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तेरे मेरे दरमियां

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*************************** प्यार में तेरे मेरे दरमियां अभी  कुछ बातें अधूरी है  पूरी करने के लिए बातें    हमारी जिंदगी पूरी हैं  प्यार करता हूं बेपनाह तुझसे  पर अभी भी हमारे बीच दूरी है  प्यार में तेरे मेरे दरमियां  अभी कुछ बातें अधूरी है । हमारे बीच की खामियां  दूर हो जाए तो अच्छा है क्योंकि तेरे मेरे दरमियां  जो प्यार है वह तो सच्चा है मैं मानता हूं कि मेरे अंदर  जो आदतें हैं वह बुरी है प्यार में तेरे मेरे दरमियां  अभी कुछ बातें अधूरी है। हमारे बीच की मजबूरियां  बढ़ा रही हैं हमारे बीच दूरियां मुझमें अभी कुछ है खामियाजा  उसे मैं भली भांति मानता हूं कि तेरे लिए मैं ला ना सका श्रृंगार का सामान अभी तक पूरी प्यार में तेरे मेरे दरमियां  अभी कुछ बातें अधूरी है। स्वरचित एवं मौलिक  सुशील चौधरी "विद्रोही"  जंदाहा वैशाली बिहार

भारत मां का वृतांत

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अखंड भारत का सपना खंडित होते दिखता है  ईमानदारो  कि ईमान सरेआम  बिकते दिखता है जो ना हुआ गुलामी में अब  वह भारत में होता है  और अब तो भारत का बच्चा-बच्चा क्रंदन करते दिखता है।  अब फूल जैसी हथेली को भी श्रम करना पड़ता है  जब होता है देश में अन्याय तब कलम उठाना पड़ता है  अब किस पर करें इतवार और किसको कहे बेकार  क्योंकि अब तो हर कोने कोने में बेईमान सब ही रहता है। भारत मां के ऊपर मानो जैसे टूट पड़ा है कहर  भारत मां के ह्रदय तल में मानो जैसे चल रहा समुंद्र की लहर  मानो भारतमाता  हमसे रोते-रोते यह कहती है की इससे अच्छा हमको तुम दे देता दो पुरियों में जहर। वीर सपूतों को जब दिखती है भारतमाता तीरंगों में तब क्रंदन होने लगती है उनके पूरे अंगों में  देख लिपटे  तिरंगो में अपने वीर सपूतों को  मानो अनल लिपट गया है भारत मां के अंगों में। स्वरचित एवं मौलिक  सुशील चौधरी  जंदाहा वैशाली बिहार

भारत

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भारत के गौरव भूमि पर नेताओं का ही राज हुआ  बहुत दिनों से ललचाए बैठे था आज सिद्ध उसका काज हुआ नेताजी और बापू के देखे सपने सब बर्बाद हुआ  जो ना हुआ था 74 वर्ष पहले वह आर्यवर्त में आज हुआ राम राज्य का शपथ हुआ पर कलयुग में ना राम हुआ  यह देखो बैठे हैं चोर, उचक्के कलयुग में इनका ही नाम हुआ  अब चोर उचक्के का ही भारत में सम राज्य हुआ भारत के गौरव भूमि पर नेताओं का ही राज हुआ मुखौटा पहने बैठे हैं  सब देशद्रोही अपने ही देश में देश के कोने-कोने से निकल रहे आतंकवादियों के भेस में बापू नेहरू और सुभाष को इसी भूमि पर नाज हुआ  भारत के गौरव भूमि पर नेताओं का ही राज हुआ स्वरचित एवं मौलिक सुशील चौधरी  जंदाहा वैशाली बिहार

पिता

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जिस पिता की उंगली पकड़कर चलना हमने सीखा है  उसके आगे सारी दुनिया की दौलत फीका है  पर इस मुख से सुंदर स्वर् बोलना भी तो उनसे ही सीखा है। पिता अपने आप में करुणा का समंदर है  स्नेह का भंडार छिपा उनके ह्रदय के अंदर है कोई मानो या ना मानो पिता अपने संतानों के लिए सिकंदर है।  पिता का स्नेह है मां की ममता से कम नहीं  पिता के स्नेह का वर्णन कर सके किसी की लेखनी में दम नहीं  अपने संतानों के लिए वह क्या कुछ नहीं करते  यदि वो कभी डांट भी दे तो हमें उसका गम नहीं। बाहर सील सा कठोर  पर कोमलता हृदय के  अंदर है मानव स्नेह और प्रेम का  बहता हुआ समंदर हैं। पिता के स्नेह से बढ़कर  कोई दूजा धन हो नहीं सकता  भले सब भूल भी जाए लेकिन  पिता भूल से भी भूल कर संतानों को भूल नहीं सकता। सुशील चौधरी  जंदाहा वैशाली बिहार

दुखी भारत मां

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भारत माता   कराह रही है  राजनीति के जंजीरों में।  देखकर वो भी रो रही है  सरहद पर मरते अपने  वीरों को।  जो भी नेता आते हैं वह   स्वार्थ के गुण गाते हैं।  अपना-अपना जेब भरकर   मौन जनता को रुलाते हैं।  स्वार्थी लोभी भरे पड़े हैं  अपना यह भारत में।  देश बने कंगाल इससे  फर्क किसी को ना पड़ता है । आधा पेट रह कर बिना वस्त्र के  गरीब जनता सब सड़क पर मरता है।  अपना जेब गर्म करने में  दिन-रात सब मरता है ।  भारत में सुशासन बैठा,  चोर उचक्के बदमाशों के।  भारत माता स्मरण आती  वर्ष के दो दिवसों में।   क्या  कोई ऐसा मां का लाला पैदा  हुआ नहीं   जो  तोड़ सके भारत माता के जंजीरों को । भारत माता बैठी रो रही  बंदी बनी अपने घरों में।  फिर से देश बढ़ रहा  गुलामी अंध्यारो में।   अच्छे लोगों को मारे जा रहा है  घुसकर उसके ही घरों में। भारत माता काराह रही है  राजनीति के जंजीरों में।  स्वरचित एवं मौलिक  सुशील चौधरी  ग्राम ...

मां

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मां साक्षात माता भवानी की अवतार हैं  मां की ममता खत्म हो सकता नहीं क्योंकि वह तो  पहाड़ है   मां की ममता को पार कर सके यह असंभव है  क्योंकि मां की ममता अगम और अपार है। मां घर के सब के लिए हाजिर जवाब हैं  और अपने संतानों  के लिए वह तो नवाब है  दुनिया में जिसके पास भी मां हैं वह तो सबसे धनवान है  मेरे साथ भी मेरी मां है इसका हमें भी अभिमान है। हे ममतामई आपकी दी हुई जीवन आपके नाम करता हूं  हे जन्म देने वाली जनानी आपके लिए जीता और मरता हूं आपके लिए कुछ ना कर पाता हूं इसलिए सौ सौ बार क्षमा मांगता हैं  आप की छाया जीवन भर साथ रहे मैं यही चाहता हूं।  तुम्हारे सामने तुम्हारी संतान की हर गलती क्षम है  यह लिखते हुए मेरे दोनों आंखें नम है  हे मेरी मां  मेरी तरफ से आपको सौ बार नमन है  ममता को समेटे रखने का आपके पास बहुत बड़ा दामन है। मां के बारे में जितना लिखूं वह कम है  और मां का वर्णन कर सके किसकी लिखने में इतना दम है  मां पर कुछ विशेष लिख ना पाया इस बात का हमें गम है  पर क्या करूं शायद मेरी लेखनी में नह...

मां

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मा साक्षात् माता भवानी की अवतार है  मां की ममता खत्म हो सकता नहीं क्योंकि वह तो  पहाड़ है  मां की ममता को पार कर सके यह असंभव है  क्योंकि मां की ममता अगम और  अपार है।  मां घर में सब के लिए हाजिर जवाब है  और अपने संतानों के लिए वह तो नवाब है  दुनिया में जिसके पास मा है  वह सबसे धनवान है  मेरे साथ में मेरी मां है इसका हमें भी अभिमान है। हे ममतामई आपकी दी हुई जीवन आपके नाम करता हूं  हे जन्म देने वाली जननी आपके लिए ही जीता और मरता हूं  आपके लिए कुछ ना कर पाता हूं उसके लिए सौ सौ बार  क्षमा मांगता हूं  आप की छाया जीवन भर साथ रहे मैं यही चाहता हूं। तुम्हारे सामने तुम्हारे संतान की हर गलती क्षम है  यह लिखते हुए मेरे दोनों आंखें नम हैं  हे मेरी मां मेरे तरफ से आपको सौ बार नमन है  ममता को समेटे रखने का आपके पास बहुत बड़ा दामन है। मां के बारे में जितना लिखूंगा कम है  और मां का वर्णन कर सकें किसकी लेखनी में इतना दम है  मां पर कुछ विशेष लिख ना पाया इस बात का हमें गम है  पर क्या करूं शायद मेरी लेखनी मे...

अन्याय का मन्दिर

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1981  की बात है जब हमारे गाँव के लोग खाने के लिए दाने-दाने को मोहताज थे। खाने के नाम पर मरुआ के रोटी ,सामा के चावल और सकरकंद था।हालाकि ये सब भी थीक से नसीब नहीं हो पाता था। लेकिन किसी प्रकार गाँव के लोगों का जीवन यापन चल रहा था।                                                 इसी समय की अवधि में मेरे घर के प्लाॅट के पीछे वाले पलाॅट मे जिनका घर था। वे बहुत धनी थे,और इसी का फायदा उठाए।लेकिन उस समय जमीन का उतना महत्व नही था जीतना की अभी है। उस समय कोई किसी को दो-चार वक्त की खर्ची चला दे,तो वो उसे एक-दो कट्ठा जमीन लिख दिया करता था।आप अनुमान लगा सकते है कि उस समय की स्थिति कैसी थी। हमारे घर के पीछे वाले आदमी के परिवार में कई लोग थे। उस आदमी जो उस घर के मुखिया था  उसका नाम तो नहीं लेते पर इस कहानी  को पूरा करने के लिए मान लिया कि उसका नाम दशरथ चौधरी  था तथा उसके पत्नी का नाम राज रतन देवी था। उन्हें दो बेटा और पांच बेटी थी।  बेटियों की शा...

जीवन

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*********************  हिंदू ,मुस्लिम, सीख, हो या फिर हो ईसाई   जीवन सबका एक है सुन लो ओ धर्म काटने वाले कसाई  तुम्हारा जीवन भी तो उस परमात्मा ने ही बनाई  तो फिर क्यों इस धारा पर धर्म के नाम पर आतंक हो मचाई।  जीवन तो अनमोल है नहीं है इसकी कोई पढ़ाई  सब धर्मों का जीवन एक ही ईश्वर ने है बनाई  यह सुंदर जीवन ईश्वर से भेंट स्वरूप है पाई  तो बताओ कहां से अपने अंदर यह क्लेश की भावना लाई।  एक ही कारखाना एक ही कारीगर ने सबका जीवन बनाई  हर कोई अपने जननी के गर्व से अवतरित होकर यह सुंदर दुनिया को है पाई  तो बताओ हे तुच्छ मानव ! कहां से भिन्न-भिन्न धर्म है आई जन्म लिया जो भी इस धरती पर जीवन जीना है सबका अधिकार  कोई समझो ना किसी को इस धरती पर बेकार  क्योंकि जिस दाता ने दिया तुमको इस धरा पर जीवन, उसी ने अपने हाथों से दिया सबको रंग आकार जो जन्म लिया इस क्षितिज पर है अधिकार अपना करना सपना साकार  जीवन है अनमोल इसमें धर्म नाम का विष  घोलकर मत कर इसको बेकार ।      🙏सुशील चौधरी🙏