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मन

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भरता नहीं मन तस्वीरों से बता क्या करूँ लाख कोशिशों का नतीजा केवल तस्वीर ll तेरी यादों का सजदा करूँ या सौदा भरता नहीं मन तस्वीरों से बता क्या करूँ ll अक्सर हांथों पर तेरा नाम लिखा करती हूँ तू ही बता अब इस मेहंदी का क्या करूँ ll कुछ ख़ाब अधूरे हैं इन आँखों के तू ही बता तेरी यादों का क्या करूँ ll भरता नहीं मन तस्वीरों से बता क्या करूँ... ✍️ज्योति प्रिया

ख़त लिख रही हूँ अब

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ख़त लिख रही हूँ अब  लिखूँ भी तो क्या लिखूँ ll अरसा हुआ देखे अब  सोचूँ भी तो क्या सोचूँ ll जो अनजान हूँ तुझसे  ख़ुद को क्या पहचान दूँ ll तन्हाई ही मेरा अब हमसाया है अब तुझे हमसफ़र कहूँ तो क्या कहूँ ll हिज़्र लिखूँ, वस्ल लिखूँ अब तुझे  लिखूँ भी तो क्या लिखूँ ll जो कुछ बचा नहीं दरमियाँ हमारे  पास रखूं भी तो क्या रखूँ ll ख़त लिख रही हूँ अब  लिखूँ भी तो क्या लिखूँ ll अरसा हुआ देखे  अब तुझे  सोचूँ भी तो क्या सोचूँ ll ✍️ज्योति प्रिया, बेगूसराय