Posts

Showing posts with the label साधना सिंह

अग्निवीर

Image
देश की माटी इनका चंदन रक्त प्रवाह इनका नवयौवन रिपु की राह में स्थिर रहते अग्निवीर है यह कहलाते क्या कर लेगा अंधड़ इनका अटल रहे हर झंझावात में देश प्रेम में निशदिन रहते अग्निवीर है यह कहलाते मात पिता का आदर करते भ्रात सखा संग प्रेम भी करते देशप्रेम सर्वोपरि रखते अग्निवीर है ये कहलाते देश भी इनको देता सब कुछ भोजन स्वास्थय सुरक्षित भविष्य आन बान और शान से रहते अग्निवीर है ये कहलाते।                       साधना सिंह                      

रुको नहीं

Image
उठो ,चलो, गिरो मगर रूको नहीं, रूको नहीं! है रास्ते यह धूल के कंकड़ यहां ,पत्थर यहां पर तुम कभी डिगो नहीं रूको नहीं, रूको नहीं! मंजिल भले ही दूर हो बस धुंध ही चहुं ओर हो पर तुम कभी मुड़ो नहीं रूको नहीं ,रूको नहीं! जो आंधियां चलें कभी उड़ता हुआ अस्तित्व हो पर तुम कभी डरो नहीं रूको नहीं, रूको नहीं!!           #साधना सिंह

"युवा पीढ़ी"

Image
युवा पीढ़ी की व्यथा कथा बड़ी अनोखी है कहीं काम पाने की पुरजोर कोशिश तो कहीं चोरी और लूट मारी है। कोई पढ़ता है रात और दिन अच्छे अंकों के लिए, तो कहीं पर्चा आउट कराने की तैयारी है। कोई समझ रहा है दोस्ती को खुदा, तो कहीं दोस्त से स्वार्थ, छल और मक्कारी है। कोई रखता है फोन हाथ में और व्यस्त है ई- लर्निंग में तो कहीं पर टिक टौक,इंस्टाग्राम और स्नैप चैट की मारामारी है। हर किसी को चाहिए उन्नति अपने अपने तरीके से सब की तैयारी है।।              " साधना सिंह"

लिपस्टिक

Image
....... अरे रमा.... क्या बताऊं तुम्हें.... प्रिया तो मेरे बेटे की आधी तनख्वाह अपने सजने संवरने पर ही खर्च कर देती है। एक लिपस्टिक पांच सौ रुपए की खरीदती है। अब तुम ही बताओ... क्या हम लोगों ने कभी इतनी महंगी लिपस्टिक ली थी।...रमा अपनी हम उम्र पड़ोसन से अपनी बहु की बुराई कर रही थी।       पिछले महीने ना जाने कौन सा काजल लाई थी और बड़ी खुश होकर कह रही थी... मांजी यह आखों में फैलेगा नहीं ,जब मैंने दाम पूछे तो ₹300 बताएं। अब हम लोगों को देखो सरसों के तेल के दीए से काजल पार कर बच्चों को लगाया और बड़े किए, आज तक किसी की आंखों में चश्मा तक नहीं लगा है । और यह महारानी  300 रुपए का काजल लगाएगी। मेरा बेचारा अमित तो इनकी इच्छा पूरी करने में ही आधा हुआ जा रहा है। जाने कैसे-कैसे पाउडर, क्रीम ,मसकारा और ना जाने क्या क्या खरीद कर लगाती रहती हैं, मुझे तो सारी मेकअप की चीजों के नाम तक नहीं पता ।  सुबह-सुबह नहा धोकर पहले तैयार होती हैं, घर के काम बाद में करती है। हफ्ते में दो बार अमित के साथ शाम को सज संवर कर  घूमने भी जाएगी।    .... अरे मम्मी यहां बाहर बैठी हो कब से...

कंफ्यूजन

Image
..... और आज क्या बना रही हो खाने में ,एश की सास ने फोन पर पूछा ... कुछ समझ में नहीं आ रहा है मां, सुबह से रोहन को कई चीजें गिना दी ,हर चीज को मना कर रहे हैं। आप ही  कुछ सुझाओ  .... रोहन को आलू की कचौड़ी भिंडी के रायते के साथ बहुत पसंद है ...... पर मुझे आलू की कचौड़ी पसंद नहीं ..... उसे कढ़ी चावल भी बहुत पसंद है ....... चावल खाने से मेरा वजन बढ़ जाएगा .... तो सुखी गोभी आलू की सब्जी, प्याज का रायता और परांठा बना लो ... गोभी की गंध मुझे नहीं पसंद ... तुमने कुछ तैयारी की थी ... कचौड़ी के लिए दाल की पिट्टी तैयार है, मटर और आलू छिले रखे हैं ,दही और बूंदी भी रखा है। ... तुम एक काम करो ,आज तुम मटर आलू की रसीली सब्जी, बूंदी का रायता और दाल की कचोरी बना लो .. हां मां ,एश ने चहकते हुए कहा। स्वरचित साधना सिंह

मेरी बारी

Image
      .....जब मैं दसवीं में पढ़ता था ,तो घर के सभी लोग मेरे पीछे पड़े रहते थे। उनकी कोई गलती नहीं थी ,यह बात मैं आज कह सकता हूं ।आखिर मैं पढ़ाई पर बिल्कुल जो नहीं ध्यान  देता था। मैं मध्यमवर्गीय परिवार से था, चार भाई बहनों में मैं तीसरे नंबर पर था। मेरी तीनों बहनें पढ़ाई में अच्छी थी। मैं एक तो अकेला लड़का..... ऊपर से लड़के लड़की का भेद करने वाला हमारा समाज ........इसलिए मम्मी पापा और तीनों बहनें मुझे पढ़ाई पर एकाग्र चित्त करने के लिए कभी प्यार से समझाते , कभी डांटते और कभी कभी पिटाई भी लगाते थे ।लेकिन मजाल जो कभी कोई हथियार मेरे काम आया हो।  मैं तो बस मस्त मौला अपनी धुन में रहता , कभी छत पर पतंग उड़ाता, कभी दोस्तों के साथ क्रिकेट  खेलता, कभी कैरम खेलता और कभी-कभी मां के साथ रसोई में सब्जी बनाने में मदद करता । सब्जी की रेसिपी जानने और वैसे ही सब्जी बनाने में मुझे बड़ा मजा आता था। लेकिन जैसे ही बात गणित, भौतिक शास्त्र ,रसायन शास्त्र और अंग्रेजी की होती तो मेरा दिमाग सुलगने लगता।     हमारे घर में मम्मी ने बर्तन मांजने के लिए एक कामवाली को रखा हुआ था...

बाजरे का लड्डू

Image
             .......रात गहरी हो चुकी थी और ट्रेन अभी भी कुलधरा स्टेशन नहीं पहुंची थी। मेरा भूख के मारे मेरा बुरा हाल था। बीच-बीच में ट्रेन की सीटी ऐसी लग रही थी जैसे मैं और मेरी भूख पुराने चर्च में लटका हुआ एक घंटा है और यह एक बड़ा सा हथौड़ा है जो कि घंटे को जब चाहे बजा देता है ...टन ..न..न      मेरे डिब्बे में मेरे अलावा तीन और सहयात्री थे ।तीनों ही गांव वाले मालूम पड़ रहे थे।तीनों में से दो ने लाल  चैक वाला गमछा सिर पर लपेट रखा था ।एक के उबड़ खाबड़ खिचड़ी  बाल नजर आ रहे थे, उसकी दाढ़ी भी बेतरतीब ढंग से  बढ़ी हुई थी ,आंखें अजीब सी बड़ी-बड़ी लाल रंग की थी। जब जब वह मुझे देखता ,मैं कुछ सिहर सा जाता था। गमछा वाले दोनों आदमी गंदी-गंदी धोती पहने हुए थे। एक के चेहरे पर अजीब सा मुरदापन था,आंखें एकदम शून्य में थी ।ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वह सांस भी ले रहा है। दूसरा आदमी ना जाने क्या-क्या सोच कर एक छोटी सी ,खौफनाक सी हंसी बीच-बीच में हंसता था और अपना मुंह ऐसे चलाता था कि मुंह में पान चबाया हो।       लगभग 15...

फिफ्टी फिफ्टी

Image
    ..... अजी सुनती हो,दीपक ऑफिस से शाम को वापस आकर बोला।.... अरे आप आ गए, रेवा ने पूछा.... हां भई,तभी तो नजर आ रहा हूं। सुनो आज लंच  टाइम में शर्मा जी ने अपना टिफिन शेयर किया था, क्या सब्जी बनाई थी भाभी जी ने!!.... मजा आ गया। ....अच्छा कभी मेरी सब्जी की भी तारीफ कर दिया करो .......अरे तुम तो रोज ही अच्छी बनाती हो........ तो रोज कर दिया करो ,तारीफ के दो शब्दों से क्या तुम्हारा मुंह घिस  जाएगा   ..!!!ही ही ही.... अच्छा ठीक है, कल से रोज तारीफ किया करूंगा। तुम भी वैसे ही सब्जी बनाना ,मैं रेसिपी पूछ कर आया हूं। ठीक है , रेसिपी बताओ... कद्दू और अंगूर दोनों को फिफटी फिफ्टी लेना, पहले कद्दू उबाल लेना ,फिर उसमें हींग, करी पत्ता, सरसों का दाना, मेथी दाना और साबुत लाल मिर्च से तड़का लगाना ,आखिर में अंगूर डालकर 1 मिनट पकाना।.... ठीक है, कल संडे है तो कल यही बनाऊंगी ।    .....फिर आया अगला दिन..... यानी संडे... दीपक को आज लंच का बेसब्री से इंतजार था क्योंकि उसे कद्दू अंगूर की सब्जी खानी थी।  लंच  टाइम में रेवा ने दीपक के लिए लंच लगाया और फिर...

चल मेरे भाई

Image
लो  किताब और करो पढ़ाई ना किसी से झगड़ो ना करो लड़ाई!!! मोनू बेटा झट से नहाकर  खाने आओ दूध मलाई सोनू बेटा जल्दी आकर  परे करो छोटी चारपाई!!! लेकर बस्ता जाओ स्कूल हाथ पकड़कर तुम भाई- भाई पापा अभी सबेरे तड़के ओढ़े सो रहे है रजाई!!! क्यारी में फूल मुस्काए लेने पहुंची कमली की ताई अम्मा पका रही हैं समोसे पूड़ी, भाजी, चटनी - खटाई!!! आज भोर से टामी भौके ना जाने क्या बात है भाई भाजी वाला बुला रहा है ले लो तोरई, लौकी, चौलाई!!! पूसी बिल्ली दौड़ दौड़ कर चूहे के पीछे उकताई गौरी गैया रंभा रही है मुझको चारा दे दो भाई!!!            स्व रचित           साधना सिंह

राजा बेटा

Image
राजा बेटा   राजा बेटा कोई नहीं है तेरे जैसा आंखे खोलो और जग जाओ राजा बेटा    राजा बेटा   । कहता सूरज अब गुस्से में इसे जगाओ और नहलाओ करे व्यायाम बने ताकतवर ये जो तेरा       राजा बेटा । लाल मेरा जब उठ जाएगा दूध   जलेबी     खाएगा खूब हंसेगा  खूब खेलेगा मां का शेर  कहलाएगा   ।                स्वरचित                साधना सिंह