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Showing posts with the label राजेश "बनारसी बाबू"

🎗️ विश्व एड्स दिवस🎗️

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********************************* एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम’ एड्स का पूरा नाम है। एड्स एक जानलेवा बीमारी हैं स्वयं एड्स मृत्यु का दूसरा नाम है। एड्स इंसान को जीते जी मरने को विवश कर देता है। एड्स होते ही समाज क्या सारी दुनिया ही हमें कलंकित करने लगता है। यह बीमारी एच.आई.वी. वायरस से होता है यह बीमारी मनुष्य के प्रतिरोधक शक्ति को कम कर देता है एड्स एच.आई.वी. पॉजिटिव गर्भवती महिला से उसके बच्चे को भी हो सकता है। एड्स संक्रमित रक्त के प्रयोग करने से भी हो सकता है एच.आई.वी. से संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित संभोग करने से भी हो सकता है। एड्स बीमारी दुनिया के सामने घातक बीमारी के रूप में उभरकर आया है। एड्स साक्षात मौत का रूप बनकर पूरी दुनिया पर छाया है एड्स बीमारी का कोई इलाज नही है। एड्स बीमारी में छुपा जैसे गहरा कोई राज एड्स बीमारी को हल्के में लिया नही जा सकता एड्स बीमारी से समझौता किया नही जा सकता। एड्स बीमारी का एकमात्र इलाज बचाव है। एड्स बीमारी से बचाव हो यही इसका प्रस्ताव है। एड्स बीमारी से खुद को बचाए एड्स के प्रति लोगो में जागरूकता लाए सावधानी हटी दुर्घटना घटी यह शब्द...

बांझिन औरत का दर्द

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बांझ शब्द ही हमे झकझोरता है यह रोती चीखती असहाय अबला के दर्द को दर्शाता है। हम उस देश के वासी जिस देश में गंगा के जल में पवित्रता है। हम उस देश के वासी जहां सबके लिए एक सामान सूर्य निकलता है हम उस देश के वासी जहा हिंदू मुस्लिम सब में भाई और बहन सी बंधुता है। लेकिन दुख तब होता है जब हम बांझिन को समाज अछूत कहता है चूडी बेच के पेट पालती हूंँ भगवान सबके ताने सह के दिन काटती हूंँ भगवान मेरे हाथो से चूड़ी पहन के सब सुहागन पूजा का फल पाती है मांँ फिर भी सारा समाज हमे अशुभ मनहूश बुलाता है मांँ अब दुख सहन नही होता है मांँ जब सब बांझिन बोले तो बहुत दुख होता है मांँ मै बांझिन हूंँ शायद यही मेरी गलती है इस मनहूश पापीन की कहा कोई गिनती है पानी पीने गई कुएं पे से भगाया गया सत्यानाश हो तेरा, तेरे छूने से कुएं का जल सुख जाएगा ऐसा मुझे बताया गया मेरी कोख सुनी है शायद यही मेरी गलती है  कुलछीन भाग यहां से क्यूं यहां बैठी है पूजा में कभी शामिल न होना अपनी नजरे इधर ना फेरना जब जब मैं किसी गर्भवती स्त्री को देखती हूंँ सपनो के परदे में अपने बच्चे के चेहरे को बुनती हूंँ जब जब आंँगन में लोगों के बच्चों को ...

🙏 माँ का शहीद लाल🙏

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************************ माँ ये कैसा संदेह आया है? भाई के शहीद होने का संदेशा आया है? ये रास्ते कैसे सहमे हुए लग रहे है ? खेत खलिहान पे जैसे टोटे पड़े है? बाग बगीचे जैसे खोए पड़ें है? भैया के आने का रास्ता देख रहे हैं। क्यूं ये घर ये बस्ती क्यूं मुर्दा सा लगे है? ये फिजा में कैसी लाली छाई है? ये सूरज के तपन में कैसी नमी आई है? ये भाभी कैसी चूड़ी तोड़ रही? मांँ आज तेरी जैसे ममता टूट गई। क्यूं आज मेरी राखी भी रूठ गई? ये सन्नाहट क्यू छा गया यहां?  क्यूं इतना अशवकून हो गया यहां? मेरे भैया का शव को निकालो जरा? भैया थोड़ा सा बस मुस्कुराओ जरा? तिरंगे से शव को थोडा लपेटो जरा। कैसे बेरहम दुश्मनो ने मार दिए? हर जगह भैया के शरीर पे वार किए। बच्चे को घर मे ले जाओ जरा ? मांँ भैया के अर्थी को सजाओ जरा। भाभी को भी थोडा समझाओ ज़रा। भाभी भैया को अब यूं न देखो जरा? बिटिया तेरा ये भैया क्यू नही बोल रहा? ये मातम कैसी चारो ओर सुनाई है? ये चीख से कान मेरी फट आई है। देखो आज कितने सुहागीन की मांग आज उजड़ ये आई है? ना जाने कितनी सुहागन थी आज विधवा बनके आई है? ना जाने कितनो की घर आज उजड़ गई है ना? चंद पैसे ...

मासिक धर्म और समाज का नजरिया

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********************************** ये ऊपरी अंधेरी कोठरी से कैसी कंहरने की आवाज आई है? ये कैसी चिल्लाहट और रोने की चीख सुनाई है? लगता आज अपनी छोटी बिटिया को मासिक धर्म है आई है? मेरी बिटिया तुझे क्या क्या हो रहा है? नहीं मांँ बस थोड़ा सा दर्द हो रहा है। ऐसा क्या बात है जो तुझे शर्म आता है? नही मांँ बस अब समाज की सोच पे बस हमे रोना आ जाता है। जैसे लगता मासिक धर्म होना पिछले जन्म का बुरा कर्म होना नजर आ जाता है। नही मेरी प्यारी मुन्नी हमे तो लोगो के मानसिकता पे बस गुस्सा ही आ जाता है। जिस खून को वो गंदा है कहते उसी खून के इकट्ठा होने पे आज मर्द बन जाता है। माँ ये पांँच दिन के किसी अभिशाप से लगते है कभी लोग आचार मत छुओ तो कभी लोग मंदिर ना जाओ ना जाने क्यू हमे पाप सा  समझते है। हम भी किसी कोने में रोते ही रहते है। ये मुश्किल दिन हम किसी से ना कहते है। नही बेटा ये तो प्राकृतिक देन है इसका कोई छुआ छूत से ना कोई लेन देन है। बेटा मासिक धर्म आए तो शर्म मत करना  मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ सेनेटरी पैड प्रयोग करना। मांँ हमें ही क्यों हर महीने मरना होता है? मरते हम हर महीने फिर भी हमे प्रति...