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टमाटरों की हड़ताल

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 बात बात में कुछ टमाटरों में,  कल छिड़ गई एक अनचाही बहस  मैं बड़ा,मैं बड़ा कहकर,  गए सब एक दूजे पर बरस  एक-एक कर चारों ओर से, आने  लगी आवाज़ें  कुछ यूँ अब सब मिलकर, असमानता का बजाने लगे बाजे  कहते हैं छोटे बड़े का भेद,  ना हमको अब भाए  कट कर ही ड़लना है सबको,  फिर काहे इतराए  छोटे-बड़े का महत्व, सबका इस दुनिया अपना-अपना है   फिर काहे का ताना मारना  काहे लड़ना सताना है ऐसा ही करना है तो, छोड़ दो हमको  अब हम भी हड़ताल पर जाएँगे   नहीं बिकेंगे तुम सब के संग  तुम सबको नाकों चने चबवाएँगे  जब तुम्हारा बड़ा आकार देखकर  कुछ ग्राहक भाग जाएँगे  तुम तभी समझोगे भैया  जब लोग तुमको,कम-कम  तुलवाएँगे  कोई ना हमेशा एक जैसे,  टमाटर घर ले जाता है  छोटे बड़े सब आकार के टमाटर यहाँ शहरों में सबको भाता है  सबके आकार का है अपना महत्व,  मान लो बात छोटी-सी भैया   वरना हम तो चले हैं हड़ताल पर यहाँ   तुम मंडी में करना मिलकर अपने जैसो के संग ताता थई...

भाग्य का खेल

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वार्डबॉय , देअर इज़ एन इमरजेंसी, हरी अप,कम फास्ट - डॉक्टर साहब ने आवाज़ लगाई l चंद सेकंड में एक नर्स और दो वार्ड बॉय डॉक्टर साहब के  बगल से होते हुए शरद को ऑपरेशन थिएटर के अंदर ले गए l डॉक्टर साहब ने रिसेप्शनिस्ट को शरद के घरवालों को इन्फॉर्म कर हॉस्पिटल बुलाने के लिए कहा और ऑपरेशन थिएटर के अंदर चले गए l  पलक झपकते ही सब घर वाले अस्पताल पहुँच गए l एक्सीडेंट इतना बड़ा था कि बाहर से सीनियर डॉक्टर को बुलाना पड़ा l डॉक्टर को देखते ही शरद की माँ ने कहा - डॉक्टर साहब, मेरा बेटा शरद बच तो जाएगा ना l डॉक्टर साहब ने शरद की माँ के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा - अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, माँ जी l भगवान पर भरोसा रखिए, बस l थोड़ी देर में, जब ऑपरेशन थिएटर की बत्ती बुझी और डॉक्टर बाहर आए, तो उन्होंने  बताया कि एक्सीडेंट कि वजह से शरद की कमर का निचला हिस्सा पैरालाइज हो गया है l वह बिना किसी सहारे के अब शायद ही चल पाए l  अपने इकलौते बेटे की स्थिति के बारे में सुनकर परिवार के सभी सदस्यों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई परंतु होनी को कौन टाल सकता है l पिता ने डॉक्टर साहब से शरद की देखभाल के लिए 24 घ...

अंतिम विदाई

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स्वर कोकिला, स्वर साध्वी, सहराब्दी की आवाज़ स्वर साम्राज्ञी संग हुआ सदा,हिंद में सुरों का आगाज़ स्वर सारथी बन किया, आजीवन हर दिल पर राज मधुर कंठ से पाया  जिन्होंने,भारत कोकिला का ताज सुरों की मलिका के गीतों से, मंत्र मुक्त होता सारा संसार घर-घर पहुँचते उनके गीत,खुले सबके मन के द्वार बांधा जुदा दिलों को, जोड़ा सबको जैसे परिवार भारत रत्न बन पाया जिन्होंने,सकल जन का प्रेम अपार  सुर साधिका समस्त धरा पर, मिले ना उनके जैसी कोई  देख पार्थिव शरीर जिनका, आज सारी दुनिया है रोई  उनकी कमी पूरी कर सके,ना जग में कभी कोई आज अंतिम विदाई ले,जो अनंत में कहीं खोई सुनीता कुमारी अहरी  स्वरचित एवं मौलिक