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बारिश की बूंदें

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बारिश की नन्हीं- नन्हीं सी बूँदें जब  भी बसूंधरा पर पड़ती हैं करती हैं तृप्त धरा को मन का मौसम बदलती हैं। देखकर टिप-टिप गिरती बून्दें दिल अक्सर तुझे सोचने लगता है साथ तुम्हारा मिला जाता जो बस अरमान सजाने लगता है। ये छोटी-छोटी सी बूंदें जब तेरे चेहरे पर गिरती छूकर तेरे रक्त अधरों को सूखी माटी में मिलती। महकाती इस वसुधा को हृदय की अतृप्ति बढ़ाती बनके मोरनी नाचतीं छमछम दिल की धड़कन बढ़ातीं। देखकर तुमको मन मेरा घायल पक्षी हो जाता चातक जैसा भीगता पल-पल मन की प्यास बढ़ाता। आशा झा सखी जबलपुर (मध्यप्रदेश)

आम की महिमा

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आम फलों का राजा है सबके मन को भाता है मीठे,रसीले आम देखकर सबका मन ललचाता है नीलम, अल्फांसो,तोतापुरी दशहरी मुँह में पानी लाता है मलीहावादी आम तो देश संग विदेशों में भी धूम मचाता है विविध व्यंजन बनते आम से आमरस  स्वाद बढ़ाता है भोजन फीका लगता है जब तब अचार पूर्णता लाता है आम पना से लू भागती ऊष्णता से निजात दिलाता है कच्चे आम का विविध प्रयोग औषधि का काम कर जाता है संग लवण के कच्ची कैरी जब नव विवाहिता खाती है परिजनों के अंतर्मन में खुशी की लहर दौड़ जाती है शुभता की सूचक आम्र पत्तियाँ शुद्धता परिवेश में लाती हैं आम्रकाष्ठ पर यज्ञ हवन से दूषित विकिरण दूर भगाती हैं मातृ भाषा के विकास में आम्र भी भूमिका निभाता है आम के आम और गुठलियों के दाम ये कहावत खूब लूभाता है आम्र के एंटीऑक्सीडेंट हमको घातक बीमारी कैंसर से बचाते हैं विटामिन ए,सी,और फाइबर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं फल है मौसमी आम रसीला इसको जीवन में अपनाओ रसना के स्वाद के साथ ही स्वास्थ्य का भी लाभ पाओ।। आशा झा सखी जबलपुर ( मध्यप्रदेश)

आशा का दीपक

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छा जाये घनघोर अँधियारा तब आशा का दीपक जलता है उम्मीद की मध्यम लौ से ये गहन तम को भी हरता है घिरता है चहूँ तमस गहरा जब माहौल अराजक हो जाता है घिरता अहंकार हर तरफ अधर्म तांडव मचाता है बोध का एक नन्हा सा दीपक एक उम्मीद जगाता है होगा सब अच्छा भविष्य में मन में विश्वास जगाता है आस की ये नन्ही सी किरण ऐसा चमत्कार दिखाती है कर्म पथ पर आगे बढ़ने का मार्ग दीप्त कर जाती है आशा के इस दीपक से ही हम नव निर्माण कर पाते हैं उम्मीद की एक किरण से ही मायूसी का कुहासा पार कर जाते हैं सबको अपने भीतर एक आस का दीप जलाना है इस उम्मीद के दीप से ही जीवन रौशन कर जाना है।। आशा झा सखी जबलपुर  (मध्यप्रदेश) दैनिक प्रतियोगिता हेतु

साजिश

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कुछ तो साजिश  खुदा की भी रही होगी जो उसने हमें  मिलाया कुछ तो उसने भी चाहा होगा कि बने तू मेरा हमसाया किसी से किसी का मिलना यूँ ही नहीं होता है जिससे उस जन्म का नाता हो उससे ही दिल मिलता है मिलते तो हैं लाखों जिंदगी में पर हर किसी से दिल नहीं मिलता है ये मिलता है सिर्फ उसी से जिसे खुदा ने हमारे लिए बनाया है जिसे वो हमारे लिए बनाता है उससे मिलाने की साजिश  फिर खुद ही बनाता है।। आशा झा सखी जबलपुर  (मध्यप्रदेश) प्रतियोगिता हेतु

नयी सोच

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सार्थक और सहज दोनों ही स्नातक के प्रथम वर्ष में हैं।जब भी सार्थक परेशान होता है तो सहज से अपने मन की बात करने उसके घर चला आता है।आज भी घरवालों की बातें से दुखी हो अपने परम मित्र सहज के   घर  आ उससे  बात करने लगा।सहज ने उससे पूछा- क्या बात है सार्थक,तुम इतने उदास क्यों हो?सार्थक उससे बोला- क्या बताऊँ यार, मेरे घर वाले कितना भी आधुनिक होने का ढोंग कर लें पर रहेंगे वही दकियानूसी विचार वाले। सहज ने कहा-क्या हुआ,ऐसा क्यों बोल रहे हो? सार्थक बताने लगा, सुहास भाई के अचानक चले जाने के बाद सबको भाभी को दो वक्त की रोटी खिलाना भारी पड़ रहा है। सब उनको जैसे-तैसे घर से भगाना  चाहते हैं।आज पापा ने भाभी के लिए एक लड़का देखा है।उसकी शक्ल भी ढंग की नहीं,ऊपर से खाने-पीने का ऐब भी है।उम्र का अंतर भी बहुत ज्यादा है उनके बीच। दो बच्चों का पिता भी है।बताओ जरा ये क्या बात हुई? यदि लड़की विधवा है तो फिर उसे किसी भी गये-गुजरे से बाँध दिया जाएगा क्या?क्या उनके योग्य कोई अविवाहित नहीं मिल सकता? पता है सहज  यदि मैं इस योग्य होता तो जरूर कर लेता उनसे शादी।पर किसी अयोग्य से उनका वि...

जीवनसाथी

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जीवनसाथी साथ तुम्हारा  सदा ही मन को भाता है छूट जाते जब रिश्ते सारे ये अंत तक साथ निभाता है जीवन संध्या में आते-आते जब रिश्तों का साथ छूट सा जाता है ससुराल-मायका पास नहीं होता बड़ों का साया विलग हो जाता है बेटियाँ  जब  विदा हो जाती बेटे अपनी नीड़ में खो जाते हैं तब साथ निभाते एक दूसरे का जीवनसाथी ही काम आते हैं लाख शिकायतें हों एक-दूजे से पर हर बात ध्यान में रखते हैं प्रेम को पल-पल फिर जीते आपस के साथ में मग्न रहते हैं बातों ही बातों में खूब छेड़ते पुरानी बातों में समय को खोजते हैं ऐसे ही प्यार-मनुहार से अपनी हस्ती और मस्ती जिंदा रखते हैं हो जाये एक भी दूर कुछ पल दूसरा बेचैन  सा  हो जाता है हो जाये कुछ दुर्भाग्य  से यदि तो दूसरा अस्तित्वहीन हो जाता है।। आशा झा सखी जबलपुर  (मध्यप्रदेश)

नसीब का खेल

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पाना और खोना ये सब भाग्य,नसीब का खेल है सिर्फ भाग्य भरोसे न रहना ये  ही अपना उसूल है। नसीब में जो लिखा हो मिलना तो वही होता है भाग्यलिखे को पाने को कर्मधारा में गोता लगाना है। नसीब का खेल भी बड़ा  अजब,गजब, निराला है इसने राजा को रंक और रंक को राजा बना डाला है। पर फिर जीवन में कर्म भाग्य के आड़े आता है न करे जो कर्मानुसार तो भाग्य भी आधा रह जाता है। करते हैं जो कर्मानुसार तो भाग्य भी दोगुना हो जाता है राजा को भी महाराजा बना जाता है ऐसे नसीब अपना खेल दिखाता है। भाग्य के इस खेल में कर्म का साथ कभी न छोड़ो करो अपना कर्म भरपूर सबकुछ भाग्य पर छोड़ो।। आशा झा सखी जबलपुर (मध्यप्रदेश)

💐भ्रष्टाचार का दानव💐

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भ्रष्टाचार का दानव हर जगह पैर पसार रहा नैतिकता और सच्चाई को दीमक की तरह खा रहा कोई दफ्तर हो या ऑफिस ऐसा कोई भी बचा नहीं जहाँ दस्तक न दी हो इसने इस दानव का पैर जमा नहीं बिना दक्षिणा दिये फाइल बढ़ जाये ऐसा तो कभी हुआ नहीं बढ़ ही रहा सुरसा की तरह ये बाल भी बाँका इसका हुआ नहीं इस सुरसा रूपी दानव का क्या कभी अंत हो पायेगा? नैतिकता, सत्य के रवि का क्या  कभी उदय हो पायेगा? हर मानव को अपने अंदर बैठा राम जगाना होगा नैतिकता और सत्य के शस्त्र से इस दानव को मारना होगा इस भ्रष्टाचार के दानव से जब देश हमारा मुक्त होगा फल मिलेगा ईमानदारी का देश प्रगति पथ पर अग्रसर होगा।। आशा झा सखी जबलपुर (मध्यप्रदेश)

शहरों के आँगन

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आधुनिकता की  आड़ में छूट गए घर के आँगन लिविंग,डाइनिंग हॉल में बदल गए घर के आँगन बच्चों की किलकारी से गुलजार थे कभी जो आँगन सबके सुख-दुख साँझा करते अम्मा-बाबूजी का जमता आसन घर की अखंड एकता को दर्शाते परिवार को सम्मान दिलाते आँगन कभी -कभी घर की फूटन को कर खड़ी दीवार, दिखाते आँगन काल चक्र के खेल में उलझ कटते-बंटते रहे घर के आँगन होते छोटे-छोटे अब तो घर से एकदम विलुप्त हुए आँगन।। आशा झा सखी जबलपुर (मध्यप्रदेश)

तेरी मुस्कान

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तेरी एक मुस्कान पर ही मैं दिल अपना हार गया इस भोली, प्यारी,स्मित सी मुस्कान में तो खो गया अधरों पर छायी,मुस्कान मधुर  मेरी सुधबुध  ही गंवा देती है  शांत सरोवर से मेरे  हृदय में एक तूफान  सा मचा  देती है तेरी एक मुस्कान का जादू मेरे अन्तस् पर कुछ यूँ पड़ता है हारा,थका हुआ सा मन मेरा ताजे गुलाब सा खिलता है ये मुस्कान सदा रहे यूँ ही प्रयास सदा ये ही रखना सदैव  मुस्कुराती रहना और मुस्कान से प्रेरणा मुझे देना।। आशा झा सखी जबलपुर (मध्यप्रदेश)

💐💐चाय💐💐

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☕☕☕☕☕☕☕☕☕ देखकर तुमको  मन ललचाये दिन-रात तुम्हारा ही ख्याल आये साँवली सी ये सूरत तुम्हारी मेरे ख्वाबों ख्यालों में छा जाये तुमसे उठती भीनी सी खुशबू मुझको अपना दीवाना बनाये सुबह- सवेरे तेरे दर्शन से मेरा सुना दिन बन जाये ज्यों ही लगाऊँ तुझे होंठों से मेरा अंतर्मन मीठा हो जाये नहीं मिले जो साथ तेरा जीवन आगे बढ़ न पाये तुम कितनी जरूरी हो जीवन में "चाय" बिन तेरे एक पल रहा न जाये। आशा झा सखी