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Showing posts with the label मनीष कुमार

ये जालिम दुनियां और नारी शक्ति ❤️🕯️

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जालिम ये जालिम दुनियां क्यूं तड़पाता है रे तू, क्या तू अपनी औकात भूल गया , जब तू भी अपने मां के गर्व से जन्म लिया , कितना दर्द सहा होगा उस मां ने , तुम जैसे पाखंडी बेटे को जन्म देकर, क्यूं आया है री तू प्यार को बदलाम करने , मर क्यों नहीं गया उसी दिन , जब तुम्हें तुम्हारी मां ने अपने आंचल में छिपाया , और स्नेह का दूध पिलाकर तुम्हें, हट्ठा कट्ठा जवान किया, क्या इसी दिन देखने को .? तुम मां रूपी नारी को चोट पहुंचाने को, उसकी भावनाओं से खिलवाड़ करने को अरे शर्म से मर जाओ, तुम्हें अपनी मां का कद्र नहीं , तो क्या प्यार की कद्र करोगे , तुम दरिंदों सालों नियति को पहचानो, तुम्हारी भी जब बेटियां जन्मे , तुम्हें तुम्हारी औकात दिखा दे, सता जो रहे हो तुम दुर्योधन बनकर, तुम्हे नरक में भी न जगह मिले, ये जो मर्द बनते फिरते हो , किसी को झांसे में लेकर , तेरी औकात क्या है ? तुम्हें नारी शक्ति का आभास नहीं है, चले जाओगे वही तहखाने में जब, आभास नहीं होगा समाज में कितनी  कुरूतियां फैलेगी  तुम्हारे दरमियान, हे भगवान 🙏 विनती है और  सुन लीजिए मेरी पुकार, जब मौत आए कभी मेरे सनम को , तो आप...

सपनों का घर ( घरौंदा 🏡)

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❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 चले पड़े हैं काम की राह में, इस चिलचिलाती धूप गर्मी में,  जहां किसी को मिलती छांव नहीं, तब याद आती हैं घरौंदा अपना , जहां मिलती हैं ठंडक प्यार घरों का, पशु पक्षी भटक रहे हैं , किसी का न है खेत खलिहान , न किसी की पेड़ पौधे, बस लौट आना है इस तपती दुपहरी में, अपने बने बनाए घास फूस, मिट्टी की घरौंदे में, जहां मिलती है सुकून अपने सोने की महल का । चले भी जाए कोई इंसान छोड़कर , बाहर किसी आशियाने बनाकर , अपनी सपनो का घर भुलाकर , अपने भटकती मंजिल तक पहुंच जाना है, फिर भी याद सताती है वही अपनो की घरौंदे , जहां मां बाप भाई बहन हो घरौंदे में ।  जुग्गी झोपड़ी हो या कोई मिट्ठी की , सबका अपना प्यारा सा घर होता है , जिसमे बसती हैं हमारी बचपन की यादें , अपने भाई बहनों , मां बाप की  डोरियां ,  ऐसी होती हैं घरौंदा हमारा । छोड़ना पड़ता है हर किसी को एकदिन , वो प्यारा सा घरौंदा अपना , किसी की पुकारती गरीबी अपनी , तो किसी को बताती हैं बेटी होने का फर्ज , जो छोड़ जाते हैं घरौंदा एक दिन ,  सच... एक दिन आंसू भरी याद दिलाते हैं । लड़के हो या लड़क...

❣️मेरे जीवन साथी ❣️

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Dear ❤️ मेरी जान 💓,            आज तारीख 22/2/2022 है और मैं आपके लिए इस तारीख की शुभ अवसर पर कुछ कहना चाहता हूं 😍।  जान❣️... मैं जानता हूं कि आप मुझसे बेइंतहान प्यार करती हो और मैं ये भी जानता हूं कि आपकी रूह और धड़कने सिर्फ तो सिर्फ मेरे लिए धड़कती है 😍। और ऐसा नहीं है कि मैं आपको miss नही करता हूं 🙄, प्यार, सम्मान और दुआएं क्या होता है और दिल में सुकून भरी फीलिंग्स कैसे मिलती है ये आपने ही मुझे दिया है 😍। वो दिन याद है जब एक बार टूट कर बिखरा तो "मिथलेश दीदी" ने आकर मुझे संभाला 🤗 और थोड़ी बहुत मैं उठ भी गया but दूसरी बार मुझे अंदर से झकझोर कर रख दिया 💔💔😥 तो आपने आकर मुझे संभाला हर मोर्चे पर किलाबंदी करके आपने ही प्यार 😍❣️ और स्नेह से मुझे भर दिया 😍। जान❣️ मैं नित्य दिन आपको पाने और मिलने की तड़प मेरे सीने 💓से गुजरती 😥 । मैं जानता हूं कि आप किस हद से गुजर रही हैं और शायद अगर मैं होता आपके पास तो एक तिनका भी आपके गम और दर्द को छूने नही देता😥🥰। मीलों दूर हूं जान❣️ ओर ये चीज मुझे बहुत खटकती है दिल में स्नेह इतनी है कि आपके छोड़ जाने...

🌹 प्यार फिर तकरार🌹

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कहते हैं प्यार में बहुत सारी चीज़ें, बातें बदलाव नजर आने लगे 😊 और खुद की प्यारी चीजे जिसे हमने एक गहराई तक पाने के लिए चाहा है , जिससे निकलना मुश्किल जान पड़े🙄 और दूसरी पुरानी कीमती चीजे सामने आ जाए तो ऐसे में अपने हम दोनो प्यारी चीजों को साथ में रख कर एक दूसरे से परिचय करा देते हैं, फिर क्या..? वो प्यारी चीजें जो old is gold है उसे एक दूसरे में ताल में बैठाने लग जाते हैं ताकि वो कीमती चीज़ें ( मतलब जो बाहरी दुनियां है ) धीरे धीरे खुद बाहर निकल जाए😊। और उसे अपने प्यारी चीजों के खातिर सारी गम दर्द और सारी प्रस्थिती को हंसते खेलते अपना ले 🥰( इसे कहते हैं सांप भी न मरे और लाठी भी न टूटे🥰)..... तो आइए समझते हैं हम इस कविता के माध्यम से 👇👇👇"❤️प्यार की बाहरी दुनियां❤️" शीर्षक कविता के माध्यम से 😊😊..... Female version :– फूलों की गुलाब बनकर , जो ठहर गए हो तुम दिल ❤️में, उसे निकालना तो नामुमकिन सा लगता है, बिखरे पड़े थे हम अकेले, उस दिन आपने आकर मुझे दिल से लगाया था, मुझे कुछ सूझ नहीं रही ओ मेरे सितम , इसलिए जान से तुम्हे अपना बनाया है 🌹, छोड़ तो नही सकती तुम्हें भ...

💞प्यार, दर्द और ओझल होती यादे💞

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❤️❤️❤️❤️❤️❤️ जिसे ढूंढता फिरे ये आंखें 👁️मेरी, किसके आहट को तरसता है दिल मेरा, दुखी होकर क्यों खामोश हो गई , ए दिल❤️ बता क्या हुआ है तुम्हें 🥲, जो एक पल भी तुम्हे याद नहीं आती😊। (रफ्ता रफ्ता सनम तुमसे मिली नजर) ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ किसके लव्स और खामोशियां मुझे सता रही है, आने की इंतेजार को पल पल झुठला रही 😊, किस दर्द के अंधेरे में डूबे हैं वो आशिकी मेरी, जो रफ्ता रफ्ता दिल दुःख रही मेरी, जो बिन देखे बैचेन हो रही है धड़कने मेरी । सर्द हवाओं में ठिठुर सी गई है दिल उसके, ओस की बूंदे जो गिरी है दिल में मेरी, दिल अब सिहर उठी है इंतेजार में उसकी, न जाने क्या सितम छाने लगी अब मेरे दिल को, जो सनम मुझसे राज छिपाए चल रही । चाहता हूं दिल को थोड़ी राहत दूं तुम्हारी तरह , जो खोए हैं सनम प्रेम के अंधियारे में, रफ्ता रफ्ता जो चल रही है बहाने प्यार की, थोड़ी सुकून ❤️ देती है रात अंधियारे सी। नक्शे कदम चलनी होती है प्यार के सहारे, क्यों होती है सिर्फ मुहब्बत में इतने बहाने, रफ्ता रफ्ता सा मिलती है दर्द छिपाने , समेट कर बातें चले जो जाते हो आजकल, उन बादलों में लुका छिपी करना  बचपना की फितर...

तुम्हारी पहली मुलाकात

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🌹🌹🥀🥀🥀🥀 तुम्हारी पहली मुलाकात याद है मुझे, तुम्हारी वो हँसी, वो हर एक बात याद है मुझे, तुम्हारा यूँ शर्माना, नज़रे झुकाना, और फिर,बेबाकी से अपनी  हर एक बात कह जाना याद है मुझे। जनवरी की थोड़ी सी गर्मी,  और मेरी बेतुकी बातों को, तुम्हारा यूँ घंटो झेल जाना, बातों बातों में, उस लम्हे का गुज़र जाना, और फिर तुम्हारा विदा कह जाना, याद है मुझे। पता नही फिर कभी हम मिलें या ना मिलें, शायद हमारी पहली मुलाकात, आखिरी हो, पर सालों बाद भी जब  मैं जिंदगी के इन पन्नो को पलटूगाँ, इनमे तुम्हारा भी जिक्र होगा, कुछ यादें होगी,आँखों में नमी  और होठों पर हँसी के साथ एक बात होगी, कि याद है मुझे हमारी वो, पहली मुलाकात... ✍️✍️✍️ मनीष कुमार

कि टूट चुका हूं 💔... बिखरना बाकी है 🥀

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, सोंचता हूं के कमी रह गई शायद  कुछ या जितना था वो काफी ना था, नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता या जितना समझ पाया वो काफी ना था, शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं  प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं, अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता मेरे आँखों 🐼में जितना तुम्हें नजर आया, क्या वो काफी नहीं था I सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,क्या जितना था वो काफी नहीं था I टूट 💔चुका हूँ बिखरना 💞बांकी है, बचे कुछ एहसास जिनका 👥जाना बांकी है, चंद सांसें है जिनका आना बांकी है, मौत रोज मेरे सिरहाने खड़ी हो पूछती है भाई आ जा, अब क्या देखना😰 बांकी है I दूरियां इतनी बढ़ जाएंगी मालूम ना था I वो बाबू से बेवफा बन जाएंगे मालूम ना था I हम उनके लिए पागल हो जाएंगे मालूम ना था I जो अपना चेहरा हमारी आँखों में देखते थे I वो आईना बदल लेंगे मालूम ना था I ऐसे बरसेगी उसकी यादें सन्नाटे में मालूम ना था। दुरियां इतनी बढ़ जाएंगी मालूम ना था I सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I सोचता हूँ तोहफा भे...

🌹 तेरी माथे की बिंदिया🌹

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"बिंदिया" शब्द जो महिलाओं या फिर लड़कियों की श्रृंगार होती है वो बड़ा ही मनोभावन ओर स्त्री विशेषता की प्रतीक मानी जाती है 😍। अगर हम किसी स्त्री को देखे तो उनकी माथे पर लगी बिंदिया उनकी सुंदरता को चार चांद लगा देती है , जिस प्रकार हमे बहुत सारा व्यंजन परोस कर रख दिया गया हो और उसमे नमक का स्वाद ही नहीं 🙄 तो हमें उस व्यंजन की महता कम जान पड़ती ठीक वैसे ही स्त्रियों पर एक छोटी सी "बिंदिया" का संबंध उनकी श्रृंगार विशेष से है ।                लड़कियां छोटी हो या बड़ी उन्हें एक छोटी सी "बिंदिया" लगा दो फिर देखो कैसे उनके रंग रूप और ललाट पर तेज प्रकाशित होती है 😍। और वही बिंदिया एक दिन अपने साजन के नाम पर समर्पित हो जाती है 😍। कितनी सौम्यता की बात होती है जब कोई स्त्री अपनी बिंदिया सिर्फ तो सिर्फ अपने साजन के नाम से पहनती हैं।  तो चलिए जानते हैं एक छोटी सी का महत्व इस कविता के माध्यम से 😍...। ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ये जो बिंदिया लगाई हो सजनी मेरे नाम की, मै देखकर उन्हें आपकी प्रेम की दीवाना हो गया हूं, मन में बहुत से ख्याल आ रही ...

इश्क मोहब्बत

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कहते हैं :- हमेशा उस इन्सान को संभालकर रखिए...😊" चीजें भेंट की हो 😊🌺🌺💞🌹 जिसने आपको ये  "3👉 1. साथ, 2. समय और 3.समर्पण😊 खामोशी का भी एक रुतबा होता है.... अक्सर झूठे इंसान की बातें मीठी लगती है...🌹 और सच्चे इंसान की बातें कड़वी लगती हैं 😋... तो पैश है कुछ मेरी 😓😓😨 करुणामय कुछ  यादें 🌹🌹🌹💞💓💔..... 💓🌹💘 मुसाफिर कल भी था मुसाफिर  आज भी हूं कल अपनों की तलाश में था  आज अपनी तलाश में हूं😊 मिलना कभी तुम फुरसत में हाल - ए- दिल तुम्हें बताएंगे, जख्म अपने दिल के उस रोज  तुम्हें दिखाएंगे😓🌹🌷 सीने में अपने दर्द का ज्वालामुखी 💥 दबा कर बैठे हैं, कराह उठोगे जब अपने दर्द का  एहसास दिलाएंगे💔... मोहब्बत में नहीं चोट 💔खाई हमने यकीं करना तुम🌷🌷 क्या क्या बीती है दिल पर  बारिकी से समझाएंगे🌹 छला हरेक रिश्ते ने हमें ओर छलकर मजाक उड़ाया 😣 सुनकर कहानी दगाबाजी की आंखों से आंसू आयेंगे😨... किया था भरोसा मैंने तेरे उपर 😓 बुरे दिल की पहचान न था इतना भी बदनसीब न हुं 🙏 जो तुमसे नाराजगी जाहिर  न था😣🌷🌷 तमाशा बन गई है जिन्दगी ,हम कहां उम्मीद ...

पत्थर दिल से सींचा प्यार

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🌺🌺🌺 हाथों की लकीरों की क्या बात हुई.... बार बार उसी से मुलाकात हुई मुलाकात की क्या बात करूं 🌺🌺 फिर से एक वही शुरआत करूं😍... हमें तो बस प्यार💝 जताना आता है वफा निभाना तो मेरे दिल में आता है 🌹🌹 हाथों की कठपुतली बनकर मै चला किस ओर जिस ओर कभी प्यार की कोई गुंजाइश न थी 🌹🌹🌹 क्यूं हुआ था ये एकतरफा ईश्क मुहब्बत 🌷 क्यों हुआ मुझे उस बेनाम दर्द इबादत🌺 आता है गुस्सा मुझे इस हाथों की ✋  लकीरों का🌹🌹 Bewfa हो जाता है कोई जब दिल की सींचे पसीने 🌺🌺 का अब बस बहुत हुआ ये बेजुबान   Chating मुहब्बत🌹🌹 हम क्षितिज घटा मोड़ कर फिर भी करेंगे किसी ओर से दिल खोलकर मुहब्बत🌹🌹🌹 मधु कहूं😍 या किस नयन की जलधारा है🌷 प्रेम उन्हीं से है जहां💝हमारी हाथों की लकीरों का सहारा है 🌹🌹🌹 🌷🌷🌷हे खुदा कुछ कर ऐसा कमाल  हमनें जो सपनें संजोए है 🌺 वो कृपा से होगा साकार हाथों की लकीरें शोर मचा रही है 🌺🌺 फूलों की माला से बस मिलने की आश  जगा रही है 😍😜🌹🌹 जय देवी मईया 🙏🙏 लेखक की कलम❤️ से मनीष कुमार 🌷🌷✍️✍️✍️

😱भूतिया वीरान हवेली🏚️

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   काल्पनिक✍️....                          🌻🌻🌻🌻🌻 बहुत पुराने समय की बात है बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पार्क के दूसरी छोड़ पर पटना कॉलेज के कुछ के कुछ स्टूडेंट्स (समीर ,  माधवी, राधा , पूर्वी , मोहित और एक बाबा मनीष)अपने कॉलेज की (विदाई) समाप्ति के विशेष तौर पर पिकनिक मनाने आए थे । जिसमें बहुत सारे गर्ल्स बॉयज और प्रेमी प्रेमिका😍 की जोड़े भी थे । सभी अपने मोटरसाइकिल से हंसते खेलते उस जंगल की ओर तेज रफ्तार में बढ़ते चले जा रहे थे । पार्क नज़दीक आते ही उन्हें रोड के किनारे बहुत दूर तक एक बहुत पुरानी हवेली दिखाई पड़ी 🥰🏚️, तो उनलोगो ने सोचा क्यों नहीं आज की रात हम एक दूजे के साथ यही बिताया जाय ।  सभी मंडली दिनभर अपनी पिकनिक के जितनी भी मजे उड़ानी थी दिनभर उड़ा लिए😊, पूर्वी ने बिल्ली बनकर अठखेलियां खेली तो समीर ने शेर बनकर सबको दौड़ाया😜, कभी मोहित भालू तो माधवी डायन😱 ... और बाबा मनीष का तो काम ही है सबकी झाड़ फूंक कर सबकी भूत उतारना😜 ।  " लो बाबा हम आ...

🌹उनकी आखिरी मुलाकात 🌹

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🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲🥲 उनकी आखिरी मुलाकात याद है मुझे , कश्म कश बनी रहती थी जिंदगी, वो आए दो टूक बात करे , दिल इसी सहारे जीता था कभी, न दुबारा मिलन हुई उनसे , न कभी उनकी मीठी आवाज सुनी, दिल आस लगाए बैठा हुआ, आयेगी एक दिन वो समा, जब हमारी भी नुक छिप कर बात होगी, कसक जिंदगी की हमेशा छोड़ गई, दिल के हारे हुए थे हम, वो हर बार ब्लॉक कर गई🙄। उनकी आखिरी मुलाकात आज भी याद है मुझे, कैसे उनकी मैसेज का मोबाइल में गिरना, और मेरी दिल का धड़कना 💓, जैसे मुहब्बत हो गई थी उनसे, बस दिल को एक ही ख्याल आते, कभी तो उनका भी दिल पिघलेगा, मेरे हृदय में बसी प्यार की झलक दिखेगा, बैरुखी हवा चलती , पत्ते हिलकर टूट💔जाते, क्योंकि फिर वो ब्लॉक कर जाती, दिल बिखरे भी तो समझ आए, नादान सी दिल प्यार की भीख मांग आए🥲, जालिम दिल पर जुल्म इतना ढाहे, मुझे फिर से ब्लॉक जो कर आए🥲। उनकी आखिरी मुलाकात अब भी याद है मुझे, मेरी हजार मिन्नते करना🙏, फिर कभी भी दिल से दूर न जाना, फिर कई मीठी बातें होती, उनकी sorry 🙏 हजार होती, दिल को फिर से आश लगी होती🥲, होगा कभी उन्हें भी अह...

"🌹स्वदेश 🌹"

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      🌹🌹🌹🌹🌹 हम जानते हैं कि "स्वदेश" का मतलब क्या है..? मतलब होता है अपना देश 🥰। यहां अपना देश से हमारा अभिप्राय ये नहीं है कि हम अपने ही देश के शासक द्वारा हमें प्रताड़ित किया जाता हो🥲, शासक जब भी चाहे हम जनता पर अपनी तानाशाही दिखाए🙄। स्वदेश का मतलब मैं ये भी नहीं कह सकता कि जिस "स्वदेश" में हम जन्म लिए वही देश के सैन्य ताकत हमे स्वदेश छोड़ने को मजबूर करे 🥲, ये कैसा स्वदेश जिसकी जनता खुश न हो ..?  तो ऐसे सैन्य प्रधान और तानाशाही वाले देश की जनता भी दो लाइन अपने "स्वदेश" की तारीफ करने से भी कतराते हैं । जैसे:– उत्तर कोरिया , म्यांमार आदि । मैं किसी की भी आलोचना नहीं कर रहा लेकिन मुझे जो अच्छा लगा वही लिखा है । अरे हां मैं भी कहा उलझ गया 😊। तो चलिए समझते हैं नीचे लिख पंक्तियों के माध्यम से "🌺स्वदेश🌺" की भूमिका या कह ले "स्वदेश" शब्द होने का अर्थ...... 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 चाह नहीं है मैं रखता छल कपट, सबके दिलों की माला का जोड़ हूं, बांध जो देता हूं रिश्तों की गहराई में, मैं ऐसे लोकशक्ति का "स्वदेश" कहलाऊं । नही भट...

🌹हिंदुस्तान की विश्व में लहरता परचम🌹

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                                       🌺🌺🌺🌺🌺🌺        🙏🙏🙏🙏🙏🙏        🌻🌻🌻🌻🌻🌻 दी गई चित्र  के माध्यम से मैं अपने देश के उस तिरंगे झंडे को सबसे पहले नमन 🙏करता हूं  जिसमें हमारे भारत मां का गौरव अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देश में गूंज रही है 🥰। हाल ही में हमने आजादी की 74वीं वर्षगांठ 15 अगस्त को मनायें हैं 🥰। और ये दुनियां देख रही है कि सोने की चिंडियां कहा जाने वाला देश( जिसे हम खो चुके हैं) मात्र आजादी की 74 वर्षों में ही अपनी  मुख्य धरा पर लौटकर अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों के लिए एक  खड़ी चुनौती के रूप में हर क्षेत्र में मुकाबला कर रहे हैं 🥰। वो इंग्लैंड जिसने हमारे हिंदुत्ववादी देश पर 200 साल तक शासन किया और सोने की चिंडियाँ को लूट कर चला गया 😡,फिर भी हम उनके लिए हर क्षेत्र में चाहे वो व्यापार हो या हॉकी और क्रिकेट मैच जैसे कोई खेल उनके लिए चुनौती बन बैठे हैं । अपने आंखों के इशारे पर सारे विश्व ...

🌹हमारी शादी की लड्डू🌹

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कहते हैं शादी जब भी कीजिए बहुत सोच समझ कर कीजिए क्योंकि ये आपके जीवन का वो अंतिम पड़ाव होता है जिसे पार कर लेने के बाद निकलना मुश्किल सा होता है 😊। क्योंकि हम शादी तो बस एक बार ही करते हैं और सबसे खुशी 🥰की बात ये होती है कि ..., लडका हो या लड़की दोनों को एकदूसरे जीवन में एक नई एहसास बनती है 😍 और एक दूसरे को जानने समझने मतलब यूं कहे लें कि जीवन की डोर  एक नई रिश्ते में बंध जाती है 🥰🥰। इसमें न किसी की कोई दुश्मनी और ना किसी से कोई हस्तक्षेप😊....। फिर भी न जाने लोग ऐसा क्यों बोल देते कि शादी मतलब उसकी बर्बादी 🙄..., अरे जब बर्बादी ही होनी है तो हम शादी ही क्यों करें...? ये तो बड़ी अराजकता वाली बात हो गई 🤔😊। तो चलिए आइए समझते हैं "हमारी शादी की लड्डू" शीर्षक के माध्यम से प्रस्तुत है मेरी ओर से एक छोटी सी कविता 😍.......। ❣️❣️❣️❣️❣️ बचपन से खेलते कूदते हम बड़े हुए, न जाने कब मेरी जवानी आन पड़ी है, पापा मम्मी सभी की बोझ बन बैठे😜 हैं, देखो "शादी की लड्डु" मन कैसे फुट रहे हैं। फूलों ने ली अंगड़ाई, हवाओं ने किया इशारा, चढ़ती जवानी छोरे और छोरे की, गुलाबों की...

अनजानी सी प्रेम राही 🌹

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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 💓💓💓💓💓💓💓💓 ❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️ है कोई एक अनजाना सा रही🌹, जो चल पड़ी है सर्द हवाओं में दिल में मेरे❤️, जिसके लिए मेरी दिलों❤️ में जान बसती है, जाती नहीं कभी दूर मेरे सीने से, ये कहकर हमराही तुम मेरे दिल के शान लगते हो😍। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 है वो एक अनजाना सा राही 🥰, जिसके लिए मनीष प्रेम की गाथा गाता है, जो मिल जाओ तो समुंद्र भी तालाब सा लगता है, दिल में बसाकर जो रखा है उस गुलाब को🌹, वो परदेशी मेरी रिश्ते में दिल से मेरी जान सी लगती है। ❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️ है वो एक अनजाना सा राही ❣️, जिसके आंचल मेरे तन को छू गई हो, जब आयेगी सर्द हवाएं लेकर तुम्हारी आंचल को,  लगाकर सीने से तुम्हारी यादों की मुहब्बत को, मुस्कराती होठों से आंखों की गंगा से भींगो देंगे। 💓💓💓💓💓💓💓💓💓 है नहीं वो एक अनजाना सा राही, जिसकी काल्पनिक चरित्र का चित्रण करता हूं , कहा हो किसके प्यार में डूबी हो, जब होगी असल में दीदार मधु का❣️, वो अनजानी सी प्रेम राही भी गले की हार सी लगती है। 🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰 आपका हमराही❣️❣️🌹🌹🌹 मनीष कुमार 💘

साइंटिस्ट नीना गुप्ता

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प्रिय बंधुओं 🙏 आज मै जिसकी कविता लिखने जा रहा हूं वो हमारे भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम भविष्य और प्रकाष्ठा की प्रतीक है , तो कृपया मेरी निवेदन है की मेरी रचना को अंत तक जरूर पढ़े🙏🙏🙏। प्रोफेसर नीना गुप्ता जी 🙏 जिस प्रकार से आज हमारे बीच देश और दुनिया में  गौरव प्राप्त किया है, उन्हें हम देश वासी मरते दम तक याद रखेंगे। वो एक मैथमेटिशियन ही नहीं बल्कि साइंटिस्ट की दर्जा दी गई हैं। आपने जो 20 दिसंबर 2021 को देश के लिए एक और गौरव से सम्मानित किया है 🥰, वो हमारे आने वाली पीढ़ी तथा नए युवाओं को सिख मिलेगी । जिस प्रकार से आपने🙏 एलजेब्रिक जियोमेट्रो और कॉम्यूटेटिव अलजेब्रा में गौरवमई कार्य करते हुए 😊 युवा गणितज्ञों का DST–ICTP–IMUरामानुजन पुरस्कार 2021" प्राप्त किया है 👏👏, इसे मैं आपको "मेधावी लेडी " या "मेधावी मैथेमेटिशियन" भी कहूं तो कम लगता है । आप सिर्फ एक ही समफलता हासिल  नहीं की बल्कि समय समय पर पूरा भारतवर्ष को आपने अपनी मैधावी होने का परिचय दिया है 🙏। और तो ये सम्मान पाने वाली आप चौथी भारतीय और तीसरी महिला भी हैं👏। सबसे पहले तो मैं आपको प्रण...

भष्ट्राचार

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👺👹👿 जिधर भी देखो बुद्धि से भ्रष्ट हैं लोग, वो चाहे सरकारी कर्मचारी हो ,या नौकरशाही, गांव के दलाल हो या देश के नेतागण, क्या कहूं मैं इन्हें और कितने नाम लूं 🙄, जुबान थक जाए हमारे, लेकिन इनके भरष्टाचार नहीं थकेंगे और नही थमेंगे, क्यों करते हैं गुस्ताखियां हमारी, जब लेनी हो कोई  काम हमारी, कर देते मति भ्रष्ट हमारी👺, पैसे का लालच देकर लूट लेते रोजी रोटी हमारी, जो बढ़ते जा रही प्रकोप इनके, पांव पसारने में जो तेज है इनके, पड़ गए हैं कोरोना पड़ भारी🙄, जब पड़ती है मार गरीबी पर इनकी, लोग झुलस सी जाते हैं खून पसीने की कमाई, है ये कोई अमीरी बीमारी या कोई भूत प्रेत का साया 👹, जो जाती नहीं कही और आशियाना बनाने, या डूब मरे सब समुंदर किनारे..., बाल विवाह हो  या तीन तलाक लोगों की, बन पड़े हैं इनके कानून व्यस्था , पर भ्रष्टाचार पर कानून की आंच तक ना आई😠, आखिर कब तक सुधरेंगे ये भ्रष्ट बहरूपिया, कब ईमानदारी से राष्ट्र काम में कराएंगे, भ्रष्टाचार में जो सलग्न हैं पुरुष जनानी, उन्हें प्रकृति की खौफ है प्यारी🤨, कान खोलकर सुन लो जो कहता है मनीष जमाना🤫, मर जाओगे बीमारियों से जब, बद्दुआओं की...

वो जोर से हंसने लगी 😍।

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❣️❣️❣️❣️❣️ वो रहती थी खामोश मगर, तन्हाई में वो जिया करती थी, हम आए प्यार गुलशन हुए, और वो जोर से हंसने लगी 😍। 🌺जो जिए जा रहा था मैं, किसी की यादों की तन्हाई में, वो मिली प्यार की अहसास हुई, ओर मै जोर से हंसने लगा उन्हें पा लेने से। ❣️नजदीकियां बढ़ रही है जो हमारी, आपकी मधुर सी बातों में 😍, कि वो ऐसे मिली और प्यार हुआ, और वो जोर से हंसने लगी🥰। 🌺जब कभी राहों में अंगड़ाई आई, उसकी गजलों ने एक मोड़ ले आई, मैने प्यार से फूलों में रस भर आया, और वो जोर से हंसने लगी 😘। 🌹कहा नहीं करूंगा बात कभी, जब दोगी मुझे मन से गाली, दुखी मन से उसे मेरी तन्हाई याद आई, और वो जोर से हंसने लगी 😜। चंदा कहूं या फूलों की माला उसे, जो देख उठ रहे प्यार आठों मेरे, तारीफ सुनकर वो जरा इठलाई, और वो जोर से हंसने लगी 🤭। 🌹🌹🌹🌹🌹

तेरे इश्क में

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🌹🌹🌹🌹🌹 तेरे इश्क के दीवाने जो हम हुए , पता न चला कब हम खो गए, चलती नहीं थी जो इस दिल पर जोर किसी की, ऐसे दीवानगी में जो हम खो गए, करता रहता जो तुमसे दिल्लगी बातें हरदम, दिल खो चुकी थी तुम्हारी ख्यालों में हमदम,  तुम्हारे पाने के सपने में हमेशा देखता रहूं जो, दिल कह रहा था कही खो ना जाऊं बुलबुल, हल्की हल्की जो ठंड की मुस्कान चल रही थी, अपने दिल के दिए में अरमान जगा रही थी, फूलो पर जैसे भवरे अपना मधुर गीत गुनगुना रही थी, उसकी मीठी रस हमारे इश्क को मधुर कर रही थी, किया है इश्क मैने उससे बस इस जहां में वफा से, की दिल हो गया दीवाना तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान में, जिसे मिला नही था वो प्यार किसी गैरों का ,  दिल ने चाहा जिसे  तुम्हारी पहली मुलाकात में, कर दिया सनम तुमने भी ओरो की तरफ दिल से दगा बाजियां, नहीं सह पाया तुम्हारी लहरों वाली   दिल की बैवफायियां, अब कौन जाने कैसे दिल टूट कर बरस पड़े आंसुओ😢 की मोतियां, तेरे इश्क में चोट खाए दिल पर अब कैसे बजाऊं तालियां👏, जब जुदा न हो पाए तुम्हारी यादों के सिलसिले..., तब कह गए मनीष तुमसे... तुम्हारे ख्यालों पर तुझम...