटा नीरज, हुई उसकी तपस्या पूरी, ओलंपिक में जीता स्वर्ण पदक, कर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, हर्षित हुआ है जन जन, बढ़ाया है देश का मान, बधाईयां दे रहा है पूरा भारत महान, भाला फेंक जीता स्वर्ण, बजा टोक्यो में हमारा राष्ट्र गान, उम्र तेईस में नीरज ने किया स्वर्ण अर्जित, सौ वर्ष बाद इतिहास रच दिया गर्वित। हरप्रीत कौर दिल्ली

गजल

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तुम्हें देख कर मदहोश हो जाए दिल,वो दिलकश शराब हो तुम। जिसे पीकर फिर होश न आए,वो महकता शबाब हो तुम।। तुम्हें नहीं पता, बहार ए गुलशन का वो खूबसूरत गुलाब हो तुम। रोशन जिस से जहान है, वो आफताब हो तुम।। लिखा खुदा ने जिसे,वही किताब हो तुम। हसीं चेहरे से नकाब हटा लो,बहुत लाजवाब हो तुम।। जिससे महकता मेरा जहां हो,प्रीत वो ख्वाब हो तुम। आशिक हूं तुम्हारा,मेरे हर सवाल का जवाब हो तुम।। हरप्रीत कौर दिल्ली

देश की बेटी

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लवलीना बोरगोहेन ने किया कमाल, ओलंपिक में लाई कांस्य पदक, और पूरे भारत की बनी तीसरी बॉक्सर, हमें गर्व हैं लवलीना पर, जिसने तुर्की की चैंपियन को दी मात, तेईस वर्ष की उम्र में लवलीना ने रचा इतिहास। गोलाघाट की रहने वाली लवलीना पर करते है हम सब गर्व, मेरी कॉम के बाद दोहराया जाएगा सदा लवलीना का नाम, और साथ में होगा उनके परिजनों का भी नाम। महिला कोच शिव सिंह को करता है सारा भारत नमन, जिसने बहादुर बेटी को दिया प्रशिक्षण, लवलीना ने किया भारत का सिर गर्व से ऊंचा, वो है लवलीना बोरगोहेन हमारे देश की विजेता। हरप्रीत कौर दिल्ली

दुनिया एक रहस्यमई

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🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 कभी लगता हैं खुशियों का मेला हैं कभी लगता हैं दर्द से भरी गमो ने घेरा हैं लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! खो जाते हैं कोई कभी किसी के गहरी यादो में तो सोता हैं बेफिक्र सा चैन की नींद रातो में लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! आँखों में सजते हैं किसीके चाहत के सपने तो कोई किसी के ख़्वाबों से भी डरता हैं  लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! कम नहीं होरही हैं यहाँ किसी के हँसी होठों की तो कोई खामोश हैं यहाँ मुस्कुराना भी सज़ा हो जैसे लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! कुछ पता नहीं चलता यहाँ कब क्या होजाए कभी लगता हैं मिल जाए कोई अपना कभी अपनों से ही दूर भागते हैं लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई नैना  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿...

बाघ सरंक्षण

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बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु है।1973 में  बाघ को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया गया था। बाघ बिल्ली की प्रजाति का जीव है यह एक मांसाहारी जानवर है जो अपने भोजन के लिए अन्य वनजीवो के शिकार पर निर्भर रहता है। हर बाघ के शरीर पर अलग अलग प्रकार की धारियां होती है पर इसका सामान्य रंग काला और हल्का भूरा होता है। कुछ बाघों की प्रजाति अलग होती है तो उनकी धारियों का रंग नीला और सफेद होता है। बाघ का औसतन वजन 100 किलो होता है।बाघ बहुत तीव्र गति से दौड़ता है।ज्यादा वजन होने के कारण ये जल्दी थक जाता है।तभी ये छुप कर अपने शिकार को झट से दबोच लेता है। बाघ अक्सर अकेले और अपनी निश्चित क्षेत्र में रहना पसंद करते है। सफेद बाघ भी होते है पर वो ओडिशा में पाए जाते है। मादा बाघ साढ़े तीन महीने के गर्भ में ही दो या तीन बच्चों को जन्म देती है। बाघ के बच्चें बचपन से ही शिकार करना सीख जाते है।तीन साल तक ये बच्चे अपने माता पिता के साथ रहते है फिर अपनी मर्जी से रहते है।बाघ की आयु कम से कम 19 से 20 वर्ष होती है।बाघ बहुत ही निपुण होते है इनकी निपुणता के कारण ही इन्हें राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया गया है। अब विश्व में बाघों ...