काव्यरस भाग १
काव्य रस के प्रकार नौ बताए गए हैं जिनमें वात्सल्य और भक्ति रस को जोड़ा गया है यह कुल मिलाकर 11 होते हैं काव्य रस के इन सभी प्रकारों को मनुष्य अपने शारीरिक हावभावों से अभिव्यक्त कर सकते हैं इनके अलावा कुछ पशु-पक्षी भी अभिव्यक्ति इसी माध्यम से करते हैं। इंसान भी दहाड़ते हैं शेर भी दहाड़ता है क्योंकि यहां पर वीर रस प्रभावी होता है। चिड़िया भी चहकते हैं और मनुष्य भी चहक चहक कर बातें करते हैं कहने का मतलब हंस-हंसकर..... काव्य के सभी रस अपने आप में सर्व सिध्द हैं पर हास्य रस की सिद्धि जिसे मिल जाए उसकी महिमा अपरंपार है मतलब नो आरग्यूमेंट, नो टेंशन...रश्मिरथी के धुरंधर हास्य कवियों ने आज रश्मिरथी पाठकों एंवम लेखकों को खूब हंसाया है। हंसना जरूरी भी है इसीलिए तो हंसी को बनाया। सोंचो-सोंचो अगर मुंह में ताले लगते तो कैसा लगता।। गर गुस्से को हंसना और हंसना को गुस्सा कहते तो कैसा लगता। बचपन में भाई की नर्सरी राइम में जो पढ़ा था उसे आपको भी पढ़ाते हैं हंड्रेड परसेंट गारंटी है इसे पढ़कर आप जरूर हंस देंगे हा हा हा हा हा ही ही ही ही ही हो हो हो हो हो हौ ...