Posts

Showing posts with the label Priya Dhama

मेरी कलम

Image
कभी-कभी लिखने को कितना कुछ होता है। कभी-कभी ये दिल एक-एक शब्द का मोहताज होता है। लिखने की आदत क्या लगी जनाब, कभी-कभी हर लम्हा लिखने को जी करता है, लिख दूं अपने दिल की हर बात कमबख्त चहरे से ज्यादा, जज़्बात शब्दों में बयां करता है। मेरी कलम जो दिल के मोती पीरोकर शब्दों की स्याही से पन्नों को सजाती है, इस दिल से निकली हर आह बयां कर जाती है। लिखने को कितना कुछ है दिल की ख्वाहिशों में, पर जनाब ये जालिम जमाना न लिखने देता है, न इस मासूम दिल के भाव बयां करने देता है। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

संजोग - अंतिम भाग

Image
उदय के मां-बाप आनन-फानन में घटनास्थल की ओर निकल पड़े। घटनास्थल पर पहुंचकर उसके माता पिता की नज़र चारों ओर उदय को खोज रही थी, पर वह कहीं दिखाई नहीं दिया। पंछी के पिताजी और भगत राम जी के मित्र भीमा प्रसाद भी वहां पहुंच गए थे और उन्होंने बताया कि मरने वालों की लिस्ट में भी उदय क नाम नहीं है। तब सभी घरवालों ने चैन की सांस ली और राहत शिविर की ओर अपने कदम बढ़ाए। यहां वहां सब जगह देखने के बाद भी जब उदय नहीं दिखाई दिया, तब मां बेचैन हो उठी और उनके मन में सिरहन सी दौड़ गई पर बहुत देर बाद भीड़ में कहीं उदय की झलक दिखाई दी। उदय को काफी सारी चोटें आई थी और वह मरते मरते बचा था। उदय को देखकर सभी की जान में जान आ गई। मां ने बेटे को गले से लगा लिया और दूर खड़ी पंछी की आंखें भी नम हो गई, जो अपने पिताजी के साथ वहां आ पहुंची थी। सब से मिलकर उदय की आंखें भी छलक गई। उदय को काफी चोटें आई थी पर फिर भी सब खुश थे कि उनका बेटा सही सलामत है। समाप्त। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

संजोग भाग - २

Image
भीमा प्रसाद जी भगत राम के बचपन के पक्के दोस्त थे। उनकी बेटी पंछी और उदय भी एक दूसरे को पसंद करते थे। खैर, समय बीतता गया और दोनों के विवाह की घड़ी नज़दीक आ गई। सब रिश्तेदार भी आने लगे। तभी, उदय भी नौकरी से छुट्टी लेकर घर जाने के लिए ट्रेन में बैठ गया। उसके मां पिता भी पलके बिछाए उदय का इंतज़ार कर रहे थे। वह रात की गाड़ी से चलकर प्रातः पहुंचने वाला था। इसी कारण मां को रात में नींद भी नहीं आ रही थी, लेकिन भगत राम जी उन्हें बार-बार सोने के लिए कह रहे थे। मां सोना तो नहीं चाहती थी परंतु बहुत ज़िद के बाद सब सोने चले गए। प्रातः जब उनकी आंख खुली तो सवेरा हो गया था। पदमा देवी जी ने सवेरे सबसे पहले अपना फोन चेक किया, जिसमें उदय की काफी सारी मिस कॉल थी। उदय ने करीब आधी रात में मां को कॉल किया और मैसेज भी किया था, जिसमें लिखा था,"मां मैं आखिरी बार आपकी आवाज़ सुनना चाहता था", जिसको पढ़ कर उदय के मां पिताजी बहुत घबरा गए। घबराहट में हड़बड़ा कर जब उन्होंने टीवी खोल न्यूज़ चैनल लगाया, जिसमें सारी घटना का प्रसारण चल रहा था, घटना उदय के स्टेशन से थोड़ा पहले की थी। क्रमशः अगले भाग में। प...

प्रकृति

Image
प्रकृति दूर करती विपत्ति, मां स्वरूपी होती संस्तुति, जल थल प्रकाश पवन करते जीवन का सर्जन, उपहार ये मुफ्त में मिले- छोटा, बड़ा, अमीर, गरीब सबके लिए, सबल है यह शांत संपत्ति मत आंको कम इसकी शक्ति,  दोहन होगा तो करेगी नाश छीन लेगी सबकी सांस, संतुलन है मंत्र इसका अपार जन, पशु, पक्षी से इसको प्यार।। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़ #चित्रार्थी

चलचित्र

Image
चलचित्र की कहानी सपनों की नगरी, मनभावन कलाकृतियां कलाकारों की ज़ुबानी, दिल की कहानी, कहानियों में हज़ारों सपने, ना जाने कितने राज़ हैं इन सपनों की परछाइयों में। कुछ नज़ारे बन जाते हैं और कुछ नज़रों में छप जाते हैं, रंगीन नज़ारे नज़ारों की रंगीलियां जिससे बन जाती है चलचित्र की कथाएं। इन कथाओं के बहुत से पन्ने अस्तित्व को झकझोर कर रख देते हैं और कुछ मन को प्रफुल्लित कर जाते हैं। कुछ मन की गहराइयों में बस जाते हैं और कुछ हमें एक सच्ची सी सीख दे जाते हैं। कुछ कहानियों के किरदार फसाने बना देते हैं और कुछ स्मृतियां छोड़ जाते हैं। इन्हीं कहानियों में किसी को रास्ते मिल जाते हैं और किसी के रास्ते बिछड़ जाते हैं। यह चलचित्र की कहानी एक ऐसी कहानी है जो किसी का नसीब बन जाती है और किसी का बिगाड़ देती है। फिर भी कभी समाप्त ना होती चलचित्र की ज़ुबानी, है रंगीन कहानी। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

सोशल मीडिया और हम

Image
सोशल मीडिया की राह पर चलकर हाई-टेक होता जा रहा आज का इंसान। अपनो से दूरियां और सोशल मीडिया से नज़दीकियां बढ़ा रहा आज का ये इंसान। सोशल मीडिया ने कर दिया दूर रहने वालों को पास और पास वालों को दूर, दूर ही दूर से रिश्ते निभाते हैं आज सब। एक साथ रहते हुए भी सभी अपने मोबाइलों में व्यस्त रहते हैं, आसपास रहने पर भी एक दूसरे को मैसेज किया करते हैं। मनोरंजन का साधन बना लिया है इस हाई-टेक सफर को, ना पहले जैसी मौज-मस्ती ना मिलना जुलना, दोस्ती भी अब फेसबुक और व्हाट्सएप के ज़रिए निभाई जाती है। जान ना पहचान एक दूसरे को फेसबुक के ज़रिए फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर दोस्ती सब कर लेते हैं। मैसेंजर में हाय हेलो बोल कर दिल के करीब आ जाते हैं। आज कल की दुनिया में सोशल मीडिया और हम बहुत जुड़ गए हैं, इस जुड़ाव का सही उपयोग हमारी ज़िम्मेदारी है। सोशल साइट के हर पहलू में हमारी हिस्सेदारी है, जिसका  सदुपयोग हमारी जवाबदारी है। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

संजोग भाग - १

Image
शहर से दूर गांव की अगुवाई पर भगत राम का परिवार रहता था। यह गांव का सुखी परिवार था। भगत राम की पत्नी पद्मा देवी अपने परिवारिक जीवन में सुखी थी। उनकी एकलौती संतान उदय बड़े ही पूजा पाठ के बाद उन्हें मिला। भगतराम और पदमा देवी की काफी समय तक कोई संतान नहीं हुई और उन्होंने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी, तब भगवान की कृपा से उदय का जन्म हुआ। अब तो उदय बड़ा हो चला था और शहर में उसकी जॉब लगी थी। उदय के बाबूजी शहर में जाकर नहीं बसना चाहते थे। उदय की मां तो उसको भी नहीं भेजना चाहती थी, परंतु उदय के पिताजी ने कहा कि हमें बेटे की तरक्की के आगे नहीं आना चाहिए। उदय की मां उसके इतनी मुश्किलों से पैदा होने वाली बात याद करके अत्यंत दुखी थी। आखिरकार मां को सब की बात माननी पड़ी और उदय नौकरी के लिए शहर चला गया। शुरुआत में उदय हर हफ्ते शनिवार, रविवार आ जाया करता था, परंतु कभी कभार नहीं भी आ पाता था। धीरे-धीरे उदय की विवाह की बातचीत चल रही थी, उसका विवाह भगत राम के बचपन के दोस्त की बेटी पंछी के साथ संपन्न होना तय हुआ था। क्रमशः अगले भाग में। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

तितली रानी

Image
इंद्रधनुषी पंख सजाए, कभी बसंती कभी नारंगी रंग रंगीली आती हैं। छुई मुई सी नाज़ुक हैं, कभी दमकती कभी चमकती, कितनी सुंदर कितनी कोमल, फूलों पर मंडराती हैं। परियों जैसे पंख है इनके, फूल फूल का रस पीतीं हैं। सतरंगी कर सबके मन को दूर कहीं उड़ जाती हैं। तितली रानी बड़ी सयानी सबके मन को भाती हैं।   प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

दास्तान

Image
तू दिल मे समाया ऐसे की दास्तान बन गई, तेरी मेरी कहानी फसानों मे छप गई।। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

एक जासूस

Image
थक सा गया हूं मैं चलते-चलते, इन जासूसी रास्तो में भटकते-भटकते, अब एक घड़ी रूकना चाहता हूं, ज़रा संभलना चाहता हूं, मुस्कराहटो में ज़िंदगी बिताना चाहता हूं, बहूत हो गया ये बेचैनियों का मंज़र, अब आगे बढ़ना चाहता हूँ, मिलती नहीं मंज़िल रास्तों की गुफ़्तगू से, हर सफर में कोई राज़ छूपा है, खो सा गया हूँ इन बदरंगी गलियों में, अब रंगीनियों में जीना चाहता हूँ। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

धरती मां

Image
जग से न्यारी सबसे प्यारी अमूल्य अतुल्य धरती हमारी,  देश का अभिमान है सबकी मां है धरती हमारी शान है। धरती मां की कोख से जन्मे हम सब हैं इनके बच्चे, बचपन बीता धरती पर ही। इसकी रक्षा है कर्तव्य हमारा, तो क्यों करते हम सब इसको छलनी। झेले धरती बोझ हमारा, इसके प्रति कैसे भूले हम धर्म हमारा। मेरी धरती तेरी धरती कहकर ना बांटो इसे अब ना तुम छांटो इसे। हर रोज अपने बच्चों को खो रही देखो ये धरती मां है रो रही। हरियाली इस मां की खोती जा रही, कितनी बंजर ये होती जा रही। चलो मिलकर करते हैं इसकी पूजा, यही तो है हमारी धरती माता।। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

तेरे इश्क में

Image
ओ कान्हा तेरे इश्क में लागी ऐसी लगन, राधा बंधी प्रेम में मीरा हुई मगन, ओ कान्हा तेरे इश्क में लागी ऐसी लगन, गोपियां बनी दीवानी फिरीं वन-वन, ओ कान्हा तेरे इश्क का चढ़ा ऐसा रंग द्रोपदी बनी सखी, रुक्मणी का मोह लिया मन, ओ कान्हा तेरे इश्क की ऐसी छाई लगन, ब्रिज बना मनमोहन, महका वृंदावन, ओ कान्हा सारे जग में तूने ऐसी बंसी बजाई, दुनिया हुई मगन, ओ कान्हा तेरे इश्क में लागी ऐसी लगन, भक्ति में तेरी लीन हुई बन गई जोगन।। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

मुक्ति

Image
चाहे हर बंधन से मुक्त हो जाऊं,  ईश्वर तेरा मोह ना छोड़ा जाए, दिल टूटे या जग छूटे,  हे रब तेरा मोह ना छोड़ा जाए। जीवन भर कृष्ण प्रेम की बंसी बजाई,  ईश्वर तेरी भक्ति में ही रैना बिताई। जिंदगी के मोह जाल में फंसा है हर इंसान ऐसे, जीवित रहते मुक्ति कहां। मृत्यु के मुंह से छूटे, ऐसी कोई शक्ति कहां। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

बधाईयाँ

Image
मीना जी गांव की मुखिया जी की पत्नी और उनका भरा पूरा परिवार गांव की शानदार हवेली में बड़ी शान से रहते। उनके दो बेटे जो देश के बॉर्डर पर तैनात देश की रक्षा के लिए तत्पर थे। वहीं  उनकी दोनों बहुएं अति सुंदरता और शालीनता की मिसाल थी। सारा गांव उनके गुणों व खूबसूरती की प्रशंसा करते नहीं थकता था। अब उनके घर खुशियों की लहर आने वाली थी, दोनों बहुएं पेट से जो थी, जल्दी ही घर में नन्ही किलकारियां की गूंज सुनाई देने वाली थी। दोनों की संतानों का जन्म भी एक ही दिन हुआ, बस समय का फर्क था। बड़ी बहू के बच्चे का जन्म सुबह के समय हो गया। बड़ी बहू को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। घर में बधाइयों का तांता लगना शुरू हो गया। छोटी बहू की डिलीवरी सांझ को हुई, उसकी कोख से पुत्री ने जन्म लिया। अब तो जैसे हवेली में मातम सा छा गया, छोटी बहू के लिए कोई बधाई संदेश नहीं आया। मीना जी भी इस बात से काफी दुखी थी, क्योंकि वह चाहती थी कि उनकी दोनों बहुओं को उनकी ही तरह दो-दो बेटे हो, परंतु होनी को यह कहां मंजूर था। मीना जी इस वाक्या से बड़ी चिंतित थी, क्योंकि वह सारे गांव भर में अपनी झूठी तारीफों के पुल बांधकर पहले से ही...

दहलीज

Image
वो बन संवर कर महफिल में शमा जलाने आए, वो अब मेरे दिल की दहलीज पर नया जख्म लगाने आए। उन मीठे सौंधे जख्मों से उभर ना पाया दिल अभी, फिर भी वह आज नए जख्मों पर मरहम लगाने आए। मेरी वीरान सी जिंदगी में खुशबू फैले अगर, वो मेरे घर के दरों-दीवार सजाने आएं, इसी गली में उनके कई  मित्र बसते हैं, वो किसी और को मिलने के बहाने तो आएं। ए खुदा रखना रहमों करम इस दिल पर, कोई मुझे इन सुनहरे ख्वाबों से ना जगाने आए। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

दोस्त

Image
ना चाहत है सितारों की, ना चाहत है नज़ारों की, आप जैसा दोस्त मिल जाए, तो क्या जरूरत है हजारों की। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

अलगाव

Image
जीवन की आपाधापी में रोज़गार के कम होते अवसरों और अपनों से दूर होते लोगों के बीच आज सब से घायल स्थिति में है, वो आपसी विश्वास। विश्वास रिश्तो को मजबूती देता है,अगर वही कम होगा तो इंसानी रिश्ते कैसे मजबूती पाएंगे। दुनिया में सबसे खूबसूरत रिश्ता पति-पत्नी का होता है, परंतु आपसी विश्वास की कमी होने पर रिश्ते की डोर डगमगा जाती है और रिश्तो में अलगाव की स्थिति आ जाती है, यही अलगाव दिलों को तोड़कर रिश्तों को बिखेर कर रख देता है। रिश्तों में बिखराव आ जाने से एक परिवार टूट जाता है, जिसका असर परिवार के सभी सदस्यों पर पड़ता है और इस स्थिति से बच्चे अत्यधिक प्रभावित होते हैं। अलगाव की स्थिति के कारण परिवार में कलह का समावेश हो जाता है, इसका असर बच्चों के मन में गलत भाव पैदा कर देता है और बच्चे गलत आदतों, आक्रोश और व्यावहारिक मतभेद के शिकार हो जाते हैं। जिंदगी में मतभेदों के बढ़ जाने के कारण घुटन सी महसूस होने लगती है। दो ज़िंदगियों के टूटने से कितने रिश्ते बिखर जाते हैं। शादी एक पहचान ही नहीं एक नई दुनिया की शुरुआत भी होती है, लेकिन आपसी विश्वास और समझ की कमी के कारण कुछ रिश्ते टूट कर बिखर...

चलचित्र

Image
चलचित्र की कहानी सपनों की नगरी, मनभावन कलाकृतियां कलाकारों की ज़ुबानी, दिल की कहानी, कहानियों में हज़ारों सपने, ना जाने कितने राज़ हैं इन सपनों की परछाइयों में। कुछ नज़ारे बन जाते हैं और कुछ नज़रों में छप जाते हैं, रंगीन नज़ारे नज़ारों की रंगीलियां जिससे बन जाती है चलचित्र की कथाएं। इन कथाओं के बहुत से पन्ने अस्तित्व को झकझोर कर रख देते हैं और कुछ मन को प्रफुल्लित कर जाते हैं। कुछ मन की गहराइयों में बस जाते हैं और कुछ हमें एक सच्ची सी सीख दे जाते हैं। कुछ कहानियों के किरदार फसाने बना देते हैं और कुछ स्मृतियां छोड़ जाते हैं। इन्हीं कहानियों में किसी को रास्ते मिल जाते हैं और किसी के रास्ते बिछड़ जाते हैं। यह चलचित्र की कहानी एक ऐसी कहानी है जो किसी का नसीब बन जाती है और किसी का बिगाड़ देती है। फिर भी कभी समाप्त ना होती चलचित्र की ज़ुबानी, है रंगीन कहानी। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

वो बचपन के दिन

Image
वो बचपन के दिन वो नादान हरकतें, वो मदमस्त हंसता खिलखिलाता हंसी बचपन, खेल खेल में मस्ती वो दिल आवारा, वो छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाना, वो मां का प्यार से मनाना, वो पापा के साथ घूमने जाना और दोस्तों के साथ मौज मस्ती, वो एग्जाम का डर फिर रिजल्ट से घबराना, ना कुछ पाने की आशा ना कुछ खोने का डर, बस अपनी ही धुन अपने सपनों का घर, ना रोने  की वजह ना हंसने का बहाना, कितने प्यारे होते हैं वो दिन जिसमें खिला रहता हमेशा मन, खेलकूद में बीत जाता सारा दिन, यादों की धुधं में बचपन की गलियां जहां बीते जमाने, बहुत याद आते हैं वो बीते जमाने, सब कुछ मिल जाएगा जिंदगी में, पर वो दिन वापस नहीं आएंगे। प्रिया धामा भिलाई, छत्तीसगढ़

आंखों का रिश्ता

Image
दुनिया में सबसे खूबसूरत रिश्ता आंखों का ही होता है। एक ही साथ खुलती, बंद होती हैं, एक ही साथ रोती हैं और एक साथ सोती हैं। वो भी एक दूसरे का दीदार किए बिना। यह आंखें ही है जो बिन शब्दों के सब कुछ बोल जाती हैं, ये आंखें ही है जो बिन भाषा के सब जानती हैं। यह आंखें ही है, जो मोहब्बतों में मुस्कुराती हैं, ये आंखें ही है जो नफरतों को पहचानती हैं। आंखें ना हो तो क्या जहां, क्या जहां की रोशनी। आंखें ही सबसे हंसी हैं, आंखों से ही है गुस्ताखियां। आंखों से ही तो है हया,आंखों से ही सारे नजारे हैं। आंखों से ही है रंगीनियां, आंखों से ही तो है जिंदगानियां। प्रिया धामा