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खतरे में लोकतंत्र का चौथ स्तम्भ

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लोकतंत्र की ख़ास खासियत   जन जन तक  जन जन का संवाद  अभिव्यक्ति की आजादी सूचना का अधिकार।। न्याय पालिका, कार्यपालिका, विधायिका लोकतंत्र महिमा महत्व सार।।                       चौथा संवाद संचार का माध्यम मिडिया का संसार।। गांधी जी के तीन बन्दर आज प्रसंगिग उल्टा दिखता मिडिया सच नहीं देखता सच नहीं दिखाता सच का कर देता है त्याग।।                              सच बोलने की हिम्मत गर दिखलाता बतलाता कोईं सच सिद्धान्त पर हो जाता बलिदान।। मिडिया के रूप अनेको प्रिंट मिडिया इलेक्ट्रानिक मिडिया सोशल मिडिया ना जाने कितने अवतार।। पीत पत्रकारिता टी आर पी वायरल का कारोबार।। सच को झूठ ,झूठ को सच का खेल बनगया तमाशा लोकतंत्र का चौथा अलम्बरदार।। जन जन में अब अवधारणा कौन सुनाएगा सच आज  कोई बिक जाता है कोई बिकने का करता इंतज़ार।। ये कुछ सचाई है मगर आज भी संजीदा संवेदनशील है लोक तंत्र का चौथा स्तम्भ की धार।। कितनो ने जान गवाई सच्चाई का छोड़ा नहीं कभी...

हिंदी पत्रकारिता दिवस विशेष

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बेटा हिन्द का हूँ मैं, मेरी पहचान है हिंदी माँ सरस्वती कि वीणा की झंकार है हिन्दी, बेटा हिन्द का हूँ मैं मेरी पहचान है हिंदी।। लहू में बहती सांसों की सोहं धड़कन प्राण है हिंदी बेटा हिन्द का हूँ मैं मेरी पहचान है हिंदी।। अविनि के कण कण से प्रवाहित निशा सांध्य दिवस शुभ प्रभात है हिंदी।। ह्रदय मेरा एक मंदिर है माँ भारती देवी  स्वर साधना आराधना मेरी है हिंदी बेटा हिन्द का हूँ मैं मेरी पहचान है हिंदी।।      पूरब से पश्चिम ,उत्तर से दक्षिण जन आकांक्षा आत्म पुकार है हिंदी।। हिमालय से ऊंचा सागर से गहरी हिन्द की भाग्य है हिंदी बेटा हिन्द का हूँ मै मेरी पहचान है हिंदी।।   प्रेम की भाषा मानवता रसधार है हिंदी अविरल निर्मल निर्झर कल कल कलरव गान है हिंदी। मैं बेटा हिन्द का हूँ मेरी पहचान है हिंदी।। संस्कृति सम्यक संस्कार है हिंदी हिन्द एक नेक की बंधन सूत्र  राष्ट्र का सार है हिंदी। बेटा हिन्द का हूँ मैं मेरी पहचान है हिंदी।। नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

भगवन परशुराम

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शुक्ल पक्ष तृतीया बैशाख मास अविनि पर गंगा अवतरण कृष्ण सुदामा मिलन शुभ अवसर पदोष काल।। आखा तीज मंगल शुभ मुहूरत धन बैभव शुख सबृद्धि प्रसन्न मगन युग प्राणि प्राण ।। भृगुकुल भूषण ऋचीक पौत्र जमदग्नि पंचम पुत्र विष्णु के षष्टम औतार माँ रेणुका कोख मान अभिमान भार्गव  पशुराम अवतार।। सप्त चिरंजीवी में सम्मिलित गौरव शिव शक्ति शिव आशीर्वाद शिव परम कृपा ज्ञानी योद्धा धैर्य धीर गम्भीर रण बीर दिग्दर्शक परशुराम।। अत्याचारी अन्यायी राजा शासन शासक से अविनि को किया भय मुक्त मुक्त भार इक्कीस बार।। नही क्षत्रिय कुल द्रोही जन आकांक्षाओं के प्रतिनिधि प्रतिबिम्ब युग अविनि भाग्य भगवान परशुराम।। मृतसंजीवनी विद्या के ज्ञाता देवब्रत भीष्म गुरु शिष्य गुरु महिमा मर्यादा सत्त्यार्थ कर्ण को दिया गया मिथ्या से मर्माहत भगवान परशुराम।। पिता आज्ञाकारी पिता आज्ञा से वध कर डाला माता और भ्राता चार पिता आज्ञा से पुनर्जीवित कर माता भ्राताओं को अमर अवतार भगवान परशुराम।। सहस्त्रबाहु की धृष्टता का दंड दिया अनेको अनुष्ठान यज्ञ किया युग प्राणि कल्याणार्थ नारी गौरव रक्षा हेतु शिष्य भीष्म से पराजय भी स्वीकार।। आत्म सत्य ...

मजदूर है हम

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मजबूर नहीं मजलूम नहीं मजदूर है हम, मेहनत मेरा  ईमान खून पसीना बहाते हम।। मेरा अपना  घर जीवन  का सपना सारे जहाँ का घर  बनाते है हम, कल कारखानों में  हम मानव मशीन बन जाते है हम।। बड़े बड़े महल अटारी बनाते  हम ,वैसे तो दुनियां का हर  मानव श्रम करता मगर श्रमिक   कहलाते हम।। दिन और रात चिलचिलाती धुप हो या कड़क सर्द की ठंडी बारिस हो या तूफ़ान श्रम की भठ्ठी में खुद को गलते है हम।। कोई इच्छा अभिलाषा नहीं विकास निर्माण की कोल्हू में पिसते जाते हम।। दो वक्त की रोटी मेरे लिये जीवन की सौगात आजाद मुल्क में गुलाम सा जीवन जीते जाते हम।। गीता में कर्म योग कृष्णा का ज्ञान सिरोधार्य कर कर्मएव जयते ,धर्मएव जयते, श्रमएव जयते ,सत्यमेव जयते को जीते जाते हम।। खून हमारा पानी जीना मारना बेईमानी वक्त समय घुट घुट कर  जीते मरते जाते हम।। अभिमान हमे भी हम है मानव किला दुर्ग हो या रेल ,प्लेन हम मजदूर बनाते। अब बिडम्बना मेरी किस्मत का अपने ही वतन में प्रवासी कहलाते हम।। पल पल चलते राष्ट्र धुरी के इर्द गिर्द चलते जाते हम,जो भी हम निर्माण करे मेरा अधिकार नहीं रेल की भीड़ में...

ममता का मोल जीवन

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बेमोल जीवन का मोल क्या बेमोल हवाओ से चलती सांसे बेमोल जल से जीवन  बेमोल नेह स्नेह के रिश्तो का रिस्ता समाज भाई बहना का प्यार बचपन जवानी जीवम का सद्भाव श्रृंगार।। ममता भाव भावना लुटती मिटती माँ ममता का आँचल साया दुलार छांव।। ममता मातृ शक्ति अंतर्मन का प्रस्फुटित प्रबाह जीवन संस्कृति संस्कार कि बुनियाद।। ममता का मोल नहीं ईश्वर खुदा भगवन नही चुका सकता ममता का मोल मिटती नही घटतीं नही सिमटती नही ममता का प्रवाह मन जीवन को सिंचित करता दिशा दृष्टि का उद्देश्य पथ आवनी आकाश।। ममता मनमोल मिलती बेमोल ममता की समता का ना ओर ना कोई छोर ममता की घटाए वर्षा और बारिश ममता बेमोल मनमोल मन भावो जीवन रिस्ता समाज की दिशा दृष्टि अजोर।।  ममता का मोल नहीं ममता का तोल नहीं ममता का ऋण नहीं ममता मन भावो जीवन उत्कर्ष ।। मां ममता का शाश्वत संसार सत्य ममता व्यक्त अव्यक्त मन मन्दिर की आभा आस्था विश्वास।। ममता का मोल जीवन ममता  अमूल्य अनमोल।।

भाग्य

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भाग्य भगवान कर्म काल जन्म जीवन अवसर उपलब्धि उद्देश्य मर्म महत्व मान।। निराकार साकार निर्विकार मन आत्मा बुद्धि विचार व्यवहार सांचार ज्योति ज्वाला मुमकिन मुस्कान मार्ग।। सानिध्य सत्कार जीवन व्यवहार सत्य सार्थक चरित्र चमत्कार नश्वर स्वर अविचल अविराम।। बचपन युवा किशोर जवानी जरा असहाय बीमार लाचार साँसों धड़कन में मृत प्रायः विलक्षण विराटता बैभव  उत्साह शक्ति का प्रबाह।। त्वरित ध्वनि पवन वेग सूरज सौर्य दिवस निशा प्रकृति प्रबृत्ति ब्रह्म ब्रह्मांड सोच सार्थकता बोध अमरत्व अमर साक्ष्य।।  वर्षा सरिता धारा सागर साहित्य ज्ञान विज्ञान संस्कृति सांस्कार जन्म जीवन पथ उज्ज्वल उजियार।। नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश

पांचोत्सव

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धन धान्य यश शुभागमन वंन्दन अभिनंन्दन पुज्ज संपत आशीर्वाद विश्वास उत्सव चलभाष।। पंच दिवस उत्सव जीवन की खुशियाँ स्वस्थ जीवन सुख बैभव अनुराग भ्रमर भाष्य चलभाष।। स्वस्थ निरोगी काया धन दौलत का मर्म  पर्व मूलउद्देश्य बैसवारी व्यवहार चलभाष।। विद्वत जन का साहित्य संदेश सार भगवान सुख संपदा बैभव आचरण सत्कार चलभाष।। अद्भुत संयोग सागर मंथन धन बैभव मनोकामना पूजन धन्वंतरि आगमन।। जीवन लक्ष्मी पूजन गोवर्धन गौरव मान भाई बहन एक दूजे के लिये भैया दूज व्यवहार।। कलम दावात चित्र गुप्त भी पांचोत्सव सत्कार सत्य सकल याथार्त।।  नांदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

दामोदरम

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माधवं केश्ववम कृष्ण दामोदरम भगवतम भाव धन्य राधे राधितम!!  माधवम केशवम कृष्ण दामोदरम भगवतम भाव धन्य राधे राधितम!! भाग्य भी है भगवान् भी है  मिटाता भी है तो बनाता भी है!!  माधवम केशवम कृष्ण दामोदरम भगवतम भाव धन्य राधे राधितम!! इच्छा भी है तू परीक्षा भी है भाव भक्ति में नाचता भी है तू, इशारों पे युग को नचाता है भी है तूं ही विधि विधान विधाता भी है!!  माधवम केशवम कृष्ण दामोदरम भगवतम भाव धन्य राधे राधितम!! नंद नन्दन यशोदा का लाडला कर्म ग्यान कि ज्योति जलाता भी है बसु्‍धैव कुटुम्बकम का कृष्ण है मर्म सृष्टि कि दृष्टि का विश्वास है!!   माधवम केशवम कृष्ण दामोदरम भगवतम भाव धन्य राधे राधितम! नर का नारायण पुरुष का पुरूषार्थ है जिसका कोई नही उसका संसार हैं सत्य का सारथी मित्र कि मित्रता का मर्म मर्यादा सम्मान है!!  माधवम केशवम कृष्ण दामोदरम भगवतम भाव धन्य राधे राधितम!!   रास रसिया रसिक महारास है गोपियों का गोपेश्वर नारी कि लाज़ है, है प्रेम जगत में सार और कछु सार नहीं का सार है!!  माधवम केशवम कृष्ण दामोदरम भगवतम भाव धन्य राधे राधितम धितम!!  जगत का...

गरीबी की सर्दी---

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बढ़ती सर्दी बदलता मौसम प्रकृति  नव यौवना सिकुड़ता मानवतन दिवस छोटा लंबी रात।। भाव भावना जीवन तंगी हालात  सर्व भाव की अभिव्यक्ति मूक ईश्वर का दोष मात्र दुख में ही याद साथ।। चेतना जाग्रति जागरण नाद परम् पुरुषार्थ बराबर भाग्य भगवान को कोषता चाहता न्याय।। तोषक तकिया और रजाई भाग्य नही आवनी पर बिछावन पुआल क्या करे परमात्मा उसके तो सब प्रिय सबके साथ समान भाव।। फ़टी जुट बोरियां सर्दी कवच गांव गरीबी गली मोहल्ले नगर फुटफाथ कर्म कि व्यख्या करता अमीर गरीब अंतर मात्र।। सुनी आंखे सुखी आंत सर्द से किटकिटाते दांत बयां सर्दी का हाल फिर भी नव सूर्योदय नव जीवन उत्साह का नव उल्लास।। जाने कितने ही सरकारी धर्म दान के जल जाएंगे अलाव कितने कम्बल वितरण लगता स्वांग।। फिर भी सर्दी में जन साधारण बेहाल  लेखनी बोलती सर्दी में मजबूर मानव संसार कि पड़ताल।। सर्दी की मर्जी जीवन घुट घुट कर चलता जाता अपने हाल भाग्य भगवान की नियती न्याय।। नन्दलाल मणि त्रिपाठी गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

प्रकृति परमात्मा---

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आंवला पीपल श्रीफल प्रकृति प्राण विष्णु बृक्ष श्री हरि आशीर्वाद छाँव भाष्य।। जन्म स्वास्थ जीवन पथ उद्देश्य मुक्ति बोध मार्ग के विश्राम छाँव की ठाँव ।। अविरल अविराम भाव का साँच नर नारायण की कलयुग सयुक्तता प्रकृति प्राण ज्ञान बैराग्य अनुराग।। क्षय क्षरण अक्षय जीवन संसय रहित निर्विघ्न छाँव में रहन सहन अक्षय अभ्यास।। प्रकृति प्राणि समन्वय ब्रह्म ब्रह्मांड का सत्य समागम परिवार जीवन सार।। धर्म कर्म दायित्व बोध कर्तव्य का प्रकृति प्राणि सत्य का ब्रह्म ब्रह्मांड यथार्थ ।। अनन्त पुण्य प्रभाव  बृक्ष की छांव  पल प्रहर विश्राम आंवला की छांव संकल्प निर्वाह।। नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

संन्त उदय

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संत का उदय अंत्योदय उन्नति उत्कर्ष मार्ग प्रशस्त आश विश्वास।। निःस्वार्थ निर्विकार सम भाव धरा धारा प्रवाह मानव मानता सांस्कार अतीत वर्तमान।।  जीवन झंझवत तूफां दिवस संध्या निशा प्रभात प्रेम शांति उत्साह प्रेरणा प्रेरक उत्साह।। पल पल बदलते युग में स्थिर शांत मधुर मुस्कान व्यवहार शौर्य नव कमल प्रभास ।। सीमित संकुचित होती मानवता बृहद जीवन दर्शन  युग जागरण वरदान।। शत्र शात्र सार मानव मार्याद मूल्यों रिश्ता नाता संबंध समाज।। निर्माण यज्ञ ऋषि मनीषि की आहुति सत्य संसार मातु पिता सेवा धर्म मर्म पितर तर्पण संस्कृति सांस्कार आचरण व्यवहार।। नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

जन जन का भाव लिखूंगा

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प्रभा प्रभात संध्या निशा दिन रात लिखुंगा भाष भाष्य भाव वर्तमान अतीत भविष्य कि बात लिंखुगा।। जीवन का शुभ मंगल नैतिकता मौलिकता मूल्य शब्द स्वर एक क्रांति लिखुंगा।। नित्य निरंतर काल समय जीवन संग्राम कुरुक्षेत्र पथ विजय शत्र शात्र अविराम लिंखुगा।। जीवन सार्थक सत्य संकल्प तप भगीरथ पराक्रम पुरुषार्थ शंखनाद लिखुंगा।। निश्छल निर्विकार युग उत्क्रर्ष का पल पल पग भाग्य भारत का स्वाभिमान लिखुंगा।। बचपन किशोर युवा चरित्र निर्माण विकास अनुष्ठान संकल्प साध्य साधना अभिनंन्दन अभिमान लिखुंगा।। कन्या बेटी नारी युग उत्थान भागीदार गौरव गरिमा युग पुरुष औरत औकात आवाहन शंखनाद  लिखुंगा।। सत्य सनातन संस्कृति सांस्कार भारत श्रेष्ठ नेक आराधना का जन आहुति अपरिहार्य लिखुंगा।। जन जन की खुशहाली हरियाली आहल्लादित मन स्वर शब्द  ज्ञान विज्ञान साहित्य समाज सत्कार लिखुंगा।। नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

साहित्य और समय

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समय  प्रबाह परिस्थिति परिवेश वर्त्तमान की दृष्टि दिशा मार्ग है।। साहित्य भाव झरना झील नदियां सिंधु समागम नित्य निरंतता अक्षुण अक्षय उजियार है।। शब्द ओजस्वी ओज जन जन मन का आनंद अनुराग राष्ट्र चेतना क्रांति है।। संगठित वैचारिक मंथन का अमृतपान  भाँवो की अभिव्यक्ति जन जन का आवाहन नित्य निरंतर संस्कृति सांस्कार है।। वर्तमान जन मन की अभिव्यक्ति नित्य निरंतर जीवन मे कल्पना का याथार्त संसार है।। युग सृष्टि दृष्टि सत्यार्थ महायज्ञ पल पल जीवन अनंत ईश्वर सत्य प्रदत्त का आचरण व्यवहार प्रतिविम्ब उजियार है।।  नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

राम जन्म विशेष

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राम तो जीवन मूल्यों का नाम राम धर्म धैर्य का मान।। राम विशुद्ध सात्विक संस्कार राम राम से प्रणाम।। राम राम राम अभिशाप  राम नाम ही आदि राम नाम ही अंत हर ह्रदय में राम है हर साँसों में राम हर प्राणी में राम है हर प्राणके राम।। भक्त राम का निर्मल निश्चल  मन  युग समाज के रिश्तों में मर्यादा पुरुषोत्तम जय श्री राम।। मन वचन कर्म से मिथ्या द्वेष दम्भ त्याग समझो स्वयं पर राम कृपा वर्षात जय श्री राम।। कण कण में राम मिलेंगे  प्राणी में राम  प्राण भगवान मिलेंगे राम नाम कल्याण जय श्री राम।। बानर भालू साथ मिलेंगे दुःख पीड़ा में  साथ रहेंगे साथ जिएंगे साथ मरेंगे।। राम नाम ही सत्य है राम राम  स्वागत  राम नाम ही जीवन राम नाम ही  खेवनहार।। राम यश है राम राम राम ही अधम उद्धार राम नाम ही सत्य है राम नाम जन्म जीवन सार सत्कार जय श्री राम।। नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

जय माँ जगदम्बा

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माँ जिसे बुलाती जाता तेरे दरबार ,माँ की ज्योति जली है ,जग में है उजियार बोलो जय मात दी ।।                                    बोले जाओ जय माता जी कदम कदम बढ़ते जाओ  माता ने बुलाया है चलते जाओ बोलो जय माता जी।।        मील जाएगा माँ वैष्णव देवी का द्वार माँ का आशिर्बाद ममता और दुलार  बोलो जय माता जी!!                               तू घट घट बासी घट घट में तेरा रूप तू अम्बे  जगदम्बे तेरे चरणों में  संसार बोलो जय माता जी।।                            शिव ,ब्रह्मा, विष्णु माँ की स्तुति गावे भाग्य भगवान को पावे माँ शेर पे सवार आयी करने जग कल्याण बोलो जय माता जी।।                            जग हुआ निहाल जग करता दर्शन माँ का अद्भुत श्रृंगार घर परिवार य...

जै जै जगदम्बे जै मां काली

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जै जगदंबै  जै माँ काली, जै  जगदंबै जै माँ काली ,वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!             जै जगदंबै  जै माँ काली, जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!        पारिजात का पुष्प और पल्लव प्रणव ध्यान कि धन्य तूं न्यारी जै जगदंबै  जै माँ काली जै जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!! समनिष्ठा कि जागृति ज्योति आत्म बोध कि साहस शक्ति विघ्न विनासक मंगल कारी  जै जगदंबै  जै माँ काली जै  जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!        आदि मध्य अवसान अनंत तुम्हीं  युग जीवन कि संचारी  जै जगदंबै  जै माँ काली ,जै जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!!         सौम्य, साधना ,भाग्य ,भविष्य ,निर्भय निर्झर जीवन कल्याणी जै जगदंबै  जै माँ काली  जै जगदंबै जै माँ काली वीर भूमि भी आंचल तेरा तूं जग जननी जग रखवाली!! ...

माँ तेरे चरणों मे

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जग तेरे चरणाें आया मेरी माँ  जग तेरे शरणाें में आया मेरी माँ!! तेरे आँखो का दुलार ,तेरी संतान,  तेरे आँचल का प्यार ,तेरी संतान   जग आया लेकर अपनी मनोकामना माँ तेरे द्वार! जग तेरे चरणाें आया मेरी माँ  जग तेरे शरणाें में आया मेरी माँ!! माँ सबकी भर दे झोली, कोई खाली ना जाये,तू जग जननी, तू जग कल्याणी,जग तारणी माँ , नव दुर्गा माता रानी! जग तेरे चरणाें आया मेरी माँ, जग तेरे शरणाें में आया मेरी माँ!! तू भय भव भंजक निर्भय कारी ,दुष्ट संघारी छमा, दया, करुणा कि सागर जग तेरी करुणा, कृपा तरस कि दरश में आया मेरी माँ! जग तेरे चरणाें आया मेरी माँ जग तेरे शरणाें में आया मेरी माँ!! तू भक्ति कि शक्ति,तू मंगलकारी, शुभ संचारी, अमंगल हारी जग तेरे दर पे दर्शन को आया मेरी माँ! जग तेरे चरणाें आया मेरी माँ, जग तेरे शरणाें में आया मेरी माँ!! नांदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर उत्तर प्रदेश।।

मातु भवानी

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जै जै जै अम्बे मातु भवानी माँ दुर्गा जग कल्याणी!! जै जै जै अम्बे मातु भवानी माँ दुर्गा जग कल्याणी!!  मनोकामना कि तू माता,ममता का आँचल वात्सल्य कि महिमा मूरत सूरत  माता रानी जै जै जै अम्बे मातु भवानी माँ दुर्गा जग कल्याणी!! दुष्ट विनाशक भय भंजक माँ शेरों वाली जै जै जै अम्बे मातु भवानी माँ दुर्गा जग कल्याणी!! सूर्योदय संध्या तक तेरी सेवा भक्ति रात्रि जागरण आराधना तूं देवी देवों कि शक्ति जै जै माँ जोता वाली  जै जै जै अम्बे मातु भवानी माँ दुर्गा जग कल्याणी!! संतानों कि रक्षक, सकल मनोरथ पूरन करती, सुख शांति सम्मान किलक्ष्मी जै जै जै अम्बे मातु भवानी माँ दुर्गा जग कल्याणी!!  नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

हे माँ

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 तू अवनि अवतारी  पर्वत की बाला  दुःख हरने वाली  जग कल्याणी  जय अम्बे जय जगदम्बे !! तू सीता सावित्री   पार्वती विघ्नेश्वरी  भुनेश्वरी बाघम्बरी   चंडी  चंडिका  मनसा महिमा   मनोकामना!! तू अवनि अवतारी  पर्वत की बाला  दुःख हरने वाली  जग कल्याणी  जय अम्बे जय जगदम्बे !! तू  लक्ष्मी गौरी  शिवा वैष्णवी  रुक्मणि राधा  राधा  ब्राह्मी  भाग्य विधाता !! तू अवनि अवतारी  पर्वत की बाला  दुःख हरने वाली  जग कल्याणी  जय अम्बे जय जगदम्बे !!  तू माँ शारदा  स्वप्नेश्वरी वगलामुखी   कर्णिका काली  तू छाया माया  निद्रा क्वचिदपि  न भवति  कुमाता !! तू अवनि अवतारी  पर्वत की बाला  दुःख हरने वाली  जग कल्याणी  जय अम्बे जय जगदम्बे !! तू रिद्धि सिद्धि  हरसिद्धि सत्य  सप्त श्रृंगी माता  तू कामाख्या  जग जननी जग विख्याता !!  तू अवनि अवतारी  पर्वत की बाला  दुःख हरने वाली जग  कल्याणी जय...

आदि शक्ति अम्बे जगदम्बे

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आराधना खंड हे देवी माँ तू भय भव भंजक  जगत कल्याणी  दुष्टो की दुर्गा काली  भक्तो की रखवाली  शक्ति दे मुझे अपनी  भक्ति का भाव भाग्य दे !! माँ शारदेय  मैं आया तेरे द्वार  तुझे पुकारते  मैं तेरी संतान  सुन पुकार  मेरी कामना का वर   वरदान दे!! खोजता भटकता   सारे जहां में  आ गया हूँ  तेरे द्वार  तेरे ज्योति के  उजियार में !! जिंदगी की दुस्वारिया  बहुत मैं आ गया  जिंदगी चाहतों  की राह में   तेरी ममता    आँचल की छाव में !! माँ शारदेय  मैं आया तेरे  द्वार तुझे पुकारते  मैं तेरी संतान  सुन पुकार   मेरी कामना का  वर  वरदान दे!! माँ शारदेय मैं आया  तेरे द्वार तुझे पुकारते  मैं तेरी संतान  सुन पुकार   मेरी कामना का  वर  वरदान दे!!  माँ शारदेय  मैं आया  तेरे द्वार  तुझे पुकारते  मैं तेरी संतान  सुन पुकार   मेरी कामना का  वर  वरदान दे!! हो गया हो  गर ...