आरूषि!!!
आरूषि अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी।सभी सुख उसे बचपन से मिले और क्यों न लाड प्यार मिलता शादी के सालों साल बाद जो पैदा हुई थी।वो भी तब जबकि उसके माता-पिता ने संतान की उम्मीद भी खो दी थी। लेकिन शिक्षा दीक्षा में कोई कभी नहीं रखी।बहुत अच्छे संस्कार दिए थे।बोल ऐसे मीठे कि बरबस अपनी ओर ध्यान खींच ले।केन्द्रीय विद्यालय से पढ़ाई की और यूनिवर्सिटी से ।देखने में बहुत सुन्दर सौम्यता चेहरे पर मुस्कान के साथ आकर्षक लगती। आरूषि के माता पिता ने उपयुक्त जीवन साथी चुना जो प्रोफेसर था नाम था राज और दिखने में आकर्षक।स्वभाव से शान्त सुलझा हुआ।परिवार में माता पिता और एक छोटी बहन थी। सभी कुछ अच्छा चल रहा था पर आरूषि को बच्चे की तमन्ना थी पर ईश्वर के आगे विवश।लोग अपनी हरकतों से बाज कहाँ आते?पूछते बच्चे के लिए।जब छोटी ननद के विवाहोपरान्त एक बेटा और एक बेटी हो गये तो नाते रिश्तेदार ताने और छीटाकशी करने लगे।आरूषि और राज परेशान हो गये सभी इलाज करवा लिए,सभी पूजा पाठ । जिसने जो बताया सब किया अब दोनो अधेड़ उम्र के पड़ाव में थे उम्मीद खत्म होने लगी निराश हो चुके थे पर....आरूषि की तमन्ना कहीं न कहीं जिन्दा ...