भुतहा मकान भाग 3 : साक्षात दर्शन
एक विशेष प्रकार की आवाज सुनकर राजन की नींद खुल गई । आवाज ऐसी आ रही थी जैसे कोई सांप रेंग रहा है । उसने धीरे से अपनी आंखें खोली मगर उसे कुछ दिखाई नहीं दिया । उसे लगा कि उसने डर के मारे आंखें खोली ही नहीं थीं । उसने अपनी दोनों हथेलियों से अपनी थोनों आंखें मसली फिर खोलीं । अभी भी कुछ दिखाई नहीं दिया । राजन सोच में पड़ गया कि आखिर माजरा क्या है ? राजन के दिमाग में अचानक कौंधा कि वह शायद बिजली बंद करके सोया था । पर उसे याद आया कि वह तो बिजली जली छोड़कर बिसार लेटा था और हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था कि अचानक उसकी आंख लग गई । लेकिन पूरे मकान में ये अंधेरा क्यों है ? शायद लाइट चली गई होगी , राजन के मस्तिष्क में एक क्षण को यह बात आई लेकिन अगले ही पल उसने गर्दन घुमाकर बाहर की ओर देखा तो पता चला कि रोड लाइट जल रही थी । "ये क्या माजरा है" ? राजन को कुछ समझ नहीं आ रहा था । जब दिमाग में भय समाया हुआ हो तो फिर वहां बुद्धि और ज्ञान नहीं रहते हैं । दोनों में छत्तीस का आंकड़ा है । राजन ने सोचा कि वह उठकर लाइट जला दे । क्या पता बंद करके सोया हो ? लेकिन उठना कोई कम जोखिम का काम था क्य...