प्रेम
प्रेम कोई खेल नहीं जन्नत का दीदार है, जो जोड़े रखे दो दिलों को वो अनोखा तार है, प्रेम सच्चे एहसासों से गढ़ा होता है, प्रेम में मर मिटने का पूरा हौसला होता है, प्रेम सादगी भरा श्रृंगार होता है, प्रेम में एक दूजे को समझ लेने का खूबसूरत अंदाज होता है, प्रेम हार जीत से परे है, प्रेम के दीवाने हर दर्द सह लेते है, प्रेम अजीब सा मामला है, प्रेम में कहा कुछ अच्छा बुरा है, प्रेम चाहत के धागों से बुना ख्वाब होता है, प्रेम कोई खेल नहीं जिंदगी से जिंदगी का स्पर्श होता है, प्रेम चंद ख्वाहिशों का कोई कहकशा नहीं, प्रेम का चरित्र ही पवित्र बयार सा होता है, जिस प्रेम में समर्पण के जगह आकर्षण हो, वो असल में प्रेम कहा होता है! रानी साह कोलकाता पश्चिम बंगाल