Posts

Showing posts with the label कीर्ति चौरसिया

प्रेम की निशानी

Image
ऑंखों से मेरी ढलता हुआ खारा सा पानी एहसासों को समेटे, यही तेरे प्रेम की निशानी!! हमेशा कब रही है ,ठहरी हुई रबानी हिचकोले खाती रही,समन्दर में जिंदगानी!! बीच मझधार में भी बढ़ती रही कहानी वो दूर होता गया,मेरी बढ़ती रही दीवानगी!! चंद दिनों का किस्सा, और यादों की जुबानी मजबूरीयां कहता रहा, दोनों की आंखों का पानी !! बड़ी शिद्दत से करते रहे, हम रहे यादों की अगवानी दूर हो कर भी,दिल पर हक बना गया मालकानी !! कभी ग़म,कभी खुशी,ये वक्त की छेड़खानी फिर मिलने की अब ना चलेगी तेरी ये आनाकानी !! स्वरचित✒️✒️ कीर्ति चौरसिया जबलपुर मध्यप्रदेश

अक्सर देर रात

Image
छूट जाता है जो लम्हा भरकस  खुश रहने की कोशिश का, उसका ख्याल आता है अक्सर देर रात।। ख्वाब जो पूरे नहीं होते कर्तव्यों की जद्दोजहद में, उसका मलाल रहता है अक्सर देर रात।। ऑंखों में ठहरे रहते हैं दिन के उजाले में छुपे रहते हैं उन्हीं अश्कों से भीगता है चेहरा अक्सर देर रात।। सरोवर की लचकती कुमूदनी प्रभाती की प्रतीक्षा में रुप संवारती है  अक्सर देर रात।। स्वरचित✒️ कीर्ति चौरसिया जबलपुर मध्यप्रदेश

पलाश

Image
देखो, भर गया वृक्ष पलाश  आने वाला है मौसम खास। यादों में जैसे कोई खोया हुआ मुद्दातों के बाद आज जागा हुआ।  जैसे वीरान विराट जंगलों में  लगा नारंगी तिलक मंगलों में। पत्ते झड़ जाते जब पतझड़ में खास अकेले लहलाहाता नारंगी पलाश। अलसाई गौरी के उलझे गेशु मदमस्त भरा बहकता सा टेसू। बसंती हवा लगाती जंगल में आग रंग बिरंगी छटा , गाए मौसमी फाग। धीरे से कहता, मैं रंगों की हूं आस आने वाला है कोई त्यौहार खास। स्वरचित मौलिक,, अप्रकाशित कीर्ति चौरसिया जबलपुर मध्यप्रदेश

अपूर्ण प्रेम

Image
स्वछन्द ह्रदय से स्वीकार, प्रेम सदैव आभासीत हुआ, प्रेम की परिपूर्णता में भी  प्रेम कब परिभाषित हुआ।। अपूर्ण प्रेम ही प्रेम की परिपूर्णता का परिमाप हुआ, मंदिरों में सृजित स्नेहमय  राधेकृष्ण का कब मिलाप हुआ।। प्रेम अनुभूति का गहरा  विशाल खारा  समुन्दर हुआ, जन्मों तक प्यास बाकि रही  पूरा कब‌ किसके अन्दर हुआ।।   प्रेम के ही जैसे गुलाब काॅंटों से लिपटा मिला,  विविध रंगों में खिलता रहा उपहारों में सिमटा हुआ।। प्रतीक्षा से भरे नयन प्रेम का आधार हुए, मीलों लम्बे रास्ते  आसानी से कब पार हुए।। स्वरचित, कीर्ति चौरसिया जबलपुर मध्यप्रदेश

दिसंबर

Image
मिल ना पाता जनवरी से कभी दिसंबर का भी अपना ही दर्द है। बीच बाजार बदनाम ही रहता, दिन ठिठुरन भरे,  कहते रातें सर्द हैं। आने की अपनी छोटी सी चाहत में  महीने ग्यारह यही चुकाता कर्ज है। मुस्कान सजाता मुख पर अपने जैसे यही  परिवार का पहला मर्द है। हाताश कोई, रुठ ना जाए मुझसे  आगे बढ़ाना सबको उसका फर्ज है। खुशीयों में सबकी खुश रहता बाद सभी के आता,पर मन में हर्ष है। स्वच्छंद प्रकृति का रूप निखारता लगता मीठे मधुर गीतों की तर्ज़ है। लगी रहती  झड़ी त्यौहारों की सदा, दिसंबर खाली जाता,ये भी इसका मर्ज है। आगे निकल जाए कोई कितना भी दिसंबर मिल कर ही होता पूर्ण वर्ष है। मीठे एहसासों से भरा ,माथे पर मेरे सजा, "कीर्तीजय" जीवन में  , यही दिसंबर दर्ज है। स्वरचित, मौलिक, कीर्ति चौरसिया  जबलपुर (मध्यप्रदेश) आपका दिन शुभ हो 🙏

दुनिया का मेला

Image
ना करो ज्यादा उम्मीदें,ना  सजाओ बड़ा सपना , आए हो दुनिया के मेले में , चार दिन है तुम्हें रुकना !!! है लोभ, लालच, विलासिता  का बाज़ार सुंदर सजा हुआ , स्वार्थ, कटुता ,और मैं , मैं का शोर बड़ा मचा हुआ !!! लेकर चार अपनों को  तू घूम दुनिया के मेले में, दे, देकर आवाज बुलायेंगे  तू मत पड़ना इस झमेले में!!! नेकियों की दुकान में  तू ध्यान अपना लगाना , स्नेह, और प्रेम की  भर थैली घर ले आना !!! झूलने को झूले भी कई तुझे मिलेंगें, हिचकौले खा कर भी जीवन के फूल खिलेंगे !!! रखना हाथ पकड़ कर  कोई अपना ना गुमने पाए , संताप रहेगा उम्र भर  क्यों अपनों को छोड़ आए !!! कुछ छोटे, नन्हें हाथों से  बिक रही होगी मासूमियत , कुछ खरीद दयाभाव से  देना उनको भी अहमियत !!! इस दुनिया के मेले से  वापिस एक दिन जाना है, याद करे दुनिया तुझको  कुछ कर्म ऐसे कर जाना है, सोच कर ना जाना ये   बस आइसक्रीम ही खाना है !!!           कीर्ति चौरसिया       जबलपुर (मध्य प्रदेश)

प्यारा मध्यप्रदेश है

Image
देश के दिल में बसता है प्यारा मध्यप्रदेश है। लोक संस्कृतियों, जनजाति का यहाॅं अदभुत संयोग है, प्यारा मध्यप्रदेश है।। पाॅंच राज्यों को छूता है  मिला-जुला परिवेश है। विंध्याचल, सतपुड़ा,मेकल  प्रकृति का सुंदर उपदेश है, प्यारा मध्यप्रदेश है।।  पचमढ़ी, उज्जैन में महाकाल महेश है, ओंकारेश्वर, महेश्वर में भी शिव शम्भू का ही भेष है, प्यारा मध्यप्रदेश है।। बक्साहा के जंगल में अब  नजरें गढी़ विशेष है हीरा, पन्ना की खानें भी मिलती यहां अशेष है, प्यारा मध्यप्रदेश है।। नर्मदा,‌क्षिप्रा सी सरितायें कल कल बहती धारायें वन, जंगल की सौगातें कहलाए वन प्रदेश है, प्यारा मध्यप्रदेश है।। जन्म भूमि ये कवियों की माखनलाल,परसाई, कालिदास है साहित्य, शिक्षा का मिलता सदा सन्देश है, प्यारा मध्यप्रदेश है।। स्वरचित,----✒️ कीर्ति चौरसिया जबलपुर (मध्यप्रदेश) समस्त मध्यप्रदेश वासियों को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

जय श्री कृष्णा

Image
जग में छाया अंधेरा,रात घनघोर थी कंस के ज़ुल्म से, त्राहिमाम चहुंओर थी थी जरुरत हमें प्रभु, अवतार की हर तरफ शोर था, अधर्म का जोर था ! भांदों महिना कृष्ण पक्ष अष्टमी ग्रह अनुसार थे,है नक्षत्र रोहिणी, प्रगटो ,हे प्रभु  धन्य धरती करो देव सारे करें वन्दना आपकी!! सुनकर पुकार सबकी करुणामयी जन्मे प्रभु माता देवकी भयी, वासुदेव से पितृ कारागार में लेकर चले डगर यमुना सही !! देवकी की व्यथा, कोई समझा कहां? जन्म देते ही लाल ,तू चला हैं कहां? मां की ममता हुई,कितनी बेहाल है बेबसी साथ मेरे बस यही हाल है!! हर्षोल्लास से छाए बंदनवार है गोकुल की गली,धूम नंद द्वार है, रेशम की लडी़, यशोदा झूला छरें विष्णु का हुआ, कृष्ण अवतार है!! गोकुल में मधुर बाललीला रची, फोंडे़ माखन मटकी, हैं खाते दही गोपी ग्वालों के संग रासलीला करें मधुर बंसी की धुन पर राधा नची!! मथुरा, बृंदावन, कुरुक्षेत्र का रण कृष्ण प्रेम से मगन हुआ कण कण, थामे सुदर्शन दिया गीता का ज्ञान भाती मोहिनी मूरत,मुरारी प्रति क्षण! स्वरचित, मौलिक✒️        कीर्ति चौरसिया      जबलपुर मध्यप्रदेश

विश्वास

Image
अथाह शक्ति सम्पन्न, निर्गुण अनादि परब्रहम खेता नाव समस्त जगत की, धर्म हीन मानव शरीर की ! क्षमा सदैव अपराध कीजिए,मम बुद्धिहीन प्राणी के माया मोह में रची हुइ,अपटु अल्पज्ञ वाणी के ! अंनत राग द्वेष ह्रदय में, स्वार्थ सिद्धि के मद में उछलता जलनिधी लहरों सा, भटकता चंचल मन्मथ में ! करूणामय ह्रदय से,निज अपराधों को सहता हूं कर्मशील बन विधि भाग्य को,अपने हाथों रचता हूं! विस्मृत कर देता हूं,अंतसमन पीड़ा को विश्वास यही आराध्य मेरा,देख रहा हर क्रीड़ा को ! नित लगा रहूं प्रयासों में, मंज़िल पाने की होड़ नहीं अपनों के मन‌ को पा जाऊं, अधिकारों की दौड़ नहीं ! फलविहीन तरु से ,फल पाने की क्यों आस करूं? प्रतिफल मिलता सत्कर्मो़ का,मात्र यही विश्वास करुं ! रोपा है उस अंनत शक्ति ने,बीज वही फलेगा माटी की कच्ची काया हूं,तप कर कंचन वर्ण मिलेगा ! प्रभुता का अधिकार ना मांगू, सत्यनिष्ठ रहे ये काया चिरलीन निंद्रा जब आए, रूग्णता का घेरे ना साया ! स्वरचित, मौलिक, सर्वाधिकार सुरक्षित,,           कीर्ति चौरसिया      जबलपुर मध्यप्रदेश

नीरज चौपड़ा देश का अभिमान

Image
 महक गया फिर चमन हमारा नीरज ने रवि उगाया है, रहे तिरंगा शान तेरी  टोक्यो में जन मन गाया है!! रचा दिया इतिहास लाल ने भारत देश आज हर्षया है फिर हुई एक अगस्त क्रांति सावन में सोना बरसाया है!! हरियाणा के गांव खांद्रा का  नाम नक्शे में छाया है, मां सरोज के पूत ने आज दुनिया में नाम कमाया है!! सीमा पर रक्षा करने का कर्तव्य भी खूब निभाया है, सूबेदार पद पर रहकर सेना में स्थान बनाया है!! स्वरचित, मौलिक,, सर्वाधिकार सुरक्षित   कीर्ति चौरसिया   जबलपुर ( मध्य प्रदेश)

शिक्षा का परिवर्तन

Image
शिक्षा में परिवर्तन देखो,अजब गजब सा मापन देखो, बिना कापी और बिना पेन के,छात्रों को अध्यापन देखो ! अब हम तो कहलाते बुद्धू,रात दिन जो पढ़े पढ़ाए, दिन कटता था कक्षाओं में,रात कटती नोट्स बनाए! टाइम टेबल के आते ही,और चौकन्ने हो जाते थे, प्रैक्टिकल परीक्षा में ,फाइलें खूब सजाते थे!! अब किताबें भी हुई नदारत,मोबाइल में सब हुआ समाहित, ना शिक्षक की डांट डपट है,ना छात्रों की हुई शरारत!! कानों में लगा तार घूम रहे,पढ़ने का ढोंग कर रहे, ऑनलाइन चल रही क्लास हमारी,बता बता कर धौंस भर रहे!! बिना परीक्षा पास हो रहे,डिग्री की बौछार कर रहे, छात्रों सा अनुशासन गायब,घर में बैठे मौज कर रहे!! ज्ञान की दुर्गति कर रहे,इशारों में नकल कर रहे, पाठयक्रम का पता नहीं,प्रश्नपत्र लीक कर रहे!! गजब हो गई शिक्षा दीक्षा,बस नाम की रह गई परीक्षा, फीस भरो और डिग्री पाओ,पढ़ाने की अब बची ना इक्छा!! स्वरचित, मौलिक, सर्वाधिकार सुरक्षित -----           कीर्ति चौरसिया      जबलपुर (मध्य प्रदेश)

राम नाम

Image
राम नाम की महिमा गा ले,  राम नाम तू कंठ समा ले, जीवन की सुध ले ना ले,  राम प्रभु को अपना ले, साधक जपते राम ही राम , रे, मन तू क्यों नहीं लेता उनका नाम! रचा स्वयं जिसने संसार, आदि अंनत के पालनहार मर्यादा का पाठ पढ़ाने, उसने भी कष्ट सहा अपार, त्यागमूर्ति सीताराम, रे, मन तू क्यों नहीं लेता उनका नाम! अहिल्या को तारा जिसने, झूठे बेर शबरी के खाए, केवट को मित्र मान लिया, राम को तो बस प्रेम भाए, जनकनंदनी,नेह प्रीति ,स्वयं विराजे जिनके वाम, रे, मन तू क्यों नहीं लेता उनका नाम! मति रावण की नहीं फिरी थी, कुल का करना था उद्दार, बैर लिया दुनिया से उसने, मृत्यु पाने श्री राम के हाथ, स्वयं शिव जिनके अनुरागी,  और सखा बने हनुमान, रे, मन तू क्यों नहीं लेता उनका नाम!   स्वरचित, मौलिक ___     कीर्ति चौरसिया    जबलपुर (मध्य प्रदेश)

बचपन और बारिश

Image
कापी के पिछले पन्नों से,बनती थी जब नाव, बारिश के पानी में भी तब,छप छप करते पाँव! भीगा तन, और भीगा मन,अंतरमन भी मस्त मगन, काले काले बादल भी,लगते थे तब मनभावन! भीगे बस्ते लेकर हम,जब पहुँचा करते नित्य सदन, पुस्तकों की कतार लगा,सिर्फ सुखाने का था मन! रास्ते में ढूँढा करते थे,कोई शीतल सी छाँव,, बारिश के पानी में,छप छप करते पाँव! साड़ी के पल्लू से माँ भी, रगड़ रगड़ कर बाल सुखाती, अदरक वाली चाय बनाती,बार बार माथा सहलाती!! मस्ती वही थी बारिश की,फिकर नहीं थी खारिश की, कितना प्यारा था वो बचपन,भीग जाएं चाहे पैसे पचपन!! कीचड़ में सन जाते थे,छोटे छोटे गाँव, बारिश के पानी में भी,छप छप करते पाँव !! बडे़ हुए तो सहमे ऐसे,इस बारिश में भीगे कैसे, मस्ती बिक गई जेबों मेंं,कुछ कागज के नोटों में!! बारिश वही है,लेकिन अब,मायने बदल गए मस्ती के,,बचपन का अल्हड़पन बीता दिन आ गए गृहस्थी के!! निर्धारित रस्ते में रहते,अब गायब सब ठाँव, बारिश के पानी में भी,छप छप करते पाँव!! आने से पहले बारिश अब,बन जाते पापड़ ,अचार, कुछ महीनों पहले ही करती,गेंहू चावल, मसाले तैयार !! मुश्किलों की अब बौछारें हैं,बंगला, और मोटर का...

हाइकु

Image
सजी नवेली       संग सखी सहेली                      मुखुर हंसी । मंडप छाए           मंगल गीत गाएं                      पाएं आशीष। कन्या दान         पितृ कर महान                       बना संबंध। छोड़ बाबुल     चली पिया मिलन                      देहरी छूटी। संग सपन         भर उर उमंग                   चली थिरक । जान अपना        संग चली विदेश                      सुन आदेश । नयन नीर            सुता मन अधीर                       माता विकल। साथी समझ         ...

सर्वे भवन्तु सुखिन:

Image
चिकित्सक दिवस पर समस्त चिकित्सकों को समर्पित  मन में समाहित नित सेवाभाव सर्वे भवन्तु सुखिन: का ही चाव, सदा कर्म पथ पर अटल अपने आंखों में पाले निस्वार्थ सपने!!! देख रहे महामारी की यातनाएं पर पीड़ा कीअनगिनत विषमताएं, तड़प रहे लोग अपनों की चाह में रोते बिलखते परिवारों की भावनाएं !! जब मचा प्राणों का संकट रिश्तों में भी पाया टूटने का कंटक, बेटे मां को ना दे पा रहे कंधा आपदा में अवसर खोज कुछ लोग चला रहे अपना धंधा!!! बढ़ रही तुम्हारी जिम्मेदारियां नहीं परवाह अपने जीवन की, परिवार अपना छोड़ कर सेवा भाव से दे रहे नई ज़िंदगियां!!! तुम योद्धा इस महा समर के हौसलों से अपने जीते हैं, कर रहे नि:स्वार्थ सेवा  आशीष का मिलेगा मेवा !!!! स्वरचित,, मौलिक,, सर्वाधिकार सुरक्षित कीर्ति चौरसिया जबलपुर मध्य प्रदेश

वादा

Image
देखते देखते रात ढल जाएगी तुम सितारों से शिकवा ना करना कभी चांदनी रात से क्यों शिकायत करें रात के बाद फिर एक सुबह आएगी ! अपने दर्द की कभी तू नुमाइश ना कर जानते हैं सभी ज़िंदगी का सबब, कोई बचता नहीं ,वक्त की मार से ज़िंदगी की महक ,फिर करीब आएगी!! अपने सपनों से सदा तू वादा ये कर रात को जाग कर तुझको देखा अगर, नींद में डूब कर क्यों तुझको जाया करें बात ये ख्वाब की ,हकीक़त बन जाएगी!! हौसलों से ही है,अपनी दुनिया बनी कोशिशों को कभी हमने रोका नहीं, खींच लें ये कदम किसकी जुर्रत यहां हमने खुद ही बनाई अपनी किस्मत नई !!!! किसी अनजान से कभी मिलना पड़े अपने दिल को कभी तू धड़कने ना दे, रफ्ता रफ्ता तुझे इश्क हो जाएगा  फिर इंतजार की,सदी इक आएगी !!!! कीर्ति चौरसिया  जबलपुर ( मध्य प्रदेश)

पहली बारिश

Image
तुझे भूलने की हर कोशिश, नाकाम हो गई, पहली बारिश क्या बरसी, खबर आम हो गई!! बात जो पहुंची नहीं, तुझ तक वही ज़िंदगी का पैगाम हो गई, हमने तो छुपाना चाहा था,आंखों से बारिश खुलेआम हो गई!! बढ़ गई जब दूरियां,सिसकियां तमाम हो गई, हर लम्हा रास्तों पर नजर,इंतजार का अंजाम हो गई!! शायद ढूंढ लाएं तुझे,ये काली बदलियां, एहसासों से भरी ज़िन्दगी,बस तेरे नाम हो गई!! मौसम की ये हरकतें,यादों को परेशान कर गई, तुझे छूकर आती है मेरे पास, बारिश की ये हवाएं भी बदमाश हो गई!! स्वरचित, मौलिक,, सर्वाधिकार सुरक्षित,, कीर्ति चौरसिया जबलपुर (मध्य प्रदेश)

आराधना

Image
हे परमपिता, हे आराध्य मेरे चरणों में सदा स्थान मिले , सागर की तूफानी लहरों में तुझ मांझी की पतवार मिले ।। मन भटक रहा मरीचिका में माटी की कच्ची काया हूं, परिस्थितियों के वश रही छल प्रपंचों की नित छाया हूं ।। सुनो, प्रार्थना रघुवर मेरे सतमार्ग पर कदम बढ़ते रहें मुश्किलों ,बाधाओं में  हौसलें मुझे मिलते रहें।। है याचना,, यही रघुवर अधिकारों का न हनन सहुं, मर्यादाओं में बंधी रहूं नित कर्म पथ पर आगे रहूं आराधना !! यही मेरी सेवाकर्म अपना करूं !!! जीतने को जग ये सारा संघर्ष का नित पथ मिलें त्याग कर स्वार्थ अपना धर्म का प्रतिफल मिले !!  स्वरचित, मौलिक      कीर्ति चौरसिया  जबलपुर (मध्य प्रदेश)

असमंजस

Image
निरंतर बह रही जीवन धारा सूखी, रेतीली,पथरीली राहें प्रवाह रोकती सरिता का उष्णता का चढ़ता पारा है!!! घोर अंधेरा छाया जैसे प्रधिप्त उजाला गुम हुआ, डगमग डोल रही नैया उचित अनुचित का कौन खिवैया !!! हर प्राणी संस्कारी है परिस्थितियों से हारे सब, कोई किसे, क्यों दाग लगाए विषमताओं के मारे सब !!! अक्षुढ़, भंगुर जीवन में असमंजस ने ही घेरा है, करें ना करें का प्रति द्वंद माया का प्रतिपल फेरा है !!!! विषमताओं में सामंजस्य बिठा चुनौतियों को स्वीकार करो, नित नए आयामों को पाकर असमंजस का प्रतिकार करो !!!! स्वरचित, मौलिक सर्वाधिकार सुरक्षित,,, कीर्ति चौरसिया जबलपुर (मध्य प्रदेश)

हम होंगे कामयाब

Image
फिर से बहार आएगी, अपने भी शहर में। डरते हुए सब लोग फिर न होंगे  जी घर में।। कोरोना को हरा के होंगे कामयाब हम। मत सोचिए कब तक रहेंगे और कहर में।। आई है बैक्सीन इसे आप लगाओ। मानव के लिए, बन रही अमृत ये जहर में।। हिम्मत हमारी कामयाब हमको करेगी। बस हौसलों का साथ हो, हर एक पहर में।। फिर से सजेंगी गुमठियां, फिर चाट खाएंगें। फिर आएगी रौनक सभी दीवार ओ दर में।। दुनिया में  हमारी ही बैक्सीन छा गई। हम कामयाब हो गए दुनिया की नजर में।। रखिए बनाए हौसला, हिम्मत न हारिए। हमको मिलेगी कीर्ती कोरोना समर में।। स्वरचित , कीर्ती चौरसिया  जबलपुर (मध्य प्रदेश)