अनजान राही बना हमराही
"ओह!! माई गाॅड "कितना सुंदर दृश्य है, नीला स्वच्छ आकाश ,सोंधी सोंधी मिट्टी की खुशबू, हल्की हल्की बारिश, सफेद कोहरा ,रात को ये सब अनुभव नही हो रहा था। आते आते रास्ते मे अंधेरा छा गया था ,बस ठंडक महसूस हो रही थी। ओह कितना सकुन है यहाँ ,नहीं तो शहरों मे उठते ही टैफिक की आवाज से सुबह-सुबह ही सिर में दर्द हो जाता है। कितना डर गया था मैं यहां आने से पहले कि सुनसान पहाड़ी वादियों में क्या करेगा। यहां के टेढ़े-मेढ़े रास्ते बहुत डराते हैं। जब खाइयो की तरफ देखो एक खौफनाक मंजर नजर आता है ऐसा लगता है यदि कोई इन में गिर गया तो उसका अता पता भी नहीं मिलेगा। लेकिन आज न जाने क्यों यह सब बहुत सुंदर और अच्छा लग रहा है । तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आई। साहब जी आपको कुछ चाहिए। मैं यहां पर आप की देखभाल करने के लिए हूं। मेरा नाम गोपाल है, आप जब चाहे मुझे आवाज लगा सकते हैं, इस समय आपको कुछ चाहिए तो बताइए। अच्छा गोपाल काका मेरे लिए एक कप गर्म गर्म चाय ला दीजिए। गोपाल राहुल के कमरे में चाय के साथ सुंदर फ्रेश फूल लेकर आया और गुलदस्ते में लगा दिए। सारा कमरा महक ऊठा।वाकई यह जगह जन्नत है ।कहते हुए...