जो अपमान करे निज माटी का
देश के गद्दारों के ऊपर कुठाराघात करती मेरी यह कविता आप सभी के सामने अवलोकन हेतु प्रस्तुत है l अगर दिल को छू जाए तो आप सभी से असीम प्यार और सहयोग की कामना करता हूं l🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 जो अपमान करे निज माटी का,इंसान नहीं हो सकता हैl जो गुणगान करें स्व बैरी का,निष्ठावान नहीं हो सकता है l ०१.मेरा चित्त आज व्यथित हुआ है,देश विरोधी नारों सेl भारत माँ का शीश झुका ,आज घर में छिपे गद्दारों से l जयचंदों से अपने वतन का, सम्मान नहीं हो सकता है जो अपमान करे निज माटी का,.......................l ०२.जहांँ गुलिस्तां में गुल धर्म के, रंग बिरंगे खिलते हैंl भाषा संस्कृति अलग यहां,फिर भी साथ में चलते हैंl नफ़रत की जो करे बुवाई,बागवान नहीं हो सकता है जो अपमान करे निज माटी का.......................l ०३.भारत माँ की जान नहीं हैं,इस रज़ के वो त्रान नहीं हैंl ...