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एक आत्महत्या

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सोचकर देखना जरा एक बार.... कि किस हाल में होगी वो, जब आत्महत्या का ख्याल उसके मन में आया होगा। शायद कोई बहुत बड़ा बोझ होगा दर्द का... जो उसका मासूम दिल सहन नहीं कर पाया होगा। क्या गुजरी होगी उस परिवार पर... जिसने अपने घर की जवान बेटी को गंवाया होगा। क्या हाल हुआ होगा उस मां का... जिसने उसे अर्थी के लिए दुल्हन की तरह सजाया होगा। क्या बीती होगी उस भाई पर...  जिसने अपनी बहन की डोली की जगह, उसकी अर्थी को कांधा लगाया होगा। कैसे संभाला होगा खुद को उस बाप ने... जिसने अपनी जवान बेटी की लाश को, अपने ही हाथों से जलाया होगा। कहां से आई होगी वो हिम्मत उसमें... जब एक बाप ने अपने रिश्तेदारों को बेटी की शादी की पर नहीं,  बल्कि उसकी मौत की दावत पर बुलाया होगा। कुछ ने बहाए होंगे आंसू उसके जनाजे पर... तो कुछ ने उसके दामन पर,  चरित्रहीनता का दाग भी लगाया होगा। न जाने जिंदगी की किस जद्दोजहद से जूझ रही होगी... जब आत्महत्या की ओर उसने अपना कदम बढ़ाया होगा। सब उलझे होंगे अपनी-अपनी सोच में मगर... उसके मन की पीड़ा को कोई भी नहीं समझ पाया होगा। न जाने कब से घुट रही होगी अंदर ही अंदर... अपने दर्द क...

मुझे उसकी सादगी पसंद है

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लोगों को पसंद होती होगी चमक-धमक... मुझे तो उसकी सादगी पसंद आती है। मेकअप करना आता नहीं है उसको... मगर आंखों में वह काजल जरूर लगाती है। उसकी खूबसूरती की क्या तारीफ करूं मैं... उसकी छोटी-सी बिंदी भी दिलों पर कयामत ढाती है। हां चेहरे से थोड़ी सांवली सी है वो... फिर भी सादगी में बेहद खूबसूरत नजर आती है। गुलाब की पंखुड़ियों से उसके होंठ... हाय! क्या कहर लगती है जब वो मुस्कुराती है। बच्चों सी मासूमियत झलकती है चेहरे से उसके... उसकी खिलखिलाती हुई सी हंसी मेरा दिल चुराती है। बड़ी प्यारी लगती है वो मुझे... जब मेरे सामने सादे सूट पर रंगीन दुपट्टा डालकर आती है। आजकल लोग तो बंद कमरों में प्यार करते हैं... वो सड़क पर मेरा हाथ थामकर चलना चाहती है। हां, छोटी-छोटी बातों पर आंसू बहाती है अगर... तो छोटी-छोटी चीजों से ही बहुत खुश भी हो जाती है। मैं गुस्से वाला हूं, मेरी नाराजगी बर्दाश्त नहीं कर पाती है... इतनी पागल लड़की है वो कि मेरे डांटने पर  मेरे ही सीने से लिपटकर रोने लग जाती है। ए खुदा! उसे कभी कोई गम न देना... उसकी जरा सी तकलीफ से मेरी जान निकल जाती है।  मेरी खुशी के लिए, कुछ भी क...

आगे बढ़ाता चल कदम तू लक्ष्य अपना ठान कर

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है अगर तू चाहता होना सफल इस जिंदगी में, कर अथक प्रयास, रख विश्वास उसकी बंदगी में, सोच मत कि चार लोग देख तुझको क्या कहेंगे, भूल मत खिलता कमल है खूबसूरती से गंदगी में, रुकना न कहीं राह में, कमजोर खुद को जानकर... आगे बढ़ाता चल कदम तू लक्ष्य अपना ठान कर। राहें अनिश्चित हैं मगर निश्चित तू अपना लक्ष्य रख, कंटक भरे राहों पर स्वयं को पाषाण के समकक्ष रख, देखना मंजिल भी तेरी तुझे फिर पास आएगी नजर, कामयाबी के सम्मुख तू निज आस्था का पक्ष रख, टूटने लगे जब हौंसला, मां-बाप का तू ध्यान कर... आगे बढ़ाता चल कदम तू लक्ष्य अपना ठान कर। राह में तुझको मिलेंगे सहसा लोग कुछ अपने लगेंगे, साथ उनका पाने को मन में तेरे नये सपने सजेंगे, मतलब निकल जाने पर तुझको तन्हा वही फिर छोड़ देंगे, टूट जाएगा तू तेरे सपने सभी बिखरने लगेंगे, कलयुगी दुनिया है प्यारे, न हो भ्रमित, निज कार्य कर... आगे बढ़ाता चल कदम तू लक्ष्य अपना ठान कर। गैरों से नहीं अपनों से भी तुझको बहुत लड़ना पड़ेगा, रातों को आधी जागकर तुझको अथाह पढ़ना पड़ेगा, श्रम के बगैर होती नहीं हासिल सफलता कभी, कठिनाइयों के गिरि मिलें तो साहसी बन चढ़ना पड़ेगा, अक्ष...

हार गई हूं

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मैं मरना चाहती हूं इसलिए नहीं क्यूंकि मैं जीना नहीं चाहती बल्कि इसलिए क्यूंकि हार गई हूं मैं खुद से अपने जीवन से मैं वही हूं , जो कहती है संघर्ष ही जीवन है मैं वही हूं , जो मानती है जीवन सुख-दुख का संगम है मैं वही हूं..... जो हर रोज ढेर सारे सपने अपनी आंखों में लिए जागती है हर सुबह एक नई उम्मीद लिए जीती है मैं सोचती थी... कि एक दिन आएगा जब सब कुछ ठीक हो जाएगा वो एक दिन होगा मेरा जब सब मुझे समझेंगे लेकिन .... अब हार गई हूं बहुत से ख्याल आते हैं .... मन में टूट जाती हूं सोचकर क्या यही जीवन है? रचना राठौर

तुम्हारे लिए मेरा आखिरी खत

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💟💟💟💟💟💟💟💟💟💟💟💟💟💟💟 क्या तुम्हें आज भी याद है , मेरा वो आखिरी खत?? जो मैंने तुम्हारे लिए अपने खून से लिखा था। जो लड़की किसी की खरोंच देखकर भी डर जाती थी कभी.... उसने तुम्हारे लिए खुद ही अपना खून बहा दिया था। क्या याद है, तुम्हें मेरा वो आखिरी खत??? जिसमें मैंने अपने हाल-ए-दिल बयां किया था । याद करो, मैंने तुमसे कभी तुम्हारे प्यार के अलावा... और क्या मांग लिया था? क्या याद है, तुम्हें मेरा वो आखिरी खत??? जिसमें लिखा था मैंने सिर्फ तुमसे ही सच्चा प्यार किया है। देकर तुम्हें अपना सारा वक्त , बदले में तुमसे... मैंने उम्र भर का इंतजार लिया है। क्या आज भी याद है तुम्हें?  तुमसे बात किए बिना मुझे नींद नहीं आती थी‌। जब तक मिलती न थी तुम्हारी खबर .... कितनी बेचैन हो जाती थी। क्या याद है तुम्हें??? रात भर तुम्हारे एक मैसेज का इंतजार करती थी। दिन भर की थकान से चूर होने के बावजूद भी... तुमसे पहले कभी न सोती थी। याद है ना तुम्हें????? आधी रात को उठकर तुम्हें कॉल लगाती है। तुम सोए रहते थे हर रोज.... और मैं ही हर रोज तुम्हें नींद से जगाती थी। याद करो मेरी जान!💘 तुम्हारे जरा सा...

कौन हूं मैं ?

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मां का मान, पिता का अभिमान हूं मैं। भाई के लिए लड़ाकू विमान, अपनी बहनों की जान हूं मैं। दुखों की बंद पोटली, मुस्कुराहटों की दुकान हूं मैं। किचन की शान और  अनेकों गुणों की खान हूं मैं। अस्तित्व है मुझसे सबका हर रिश्ते की पहचान हूं मैं। हां एक लड़की हूं, मगर तुम्हारी तरह ही एक इंसान हूं मैं। मत डालो बुरी नजर मुझ पर अपने परिवार का सम्मान हूं मैं। तुम जिस नजर से देखते हो मुझे... बस एक नजर में ही कर लेती पहचान हूं मैं। क्या लगता है कुछ समझती नहीं मैं...गलत तुम्हारे इरादों से क्या अंजान हूं मैं? सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करना चाहते हो मुझसे... क्या तुम्हारे लिए कोई सामान हूं मैं? लड़की हो लड़की की तरह रहो, कोई कुछ भी कहे बस चुपचाप सहो। लड़की जात हो...ज्यादा दांत मत दिखाया करो, सुनो! शाम होने से पहले घर आ जाया करो। तुम्हें किसी की क्या जरूरत  इसलिए दोस्त मत बनाया करो, कोई नजर उठाकर देखे तुम्हें तो  तुरंत अपनी पलकें झुकाया करो। दूसरों को देखकर ऐसे-वैसे कपड़े कभी मत पहनना, और हां, बड़ों के बीच तो तुम हमेशा खामोश ही रहना। पढ़-लिखकर तुम्हें कौन-सा कलेक्टर बन जाना है, ससुराल जा...

हजारों अनाथ बच्चों की आई, सिंधु ताई

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हजारों अनाथ बच्चों की बनी थीं जो आई। महाराष्ट्र में जन्मी थीं वह महिला, नाम था उनका सिंधु ताई।। चरवाहे के घर में इन्होंने, बेटी स्वरूप था जन्म लिया... लिंगभेद के कारण घर में, 'चिंधी' भी इनको नाम दिया। वो माता जिसकी कोख से इन्होंने जन्म लिया था... उसने जीवन के किसी भी पड़ाव पर इनका साथ नहीं दिया था। पढ़ने की शौकीन थी ताई, मगर नसीब में न थी इनके पढ़ाई... पिता के सहारे ही, बमुश्किल चौथी कक्षा तक ही पढ़ पाई। बाल्यावस्था में ही तीन गुनी आयु के व्यक्ति से इनका विवाह करा दिया गया... जब समझ आई दुनियादारी तब तक तीन बच्चों की मां बना दिया गया। मजदूरों के हक में इनके द्वारा जब एक आवाज उठाई गई थी... बेईमान मुखिया ने भड़काया पति को और चरित्रहीनता का आरोप लगाकर घर से निकलवाई गई थी। नौ मास का गर्भ लेकर अकेले ही घर निकल गईं... चलने की स्थिति न थी इसलिए उस रात गाय-भैंस के तबेले में ही ठहर गईं। अर्धचेतन अवस्था में ताई ने एक बेटी को जन्म दिया... पिता का देहान्त हो गया और मां ने अपने घर रखने से साफ इंकार कर दिया। नवजात बच्ची को लेकर ताई रेल्वे स्टेशन पर रहने लगीं... आते-जाते यात्रियों से भ...

कोहरे की रात

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याद है मुझे वो घने कोहरे की रात... हाथों में हाथ लेकर तुमने कही थी जो बात। चारों तरफ घना कोहरा था छाया... उस कोहरे में मुझे आगे का कुछ नजर नहीं आया। हवाओं की सरसराहट से मेरा मन बहुत घबराया था... मैं बढ़ाती जा रही थी कदम मगर लगा जैसे मेरे पीछे कोई साया था। अमावस की रात में इतना घना कोहरा... मानो प्रकृति ने धुएं का काला लिवास था ओढ़ा। मैं आई तो थी इस रास्ते पर तुम्हारे ही साथ... मगर न जाने कब छूट गया मेरे हाथों से तुम्हारा हाथ। उस भयंकर ठंड में मैं खुद में ही सिमटती जा रही थी... घबराई-सी चारों तरफ तुम्हें ढूंढते हुए आगे बढ़ती जा रही थी। अचानक मेरा पैर फिसला और मैं बीच सड़क पर ही गिर गई... उस पल डर के मारे मेरी चीख तक निकल गई। कोहनी में चोट लगी थी मेरे बमुश्किल संभलकर बैठ पाई थी... फिर अचानक मुझे कुछ कदमों के चलने की आहट आई थी। मैंने जल्दी से उठकर दौड़ना चाहा मगर उठ तक न पाई... क्योंकि कोहनी के साथ-साथ मेरे पैरों में भी चोट थी आई। हर क्षण प्रति क्षण कदमों की आहट तेज होती जा रही थी... डर के मारे कांपने लगी थी मैं, मुंह से आवाज भी निकल नहीं पा रही थी। जब महसूस किया कि अब मैं कुछ नही...

तुम मानो या ना मानो

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सुनो! मैं आज भी तुम्हें बहुत प्यार करती हूं... अब तुम्हारी मर्जी, तुम मानो या ना मानो। यह दिल पल-पल तुम्हें याद करता है, तन्हाई के आलम से आज भी उतना ही डरता है। सुनो! मैं आज भी तुम्हारे लौटने का इंतजार करती हूं... अब तुम्हारी मर्जी, तुम मानो या ना मानो। मेरा मन मुझसे हमेशा यही सवाल कहता है, जो तेरे दिल में है वो तेरे साथ क्यों नहीं रहता है? सुनो! मैं आज भी तुम्हारे लिए इस दिल को बेकरार करती हूं... अब तुम्हारी मर्जी, तुम मानो या मानो। मैंने तुम्हारी दौलत से नहीं सिर्फ तुमसे मोहब्बत की है, तुम्हें माना है अपना खुदा बस तुम्हारी इबादत की है। सुनो! आज मैं इस बात का भी इकरार करती हूं... अब तुम्हारी मर्जी, तुम मानो या ना मानो। मुझे तो हमेशा से सिर्फ प्यार और वक्त ही चाहिए था, जो मेरी तरह ही मुझसे मोहब्बत करे, एक ऐसा शख्स चाहिए था। सुनो! आज मैं तुमसे अपनी मोहब्बत का इजहार करती हूं... अब तुम्हारी मर्जी, तुम मानो या ना मानो। मोहब्बत में अपनी मैं अपना एक उसूल रखती हूं, गर मिले दर्द मोहब्बत में, तो वो भी हंसकर कुबूल करती हूं। सुनो! मैं वो हूं जो इश्क में हर हद को पार करती हूं... अब तुम्हार...

हम चाय के दिवाने

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तुलसी अदरक इलायची, डाल जब चाय बनाए। कैसा भी सिर दर्द हो, क्षण में दूर भगाए।। जब बनकर मेहमान कोई, मेहमानी में जाए। खाना-पीना बाद में, स्वागत चाय कराए।। गर्म चाय के साथ में, परांठा भी खूब सुहाए। हो अमीर या गरीब कोई, मन सबका चाय लुभाए।। चाय की टपरी पर जब, चार दोस्त मिल आएं। हो कितनी भी उदासी, चेहरे सबके खिल जाएं।। परेशान करे जब बात कोई, अनिद्रा हमें सताए। बस एक कप चाय, रात भर मीठी नींद सुलाए।। अॉफिस में काम करके, जब बदन अकड़ जाए। मिले एक कप चाय का, दिन भर की थकान मिटाए।। सर्दी के मौसम में, चाय बड़ी मन भाए। गर्मी में नुकसानदेह, फिर भी मन ललचाए।। बिस्किट हो नमकीन हो या गरमागरम पकोड़े। हो जाएं बीमार मगर हम चाय कभी न छोड़ें। विकट हुए बीमार हम, पर चाय न छोड़ी जाए। चाय छोड़ पानी पियो, डॉक्टर भी सलाह बताए।। चाय के हम आदी हैं, पीने के ढूंढें बहाने। चाय हमारा प्रेम है, हैं हम चाय के दिवाने।। लेखिका :- रचना राठौर ✍️

डाकिया डाक लाता है

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डाकिया हर रोज आता है, डाक भी साथ लाता है।। छांव हो या धूप हो। मंजिल पास हो या दूर हो।। हो अमीर या गरीब कोई संदेश घर-घर तक पहुंचाता है... डाकिया हर रोज आता है, डाक भी साथ लाता है। कुछ अपने हमसे बहुत दूर रहते हैं। फोन पर ही सब अपना हाल कहते हैं।। मगर पहुंचाना हो कुछ भी तो डाक से ही भिजवाता है... डाकिया हर रोज आता है, डाक भी साथ लाता है। हम अक्सर कैफे पर जाकर  अपना रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। कभी आधार, कभी पैन-कार्ड,  कभी अन्य दस्तावेज भी मंगवाते हैं।। हो कोई भी कारण देरी नहीं लगाता है, हमारे सभी काम वह नियत समय पर निपटाता है.... डाकिया हर रोज आता है,  डाक भी साथ लाता है। डाक सेवा सरकारी है। वह सरकारी कर्मचारी है।। बाकी कर्मचारियों की तरह  अपनी नौकरी की किसी को  अकड़ नहीं दिखलाता है... डाकिया हर रोज आता है, डाक भी साथ लाता है। गांव हो या शहर कहीं भी जाने से डाकिया न सकुचाता है। सुबह-शाम सबको  उनकी सूचना पहुंचाता है।। अपनी ड्यूटी को वह ईमानदारी से निभाता है इसलिए डाक देने पहले हमारे दस्तखत करवाता है... डाकिया हर रोज आता है, डाक भी साथ लाता है। लेखिका:- रचना...

एक दोस्त है मेरा, जो हर हालात में मेरा साथ निभाता है।

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❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ एक दोस्त है मेरा... जो हर हालात में मेरा साथ निभाता है। मैं रोऊं अगर तो आंसू वह भी आंसू बहाता है मैं रोते हुए बिल्कुल अच्छी नहीं लगती, यह बात मुझे समझाता है.... एक दोस्त है मेरा, जो हर हालात में मेरा साथ निभाता है। मेरी खुशी देख वो भी बेहद खुश हो जाता है, जब हंसती हूं मैं, मेरे साथ वह भी मुस्कुराता है... एक दोस्त है मेरा, जो हर हालात में मेरा साथ निभाता है। जब परेशान होती हूं मैं, तो वह भी परेशान -सा नजर आता है गुजर जाएगा मेरा यह वक्त भी, यह अहसास मुझे दिलाता है... एक दोस्त है मेरा, जो हर हालात में मेरा साथ निभाता है। जब खोई रहती हूं मैं यादों में किसी की, तो वह भी गुमसुम-सा हो जाता है हकीकत वो नहीं जो ख्यालों में है, आज की हकीकत क्या है? यह भी वही मुझे बतलाता है.. एक दोस्त है मेरा, जो हर हालात में मेरा साथ निभाता है। सारी दुनिया मुझे छोड़ जाए, पर वह कभी मुझे अकेले छोड़ कर नहीं जाता है वह कोई और नहीं आईना है मेरा, जो मुझे मुझसे ही मिलवाता है, मेरी तन्हाई मिटाता है... एक दोस्त है मेरा, जो हर हालात में मेरा साथ निभाता है। हां वो आइना ही है मेरा, जो मु...

हाल-ए-दिल 💔

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जुदा होने के बाद उनसे अपने हिस्से का प्यार मैंने  कुछ इस कदर निभाया है... जब भी आई याद उनकी एक बड़ा सा पैराग्राफ लिखा उनके लिए और सेंड करने से पहले ही मिटाया है। उनके बार-बार पूछने पर भी मैंने, उन्हें सब झूठ ही बताया है... कि उनके होने या न होने से  अब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता उनके सामने हमेशा मैंने यही जताया है। अब एक मिनट भी बात नहीं होती उनसे जिनके साथ कॉल पर मैंने दिन-रात बिताया है... हारकर अपनी मोहब्बत मैंने, गालिब!  उनके नसीब को जिताया है। बेरहमी से तोड़ दिया मैंने उन्हें जिन्होंने मुझे प्यार करना सिखाया है... खुश तो मैं भी नहीं हूं उनका दिल तोड़कर, मगर देख ए खुदा! उनकी खुशी की खातिर मैंने उन्हें अपना एक आंसू भी नहीं दिखाया है। उन्हें सिर्फ शक हुआ था कि बदल गई हूं मैं मैंने खुद उनके शक को यकीन में बदलवाया है.... यह कैसा नसीब लिखकर भेजा तूने मुझे ए खुदा! जिनसे की सच्ची मोहब्बत मैंने उसी के हाथों  अपने दामन पर दाग बेवफाई का लगवाया है। और क्या सबूत दूं मैं? अपनी बेवफाई का उन्हें उनसे चैटिंग न होने पर भी  स्टेटस मेरा अॉनलाइन नजर आया है... चलो अब मान भी...

तेरी मेरी प्रेम कहानी

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सबसे अलग, सबसे जुदा, तेरी मेरी प्रेम कहानी है... दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है। तुम्हें खोने से हमेशा डरती रही हूं मैं झगड़ा चाहे लाख किया, मगर प्यार हमेशा करती रही हूं मैं कैसे कहूं? मैं कल भी तुम्हारी थी और आज भी हूं  यह बात तुम्हें बतलानी है... दिल में रखते प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है। सुनो! आज भी तुम्हें देखने को बहुत तरसती हूं मैं कैसे बताऊं?  तुम्हारी आवाज सुनने को कितना तड़पती हूं मैं निकल पड़ी हूं तुम्हारे बगैर एक नयी राह खोजने यह राह बड़ी अंजानी है... दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है। जुदा हो गए हैं लेकिन हमारा रिश्ता कभी न टूटेगा रूह से रूह तक सफर तय किया है हमने,  अलग होकर भी यह साथ कभी न छूटेगा जानती हूं, जिस्मानी मोहब्बत की दुनिया है यह फिर भी इश्क हमारा रुहानी है... दिल में रखते हैं प्यार बहुत, पर आंखों में रहता पानी है। अपने परिवार की खुशियों के लिए हमने अपने प्यार को छोड़ दिया जिसको मांगा था मैंने अपनी दुआओं में आज उसका ही दिल बड़ी बेरहमी से मैंने तोड़ दिया बेवफाई नहीं की मैंने, बस अपने कर्तव...

कोशिश कर रही हूं....

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कोशिश कर रही हूं ,  सब कुछ भुलाने की । कोशिश कर रही हूं , तुमसे दूर जाने की । कोशिश कर रही हूं, तुम्हारी जिंदगी में कभी वापस न आने की। कोशिश कर रही हूं, जो कुछ भी हुआ मेरे साथ इस सबसे आगे निकल कर... अपना रास्ता बनाने की। कोशिश कर रही हूं , जिंदगी में आगे बढ़ जाने की। कोशिश कर रही हूं , अपनी मंजिल को पाने की। ये उम्मीदें ही तो हैं, जिन पर मेरे ख्वाबों की दीवार टिकी है... यह कोशिशें ही तो हैं , जिनके आगे हार भी मुझे जीत-सी लगी है। तो क्या हुआ ? अगर कुछ कोशिशें बेकार चली जाएंगी... सफलता न सही , मगर कम-से-कम  जिंदगी में एक सबक तो देकर ही जाएंगी। क्योंकि जिसकी वजह से  हम एक बार असफल हो जाएंगे तो फिर वो गलती हम दुबारा कभी नहीं दोहराएंगे। और मुझे पूरी उम्मीद ही नहीं ,  बल्कि पूरा यकीन भी है  मेरी कोशिश , मेरी मेहनत एक दिन जरूर कामयाब होगी। मेरे सपने हकीकत में बदलेंगे कामयाबी मेरे साथ होगी । :- रचना राठौर ✍️

मेरे यार की शादी है

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❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ सुनो , मेरे ख्वाबों की बरबादी होने वाली है क्योंकि मेरे यार की शादी होने वाली है। मेरी जान को जब  उसकी भाभियों ने हल्दी लगाई होगी...😚 एक पल के लिए उसे  याद मेरी भी आई होगी🤔। छेड़कर उसे 🤗, सबने उसके संग  हंसी ठिठोली भी की होगी...😆 चेहरे पर होगी हंसी उसके 😄 मगर आंखों में नमी ही होगी😥। जब मेंहदी लगेगी हाथों में उसके 🙌,  तो किसी का नाम भी छिपाया जाएगा... उस पल जब देखेगा अपनी हथेली में😔 , एक बार को चेहरा मेरा भी उभर आएगा😓। चांद सा लगेगा वो जब सिर पर सेहरा बांधेगा...🌝 पूरा यकीन है मुझे मेरी जान पर😘, वो अपनी नई जिंदगी की जिम्मेदारियों से  कभी दूर नहीं भागेगा❌😶। ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️  :- रचना राठौर ✍️

तितली - सा बनना है मुझे

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अच्छा , तो अब हम चले उस नीले खुले आसमान के तले तितली सी बेखौफ उड़ान भरना है मुझे हां , तितली - सा  बनना है मुझे। बड़ी बेरंग सी हो चुकी है जिंदगी न कोई हंसी है इसमें, न ही दिखती है कोई खुशी अपनी बेरंग सी जिंदगी में , हजारों रंग भरना है मुझे हां , तितली - सा बनना है मुझे। बचपन से लेकर आज तक हमेशा दूसरों के हिसाब से खुद को ढालती रही हूं बहुत चोट लगी इस मासूम से दिल पर मगर हर बार मैं खुद को संभालती रही हूं अब सब कुछ भुलाकर एक नयी शुरुआत करना है मुझे हां , तितली - सा बनना है मुझे। सबकी खुशी के लिए अपने कई सपनों को मैंने मार दिया खुद धोखा खाकर भी सबको उनके हिस्से का मैंने प्यार दिया अब जिंदगी में अपनी खुशी के लिए भी कुछ करना है मुझे हां , तितली - सा बनना है मुझे। जानती हूं ज्यादा लंबी चलती नहीं जिंदगी हमारे हिसाब से कभी भी ढलती नहीं जिंदगी जिंदगी छोटी ही सही , मगर खुलकर जीना है मुझे हां , तितली - सा बनना है मुझे। पास नहीं ,  दूर ही सही , मगर  कुछ अपने मेरे संग तो हैं बाज-से मजबूत तो नहीं ,  तितली के जैसे कोमल ही सही , मगर मेरे पंख तो हैं इन पंखों के सहारे ही सफलता ...

हासिल करना है मुझे मेरी सफलता का आसमान

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ख्वाहिश है कि मेरी जिंदगी में एक दिन वो मुकाम आए, मेरे हिस्से में मेरी सफलता का आसमान आए। बहुत किस्से बने जिंदगी में, कई किरदार हैं मैंने निभाए बस अब कोशिश है कि  इन सबसे अलग खुद की एक पहचान बनायी जाए। छोड़ दिया बेवजह सबको अपनी तकलीफ बताना, छोड़ दिया अपने अहसासों को उनके सामने जताना। क्यों न अब अपने हर दर्द, हर अहसास को कागज पर उतार दिया जाए ... क्यूं न जज्बात की स्याही से अपने ख्वाबों को अब हकीकत में तब्दील किया जाए ? मेहनत इतनी करूंगी कि लोग जब मिलें तो कहें... ' यह वो रचना नहीं जिसे हम जानते थे , यह तो लगे है कोई और ' खामोश रहूंगी , कुछ न कहूंगी क्यूंकि अब मेरी सफलता ही हर तरफ मचाएगी शोर। सफलता की तरफ अब एक-एक कदम मैं बढ़ाने लगी हूं, अब तक आजमाते थे लोग मुझे , अब मैं खुद ही खुद को आजमाने लगी हूं। देखती हूं आखिर कब तक गिरना है मुझे ? जरूरत नहीं मुझे अब किसी के सहारे क्योंकि जानती हूं गिरकर खुद ही संभलना है मुझे। हां माना कि इस राह में बहुत अड़चनें हैं ,  मुमकिन है इनमें उलझकर मैं बार-बार गिरुंगी ... लेकिन जब गिरुंगी तभी तो दोबारा दोगुनी मेहनत लगाकर ऊपर उठूंगी। कब तक ...

वो हूं मैं..!

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जो तुम्हारे आगे झुकी सी है  वो हूं मैं...! जरा सा प्यार दिखाने पर , जो खिलखिला कर हंस पड़ी है  वो हूं मैं...! जो कभी अपने लिए दूसरों से नहीं लड़ी है  वो हूं मैं...! जो दूसरों के लिए अपनों से तक भिड़ी है  वो हूं मैं...! अपनी गलती ना होने पर भी जो नजरे झुकाए खड़ी है वो हूं मैं...! किसी के चिल्लाने पर , बिना कुछ कहे जो रो पड़ी है वो हूं मैं...! दोस्तों की मदद के लिए जो हमेशा खड़ी है  वो हूं मैं...! वो जो हर रिश्ते को अपना मान चली है  वो हूं मैं...! वो जो सबकी खुशी के लिए , खुद को खोने लगी है  वो हूं मैं...! वो जो अपनी भाई बहनों की लाडली बनी है वो हूं मैं...! सबके साथ होते हुए भी जो अकेले खड़ी है वो हूं मैं...! लेखिका :- रचना राठौर ✍️

मेरी जिंदगी है तू..!!

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❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️  मेरी जिन्दगी है तू.... तू ही बता  तेरे बिना कैसे मैं रहूं ??? तेरी आवाज सुनकर ही , तो मेरी नींद खुलती थी, तेरी बातों के संग ही , तो मेरी हर शाम ढलती थी। देखकर तुझको मुझे मिलता है कितना सुकूं... मेरी जिंदगी है तू .... तू ही बता  तेरे बिना कैसे मैं रहूं? चाहती थी उम्र भर के लिए बस तेरा ही साथ, अब छूट रहा हाथों से मेरे , मेरी जान! तेरा हाथ। छोड़ न पाऊं तुझे , तू ही तो है मेरी आरजू..... मेरी जिन्दगी है तू.... तू ही बता तेरे बिना कैसे मैं रहूं ??? हां मुझको याद है अब भी , वो तेरा मुझसे खफा होना  याद है यह भी , बिछड़कर मुझसे, वो तेरा  खुद को सजा देना। खफा होकर भी एक-दूजे से , होती रहती थी हमारी गुफ्तगू.... मेरी जिन्दगी है तू.... तू ही बता तेरे बिना कैसे मैं रहूं ??? बड़ी हिम्मत है मुझमें , ऐसा लोग कहते हैं  न जाने जुदा होकर, कैसे वो लोग रहते हैं? बड़ी प्यारी है हंसी मेरी , मगर कैसे अब मैं हंसू... मेरी जिंदगी है तू.... तू ही बता तेरे बिना कैसे मैं रहूं ??? तुम्हारे सामने अक्सर छिपा लेती हूं मैं , मेरी आंखों की नमी मगर तन्हाई म...