Posts

Showing posts with the label Sharad narayan khare

जलता मेरा देश

Image
धधक रहा है देश,आज हम भय में सारे। नौजवान को समझाकर के,सब ही हारे।। नीति,नियति की बातें होतीं,हिंसा फैली। देखो तो सबकी ही चादर दिखती मैली।। शासक दोषी,नौजवान भी,कुछ तो देख तमाशे। दूर बैठकर चुप हो खाते,शक्कर पगे बताशे।। देशभक्ति की बातें करते,पर लाते अँधियारे। जलता मेरा देश,मूक हैं देखो सारे।। आग बुझेगी कैसे अब यह,कोई तो बतलाये। नीतिनियंता,पालनकर्ता,कोई राह सुझाये।। आँखों से आँसू बहते हैं,लखकर यह बर्बादी। फूँक रही है निज का ही घर,नौजवान आबादी।। अंधकार में दीप बंधुवर,कौन जलाएगा। कौन भारती के बेटे का फर्ज़ निभाएगा।। देशविरोधी लोगों के तो,देखो वारे-न्यारे। जलता मेरा देश,मूक हैं देखो सारे।। मारकाट है,हिंसा,मातम,अवसादों ने घेरा। उजियारा तो दूर हो गया,छाया घोर अँधेरा।। विध्वंसक सबके मन हैं अब,भटक रहे सब। अपने ही सारे नित हमको,खटक रहे अब।। देशभक्त वह ही जो अपना देश सँवारे। समझो युवा,आज मत फेंको,मूरख बन अँधियारे।। मंगलगान नहीं होता अब,गम बस द्वारे। जलता मेरा देश,मूक हैं देखो सारे।। --प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे         मंडला,मप्र ==================== प्रमाणित करता हूं कि प्र...

पर्यावरण दिवस

Image
जीवन भर गाते सभी,वसुधा के तो गीत। हरियाली को रोपकर,बन जाएँ सद् मीत।। हरियाली से सब सुखद,हो जीवन अभिराम। पेड़ों से साँसें मिलें,विकसित नव आयाम।। धरती माता पालती,संतति हमको जान। धरती माता के लिए,बेहद है सम्मान।। अवनि लुटाती नेह नित,करुणा का प्रतिरूप। इसकी पावन गोद में,सूरज जैसी धूप।। वसुधा का संसार तो,बाँटे सुख हर हाल। हवा,नीर,भोजन,दुआ,पा हम मालामाल।। धरा-गोद में बैठकर,होते सभी निहाल। मैदां,गिरि,जंगल सघन,सुख को करें बहाल।। हरियाली के गीत नित,गाती वसुधा ख़ूब। हम सबको आनंद है,बिछी हुई है दूब।। वसुधा का सौंदर्य लख,मन में जागे आस। अंतर में उल्लास है,नित नेहिल अहसास।। धरती माँ करुणामयी,बनी हुई वरदान। नित हम पर करती दया,देती है अनुदान।। धरा आज प्रमुदित हुई,करती हम पर नाज़। पेड़ों का रोपण किया,हुई सुखद आवाज़।। गाती रोज़ वसुंधरा,हरियाली के गीत। जब साँसें सबको मिलें,होगी तब ही जीत।। वसुधा का है नेह यह,जो देती है अन्न। वरना हम रहते सदा,भूखे और विपन्न।।         --प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे                        प्रा...

महात्मा बुद्ध के

Image
मानवता की सीख से,जगा दिया संसार। हे गौतम ! तुमने दिया,हमको जीवन-सार।। सामाजिक नवचेतना,का बाँटा उजियार। प्रेम-नेह के दीप से,दूर किया अँधियार।। कपिलवस्तु के थे कुँवर,किया सभी पर त्याग। ज्ञान-खोज में लग गए,गाया सत् का राग।। संन्यासी बन तेज का,दिया दिव्य उपहार। बुद्ध ज्ञान के पुंज थे,परम मोक्ष का सार।। धम्मं शरणम् ले गए,सारे जग को बुद्ध। प्रेम,शांति की सीख से,बंद किए सब युद्ध।। मार्ग दिखाया सत्य का,मानवता का गान। हर दुर्गुण को दूर कर,सौंप दिया उत्थान।। बौद्धधर्म के दर्श से,किया नवल यह लोक। सतत् साधना से किया,दूर सभी का शोक।। सबके मन को जीतकर,मानव बने महान। सचमुच में सिद्धार्थ थे,परम शक्ति का मान।।   सदियों तक जग बुद्धमय,युग-युग तक गुणगान। हर मानव मानव बना,सचमुच में इनसान।।   नमन् करूँ,वंदन करूँ,गाऊँ श्रद्धागीत। हे गौतम ! तुम हो सदा,मानवता के मीत।।      --प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे                   प्राचार्य प्रमाणित किया जाता है कि प्रस्तुत रचना व अप्रकाशित है -प्रो शरद नारायण खरे

प्यारी माँ

Image
कहतीं हमसे झुर्रियाँ ,यह जीवन था ताप। संतति के माँ ने हरे,सारे ही संताप।। सुधा बाँटकर हर घड़ी,पिया हलाहल आप। माता के तो त्याग को,कौन सकेगा माप।। वृद्ध हुई तो क्या हुआ,वैसा ही है वेग। माता ने नित ही दिया,संतति को शुभ नेग।। पर विडंबना है यही,जब माता लाचार। संतानें तब ही करें,अनदेखा व्यवहार।। टूट गया चश्मा 'शरद',घेरें आकर रोग। नहीं ध्यान उसका रखें,संतानें सुख-भोग।। जिन बच्चों को पालकर,किया बड़ा,आबाद। वे ही देते मातु को,रोज़-रोज़ अवसाद।। आँखों से दुख झर रहा,कातरता का मर्म। वृद्ध मातु के प्रति नहीं,संतानों में कर्म।। माँ तो माँ है,बाँटती,दिली दुआ औ' प्यार। यही कामना वह करे,महके घर-संसार।। माता भटके,कष्ट में,तो संतति पर लाज। फर्ज़ निभाने से बचें,तो गिरना तय गाज।। माता की हो वंदना,सेवा का हो राज। पुत्र-पुत्रियाँ हों भली,ऐसा बने समाज।          -प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे                      प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय,मंडला,मप्र    

श्रमिकों का गीत

Image
========= श्रम करने वालों के आगे,गहन तिमिर हारा है। श्रमिकों के कारण ही तो देखो,हरदम उजियारा है।। खेत और खलिहानों में जो, राष्ट्रप्रगति के वाहक  अन्न उगाते,स्वेद बहाते, जो सचमुच फलदायक  श्रम के आगे सभी पराजित,श्रम का जयकारा है। श्रमिकों के कारण ही तो देखो,हरदम उजियारा है।। सड़कों,पाँतों,जलयानों को, जिन ने नित्य सँवारा यंत्रों के आधार बने जो, हर बाधा को मारा खेल रहे संघर्षों से नित,जिन पर हर वारा है। श्रमिकों के कारण ही तो देखो,हरदम उजियारा है।। ऊँचे भवनों की नींवें जो, उत्पादन जिनसे है हर गाड़ी,मोबाइल में जो, अभिवादन जिनसे है स्वेद बहा,लाता खुशहाली,श्रमसीकर प्यारा है। श्रमिकों के कारण ही तो देखो,हरदम उजियारा है।।               प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे                    प्राचार्य               शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय                 मंडला(मप्र)-481661               ...

बाबासाहब भीमराव अंबेडकर

Image
बाबासाहब ने दिया,हमको प्रखर विधान। बाबासाहब बन गये,हम सबकी पहचान।। बाबासाहब चेतना,एक अटल विश्वास। बाबासाहब शान थे,जन-जन की आस।। बाबासाहब मान थे,हम सबका अभिमान। संविधान का कर सृजन,किया सतत् उत्थान। बाबासाहब कर्म थे,पूरे अनुसंधान। बाबासाहब देशहित,मानवता के प्राण।। बाबासाहब ने किया,नवल एक उद्घोष। बाबासाहब ने दिया,हर पीड़ित को जोश।। बाबासाहब गर्जना,प्रबल एक आवेग। सकल वतन को दे गये,समरसता का नेग।। बाबासाहब जागरण,अंधकार पर मार। सकल तिमिर का कर हरण,फैलाया उजियार।। दिलवाया इंसान को,मान और अधिकार। बाबासाहब की सदा,होगी ही जयकार।। बाबासाहब ने किया,आजीवन संघर्ष। इसीलिए हर आदमी,के मुख पर है हर्ष।। बाबासाहब का जनम,मंगलमय,जयकार। जो सूरज से तेजमय,बने दिव्य अवतार।।         --प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे                    प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय                   मंडला,मप्र        प्रमाणित किया जाता है कि रचना मौलिक व अप्रकाशित है--प्रो.शनाखरे

श्रीराम के दोहे

Image
राम नाम है वंदगी,राम नाम यशगान। राम नाम सुख-चैन है,राम नाम उत्थान।। राम नाम में ताप है,राम नाम में साँच। राम नाम हो संग तो,नहिं आती है आँच।। राम नाम सुख से भरा,राम नाम रसधार। राम नाम के तेज से,महके नित संसार।। राम मोक्ष हैं,दिव्य हैं,जग के पालनहार। राम शरण में जो गया,पाता वह उपहार।। राम नाम तो सूर्य है,राम नाम अभिराम। राम नाम आवेग है,है नित तीरथधाम।। राम नाम तो श्रेष्ठ है,राम नाम आदर्श। तरे मनुज भव से सदा,मिले राम का दर्श।। राम नाम शुचिता लिए,राम नाम में सार। राम नाम वरदान है,राम नाम उपहार।। राम नाम उजियार है,हर ले जो अँधियार । राम नाम यशगान है,राम नाम जयकार।। राम नाम मधुरिम-सुखद,राम नाम उद्घोष। राम नाम है वंदगी,राम नाम है जोश।।   राम नाम आशीष है,राम नाम विश्वास। राम नाम तो आस है,है नेहिल अहसास।। राम नाम तो ज़िन्दगी,है जीने का भाव। राम नाम में ताज़गी,गरिमा लिए प्रभाव।। राम नाम तो सत्य है,जो देता मुस्कान।  करके हर जीवन सुखी,रचता जो नित मान।।         -प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे                    प्राचार्य...

गोरैया

Image
गोरैया एक छोटी चिड़िया है। यह हल्की भूरे रंग या सफेद रंग में होती है। इसके शरीर पर छोटे-छोटे पंख और पीली चोंच व पैरों का रंग पीला होता है। नर गोरैया का पहचान उसके गले के पास काले धब्बे से होता है। १४ से १६ से.मी. लंबी यह चिड़िया मनुष्य के बनाए हुए घरों के आसपास रहना पसंद करती है। यह लगभग हर तरह की जलवायु पसंद करती है पर पहाड़ी स्थानों में यह कम दिखाई देती है। शहरों, कस्बों,गाँवों, और खेतों के आसपास यह बहुतयात से पाई जाती है। नर गौरैया के सिर का ऊपरी भाग, नीचे का भाग और गालों पर पर भूरे रंग का होता है। गला चोंच और आँखों पर काला रंग होता है और पैर भूरे होते है। मादा के सिर और गले पर भूरा रंग नहीं होता है। नर गौरैया को चिड़ा और मादा चिड़ी या चिड़िया भी कहते हैं।       पिछले कुछ सालों में शहरों में गौरैया की कम होती संख्या पर चिन्ता प्रकट की जा रही है। आधुनिक स्थापत्य की बहुमंजिली इमारतों में गौरैया को रहने के लिए पुराने घरों की तरह जगह नहीं मिल पाती। सुपरमार्केट संस्कृति के कारण पुरानी पंसारी की दूकानें घट रही हैं। इससे गौरेया को दाना नहीं मिल पाता है। इसके अतिरिक्त मोबाइल ट...

महिला दिवस

Image
(1) नारी से शोभा बढ़ती है,नारी फर्ज़ निभाती है। नारी कर्म सदा करती है,नारी द्वार सजाती है।। सबको कब यह भान मिलेगा,नारी प्रेम बहाती है। सबको कब यह ज्ञान मिलेगा,नारी पूज्य कहाती है।। (2) नारी के सब गुण गाते हैं,पर ना धर्म निभाते हैं। कुछ कहते हैं पर करते कुछ,लोग सदा भरमाते हैं।। अब अँधियारा तजना होगा ,उजियारे को लाना है। नारी की मुस्कान सजेगी,हमको सब कुछ पाना है ।। (3) नारी दुर्गा-सी लगती है,नारी ज्ञान कहाती है। नारी धन की भी देवी है,नारी नित्य सुहाती है।। नारी की नित ही जय बोलो,यश गुंजित हो जाएगा। चहक उठेगी सारी दुनिया,जग भी खुशियाँ पाएगा।। (4) दुनिया तो कपटी लगती है,नीति समझ ना आती है। बातें अच्छी करती हैं पर,करनी में गिर जाती है।। नारी को अब बढ़ना होगा,दौर बदल ही जाएगा। नारी का अपमान रुकेगा,मौसम मंगल गाएगा।। (5) नारी नर की जीवन साथी,बात समझ में आती है। पर नर क्यों अनुदार हो गया,उसे क्रूरता भाती है।। नारी तब ही सुखमय होगी,जब नर ख़ुद को बाँचेगा। नारी पर जो ज़ुल्म किए हैं,ख़ुद की करनी जाँचेगा।।                 -प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे ...

चेतनता की रात-महाशिवरात्रि

Image
 हे!भोले शिव है विनय,तुम हो कृपानिधान। तुम बनकर रहना सदा,मेरे प्रिय भगवान।। चेतनता की रात है,शिव विवाह की बात। जग जड़ था चेतन हुआ,यह सबको सौगात।। शिव गौरा कल्यामणमय,सच में पावन मेल। इक बाती सी जल रहा,दूजा उसका तेल।। हे! शिवशंकर,है नमन् ,करना जगकल्याण। पाप मारता है हमें,नित ही तीखे बाण।। गौरापति,गौरीश तुम,रखना मेरी लाज। गिरा झूठ,अन्याय पर,हे! प्रभुजी अब गाज।। गंगाधर,डमरू बजा,तभी डरेगा पाप। जो नैतिकता नहिं रखें,दे दो उनको शाप।। विषय-वासना बढ़ रही,हैं कपटी आसार। नयन तीसरा खोलकर,कर डालो संहार।। अंधकार ने ग्रस लिया,सिसक रहा उजियार। कौन करेगा सत्य से,तुम जैसा अब प्यार।। औघड़दानी जय करूँ,देते तुम वरदान। इसीलिए हम सब करें,तेरा नित गुणगान।। महादेव शिव की दया,करते जो उपकार। जिनके कारण हो गए,स्वप्न सभी साकार।। शिवबाबा मंगलमयी,औघड़दानी नाथ। नहीं छोड़ना साथ तुम,थामे रखना हाथ।। भोलेभंडारी करूँ,मैं तेरा यशगान। तुम हो मालिक़ तुम सदा,रखते सबकी आन।।                        -प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे         ...

साथ तुम्हारा

Image
हर पल साथ तुम्हारा हो,तेरा मुझे सहारा हो। तुमसे बढ़कर और नहीं,तुझ तक जीवन सारा हो।। मेरे प्रियवर,मेरे साथी, चाहत है बस तेरी तुझ तक सीमित मेरा जीवन, और भावना मेरी हर पल साथ तुम्हारा हो,बस तुझ पर दिल हारा हो। हर पल साथ तुम्हारा हो,तेरा मुझे सहारा हो।। गहन तिमिर में तू उजियारा, है वसंत की बेला तू केवल लगती मलयानिल, दुनिया जगे झमेला पास रहे तू हर पल मेरे,वरना दिल बेचारा हो। हर पल साथ तुम्हारा हो,तेरा मुझे सहारा हो।। तू जीवन की धवल चाँदनी, सुखद एक अहसास सभी ओर तो रोदन दिखता, तू केवल विश्वास सूरज-चाँद उगें जीवन में ,सब कुछ तुझ पर वारा हो। हर पल साथ तुम्हारा हो,तेरा मुझे सहारा हो।। भजन-आरती तुझमें दिखते, गुरुवाणी का गायन परभाती की रौनक तुझमें, राम-राम अभिवादन पूरणमासी प्यार तुम्हारा,बहती गंगा धारा हो। हर पल साथ तुम्हारा हो,तेरा मुझे सहारा हो।।                 --प्रो.(डॉ)शरदनारायण खरे                                प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय   ...

सफलता का गीत

Image
असफलता है एक चुनौती,दो-दो वार करो। फैला चारों ओर अँधेरा पर तुम लक्ष्य वरो।। साहस लेकर,संग आत्मबल बढ़ना ही होगा जो भी बाधाएँ राहों में,लड़ना ही होगा काँटे ही तो फूलों का नित मोल बताते हैं जो योद्धा हैं वे तूफ़ाँ से नित भिड़ जाते हैं मन का आशाओं से प्रियवर अब श्रंगार करो। फैला चारों ओर अँधेरा,पर तुम लक्ष्य वरो।। असफलता से मार्ग सफलता का मिल जाता है सब कुछ होना,इक दिन हमको ख़ुद छल जाता है असफलता से एक नया,सूरज हरसाता है रेगिस्तानों में मानव तो नीर बहाता है चीर आज कोहरे को मानव,तुम उजियार करो। फैला चारों ओर अँधेरा,पर तुम लक्ष्य वरो।। भारी बोझ लिए देखो तुम,चींटी बढ़ती जाती है एक गिलहरी हो छोटी पर,ज़िद पर अड़ती जाती है हार मिलेगी,तभी जीत की राहें मिल पाएँगी और सफलता की मोहक-सी बाँहें खिल पाएँगी अंतर्मन में प्रवल वेग ले,नित जयकार करो। फैला चारों ओर अँधेरा,पर तुम लक्ष्य वरो।।       प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे                          प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय मंडला(मप्र)-481661