Posts

Showing posts with the label Neha Sharma

किस्से नये पुराने

Image
किस्से नये पुराने लगते हैं गुदगुदाने किस्से नए पुराने जब भी बैठे फुर्सत में याद आते हैं वो मौसम सुहाने भूले नहीं भुलाये जाते वो बचपन के जमाने स्कूल नहीं जाने के  ढूँढते नित नए बहाने पूछे जाने पर लगाते नानी के निधन के बहाने पकड़े जाने पर पड़ते डंडे और पड़ते घरवालों की डांट  भरी दुपहरी में बाग के चक्कर और जाते खट्टी खट्टी इमली की चाट डाकिये की साइकिल  ले जाते सीखने के बहाने पर सीख तो नहीं पाते पर लगा आते चोट डाकिया कहता -ये तो होना ही था जब इसकी नीयत में था खोट कान पकड़ कर सॉरी कह चुप जाते माँ के आँचल की ओट ज्यों हुए कुछ बड़े तो चढ़ा था इश्क का बुखार एक अनजाने से कर बैठे अनजाने में ही प्यार बस अब तो करते रहते हर वक़्त उसका ही इंतजार पर हाय री किस्मत  मेरे नसीब में नहीं था उसका प्यार छोड़ गया मुझको तन्हा रोते आया न जुल्मी कभी आँसू पोंछने उतार फेका सर से इश्क का बुखार अब तो बस खुद से ही है करना प्यार कल्पनाओं को बस देकर रंग जीवन में बढ़ाना है उमंग दिल गाये ख्वाबों के तराने करके याद किस्से नए पुराने.....                    ...

जिंदगी के पन्ने

Image
यूँ ही बैठे बैठे जिंदगी के पन्ने पलट रही थी, उन पन्नों में बहुत सी धुंधली सी यादें अतीत की थीं, कुछ खट्टी ,कुछ मीठी , कुछ कड़वी,कुछ तीखी, पर यादें जैसी भी हो दिल को झकझोर देती है, यादें जीने की वजह बन जाती है , कितना ही हम उन्हें भुलाने की कोशिश करें, किसी न किसी मोड़ पर सामना हो ही जाता है, कितने आगे निकल आये बहुत खूबसूरत लम्हें पीछे छूट गए, कुछ नए रिश्ते जुड़ गए ,कुछ हाथों से छूट गए, जो जुड़ गए उन्हें सहेज कर  हैं रखने, छूटे रिश्ते अब नहीं हो सकते अपने, वक़्त जो निकल गया, वापस न आएगा, जी लो सुकून से वरना, वर्तमान भी फिसल जाएगा, तेरा मेरा करते करते ,जीवन व्यर्थ गंवाएगा, भज ले बन्दे प्रभु का नाम ,जीवन सफल हो जाएगा....                                                         नेहा शर्मा

उन्मुक्त परिन्दों सा

Image
ये दिल भी कितना नादान है कैसे कैसे ख्वाहिशें पालता है उम्र बचपन की हो या पचपन  लहरा कर अपना आँचल हर उम्र में उन्मुक्त परिंदों सा अम्बर में उड़ान भरना चाहता है कभी छत पर खड़े होकर पंछियों से बातें करना चाहता है कभी नदियों की हिलोर संग मस्तियाँ करना चाहता है तो  कभी चाँद तारों से बातें करना भूल जाना चाहता है हर गम वक़्त से आगे निकलना चाहता है  क्योंकि वक़्त रेत की तरह   हाथों से फिसलती जा रही है    वक़्त से कुछ  हसीं लम्हों की तस्वीर   अपनी पलकों पर कैद करने चाहता है                                      नेहा शर्मा

सिंधु ताई

Image
अपनों ने जिन्हें कर दिया था बेसहारा वो सिंधु ताई बनीं बेसहारों का सहारा कच्ची उम्र में ब्याह दी गईं उम्रदराज से बहकावे में उसने निष्कासित किया घरबार से अपने हक की खातिर थी आवाज उठाई बहकावे में आकर पति ने बाहर की राह दिखाई नौ माह की गर्भवती तबेले में थी बेटी जाई थी सहारा लेने को वो माँ के घर पर आईं थी वहाँ भी नहीं मिला सहारा ,जिसकी उसको जरूरत थी अंतरात्मा से आवाज है आई अब वो बनेगी जरूरत किसी की स्टेशन पर भीख मांगकर,दोनों का पेट भरी थी हिम्मत नहीं हारी ,आत्मरक्षा को श्मशान में सोती थीं धीरे धीरे अनाथों की बन गईं वो माई भीख माँगकर ही उनका पेट भर पाई औरों को ममता देने की खातिर अपनी ममता का त्याग किया निर्बल का बन कर सहारा उनको जीवन दान दिया सबका हित करने वाली माँ की ख्याति फैल गई सिंधु ताई के नाम से वो लोकप्रिय होती गई हक दिलवाने की खातिर जी जान लगा देती थी न जाने कितनों के घर भी वो बसा देती थीं बहुत पाया है सम्मान उन्होंने हैं वो इसकी हकदार कमजोर कभीं बनना जग में,सीख ये सबको सिखाई देश विदेश हर जगह पर मिला इन्हें सम्मान आज न जाने कितने बेटे बेटियों की बन गई माँ पढा लिखाकर उन्हें भी...

तुम मानो या न मानो

Image
तुम मानो या न मानो मैं आज भी तुमसे  बेइंतहा मोहब्बत करती हूँ माना अपनी मोहब्बत में मिलन नहीं जुदाई लिखी थी पर इश्क हमारा दूरियों में  भी अपने शबाब पर है बहुत सादगी थी अपनी मोहब्बत में आज भी वैसी ही तड़प होती है जो उन दिनों होती थी  जब हम जवां थे पर प्यार हमारा रूहानी था इसलिए बिन मुलाकात आज भी उन हसीन पलों की यादों के सहारे जी रहे हैं  माना कि कभी अपने जज्बात अपने अहसास कह नहीं पाए तुझसे पर तुमसे छिपा भी तो नहीं पाए खामोश निगाहों ने  सब राज दिल के खोल डाले  सच उम्र ढलान पर आ गई है  तुम्हारी में नहीं जानती पर  मुझे हकीकत में तुझसे   बेइंतहा मोहब्बत है.....                           नेहा शर्मा

बाइसवाँ साल

Image
बीत गया इक्कीसवीं सदी का इक्कीसवाँ साल आ रहा  इक्कीसवीं सदी का बाईसवां  साल जो भी नादानी हुई थी ,इक्कीसवें साल में भुला देना हर उस गम को ,जो मिला उस साल में कहते हैं सब साल नया,किंतु क्या है हाल नया नूतनता किस बात में है ,वही पुरानापन हर रात में है चाल वही है ढाल वही है,मेरे सम्मुख सवाल वही है वो ही धरती ,आसमाँ भी वो ही,वो ही सूरज,चाँद सितारे वो ही इंसान ,वो ही कुदरत, वो ही नजरों के नजारे फिर भी नव वर्ष का ,करें हम धूमधाम से स्वागत मिले सबको ख़ुशियाँ भरपूर,न हो कोई भी आहत बीते गम की अँधियारी रात,आये नई सुबह की खिलखिलाती सुबह दूर हो जाये गम की साँझ,खिल जाए खुशियों की धूप                                              नेहा शर्मा

होठों की मुस्कान

Image
  डाकिया डाक लाया डाकिया डाक लाया  लाया प्रेम का संदेश और होठों की मुस्कान  रहता सभी को बेसब्री से इसका इंतजार  कहते इसको जादूगर करते काम महान  एक ही झोली में रखता आँसू और मुस्कान  सच ही कहा निदा फ़ाज़ली जी ने   डाकिया लेकर आता खुशियों का भी पैगाम  कभी लाता एक पिता का स्नेह पत्र तो   कभी एक पुत्र का अपनों की प्रीत का दर्द  कभी एक बिटिया का अपने   मायके से अलग होने का दर्द   तो कभी एक प्रेयसी का विरह    तो कभी एक प्रेमी का प्रियतमा के लिए    न जाने कितनों के प्रेम सन्देशा लेकर   आता है वो सीधा सादा साइकिल पर सवार   कभी तपती धूप में ,तो कभी बारिश की मार   कभी कंपकंपाती सर्दी में ठिठुरते हुए   वो सन्देश पहुंचाने का कार्य करता है                                          नेहा शर्मा

वसुन्धरा का हाल

Image
हरी भरी वसुंधरा का हाल हुआ बेहाल देख दशा धरा की रो पड़ा आकाश सृष्टि ये पुकार रही ,वेदना के गीत गा रही क्यों किया इंसान ने धरा पर अत्याचार है हरे भरे खेत खलिहान अब सिमट रहे हैं हरियाली खत्म हुई इमारतें बन रहे हैं निर्मल स्वच्छ नदी का भी किया बुरा हाल है नदियों के बहाव का ,रास्ता जो रुका अगर राह न मिली अगर तो नदी ढूंढ लेगी डगर फिर होगा गाँव शहर का हाल विकराल है प्रदूषण फैल रहा हर तरफ धूल का गुबार है महंगाई की मार से ,मच रहा हाहाकार है जाति धर्म के नाम पर ,बंट रहा इंसान है अपने स्वार्थ की खातिर ,बाँट दिया भगवान है                                   नेहा शर्मा

जीवन की समय यात्रा

Image
जाने क्या होता है समय यात्रा जिंदगी है अब निकलती हुई अपने हाथों से रेत की तरह दिन ब दिन फिसलती हुई इस यात्रा का पहला दौर जो सुहाना बचपन का बीता उछल कूद मौज मस्ती में न किसी बात की चिंता न फिक्र बारिश के पानी व कागज की कश्ती में जब आये किशोर अवस्था तीसरे पड़ाव में  तो उलझ कर रह गए कुछ किताबों में सवाल तो समझ जाते  फ़ँस जाते जवाबों में जैसे तैसे नैया को पार किया, पर यार दौर वो आशिकी वाला आ चला अब कहीं भी न लगता मेरा दिल ढूँढे न जाने कौन सी मंजिल  एक शहजादा दिल को भा गया मुझे प्रेम का रोग लगा गया घर वालों को सब समझ में आ गया पकड़ कर एक वर मेरा ब्याह करा दिया अब तो भैया घर की जिम्मेदारी में ही  चक्की पिसती कटेगी उम्र हमारी  बाल बच्चों को पालते पालते   भूल गए सब अपनी ख्वाहिशें  पल गए बच्चे अब लग गए अपनी लाइन  कर शादी बाँध दिया प्रेम की डोरी से  सब अपनी गृहस्थी में हो गए मशगूल  हम समय यात्रा का चौथा पड़ाव पर  आकर हो गए बिल्कुल फिजूल  पर हमारा भी दिल दरिया है  सब गम हँस कर सह लिया है  अपनी पोती में अपना मन लगाएंगे  बाक...

प्रोफेसर नीना गुप्ता

Image
        प्रोफेसर नीना गुप्ता जिन्होंने गणित विषय के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त कर सिर्फ अपनी जन्मस्थली कोलकाता ही नहीं वरन अपने देश का नाम रोशन किया है।यह पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के युवा गणितज्ञ को गणित के क्षेत्र में नई पहचान बनाने के लिए दिया जाता है          1984 को कोलकाता में जन्मी नीना गुप्ता ने कोलकाता में ही अपनी स्कूली शिक्षा खालसा हाई से ग्रहण की कर B.sc maths की डिग्री ली ।उसके बाद नीना गुप्ता ने Indian Statistical Institute से गणित में मास्टर डिग्री व P. hd की डिग्री प्राप्त की।          2014 में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी से यंग साइंटिस्ट का पुरस्कार जो उन्हें हाल के वर्षों में बीजगणितीय ज्यामिति में किये सबसे सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए मिला।          2019 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार सबसे कम उम्र की गणितज्ञ को मिला जिन्होंने 70 साल पुरानी गणित की पहेली जारिसकी की  रद्दीकरण की समस्या का हल  सफलतापूर्वक किया।  ये भारत के एक सितारे की तरह है...

सोशल मीडिया और हम

Image
सोशल मीडिया की वजह से हाईटेक हो रहे हैं हम आए रिश्तों की बुनियाद कमजोर करते जा रहे हैं हम  सोशल मीडिया के दोनों पहलू हैं सकारात्मक और नकारात्मक यदि हम इसे सही उपयोग में लेते हैं तो ये  सकारात्मक हो जाते हैं  और गलत उपयोग में लिया तो नकरात्मक हो जाते हैं सोशल मीडिया ने दूर रहने वाले को पास पास वालों को दूर कर दिया है घर में जितने सदस्य उतने ही मोबाइल एक साथ बैठे हुए भी सभी  अपने मोबाइल में व्यस्त होते हैं कई लोगों ने इसे मनोरंजन का साधन बना रखा है जान न पहचान पर फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं और तो और मैसेंजर पर hi, hello लिखने लग जाते हैं कुछ तो बहुत प्यार ही करने लगते हैं चाहे उस प्यार की किसी को जरूरत हों न हो सोशल मीडिया से अफवाहें भी बहुत फैलती हैं लोग बिना सबूत मैसेज फारवर्ड कर डालते हैं माता पिता को अंधेरे में भी रखा जाता है और इसके फायदे हैं :- कई बातों की जानकारियाँ मिल जाती हैं विदेश में बसे अपने लोगों को देख और सुन पाते हैं गूगल पर सारी जानकारियां उपलब्ध है किसी को कोई समाचार देना हो  तो ब्रॉडकास्ट लिस्ट बनाकर दी जा सकती है बस हमें इसका ग...

जज्बातों के अल्फ़ाज़

Image
तेरी मेरी कहानी  हो गई वर्षों पुरानी जो नहीं जिस्मानी वो तो बन  गई रूहानी न हुई कभी मुलाकात बस आँखों ही आँखों में हो गया था इज़हार खामोशी ने जता दिया दिल के छुपे  वो अहसास जो लब कह न सके जो जज्बातों के अल्फ़ाज़ कुछ थी अपनी मजबूरी जो हो गयी थी दूरी फिर भी दिल में  अब तक बसा रखा है तुम्हारी वो मीठी याद पता है कभी न मिल पाएँगे पर तुम्हारी यादों को  सीने में दबाकर ही इस दुनिया से चले जायेंगे....                          नेहा शर्मा

शून्य का अर्थ

Image
शून्य भी हमें बहुत कुछ सिखाता है एकता का सन्देश दे कीमत बताता है अकेला हो ने पर जिसकी कोई कीमत नहीं पर किसी अंक के साथ मिले तो  शुन्य का भाव बढ़ जाता है  शून्य का सम्बंध भी हर जगह जुड़ा है क्रिकेट में देखो तो शून्य पर आउट  हो जाने पर कितनी जिल्लत होती है वैसे ही परीक्षा के परिणाम में भी  शून्य का आना जैसे जीवन को ही शून्य कर जाता है एक शून्य का अर्थ है खालीपन या यूँ कह सकते हैं भावविहीन तो हमें अकेले शून्य की तरह नहीँ बल्कि किसी अंक के साथ लगे शून्य की तरह ही होना चाहिए जिससे अपना भी मान बढ़ जाये....                            नेहा शर्मा

बूढ़ा बरगद

Image
मेरे घर के सामने  एकबूढ़ा बरगद आज  भी अपनी शाखाओं को   फैला कर वैसा ही खड़ा है  जैसा बचपन से देखती आई  मुझे बेहद प्यार था उससे  न जाने कितने पक्षियों का   बसेरा बना हुआ था   सुबह उषा की किरणों के संग   पक्षियों की चहचहाहट   मन को मोह लेती थी   जब बसन्त ऋतु का आगमन    होता तो कोयल की कूक   मन्त्रमुग्ध कर जाती थी   तपती दुपहरी में राहगीर   व श्रमिकों को तरुछाया का   सुकून यहीं मिलता था   उनका विश्राम स्थल भी बन जाता   बारिश के पानी से भी कई बार   उनकी घनी पत्तियों और    मोटी शाखाएँ बचाव का कार्य करती   बदले में उसने कभी किसी   प्रतिदान की चाहत नहीं की   कितनी पीढ़ियाँ देख ली उसने   मैं तो जब मेरा दिल भर जाता   तो उससे ही बातें कर अपना    दिल हल्का कर लिया करती थी   वह खामोशी से मुझे सुनता    और सच कहूँ तो दिलासा भी देता   सब्र रख सब अच्छा ही होगा....                   ...

जिंदगी का अनुभव

Image
कभी कभी यूँ भी होता है  सारी जिंदगी हम यूँ ही  किताबों में बीता देते है  और जिंदगी का अनुभव  नहीं कर पाते हैं और  सफलता पाने में असफल   होकर किताबों का बोझा  ढोते फिर रहे होते हैं  हमें वो कामयाबी नहीं   मिल पाती जो हम चाहते हैं  या यूँ कहें जिसके हम हकदार है  और हमारा हक वो ले जाते हैं  जो इसके लायक ही नहीं थे  डिग्रियां तो बहुत सी इकट्ठी कर ली  पर जिंदगी की पढ़ाई के लिए  जो डिग्री हमें चाहिए वो है ही नहीं  और हम मारे मारे भटकते फिरते हैं....                        नेहा शर्मा

मन की आवाज

Image
मन की आवाज को कौन सुना पाया है जिसने भी सुनाया वो उसकी कीमत चुकाया है दब जाती है उलझी जिंदगी में मन की आवाज सुनाई नहीं देती न कोई सरगम न कोई साज बस घुट घुट कर यूँ सिसकते रहते हैं लब तक आकर भी अल्फ़ाज़ दबे रहते हैं कभी अपनों के बीच तो कभी सपनों के बीच  शून्य से खड़े ताकते हम सागर की लहरों के बीच....                                         नेहा शर्मा..

कभी चटक जाते हैं रिश्ते शीशे की तरह

Image
कभी चटक जाते हैं रिश्ते शीशे की तरह बिखर जाते हैं फिर होकर चूर चूर  कभी बहक जाते हैं शब्द काँटों की तरह चुभते हैं फिर दिल को जैसे हो शूल चटके रिश्ते फिर कभी न एक हो पाते हैं बहके शब्द दिल में घाव बना जाते हैं रिश्तों और शब्द दोनों को संभाल कर रखना चाहिए....                        नेहा शर्मा

प्रतिक्षा

Image
जाने किस प्रतीक्षा में है खामोश आँखें वक़्त रोके कब रुका है कोई कितना भी चाहे किस गम में गुमसुम है खामोश आँखें उठो,देखो द्वार पर ख़ुशियाँ खड़ी हैं फैलाये बाँहें बढ़ाकर कदम रोक लो उसे जाने न  पाये...                   नेहा शर्मा

सतरंगी सपने

Image
रंग बिरंगी दुनिया के सतरंगी सपने, कुछ हैं पराए, और कुछ हैं अपने, कुछ पूरे  हुए, पर कुछ हैं अधूरे, जाने कब वो पूरे होंगे सपने अपने, हर चाहतें पूरी कब होतीं हैं, एक पूरी हुई ,दूसरी खड़ी होती है, ख्वाहिशें मन को सदा जिंदा रखती हैं, गर ख्वाहिशें न हो मन मे तो उदासी ही रहती है, जिंदगी तेरे इन रंगों से हमने भी यारी कर ली, इंद्रधनुष के सातों रंग ,अपने जीवन में भर ली, मन अब कल्पना की उड़ान भरने लगा है, सारे सपने  होंगे पूरे ,अब लगने लगा है....                                      -नेहा शर्मा

श्याम वंदना

Image
मुझको अपनी शरण में ले लो ऐ मेरे श्याम बिहारी तुमको क्या बतलाऊँ कि दिल ये कितना उदास है जब जब तेरी शरण में आया इस दिल ने है सुकून पाया  तेरे चरणरज को शीश लगाकर  मैं तो भवसागर तर आया  मेरे मस्तक पर रखना हाथ सदा  तुम सांवल गिरधारी  तुमको क्या बतलाऊँ कि  दिल ये कितना उदास है......  तुमने पार करी मेरी नैया  भवसागर के तुम हो खिवैया  मेरी बिगड़ी तुम ही बनाते  गोपियन के कृष्ण कन्हैया  मन मंदिर में मूरत तेरी  बसाऊँ मैं बनवारी  तुमको क्या बतलाऊँ की  दिल ये कितना उदास है....  तन मन धन है तुमको अर्पित  मेरा  ये जीवन तुमको समर्पित  तुम ही हो मेरे पालनहारे  रास्ता न सूझे कोई तुम बिन  मुझको सच्ची राह दिखा दे  साँवरिया गिरधारी  तुमको क्या बतलाऊँ कि  दिल ये कितना उदास है....                  नेहा शर्मा