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ऐसे बदलाव नहीं आएंगे

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सिर्फ इसलिए कि हमें बुरा लगता है देखना... देश को दंगे-फसादों में जलते हुए, मानवता को विभिन्न धर्मों की बलि-वेदी पर रोज चढ़ते हुए, निर्दोष बच्चियों एवं महिलाओं को क्रूर भेड़ियों का शिकार बनते हुए, सिर्फ इसलिए कि हमें बुरा लगता है सोचना... एक दिन कहीं खाने-पहनने की हमारी व्यक्तिगत आजादी राजनीति की भेंट न चढ़ जाए, एक दिन कहीं निष्पक्ष राय रखने की हमारी व्यक्तिगत आजादी जेलों में न सड़ जाए, वे रुक नहीं जाएंगे! वे रुकेंगे केवल तब ही जब उनको रोकने के लिए धरातल पर सामूहिक प्रयास किए जाएंगे, उतरना पड़ेगा पूरे मन से उनके खिलाफ रणक्षेत्र में, सिर्फ देखने एवं सोचने भर से बदलाव नहीं आएंगे।                                     जितेन्द्र 'कबीर'                                      यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है। साहित्यिक नाम - जितेन्द्र 'कबीर' संप्रति - अध्यापक पता - जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी ड...

धारा के विपरीत

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शक्तिशाली का गुणगान करना फायदे का सौदा रहा है हमेशा से, यह जानते हुए भी कमजोर के पक्ष में जो इंसान आवाज उठाएगा वही इंसान एक दिन न्याय की सही परिभाषा गढ़ पाएगा। धनवान का गुणगान करना फायदे का सौदा रहा है हमेशा से, यह जानते हुए भी गरीब के पक्ष में जो इंसान आवाज उठाएगा वही इंसान एक दिन समानता की सही परिभाषा गढ़ पाएगा। सरकार का गुणगान करना फायदे का सौदा रहा है हमेशा से, यह जानते हुए भी जनता के पक्ष में जो इंसान आवाज उठाएगा वही इंसान एक दिन लोकतंत्र की सही परिभाषा गढ़ पाएगा। धारा के साथ बहना ज्यादातर लोगों ने चुना है हमेशा से, यह जानते हुए भी धारा के विपरीत तैरने का हौसला जो इंसान रख पाएगा वही इंसान एक दिन संघर्ष की सही परिभाषा गढ़ पाएगा।                                  जितेन्द्र 'कबीर'                                   यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है । साहित्यिक नाम - जितेन्द्र 'कबीर' संप्रति - अध्याप...

लूट मची है लूट

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शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जो छोटे-बड़े 'कुकुरमुत्ते' उग आए हैं अवसर पाकर, लगाते हैं अक्सर नारे वो जनसेवा के बदलाव और सुधार के झंडे उठाकर, सच तो यह है कि उनमें से अधिकतर आए हैं इस क्षेत्र में मोटा मुनाफा देखकर, जानते हैं वे अच्छी तरह से कि कर नहीं सकता इंसान कोई भी समझौता बच्चों की शिक्षा और अपने परिवार की सेहत को लेकर, दुनिया के सामने लाख दिखा लें खुद को सेवा भावना से प्रेरित लेकिन वास्तव में अपनी संस्था का प्रचार-प्रसार कर मुनाफा कमाना ही है उनकी प्राथमिकता में  सबसे ऊपर, अपनी बाहरी चमक-दमक और छद्म आधुनिकता से लोगों की आंखें चौंधिया कर, लूट रहे हैं वो दोनों हाथों से लोगों को उनकी दुखती रग को दबाकर।                           जितेन्द्र 'कबीर'                            यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है। साहित्यिक नाम - जितेन्द्र 'कबीर' जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

जो कम लोग देख पाते हैं

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आग लगाई गई... ज्यादातर लोगों ने उसमे जलती देखी गाड़ियां, भवन और दुकानें, कम ही लोग देख पाए  उन गाड़ियों में राख होती हुई किसी परिवार की  रोजी-रोटी, जलता हुआ किसी बच्चे का भविष्य, किसी नौकरी पेशा वाले के आने-जाने का साधन और जीवन भर की बचत से साकार किया गया किसी का सपना, कम ही लोग देख पाए उन भवनों में राख होती हुई न जाने कितने लोगों की जमा पूंजी, नष्ट होता किसी परिवार के सिर के ऊपर छत होने का इत्मीनान  और सबसे जरूरी इंसान का इंसान पर से उठता, धुंआ-धुंआ होता विश्वास, ज्यादातर लोगों ने देखा आग लगाकर  तबाही मचाने वालों को, कम ही लोग देख पाए परदे के पीछे से उस आग के लिए नफरती तरकीबों  एवं जलावन का प्रबंध करने वालों को, जलती हुई आग में  घी डालकर उसे और भी ज्यादा  भड़काने वालों को और ऐसी गतिविधियों में संलिप्त अपराधियों को कानून के चंगुल से बचाकर किसी धर्म अथवा जाति विशेष का हीरो बनाने वालों को।                                  जितेन्द्र 'कबीर'       ...

शक्ति का झूठा दंभ

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उसने हमला किया... इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि वह बहुत बड़ा शूरवीर या बहादुर है, बहादुरी एवं शूरवीरता हथियारों के बल पर  नहीं दिखाई जा सकती कभी, उसने हमला किया... क्योंकि वह मन ही मन डर रहा है तुमसे, वह अपने अस्तित्व पर खतरा महसूस करता है जब तुम अपनी बुलंद आवाज में उसके गलत कार्यों का प्रतिकार करते हो, वह जानता है कि वह तुमसे प्रेम, धैर्य, तर्क एवं न्याय में जीत नहीं सकता और इसी डर के चलते वह हथियारों से तुम पर हमला करता है, लेकिन वह नहीं जानता कि एक निहत्थे इंसान से यूं हथियार लेकर लड़ने जाना ही दुनिया की सबसे बड़ी कायरता है, वह डरता है कि उसकी कमजोरी दुनिया के सामने आ गई तो उसकी झूठी शान का शीशमहल चकनाचूर हो जाएगा और इसी डर के कारण वह तुम पर हमला करने के सौ बहाने एवं दलीलें गढ़ता है, मगर वह नहीं जानता कि खुद को सही साबित करने के लिए उसका यूं छटपटाना ही उसकी सबसे बड़ी हार है, मृत्यु के अंतिम क्षणों में जब उसकी स्मृतियां वापस दौड़ेंगी उसके छुपे हुए डर की पटरियों पर तब वह हमलावर जान जाएगा कि शक्तिशाली एवं निडर होने का  उसका दंभ दुनिया का सबसे बड़ा झूठ था।     ...

कौन है अच्छा इंसान?

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एक अच्छा इंसान नहीं टालता किसी का कहना, मान लेता है सबकी बात बिना कोई बहस अथवा विरोध किए, कर देता है खुशी से वे सारे काम जो उसे बताए जाते हैं घरवालों, पड़ोसियों, दोस्तों और रिश्तेदारों के द्वारा, रुपए-पैसे अथवा अन्य किसी  सहायता के लिए भी करता नहीं वह किसी को इंकार, एक अच्छा इंसान बुरा लगने लगता है जब वह बोलने लगता सच को सच और झूठ को झूठ किए बिना किसी की लिहाज, सबका हुक्म  बजाते जाने की अपेक्षा जब वह रखने लगता है  सिर्फ अपने काम से काम, नहीं बढ़ा पाता जब वह  अपनी आर्थिक तंगी अथवा अन्य किसी समस्या के चलते किसी की ओर मदद का हाथ। इंसान के लिए बहुत मुश्किल है कि वह बना रहे अपनी पूरी उम्र सबके लिए एक अच्छा इंसान, गलतफहमियों अथवा  परिस्थितियों के चलते कोई न कोई मान ही बैठता है उसे बुरा इंसान।                              जितेन्द्र 'कबीर' यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है। साहित्यिक नाम - जितेन्द्र 'कबीर' संप्रति - अध्यापक पता - जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व...

कैसे एतबार करें किसी का

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हर इंसान खुद को सच्चा बताता है यहां, एतबार कर लें  कैसे हम किसी का  नुमाइशों के इस दौर में कि झूठा आदमी भी  सच की सी मासूमियत ओढ़कर आता है यहां। हर इंसान खुद को बेगुनाह बताता है यहां, एतबार कर लें कैसे हम किसी का नफरतों के इस दौर में कि हत्यारा भी शांति और भाईचारे का मसीहा कहलाता है यहां। हर इंसान खुद को पीड़ित बताता है यहां, एतबार कर लें कैसे हम किसी का विज्ञापनों के इस दौर में कि तेंदुआ भी अपने शिकार पर झपटने से  पहले तक खुद को  बिल्ली जैसा दिखाता है यहां।                     जितेन्द्र 'कबीर'                      यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है। साहित्यिक नाम - जितेन्द्र 'कबीर' संप्रति - अध्यापक पता - जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

चुनाव के पहले और बाद में

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जनता के सामने विनम्र याचक मुद्रा में नेता लोकतंत्र के पर्व की  सबसे सार्थक तस्वीर है, चुनाव के बाद भी अगर  जनता और नेता की स्थितियों में अदला-बदली न हो तो लोकतंत्र किसी देश के लिए सबसे अच्छी व्यवस्था हो जाती है, यह अलग बात है कि हमारे देश में चुनाव के तुरंत बाद नेता शासक के रुआब में एवं जनता याचक की मुद्रा में आ जाती है और यही बात हमारे देश में लोकतंत्र की खराब अवस्था को दर्शाती है। चुनाव के समय  नेता का लोगों के घर-घर जाकर उनका हालचाल एवं समस्याएं  सुनने-सुलझाने की कवायद जनता में लोकतंत्र के प्रति उम्मीद जगाती है, यह अलग बात है कि हमारे देश में चुनाव के तुरंत बाद से जनता नेताओं की प्राथमिकता से  पूरी तरह गायब हो जाती है और यही बात हमारे देश में लोकतंत्र की खराब अवस्था को दर्शाती है।                                   जितेन्द्र 'कबीर'                                    यह कविता सर्वथ...

विज्ञापन-मय भारत

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सरकारी अस्पतालों में पर्ची बनाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने एवं छत्तीस प्रकार के टेस्ट करवाने के लिए  लगने वाली लम्बी -लम्बी कतारों को देखकर इंसान बीमार होने से भी डर रहा है और विज्ञापनों के अनुसार हमारा भारत स्वास्थ्य-सुविधाओं के क्षेत्र में विश्वगुरु बन रहा है। महिलाओं एवं बच्चियों से दुष्कर्म की  खबरों से रोज के रोज अखबार पूरा भर रहा है और विज्ञापनों के अनुसार हमारा भारत एक बार फिर से रामराज्य बन रहा है। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर आम आदमी की जरूरत के हर सामान का मूल्य  बढ़ते हुए लोगों का जीना दूभर कर रहा है  और विज्ञापनों के अनुसार हमारा भारत संसार का सबसे लोक-हितकारी राज्य बन रहा है। विज्ञान विषय को चुनने वाले छात्रों की संख्या में आ रही है निरन्तर कमी, तर्क एवं शोध को पीछे छोड़ युवा राग धार्मिक कट्टरता का जप रहा है और विज्ञापनों के अनुसार हमारा भारत विज्ञान व टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। अब तक लिखे गये समूचे इतिहास को  खारिज करके  फिल्मों, वाट्सएप, फेसबुक, यूट्यूब के जरिए इतिहास की पीएचडी करने वालों का आंकड़ा बढ़ रहा है और विज्ञापनों...