मां मै गलत नहीं हूं

रीमा प्यारी सी चंचल सी कुछ लड़कियों जैसे गुण तो थोड़ी लड़कों जैसी आदतों वाली थी। प्यारी तो बहुत थी वो और लड़कियों उसे अच्छी बहुत लगती थी लेकिन पता नहीं क्यों वह लड़कियों को दोस्त नहीं बना पाती थी। बचपन से  बड़े होने तक उसकी दोस्ती हुई तो सिर्फ लड़कों से। जब तक छोटी थी उसके घर वालों को कोई समस्या नहीं थी ना ही दुनिया वालों को , जैसे ही बड़ी हुई घर वालों ने, पड़ोसियों ने, दुनिया वालों ने उसे ताने देना, उसे सुनाना शुरू कर दिया घरवालों की कोशिश रहती थी की वह लड़कों से दूर रहे। पहले तो उसे बहुत अटपटा सा लगता था सबका ऐसा व्यवहार। लेकिन थोड़ी समझदार भी थी वह  समझने लगी जब लड़कियां बड़ी हो जाती है तो उन्हें लड़कों से दोस्ती की इजाजत नहीं होती खासकर उस जैसी गांव की लड़कियों को तो बिल्कुल भी नहीं।

इसलिए वह मन मार कर अपने घर में ही रहने लगी बस क्लास जाती पढ़ती और वापस चली आती लेकिन वह पहले सी  खुश नहीं रहती थी क्योंकि उसके सारे दोस्त छूट गए थे और उसे सबसे ज्यादा दुख था उसके अपने सबसे प्यारे दोस्त के छूट जाने का । राघव नाम था उसका वह भी इसके जैसा चंचल स्वभाव का था लेकिन उतना ही समझदार था पढ़ने लिखने में और अपने क्लास में सबसे अच्छा था इसलिए सब उसकी तारीफ करते थे राघव भी उदास रहने लगा था क्योंकि उसकी सबसे अच्छी दोस्त उससे दूर जो हो गई थी।
लेकिन वो समझदार था इसलिए वह भी समझ गया रीमा की मजबूरियों को समाज की सोच को इसलिए वह भी दूर ही रहता था रीमा से। यह सिलसिला चलता रहा।
एक बार रीमा अपने क्लास की लड़कियों के साथ पिकनिक मनाने दूसरे शहर गए थी।

वहां पर वह अपने साथ आई लड़कियों से बिछड़ गई। एक अनजान रास्ते पर । शाम का वक्त होने के वजह से वह ज्यादा डर रही थी अजनबी लोगो से कोई बात भी नहीं करना चाहती थी वो।
जिस रास्ते पर वह जा रही थी उसे उस रास्ते के बारे में कुछ भी मालूम ना था । वह सही रास्ते की तलाश में भटक गई एक सुनसान से जगह में ।
लाख कोशिशों के बाद भी वह सही रास्ते पे नहीं पहुंच पाई
वो लगातार अपने घर वालो से बात करने की कोशिशों में लगी थी लेकिन किसी ने भी उसका फोन नहीं उठाया। वह डर चुकी थी ।
अब उसके पास कोई और रास्ता ना था उसने अपने दोस्तों को कॉल करना चाहा।
उसने राघव को सबसे पहले कॉल किया लेकिन वह कॉल रिसीव नहीं कर पाया उसने बाकी दोस्तों को भी कॉल किया लेकिन सबने अपनी मजबूरियों का हवाला दे कर उसकी मदद करने से मना कर दिया। 
कोई उसकी मदद नहीं कर रहा था ना घरवालों से बात हो पा रही थी और रात भी होते जा रहा था।उसके पास पैसे थे लेकिन वह रास्ता नहीं जानती थी ना अकेले जाना चाहती थी
वह क्या करे उसके समझ नहीं आ रहा था।
उधर उसके साथ आई लड़कियां भी परेशान होकर उसे ढूंढ़ने में लगी थी जब वह ना मिली तो वो सब भी वापस जाने लगी ताकि रीमा  घर में ये सब बताया जा  सके।

रीमा अब थक चुकी थी तब उसने फैसला किया कि अब किसी राह चलते इंसान से मदद मांगेगी।
तभी उसके फोन में राघव का कॉल आया ।  वह उससे बात करते करते फूट फूट कर रो पड़ी।
राघव ने कुछ देर में आता हूं कह कर उसे हिम्मत दिया और इंतजार करने को कहा।

रीमा एक जगह बैठ कर उसका इंतजार करने लगी । राघव ने किसी तरह उसके लोकेशन का पता लगाया और उस तक पहुंचा। रीमा उसके गले लग गई और रोने लगी उसे लगा मानो एक अरसे बाद किसी अपने से मिली हो। राघव ने उसे चुप कराया उसे पानी पिलाया । और उसे अपनी बाइक पे बैठा  उसकी घर के लिए निकल गया।
रात करीब 12.30 तक भी रीमा अपने घर नहीं पहुंच पाई उसका फोन भी बन्द हो चुका था। उसके घर वाले भी परेशान थे।
रात करीब 1:00 बजे के  बाद वह अपने घर पहुंची राघव के साथ।उसके घर वालों ने बिना कुछ पूछे जाने उसे खूब डांटा उसके पापा ने तो राघव पे कई तरह के इल्जाम भी लगाए।
रीमा की भाभियों ने रीमा के चरित्र पे कई तरह के लांछन लगाए। रीमा के भाई ने उसे एक थप्पड़ भी लगाया । राघव से यह सब देखा ना गया उसने बताने की , सबको समझाने की कोशिश भी की लेकिन किसी ने उसकी एक ना सुनी और उसे वहां से जाने को कहा। रीमा के पापा ने तो धक्के देकर उसे अपने घर से निकाल दिया । अपनी बेटी पे उन्हें जरा भी भरोसा ना था।
रीमा सब कुछ शांत होकर बुत बने सब देख रही थी। वह कुछ ना बोली, दिल टूट गया उसका उसके घरवालों का बरताव देख कर।

इतने अपमान और इल्जाम के बाद वह वहां और रुक ना पाई। अपने कमरे में गई। बाहर से आवाजें आरही थी कि अब इसे बाहर निकलने नहीं देंगे बहुत बिगड़ गई है,  पढ़ाई लिखाई सब बन्द , अब जल्द ही इसकी शादी भी करवा देंगे जल्द ही हमारे सिर से बोझ उतरेगा। बस हमारा बोझ ख़तम हो और उस लड़के राघव को तो हम छोड़ेंगे नहीं।
यह सब सुन कर वह परेशान हो उठी। यह सब उससे बरदाश्त नहीं पाया वह फूट फूट कर रोई, बहुत रोई । उसे कोई संभालने वाला नहीं था वहां। ना हीं कोई उसके आंसू पोछने वाला था। उसके बाद उसने एक बहुत ही गलत फैसला लिया जो शायद उसे नहीं लेना चाहिए था लेकिन वह लाचार थी।


सुबह हुई ।


फिर 10 से ज्यादा बज गए लेकिन रीमा के कमरे का दरवाजा ना खुला। उसकी मां ने दरवाजा खुलवाने की कोशिश की जब अंदर से कोई आवाज नहीं आया तो उसके पापा को बुलाया गया । किसी तरह दरवाजा खोल कर अंदर जाने के बाद वहां प्यारी सी रीमा नहीं बस उसका बेजान शरीर मिला और उसके बेजान से हाथों में एक कागज का टुकड़ा मिला जिसपे लिखा था .....

मां...
   मै गलत नहीं थी ।
काश तुम चुप ना रहती मां।
कम से कम तुमने तो समझा होता मुझे।
       
... आपलोगो के लिए एक बोझ....
                रीमा 

😥😥😥😥😥


कौन गलत था कौन सही।
क्या गलती थी रीमा की।
समाज और घरवालों के संकीर्ण सोच की शिकार बनी रीमा की आत्मा को क्या शांति मिल पाएगा कभी ।
सही होने के बाद भी अपने आप को रीमा की मौत का जिम्मेदार मान रहा राघव कहां से गलत है। क्या कभी खुश रह पाएगा वो। उसने अपनी एक प्यारी दोस्त को खो दिया क्या वो कमी पूरी हो पाएगी ।
अपने चुप रहने की सजा भुगत रही रीमा की मां क्या माफ कर पाएगी खुद को।
क्या उसके घरवालों को एहसास हो पाएगा कि उनके घटिया और नीच सोच के वजह से एक लड़की कि मौत हो गई।





अगर कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा मांगना चाहूंगी।

अनुरोध करूंगी की अपनी बेटियों पे भरोसा करें उन्हें आजादी दे अपनी सोच बदले। 🙏🙏🙏


रचनाकार 
अनुराधा

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