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Showing posts with the label हरिसंकर गोयल

चाय और कॉफी

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चाय की लोकप्रियता से कॉफी बुरी तरह जल गई "ये सबकी चहेती क्यों है" यही बात उसे खल गई  चाय का रूप रंग कितना गोरा और लाल चट्ट है  कॉफी कितनी काली कलूटी और बड़ी मुंहफट्ट है  चाय और कॉफी दोनों बहनें थीं मगर जुदा जुदा थीं  "गरीब चाय" से "कुलीन कॉफी" बहुत खफा खफा थी  कॉफी अमीर खानदान में ब्याही थी इसलिए घमंडी थी  चाय की ससुराल गरीब थी इसलिए उसकी चाल मंदी थी  चाय का सरल, मधुर स्वभाव सबके मन को भा गया  इसलिए बच्चे, बूढे, जवान सबका दिल उसपे आ गया  और तो और महिलाएं भी उसे बहुत पसंद करने लगी  सुबह शाम हर घर, दुकान में उसकी ही धुन बजने लगी  चाय का स्वाद सबके होठों को इस कदर भा गया  जली भुनी कॉफी का गुस्से से सिर चकरा गया  चाय की "डिमांड" से वह मन ही मन खदकने लगी  गुस्से के कारण "झाग" से अपने पैर पटकने लगी  जितना वह गुस्सा करती उतनी ही कसैली हो जाती थी इसीलिए वह गुस्सैल , खड़ूस लोगों के मन को भाती थी  चाय की मिठास और सौंदर्य का जादू सिर चढ़ कर बोला  उसे पाने के लिए सबने अपने दिल का दरवाजा खोला  ऊंचे खानदान,...

बंद दरवाजे

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महल के बंद दरवाजों के पीछे  बंद पड़ी हैं, अनगिनत कहानियां  जिनमें से कुछ चर्चाओं में आ गई तो कुछ सुनी जाती हैं लोगों की जुबानियां  कुछ प्रेम भरी, कुछ दर्द देने वाली  कुछ विरह की तो कुछ गुदगुदाने वाली  कुछ बेशर्मी की , कुछ बेहयाई की  कुछ वफाओं की, कुछ बेवफाई की  कुछ षडयंत्रों की , कुछ विश्वासघात की  कुछ पारिवारिक संबंधों पर कुठाराघात की  नारियों पर जुल्म के असीम प्रहार की  निर्दोष, मासूमों के निर्मम संहार की  केसरिया बानों की वीरता की उनके बलिदान की  वीर क्षत्राणियों के अद्भुत जौहर महान की  मीराबाई की भक्ति, प्यार की शक्ति की  पन्ना धाय की अप्रतिम स्वामीभक्ति की  दासियों को रखैलों की तरह इस्तेमाल की  तलवार की नोक पर होने वाले बवाल की  सौतेली माता के द्वारा अबोधों पर अत्याचार की  सिसकने को मजबूर होते देह व्यापार की  धर्म के नाम पर कटते हुए नरमुंडों की  ताकत के बल पर मनमानी करते मुस्टंडों की  अपने बेटे की खातिर किसी को वन भेजने की  अपनी ही कुलवधू को सभा में निर्वस्त्र करने क...

जन्नत और जेल भाग 1

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आज जन्नत में बड़ी मायूसी छाई हुई थी । चारों तरफ सन्नाटा पसरा पड़ा था । ऐसा लग रहा था जैसे वहां कोई बम फटा हो और सबके चेहरों के नूर को उड़ा ले गया हो । मुर्दनी सी छाई हुई थी । सबके चेहरे लटके हुए थे । हमेशा खिलखिलाने वाली हूरें जार जार रोये जा रहीं थीं । हूरों की रानी का तो रो रो कर बुरा हाल हो गया था । उसकी दासी बार बार उसके आंसू पौंछती मगर आंसू थे कि थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे । बड़ा गमगीन माहौल था । हृदय विदारक दृश्य था ।  बेचारी दासियों को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्या हो गया है जिसके कारण यह जन्नत शमशान सी प्रतीत हो रही है । कोई कुछ बताने को तैयार ही नहीं था । बस, सब रोये जा रहे थे । अंत में एक दासी ने दूसरी दासी जो शक्ल सूरत से थोड़ी समझदार लग रही थी, से पूछा  "आज क्या हो गया है इन हूरों को ? ऐसी मुरझाई मुरझाई सी क्यों पड़ी हैं ? और दिन तो बड़ी खिलखिलाती रहती थीं । सजती संवरती रहती थीं । अपने हाव भावों से सबको आकर्षित करती रहती थीं । मगर आज तो ये लगातार रोये जा रही हैं । ऐसी अधमरी सी पड़ी हैं जैसे कुत्तों के द्वारा फफेड़ी गई कोई बछिया हो ।  कोई मर गया है क्या य...

मेरे गणतंत्र का सम्मान होना चाहिए

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बड़ी कुर्बानियों से मिली है ये आजादी बड़ी मेहनत से बना है अपना संविधान बड़े परिश्रम से खिला है लोकतंत्र का बाग  इसे संवारने का प्रयास होना चाहिए  मेरे गणतंत्र का सम्मान होना चाहिए ।  कुछ लोग एकता नष्ट करने पे आमादा है  धर्म जाति के नाम पे लड़ाने पे आमादा हैं  भाषा, प्रांत के नाम भड़काने पे आमादा हैं ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए मेरे गणतंत्र का सम्मान होना चाहिए ।  सबसे ऊपर देश है ये बात ध्यान में सदा रखना  मेरा मुल्क मेरा अभिमान है, भाव मन में रखना देश की खातिर जीना देश की खातिर मरना  देश के लिए कर गुजरने का जज्बा होना चाहिए मेरे गणतंत्र का सम्मान होना चाहिए ।  आप सभी को गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां ।  जय हिंद 🇧🇬 💐💐💐🙏🙏🙏

इंसाफ मैं करूंगा भाग 1 अदालत

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( गोरखपुर में आज ही अदालत में बी एस एफ के सेवानिवृत्त जवान ने अपनी नाबालिग बेटी के बलात्कार के आरोपी को गोली मार दी जिससे उसकी मौत हो गई । इस सच्ची घटना के आधार पर यह कहानी प्रस्तुत है )   अदालत का जमादार सबको शांत रहने के लिए कह रहा था । वह बता रहा था कि जज साहब बस अदालत में बैठने ही वाले हैं । रीडर भी सतर्क होकर पत्रावलियां पलटने में लगा हुआ था । बयान कलमबद्ध करने वाला बाबू अपना कंप्यूटर लेकर एलर्ट की पोजीशन में था । इतने में जज साहब के चैंबर से निकल कर एक दरबान ने अदालत में उपस्थित होकर घोषणा की । "ऑर्डर ऑडर । जज साहब पधार रहे हैं" । जज साहब के सम्मान में अदालत में उपस्थित समस्त लोग खड़े हो गए ।  जज साहब "सर्वशक्तिमान" की तरह पधारे और एक निगाह चारों तरफ फिराई । शायद यह सुनिश्चित कर रहे होंगे कि कहीं कोई व्यक्ति अदालत में बैठा तो नहीं रह गया है । अगर किसी ने बैठे रहने की गुस्ताखी की तो क्यों नहीं उसे अदालत की अवमानना के मामले में जेल भेजा जाये ? जो अदालत राष्ट्र गीत के गायन के समय खड़े नहीं होने वाले व्यक्ति को राष्ट्र गीत और राष्ट्र ध्वज का अपमान का अपराधी ...

मकसद

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"सुनो , जयपुर से आते समय पनीर के घेवर लेते हुए आना" । अदिति ने अपने पति विवेक से फोन पर कहा "कल 'हरि' भाईसाहब आने वाले हैं ना । उन्हें पनीर के घेवर बहुत पसंद हैं" । अदिति ने विवेक को यह भी बता दिया कि कल हरि भाईसाहब भी आने वाले हैं । "अच्छा मैडम जी , इतना खयाल रखतीं हैं , भाईसाहब का । हमारा तो खयाल आज तक भी नहीं किया आपने" । विवेक उसे छेड़ते हुए बोला ।  "वो भाईसाहब कितने आशीर्वाद देते हैं हमें ? आखिर उन आशीर्वादों के लिए खयाल तो रखना ही पड़ेगा ना । और आप हमें देते ही क्या हैं ? आज तक तो कुछ दिया नहीं । फिर आपका खयाल क्यों करें" ? अदिति ने उलाहना देते हुए कहा ।  "अरे मैडम । सब कुछ तो दे दिया आपको । हमारे पास तो बस एक दिल ही था उसे हमने आपके कदमों तले बिछा दिया । अब उससे बड़ी चीज तो कोई और है नहीं हमारे पास जो हम आपको दे सकें । आप ही बता दो कि हम आपको और क्या दें" ? विवेक के शब्दों में दुनिया भर का प्यार घुला हुआ था ।  "बस, आप तो जल्दी से आ जाओ । यही हमारे लिए सबसे बड़ा तोहफा है । आपके बिना एक एक पल कैसे कटता है , यह ...

विजय के नये नये कीर्तिमान गढ़

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माना कि अड़चनें ढ़ेर सारी हैं  बाधाओं की फौज बड़ी भारी है  राह रोके खड़ा है दुश्मन जमाना एक कदम चलना भी दुश्वारी है । चारों ओर व्याप्त घना अंधकार हर तरफ पसरा हुआ हाहाकार  निराशा की कोटर में बैठा हुआ  साहस का ये अपना पूरा संसार  सूने मन में दीप जलाना होगा  सिर पर कफन सजाना होगा  मंजिल को जाने वाली राह में  एक  एक  कदम बढ़ाना होगा  ऐ दिल , हिम्मत रख , आगे बढ़  सफलता के  कठिन सोपान चढ़  यही तो  परीक्षा  की घड़ी है तेरी  विजय के नये नये कीर्तिमान गढ़  हरिशंकर गोयल "हरि"