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इश्क

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दिल के बजाय जिस्म से इश्क करने लगे हैं लोग  जिस्म के गहरे समंदर में इश्क ढूंढने लगे हैं लोग  किसी जमाने में इश्क इबादत हुआ करता था "हरि" अब इश्क को कमीना, कमबख्त कहने लगे हैं लोग  इश्क का जुनून कुछ इस तरह से चढने लगा है  दिल तेरी मुहब्बत में हद से आगे बढने लगा है  दीवानगी का आलम कुछ ऐसा छाया है मुझ पर कि दिल तेरे इश्क का अब कलमा पढने लगा है  इश्क आवारा सा घूमता है भटकते चांद की तरह  दिल दीवाना सा धड़कता है "यमन" राग की तरह  नजरें तेरी चौखट पे जाकर लौट आती हैं खाली सी  फैल रही है चाहत फिजां में फूल ए गुलाब की तरह  हरिशंकर गोयल "हरि" 

जबसे उनकी सूरत

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जबसे उनकी सूरत ख्वाबों में सजने लगी है हर  रात  आंखों  ही आंखों में  कटने लगी है  दिल अपनी एक अलग दुनिया बसाने लगा है हर  सांस अब तो  उनके ही गीत गाने लगी है  हरिशंकर गोयल "हरि"

जादू की झप्पी

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कभी मम्मी से आती है कभी पापा से आती है कभी दोस्तों से  कभी जीवनसाथी से आती है ये जादू की झप्पी भी बड़ी कमाल की होती है  जब कभी आती है, ताजगी से महका जाती है  हरिशंकर गोयल "हरि"

खुशियों का ठिकाना

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इस रंज ओ गम की  दुनिया में खुशियों का ठिकाना कहाँ है  दर्द का विशाल महासागर है खिलखिलाने का बहाना कहाँ है  एक तू ही है प्रभु जहाँ मिलता है सुकून हर आम ओ रसूख को  तेरे दरबार के सिवा "सांवरिया" ये बेशकीमती खजाना कहाँ है  हरिशंकर गोयल "हरि"

तेरी मुस्कान

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तेरी  ये शोख है मुस्कान चलाती दिल पर  तेज़ छूरी। तुझे बस देखते ही रहना दिल की मेरे मजबूरी। तुम्हें देखा तुम्हें  चाहा सराहते तुम्हें ही हैं। लबों पर थिरके  तेरे खुशी आरज़ू बस यही मेरी। तेरे रूप का जादू प्रिये सिर मेरे चढ़कर बोले। अजब सा नशा भी छा जाए भौहें तिरछी जब डोले। काया है कंचन सी  तेरी  लुभाती इस तरह मन को। अपनी  बाँकी सी चितवन से मादक मदिरा जब घोले। कोयल  छिप जाए शरमाकर बोली तेरी जब सुन ले। अपने  रक्तिम अधरों से तू  शब्दों  की मिश्री  घोले। मन में बजती रहतीं घंटियाँ जब तुम खुल के हँसतीं हो। लगता ज्यूँ  तारों के आँगन चाँद खिलखिला के निकले। ,🥀🥀🥀🥀🥀🥀🎈🎈🎈🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀