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Showing posts with the label हुमा अंसारी

बरसात की बूंद

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बरसात की एक बूंद जो मेरे रुखसार पर गिरी, अबसार से ज़ार कतार अश्कों की बारिश होने लगी! ज़ेहन में कुछ ख्याल उमड़ने लगे, दिल पर यादों की बदली सी छाने लगी! कुछ ऐसे ही मौसम में हम उनसे मिले थे, फूल खुशियों के खिलने लगे थे! इस कदर हम घुल-मिल गये थे, साथ जीने साथ मरने लगे थे! कितना खूबसूरत था अपना  जहॉ  , हर  तरफ  थीं   खुशियॉ  ही खुशियॉ! फिर काली घटा सी छाई, लोगों ने हम पर नज़रें गढ़ाईं! तेज़ बिजली कड़कने लगी, हमारी मोहब्बत सबको खटकने लगी! एक जोर का तूफान आया और उजाड़ गया हमारा आशियाना! फिर गया हमारे अरमानों पर पानी, खत्म कर दी रस्म ए दुनिया नें,  दो टूट कर चाहने वालों की कहानी !! हुमा अंसारी

सैनिक

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है बड़ा ऊंचा रुतबा उनका नाम  है   जिनका भारतीय सैनिक  अपना सब गवा कर बॉर्डर पर तैनात रहना  ना मौत का डर ना  माथे पर शिकन   खुशी-खुशी देश की खातिर हो जाते कुर्बान   घर की याद को दिल में दफन कर   तीज त्यौहार सब  छोड़कर   देश के लिए हरदम रहते तैयार  यह होते बड़े जांबाज   यह होते बड़े दिलदार   जिसने इन को जन्म दिया   उस मां को भी लाखों सलाम  आसान नहीं होता औरों की खातिर    अपने बच्चे को कर देना कुर्बान   बाप की भी है बड़ी कुर्बानी   देश की खातिर जिसने    अपने बच्चों की दे दी  जावानी  उन्हीं की वजह सलामत है अपना देश   उन्हीं की बदौलत चैन से सोता हर एक   देखो जाया ना जाने देना उनकी कुर्बानी   सिर्फ जुबान  तक ही ना हो उनकी शुक्र अदायगी    उनके हयात और उनके बाद भी   उनके परिवार की करना निगरानी   तुम्हारी छोटी सी फिक्र से    उनका मन  ना  होगा...

रिश्तो की डोर

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लोगों को एक दूसरे से जोड़े रखने के लिये दिल का मिलना बहुत ज़रूरी है । ऐसा इसलिये क्योंकि जो रिश्ते दिल से जुड़ जाते वे कभी नही टूटते । सारी कमियॉ भी बर्दाश्त हो जाती बात जब दिल की आती । जो रिश्ते ऊपरी तौर से जुड़े होते या किसी मतलब से ,वे एक ना एक दिन टूट ही जाते है। दिल से जुड़े रिश्ते हर परिस्तिथि में साथ देते और ता उम्र निभते । रिश्तों की मज़बूती के लिये दिल मिलना बेहद जरूरी होता है ऐसा मेरा मानना है । दिली रिश्तों की डोर कच्ची नही होती ये डोर टूटती नही कभी । ये रिश्तो की डोर ही तो हमें खुशियां देती दर्द में भी ये साथ ना छोड़ती । हुमा अंसारी

नशा

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क्यो आदी बने तुम..  क्यों ज़ायका दिया ज़ुबॉ को तुमने ज़हर का ? छोड़ दो ये लत ,अभी भी वक्त है,  ये ज़हर तुम्हे अंदर ही अंदर खा जायेगा ।  नशा कोई भी होअच्छा नहीं होता,  होश में जीता है जो दुश्वारियॉ वही पार कर पायेगा।  खुद को कमज़ोर मत बनाओ ,  है हिम्मत अगर ये नशा छोड़ कर दिखाओ । हुमा अंसारी

प्रेम की निशानी

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तू नही है मग़र बाक़ी हैं निशान आज भी तेरे प्यार के ! टूटे हुये दिल को समेट कर रखा है आज भी हमनें! बहते हुये अश्कों से आज भी तू छलकता है ! तेरी यादों के अम्बार आज़ भी हैं मेरे ज़ेहन में ! लबों पर आज भी तेरे बोसे की चुभन सी लगती है  ! ये निशान ता उम्र मिट नही  सकते  ! इन्ही के सहारे तो हम मर मर कर जी रहे !! तेरी प्रेम की इन निशानियों को हम बड़े सम्भाल कर रखें हैं । हुमा अंसारी

भेद भाव

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आओ हम सब मिलकर एक कोशिश करें.. भेद भाव को दूर कर मिल जुलकर रहें । यूं धर्म के नाम पर लड़ना बंद करे , किसी मज़हब पर छींटाकशीं ना करें । ऊँच नीच का भाव ना रखकर  , एक दूसरे को दिल से प्यार करें । आओ हम सब मिलकर एक कोशिश करें । हुमा अंसारी

ग़रीबी

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ग़रीबी नें बाँध रखीं हैं हमारे पैरों में बेड़ियाँ , खाने के लाले लगे कैसे पढ़ायें बेटे बेटियाँ । झुग्गी झोपड़ी में जीवन काँट रहे, ज़िंदगी की कड़वाहट आपस में बांट रहे , दुखों के दरिया मे बहते हुये, हम अपने आसूं किसी तरह पोंछ रहे हैं। अब इंतेज़ार है कोई मसीहा आये , इस दर्द भरी ज़िंदगी से हमें निजात दिलाये ,  हैं हम तैयार मेहनत मशक्कत करने को , कोई रोज़गार हमें दिलाये । हुमा अंसारी

तेरे जाने के बाद

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ना ही मै हंसा , ना हीं खुल कर रो सका दर्द अपना किसी से बयां ना कर सका । तेरे जाने के बाद , बड़ा भारी गुज़र रहा  ज़िंदगी का हर एक लम्हा । खुशियों से दामन छूट गया, ग़मों ने मुझे कस कर जकड़ा । ग़ुज़रे दिन का जमावाड़ा है लगा, तेरे जाने के बाद ,ना मै जी रहा ना मर रहा। तुझे भुलाने की हर कोशिश में नाकाम रहा तेरे नाम का मुझपर इल्ज़ाम लगा, जो मुझसे मिटाया ना जा रहा तेरे जाने के बाद ,मै किसी का ना हुआ । हुमा अंसारी

हादसा

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कब क्या हो जाये किसी को नही है पता, ज़िंदगी के कदन- कदम पर एक नया हादसा है खड़ा। खेलते हैं दिलों से ,तो़ड़े जाते हैं दिल यहाँ। वफा के नाम पर लूटा जाता, है मतलबी ये जहाँ। प्यार ,अपनापन बांटने वाला हो रहा है तबाह, चैन से वो सोता है जो फरेब कर रहा । हर हादसा  देता सबक एक नया , रास्ता जिसने बनाया ज़िंदा वही रहा। जो हादसों से उबर ना पाया, वो ज़िंदगी जी ना सका। हुमा अंसारी

चुनौतियां

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हौसलें बुलंद हो जिसके कोई बाधा रोक सकती नही । अपनी खूबियों को आगे कर हर मुश्किल को मात देते हैं वही। खुद पर भरोसा रखते ,इज़्ज़त करते हैं अपनी जिंदगी की । चुनौतियों से पीछे हटते नहीं कभी । सामना कर उनका डटे रहतें  । दोगुनी मेहनत करके आगे बढ़ते हैं बनतें हीरो असली । ऐसे दिलदार इंसान को सलाम करते हैं सभी । हुमा अंसारी

औरत

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कहते हैंं आज औरत का दिन है! ये बताओ औरत के बिना भी क्या कोई दिन है ! लोग इल्ज़ाम लगाये फिरते हैं, बोझ समझ कर रखतें हैं, कमज़ोर उसे बनातें हैं, इज़्ज़त पर हमले करतें हैं, पहरे लगाये जातें हैं, ज़ुल्म ढाये जातें हैं, उसके ऊपर जिसके बिन, ना कायनात पूरी ! ना आदमी पूरा है !! हुमा अंसारी

मुसाफिर हूँ यारो

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इस जहाँ में कहाँ हमेशा रहने वाला हूँ , कर लूं वही जिससे सुकूं पाता हूँ । बाँट लू मोहब्बतें ,है यही हसरतें, बाद अपने मै,अपने निशान छोड़ जाना चाहता हूँ। क्या करूँ धन दौलत इकट्ठा करके , जब सब कुछ छोड़ जाने वाला हूँ । मुसाफिर हूँ यारों ,ज़िदगी के सफर का , अपने कर्मों को लेकर लौट जाने वाला हूँ । हुमा अंसारी

वो खिड़की जो बन्द रहती है

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झांका करती थी एक बुज़ुर्ग हस्ती , हमें खेलता देख मन ही मन मुसकाती थी । शायद अकेलेपन से उकता गयीं थी वो , इसलिये खिड़की में बैठी रहती थी । बदन कमज़ोर हो गया था , घर के बाहर निकलने का दम ना बचा था । वो कैसे बहलाती दिल अपना, घर में उसका कोई साथी भी ना था । सब अपने अपने काम में मसरूफ थे, कौन देता उसको वक्त अपना । बिना किसी से शिकायत किये, भरी आँखे खामोश लब मुस्कुराते थे । हम उनको देख कर अपनी दादी में खो जाते थे, उनकी बेबसी देखकर मन ही मन कराहते थे । कभी हम भी उस दौर से गुज़रेंगे , ये सोच कर डर जाते थे । रोनक रहती थी जब वो हमें देखतीं थी, कभी डांटती तो कभी पुचकारतीं थीं । एक दिन ऐसा आया , वो इस जहाँ से चल बसीं । अब सूनी हो गयी वो खिड़की । जो कभी गुलज़ार रहती थी । ढूंढा करती है मेरी अखियाँ उन्हे, पर अब वो खिड़की बंद रहती है । हुमा अंसारी

भारत

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भिन्न भिन्न धर्म के लोग , भिन्न है जाति ! भाषा अलग, परिधान अलग  इनको अलग ना कर पाती ।   एक माला में पिरे रहते   जैसे सुंदर- सुंदर  मोती।   भारत की सुंदरता,  भारत की संस्कृति ।  दुनिया भर में चर्चे भारत के, है ये मिसाल एकता की । आओ हम सब मिल कर ये प्रयत्न करें.. सफल ना होने देंगें साजिश षणयंत्र रचने वालों की । दुनिया भर में कोई देश ना ऐसा ना किसी देश में श्रेष्टा ऐसी ।       हुमा अंसारी

शहीद भगत सिंह

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दुनिया में तो  रहे कम दिन , जाने के बाद भी जिंदा रह गए l अमर शहीद भगत सिंह , ऐसा बलिदान कर गए I दिलों में सबके बसते हैं , ऐसे महान काम  कर गए  I  जिंदगी में जो कुछ कर गुजरा , जिंदा वहीं रहा l हम सबको यही  सीख दे गए I  हुमा अंसारी

घर घर की कहानी

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नहीं है सुकूं पास किसी के, ना किसी का कोई सच्चा साथी । रोते हैं सभी हँसते हुये चेहरों के पीछे, है यही घर घर की कहानी । माँ - बाप बिता देते हैं जिनकी खातिर अपनी पूरी ज़िंदगानी, वही औलाद उनकी करती नाफरमानी । रोते रहते हैं वे तन्हा अकेले, है यही घर घर की कहानी । लोगो को अब वास्ता नहीं किसी से मोबाईल के हवाले कर दी ज़िंदगी, रिश्तों की अहमियत ही नही रह गयी , है यही घर घर की कहानी । हुमा अंसारी लखनऊ यू पी

घर घर की कहानी

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नहीं है सुकूं पास किसी के, ना किसी का कोई सच्चा साथी । रोते हैं सभी हँसते हुये चेहरों के पीछे, है यही घर घर की कहानी । माँ - बाप बिता देते हैं जिनकी खातिर अपनी पूरी ज़िंदगानी, वही औलाद उनकी करती नाफरमानी । रोते रहते हैं वे तन्हा अकेले, है यही घर घर की कहानी । लोगो को अब वास्ता नहीं किसी से मोबाईल के हवाले कर दी ज़िंदगी, रिश्तों की अहमियत ही नही रह गयी , है यही घर घर की कहानी । हुमा अंसारी लखनऊ यू पी

ज़िंदगी एक किताब

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खाली  पन्नों सी एक किताब है ये ज़िंदगी। हमारी करनी इसका मज़मून बनाती। एक बार जो लिख जाती कभी मिट ना पाती । जैसा हम औरों के साथ करते आगे हमारे वही बीतती। ज़िंदगी की किताब हमें बहुत सारे किरदार में ढालती । रोमांच से भरी इस किताब में दुखों की लड़ियां हैं बड़ी । कोई तन्हा सा जी रहा तो किसी को महफिलें मिलीं। ये किताब नेमत है रब की जो किस्मत से हमको मिली । एक एक हर्फ से मिलता सबक है, हर एक चीज़ कुछ ना कुछ सिखाती । ये किताब खूबसूरत अल्फाज़ से सजी रहे,कोशिश यही करना सभी । सिर्फ एक बार ही मिलती है लिखने को,दोबारा मिलेगी नही । ये ज़िंदगी की किताब है दिलचस्प बड़ी । भर लो इसमें नेकियां अपनी । हुमा अंसारी

नया सवेरा

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  नया सवेरा आया है ,नई उम्मीदें लाया है..   चिड़ियों ने है पंख खोले , सूरज जगमगाया है ।   ठंडी हवा के झोंकों ने सबका दिल महकाया है ।   नया सवेरा आया है.. नई उम्मीदें लाया है ..    साल पुराना बीत गया , नए साल का आगाज हुआ .. भूल पुराने जख्मों को , तू भी स्वागत में जुट जा I  नया सवेरा आया है.. नई उम्मीदें लाया है ..     की थी जो गलती तुमने कर ले तू उसका सुधार ,    नए पुराने ख्वाबों को लग जा तू करने साकार ।     नया सवेरा आया है.. नई उम्मीदें लाया है ..          बीत गया जो बीतना था , उसके लिए रोता है क्या !      छोड़ पुराने रंजो गम , नई आशा मन में जगा ।      नया सवेरा आया है ..नई उम्मीदें लाया है..             काम किसी के तू भी  आ ,अपना जीवन यूं  ना गवा ।    भर देगा आंचल में तेरे खुशियों की सौगात खुदा।    नया सवेरा आया है.. नई उम्मीदें लाया है..         नए साल विपदा ना आए , कर खुदा से यही दुआ । ...

अख़बार की सुर्खियाँ

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मामूली सी ख़बरों को बड़ा असरदार बनातीं हैं  अख़बार की सुर्खियाँ । कोई नज़र अंदाज़ करना भी चाहे तो कर नही पाता इस क़दर चीख़ चीख़ बुलातीं हैं सुर्खियाँ । चटपटे मसाले में घोल कर ख़बर को क्या से क्या बना देतीं हैं यही सुर्खियाँ । इन्ही सुर्खियों ने हर तरफ हल्ला मचा दिया । रोचक सुर्खी देख कर ही ख़बर पूरी पढ़ने की दिल करता । कभी कभी तो पूरी ख़बर पढ़कर सुर्खियों पर गुस्सा भी आता । सिर्फ अख़बार की सुर्खियों से ही ना पूरी ख़बर का सार निकाल लेना । होतीं हैं हटकर भी ख़बर कुछ और बोलतीं हैं सुर्खियाँ । हुमा अंसारी