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बंधन रिश्तों का

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बंधन खूबसूरत भी हैं और मजबूत भी, फर्क तो सिर्फ रिश्तों का होता है,मनचाहे रिश्तों से बनें तो तकदीर, और अनजाने रिश्तों से बनें तो मुकद्दर। एक ऐसा रिश्ता जो जज़्बात से जुड़ा है, मिलना बिछड़ना तो नसीब की बात है। ये वो बंधन हैं जो हमारी खुशी और चाहत के अहसास से जुड़े हैं। रिश्ते और बंधन एक सिक्के के दो पहलू हैं, कभी बंधन बनाते हुए रिश्ते बदल जाते हैं और  कभी रिश्तों के साथ चलते हुए बंधन बदल जाते हैं। एक खूबसूरत रिश्ता हजार बंधनो से बेहतर है, इसलिए जिंदगी में हमेशा ऐसे बंधन चुनो जिनका रिश्ता हमेशा खूबसूरत हो, कोई टूटे तो उसे सजाना सिखों, कोई रूठे तो उसे मनाना सिखों, रिश्ते तो मिलते हैं मुकद्दर से, बस उन्हें खूबसूरती से निभाना सिखो। प्रिया धामा

हम तुम

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करवाचौथ का प्यारा यह त्यौहार, जो लाए खुशियां हज़ार, दुआ है यह हमारी, मनाएं यह त्यौहार हम तुम साथ हरबार और सलामत रहे हमारा परिवार। आपका साथ मुझे जीवनभर मिले, हर सुख दुख में हम तुम सदा रहे साथ। उम्र तुम्हें मेरी भी लग जाए, काश प्रेम स्नेह से प्रकाशित हो दुनिया हमारी। करवाचौथ है बहुत सुहाना, अगर मैं रूठ जाऊं तो तुम मुझे मनाना, तुम्हारी हर ख्वाहिश को मैंने है अपना माना। खुदा करे हम एक दूसरे से कभी ना रूठे और यूं ही एक होकर सारी जिंदगी बिताएं। एक पल के लिए भी ना छूटे हाथ तुम्हारा, मेहंदी का लाल रंग हमारे प्यार की गहराई दिखाता है, माथे पर लगाया हुआ सिंदूर रब की दुआएं दर्शाता है, गले में पहना हुआ मंगलसूत्र हमारा मज़बूत रिश्ता बताता है। जोड़ी तेरी मेरी कभी ना टूटे, हम तुम साथ जन्म साथ निभाएंगे, हर पल की मिलकर खुशियां मनाएंगे। "खुशी से दिल आबाद करना, गम को दिल से आज़ाद करना, बस एक गुज़ारिश है आपसे, ज़िंदगी भर मुझे ऐसे ही प्यार करना।" प्रिया धामा

खालीपन

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सब कुछ हो कर भी कुछ ना होने का एहसास है, अजब खालीपन है। दिल के अंदर जैसे कोई है ही नहीं। इसके अंदर मानो कुछ अलग ही तूफान चल रहा है। मैं वह नहीं जो सबको दिख रहा है। जो घट रहा है मुझ में वह मैं हूं, जो बढ़ रहा है वह तुम हो। अजब अकेलापन है, सब है, फिर भी खालीपन है। न खुश हूं, न उदास हूं, न चाहत है, न ही शिकायत, न मोहब्बत है और न ही खफा हूं, न जुनून है, न कोई फरियाद बाकी है। शोर सा भरा है, खामोश सा सुनापन है अधूरा सा खालीपन है। ये खालीपन एक ऐसा सन्नाटा है जो बहुत शोर करता है। सब कुछ है मेरी ज़िन्दगी में मगर कुछ तो खालीपन सा है, शायद मुझे वो सपना नहीं मिला अब तक जो मैं खुली आंखों से देखना चाहती हूं। बहुत ज़रूरी है ज़िन्दगी में थोड़ा खालीपन क्योंकि यही वो समय है जहां हमारी मुलाकात हमसे होती है। ठहर सा जाता है एक खालीपन जो हम भरने की कोशिश करते हैं। पढ़ सकते हो तो पढ़ लो, आज मैंने अपना खालीपन लिखा है। प्रिया धामा

वक्त

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जीवन का सबसे बड़ा गुरू वक्त होता है क्योंकि जो वक्त सिखाता है वो कोई नहीं सिखा पाता। बुरा हो वक्त तो सब आजमाने लगते हैं। बड़ो को छोटे भी आँखे दिखाने लगते हैं। वक्त बदलते देर नहीं लगती, ये सब कुछ भुला भी देता है, सिखा भी देता है। कितना भी समेट लो हाथों से फिसलता ज़रूर है, ये वक्त है दोस्तों बदलता ज़रूर है। वक्त सबको मिलता है ज़िन्दगी बदलने के लिए, पर ज़िन्दगी नहीं मिलती वक्त बदलने के लिए। संवारा वक्त ने उसको जिसने वक्त का मतलब समझा, वरना वक्त का महत्व तो बस वक्त का मारा ही बता सकता है। प्रिया धामा

सच्ची सहेली

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कागज़ और कलम सच्ची सहेली हैं। लिखती तो कलम है, पर कहानी कागज़ पर बन जाती है। दिल की कहानी जो दिमाग से बन जाती है वो प्यारी कलम, जो शब्दों के मोती पिरोकर कागज़ पर बिखर जाती है। कोई इस कलम के जरिए अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है। कोई किसी के दिल में उतर जाता है, किसी के शब्द दिल को छू जाते हैं। किसी की रचना मन को प्रफुल्लित कर देती है तो किसी की शब्दावली दिल झकझोर कर रख देती है। कोई अपनी कलम के द्वारा दिलो पर छाप छोड़ देता है तो कुछ कहानियों में कुछ राज़ छुपे होते है। एक ऐसी कलम जो कागज़ पर रंग बिखेर देती है। एक ऐसी सहेली जो कभी अलग हो जाए तो किसी के काम नहीं आती और साथ हो तो दिल जीत लेती है। प्रिया धामा