आशीर्वाद
खुद को परिधान में लपेटू या जीवन की राह चलू, ख़ुद को खो के सन्यासी बनू या एक नई राह गढ़ू, खुद को शबाबासी दू या अपनी गलती सुधारू, ख़ुद की कमी देखू या दूसरो की निन्दा करू, ख़ुद के लिए कटु वचन बोलूं या दूसरो की मीठी वाणी अपनाऊ, ख़ुद ब ख़ुद सब ठीक होने का इन्तजार करू या एक क़दम चलकर सब कुछ ठीक करने की कोशिश करू, एक हवा,एक पानी फिर भी खुद से क्यों करे बेईमानी सभी के साथ,सभी के पास,एक एक क़दम बढ़ाती चलू, ख़ुद को कभी खुद की गलती गिनाती चलू, जिन्दगी की एक नई राह बनाती चलू यकिन हो जिस पर दुनिया को वो पहचान बनाती चलू, ख़ुद की कल को कड़वी यादों से भुलाती चलु यादों का एक नया सवेरा बनाती चलू, दुसरो की गलतियां भुलाती चलु, ख़ुद को एक उम्मीद दिलाती चलु,