मां मै गलत नहीं हूं
रीमा प्यारी सी चंचल सी कुछ लड़कियों जैसे गुण तो थोड़ी लड़कों जैसी आदतों वाली थी। प्यारी तो बहुत थी वो और लड़कियों उसे अच्छी बहुत लगती थी लेकिन पता नहीं क्यों वह लड़कियों को दोस्त नहीं बना पाती थी। बचपन से बड़े होने तक उसकी दोस्ती हुई तो सिर्फ लड़कों से। जब तक छोटी थी उसके घर वालों को कोई समस्या नहीं थी ना ही दुनिया वालों को , जैसे ही बड़ी हुई घर वालों ने, पड़ोसियों ने, दुनिया वालों ने उसे ताने देना, उसे सुनाना शुरू कर दिया घरवालों की कोशिश रहती थी की वह लड़कों से दूर रहे। पहले तो उसे बहुत अटपटा सा लगता था सबका ऐसा व्यवहार। लेकिन थोड़ी समझदार भी थी वह समझने लगी जब लड़कियां बड़ी हो जाती है तो उन्हें लड़कों से दोस्ती की इजाजत नहीं होती खासकर उस जैसी गांव की लड़कियों को तो बिल्कुल भी नहीं। इसलिए वह मन मार कर अपने घर में ही रहने लगी बस क्लास जाती पढ़ती और वापस चली आती लेकिन वह पहले सी खुश नहीं रहती थी क्योंकि उसके सारे दोस्त छूट गए थे और उसे सबसे ज्यादा दुख था उसके अपने सबसे प्यारे दोस्त के छूट जाने का । राघव नाम था उसका वह भी इसके जैसा चंचल स्वभाव का था लेकिन उतना ...