अब हंस दे मेरी रज्जो
" अब हंस दे मेरी रज्जो ...।" ये आंसू मेरे दिल के टुकड़े हैं इसे यूं न बहाया कर। शामू मेरा भरोसा मत तोड़ना कभी-..." कहते हुए रजिया श्याम के गले लग गइ।" (श्याम जिसे रजिया प्यार से शामू कहती थी। ) (श्याम रजिया को रज्जो कहता था ) 'भरोसा नहीं तोड़ता मैं, तेरा मुंह अभी तोडूंगा..फिर मेरे सामने आंसू निकाली तो .. । " श्याम हंसते हुए बोला! अरे ! पगली और लड़को जैसा समझ लिया है मुझे ? जो प्रेग्नेंसी के नाम से हीं लड़की से पीछा छुड़ाने लगते हैं। वो हमारा प्रिंस होगा या मेरी क्वीन...और मैं तुझे रजिया श्याम सिंह बनाऊंगा। ' श्याम ने पूर्ण निश्चय के साथ कहा।" अरे! इतना आसान नहीं है हमें रजिया श्याम सिंह बनाना ..हमारे बीच मजहब की दिवार है ..समाज हमें बहिष्कृत कर देगा ।" रजिया ने उदास स्वर में कहा-" अरे ! " किस समाज की बात कर रही है तू ..? वो जो शहनाई बजने पर प्यार की पूजा करते हैं.." जिनके लिए दिल का मतलब सिर्फ खिलौना ..या ,समझौता करना होता है...? बोल रज़िया - हर शादी में प्यार नहीं होता..? और हर प्यार की मंजिल शादी नहीं होती.....