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Showing posts with the label संगीता सिंह

अग्निपथ की राह में अग्निवीर।

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भारत सरकार ने सेना में युवाओं की भर्ती के लिए 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना लागू की है।इस योजना के आते ही पूरे देश में विरोध शुरू हो गया। आखिर क्या है ?ये अग्निपथ योजना ,जिसके विरोध में भावी अग्निवीरों ने राष्ट्रीय संपत्ति को अग्नि के हवाले कर दिया। इससे क्या साबित होता है ,जिसे अपने देश की परवाह नहीं वो खाक देश सेवा करेगा। आइए पहले जानते हैं क्या है ये अग्निपथ योजना _ _अग्निपथ योजना में सरकार युवाओं को 4 साल तक सेना के तीनों अंगों में से एक में सेवा का अवसर प्रदान कर रही है। _ इसमें भर्ती की उम्र 17.5 साल से 21 साल की है। 6 महीने की कड़ी ट्रेनिंग देकर इन्हें अग्निवीर बनाया जाएगा। _भर्ती की योग्यता_मेरिट बेसिस पर,कक्षा 10  से 12 तक के युवा। वेतन_ 30 हजार से 40 हजार तक के बीच होगा।  _यह भर्ती अधिकारी रैंक से नीचे के रैंक के  लिए होगी। _चार साल बाद सेवाकाल में प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन कर 25% युवाओं को आगे की सेवा के लिए नियमित किया जाएगा।  _सेवाकाल में बीमा का भी लाभ दिया जाएगा,मृत्यु,विकलांगता सभी के लिए अलग अलग बीमा की राशि प्रदान की जायेगी। क्यों है विरो...

आरक्षण कब तक

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आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है ,जो राष्ट्रीय पटल पर हमेशा से ज्वलंत मुद्दा रहा।कुछ इसके विरोध में तो कुछ इसके समर्थन में अलग अलग सबकी दलीलें। शुरुवाती दौर में इसे लागू करना जरूरी था ,वर्ण भेद के कारण निम्न वर्ग के लोग ज्यादातर निरक्षर और पढ़ाई लिखाई से वंचित थे। समाज को बराबरी में लाना था ,उनके उन्न्यन के लिए उन्हें आर्थिक और शैक्षिक आरक्षण अत्यंत जरूरी था। लेकिन आज जब देश अपनी आजादी की 75 वी सालगिरह मना रहा है ,तो क्या आरक्षण पर विचार करने की आवश्यकता नहीं? आज आरक्षण के कारण प्रतिभा का पलायन हो रहा,माता पिता अपने बच्चों को उच्च शिक्षा में दाखिला दिलाने विदेश भेज रहे हैं। सरकारी नौकरी में आरक्षण के कारण प्रतिभाएं प्राइवेट सेक्टर में जा रही हैं। अच्छे डॉक्टर विदेशों में सेवा दे रहे हैं। इस मुद्दे पर अपने वोट बैंक बनाने वाले नेता ,सदन में समानता का अधिकार नहीं देते ,वहां दलित, एससी, एसटी की संख्या बहुत कम है। उपराष्ट्रपति की बेटी आरक्षण का लाभ उठा बड़े पद पर बैठ सकती है ,लेकिन एक आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण को कोई सुविधा नहीं। फिर भी आज के दौर के युवाओं ने आरक्षण को टक्कर दिया है अपने दिम...

अक्सर देर रात

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सुनो मैं ड्यूटी जा रहा हूं,बच्चों के पैरेंट्स टीचर मीटिंग तुम्हीं अटेंड कर लेना प्लीज_राकेश ने पत्नी को ड्यूटी जाते समय कहा। ये तो तुम्हारा रोज का काम है,आज बहुत प्यार से बता रहे हो,जबसे शादी करके आई हूं ,तुम्हें मेरे लिए बच्चों के लिए फुरसत रहती है_राधा ने गुस्से से कहा। क्या करूं ,अब ड्यूटी ही ऐसी है ,चाह कर कुछ नहीं कर सकता हूं_राकेश ने मुंह लटका कर कहा। देखना एक दिन बच्चों के साथ मैं ही तुम्हारे ऑफिस के सामने धरना देने बैठ जाऊंगी। पुलिस वालों को ड्यूटी पर रखने से पहले शर्त रखनी चाहिए की उन्हें शादी करना सख्त मना है_राधा बड़बड़ाती हुई राकेश को बाहर छोड़ने आई। राकेश मुस्कुराता हुआ ,गाड़ी स्टार्ट करके चला गया ,और राधा धूल उड़ाती हुई गाड़ी पर उसे बैठा जाते देखती रही। तब तक मिसेज यादव घर से बाहर अपने पति को विदा करने निकली।राधा को गुमशुम देख बोल पड़ी _क्या हुआ राधा बहुत उदास हो। राधा जैसे होश में आई _हां ,दीदी आज भी मुझे ही बच्चों के स्कूल जाना होगा। अरे मैं कहती तो हूं ,स्कूटी सीख ले, तुम्हें आराम हो जाएगा, और अब तो बच्चों की छुट्टियां शुरू होने वाली होंगी, कहीं जाने का प्रोग्र...

आयुर्वेद बनाम एलोपैथी

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   आयुर्वेद और एलोपैथी की जंग सदियों पुरानी है,लेकिन कोरोना काल ने इस बहस को और बढ़ा दिया था। लोग एलोपैथी दवा के साथ साथ काढ़ा,इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी का दूध,गिलोय,और अदरक का खासा सेवन कर रहे थे। 16 वीं शताब्दी से पहले भारत में आयुर्वेद से इलाज होता था। उस समय वैद्य,आचार्य,हकीम होते थे,जो जड़ी बूटियां पीस कर खिला कर इलाज करते थे। हमारे वेद में 114 प्रकार की बीमारियों का वर्णन है ,ऋग्वेद,युजुर्वेद,में क्रमशः 67,और 82 प्रकार की औषधियों का भी उल्लेख है,जबकि सामवेद में मंत्रों द्वारा बीमारी का निदान दिलाने का उल्लेख है। एलोपैथी आधुनिक ,वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति मानी जाती है ,सर्वप्रथम एलोपैथी शब्द का प्रयोग  होम्योपैथिक के जनक सर हैनीमैन ने किया था।एलोपैथी एक ग्रीक शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ  अलोस का अर्थ अदर मतलब दूसरा , पैथो का अर्थ बीमारी । होम्योपैथी पर भी एलोपैथी हावी रही।  16वीं सदी में पश्चिम भारत के तटीय रास्ते से जब पुर्तगाली व्यापार के लिए आए ,तो वे अपने साथ डॉक्टर भी लेकर आए।अंग्रेजों के आने के बाद धीरे धीरे एलोपैथी दवाइयों और इलाज का चलन बढ...

मेरा शहर

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    मेरा शहर जब लिखने बैठी तो सोच में पड़ गई ,कौन है मेरा शहर? वो जहां मेरा बचपन बीता ,शिक्षा हुई या वो जहां मैं शादी के बाद अपना जीवन गुजार रही हूं। खैर बचपन जहां बीतता है वहां की यादें कभी भी विस्मृत नहीं होती। रांची मेरा शहर था ,जहां मैंने अपने बचपन के सतरंगी दिन देखे ,बारिश में काग़ज़ की नाव चलाई ,युवावस्था में कॉलेज बंक कर दोस्तों के साथ पार्टियां उड़ाई। मेरा शहर झारखंड की राजधानी है ,और पठार,जलप्रपात,वनों से आच्छादित प्रदेश है। इस  शहर की खूबसूरती  लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां आप घूमना चाहें तो घूमने को बहुत कुछ है, जगन्नाथपुर मंदिर जिसे नागवंशी राजाओं ने बनवाया था। रॉक गार्डन,प्राणी उद्यान, डियर गार्डन,सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम। नेतरहाट यहां की खूबसूरती बरबस लोगों को खींचती है,यहां का सूर्योदय,और सूर्यास्त देखने लोग दूर दूर से आते हैं और यहां एक रात अवश्य रुकते हैं। यहां की खूबसूरती देखकर एक अंग्रेज दंपत्ति ने यहीं अपना आशियां बनाया थी ,जिनकी बेटी मैग्नोलिया  ने एक चरवाहे से प्यार करने का गुनाह किया था ।जिसकी सजा चरवाहे को अपनी जान देकर...

वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण की योजनाएं

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भारतीय संस्कृति में बचपन से ही बड़े बुजुर्गों का सम्मान करना सिखाया जाता हैं,परंतु आज के इस भौतिकता वाले दौर में बच्चे मोबाइल या कथित बच्चे पालने वाली दीदी के हाथों पल रहे हैं। जिससे उनमें भावनात्मक लगाव अपने माता पिता से ही उतना नहीं हो रहा ,तो दादा दादी नाना नानी तो कोई मायने नहीं रखता। आज की पीढ़ी पैसे के पीछे भागी  जा रही है,मानवीय मूल्य बहुत पीछे छूटते जा रहे हैं। रचना और प्रवीण पति पत्नी थे ,दोनों में बहुत प्यार था ,बिट्टू उनका 5 साल का बेटा महंगे स्कूल में जाता था। प्रवीण के माता पिता दोनों गांव में रहते थे ,प्रवीण के पिता स्कूल से रिटायर हुए थे,पेंशन मिलती थी , गांव की खेती थी दोनों पति पत्नी आराम से रह रहे थे ,बीच बीच में प्रवीण के घर भी ढेर सारा सामान ,मौसमी फल लेकर चले जाते थे । एक दिन अचानक प्रवीण को उसके पिता का फोन आया बेटा मां नहीं रही।प्रवीण दौड़ता हुआ सपरिवार गांव पहुंचा। सारे कार्यक्रम निपटाता रहा ,लेकिन पिता का अकेलापन और उदासी उसे काटने दौड़ती।गांव के सभी लोगों ने कहा बेटा _तुम्हारे पिता अकेले हो गए ,शायद अकेलापन बर्दाश्त न कर सकें ,इन्हें अपने पास ही शह...

हादसा

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हादसा कभी भी और किसी के साथ हो सकता है ,कभी कभी परिस्थिति हमारे वश में नहीं होती है ,और कभी हमारी लापरवाहियां हमें हादसे का शिकार बना देती हैं। कुछ सालों तक ट्रेन में जहरखुरान गिरोहों  का आतंक छाया  था। अक्सर  अखबारों में ऐसी खबर पढ़ने  को मिल ही जाती थी। रेलवे पुलिस लाउडस्पीकर से यात्रियों को ऐसे जहरखुरान गिरोहों से सतर्क करती रहती ,लेकिन भारतीय बहुत जल्दी ऐसे लोगों के झांसे में आ कर अपना सबकुछ गवां देते। मेरे सामने ऐसी ही एक घटना घटी थी जो आज भी मेरे मस्तिष्क के किसी खांचे में अंकित है। मैं तब करीब 8,9 साल की रही होंगी,गर्मियों की छुट्टियों में  हमें  नाना नानी और दादा दादी के घर जाने का सुअवसर मिलता। गोमो स्टेशन जो अब नेताजी सुभाष बोस स्टेशन के नाम से जाना जाता है।वहां से हमें ट्रेन बदलनी होती । फैजाबाद ("अब का अयोध्या कैंट")जाने के लिए  जम्मूतवी एक्सप्रेस में बैठना होता था। निर्धारित समय पर ट्रेन आई हम अपनी सीट पर बैठ चुके ,समय से गाड़ी मंथर गति फिर अपनी रफ्तार से खेत खलिहान,एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन होती रात के अंधेरे में चली जा रही थी।सहय...

रक्तदान महादान

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बेटा तुमने मुझपर जो अहसान किया है ,उसे मैं कभी भूल नहीं सकता हूं_ गिड़गिड़ाते हुए नीला के पिता ने साहिल से कहा। अरे अंकल आप मुझे बेवजह शर्मिंदा कर रहे हैं,ये तो मेरा फर्ज था_साहिल ने नीला के पिता का हाथ पकड़ कर कहा। आज नीला का दूसरा जन्म हुआ था,वो भी साहिल की  बदौलत। साहिल अगर उसे सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाता और उसके लिए खून का प्रबंध नहीं करता तो शायद नीला और उसके बच्चे इस दुनिया में नहीं होते। आज राजेंद्र बाबू पछता रहे थे , आत्मग्लानि से उनका सर झुका जा रहा था ,वो किसी से नजरें नहीं मिला पा रहे थे। पता नहीं क्या देखा था राहुल में ,उसे देखते ही पसंद कर लिया था,राहुल  सरकारी बीमा एजेंट था।   राजेंद्र जी का बीमा  घोष बाबू करते थे उन्हें कुछ पारिवारिक कारणों  से कोलकता जाना हुआ, इसलिए घोष बाबू ने राहुल को उनके घर भेज दिया था यहीं राहुल से उनकी पहली मुलाकात थी।  राजेंद्र बाबू उतावले हुए जा रहे थे राहुल के बारे में जानने को। आखिर घोष बाबू के लौटने के बाद राजेंद्र बाबू ने , घोष बाबू  को अपने घर चाय पर बुलाया ताकि वे राहुल के बारे में जान सकें। घ...

उल्टा दांव

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      रमन जल्दी से बर्तन धुलो,मुझे भूख लगी है_नीता चिल्लाते हुए बोली। धुल रहा हूं डार्लिंग _जल्दी जल्दी हाथ बर्तनों पर चलाते रमन ने कहा। पहले नीता ऐसी नहीं थी ,सीधी साधी ,संस्कारी लेकिन रमन की कुछ हरकतों ने उसे जोरू का गुलाम बना दिया था । रमन एक दिलफेंक आशिक था,खूबसूरत लड़कियां उसकी कमजोरी थी।ऑफिस में वह एक एलिजिबल बैचलर था। उसी ऑफिस में नीता नई नई क्लर्क के पोस्ट पर अप्वाइंट हुई थी।सुंदर,आकर्षक ,चुंबकीय व्यक्तित्व की नीता, हर कोई उसका सानिध्य पाना चाहता था,शादीशुदा मर्द भी उसके पास भंवरे की तरह मंडराते थे। नीता जान कर भी अनजान बन अपने काम से काम रखती थी। रमन खुद को बड़ा तीसमार खां समझता था ,इसलिए  उसने अपने  साथ के ऑफिस स्टाफ से  शर्त लगाई  थी कि, वह नीता को अपने प्यार के जाल में अवश्य फंसाएगा। नीता की सहेली शालिनी को यह बात उसके पुरुष मित्र जीवन से पता चल गई थी ।नीता सतर्क हो चुकी थी। रमन मेल जोल बढ़ाने के बहाने खोज ही रहा था ,नीता  जानबूझकर उसे मौका देने लगी। वह कोई न कोई बहाना कर उसके आसपास मंडराता। एक दिन नीता ने कहा _सर आज कैब की हड़...

अवसाद

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शोहरत की चकाचौंध रातों रात काजल स्टार बन गई,मायानगरी में उसकी किस्मत पहली फिल्म के हिट होते ही बुलंदी को छूने लगी। कैमरा ,लाइट ,विज्ञापन कंपनियों,फिल्म प्रोड्यूसरों की लाइन उसके घर तक लगने लगी ।हर कोई उसके साथ काम करने को लालायित था। छोटे शहर इंदौर की मिस इंदौर काजल का सपना था ,बॉलीवुड ।अंदर से स्याह बॉलीवुड की दुनिया युवाओं का सपना होती है । काजल एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखती थी ,उसे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कोई रोक टोंक नहीं थी।आखिर मिस इंदौर के बाद उसने मायानगरी का रुख किया। और किस्मत ने साथ दिया ,बड़े डायरेक्टर को अपनी नई फिल्म के लिए  नए चेहरे की तलाश थी ,काजल ने इंटरव्यू दिया और वो चुन ली गई। फिल्म ने  थिएटर में  रिलीज होते ही ,पहले दिन ही रिकॉर्ड तोड कमाई की। पैसे ,शोहरत की अब कमी नहीं थी ,धीरे धीरे सफलता सर चढ़ कर बोलने लगी,ड्रग्स,और गलत संगति ने काजल को अंधेरे गर्त की ओर धकेल दिया। रात भर पार्टी ,और सुबह दिन चढ़े तक सोना ।जिससे निर्माता ,निर्देशक कन्नी काटने लगे।काम की कमी से कर्ज का बोझ बढ़ने लगा। दोस्त दूर होते गए,लेनदारों की धमकियां , गाली ...

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

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           कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है ,जैसे चींटी दीवार पर चढ़ती है गिरती है ,फिर भी नई उम्मीद साहस से लक्ष्य की ओर बढ़ती है। पैर न हो सपने और इरादे  हों एवरेस्ट फतह करने को तो यह सुन कर ही असंभव लगता है ,क्या ऐसा हो सकता है! अरुणिमा सिन्हा एक ऐसी लड़की जिसके साथ नियति ने भद्दा मजाक किया था ,उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया था  ,रात भर तड़पती रही और फिर अचेत हो गई ,चूहे उसके पैरों को नोचते रहे। जब होश में आई तो उसका एक पैर कट चुका था ,एक पैर में रॉड पड़ी थी ,वो दैनिक क्रिया तक करने में अक्षम थी ,एक समय की बॉलीबॉल खिलाड़ी को सहानुभूति चुभती थी ,शारीरिक अक्षमता उसके हौसलों को पस्त नहीं कर सकी। उसने इसी हालात में एवरेस्ट फतह करने का सपना देख डाला ,कृत्रिम पैर लगवा पहुंच गई जमशेदपुर एवरेस्ट फतह करने वाली महिला बछेंद्री पाल से मिलने,दुनिया ने तो  उसे मानसिक रूप से बीमार तक कह दिया ,लेकिन बछेंद्री पाल ने अरुणिमा के जज्बे को देख कहा तुमने अपने जज्बे से एवरेस्ट फतह कर लिया अब सिर्फ शरीर से फतह कर दिखाना है। तमाम अड़चने आईं ,...

भूख

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      मालकिन ,आज मां बीमार हैं,काम पर नहीं आयेगी_नन्ही सरला हाथ जोड़ मालकिन से कह रही थी। तुम्हारी मां का तो रोज का बहाना है ,कभी पूरे महीने काम नहीं करती ,कभी तुम्हारी नानी ,कभी दादी बीमार रहती है , रोज रोज के बहाने से मैं तो थक गई हूं ,अब तो मुझे पैसे काटने होंगे_मिसेज नंदा बोली  ,वो यहीं नहीं रुकी उन्होंने नन्ही सरला से कहा , "तुम क्यों खड़ी हो,जाकर बर्तन धुलो"। सरला ने कहा ,पर मालकिन मुझे मां के लिए दवाई लानी है , जितने पैसे बनते हैं एडवांस दे दो न आप? अच्छा!यहां तो पैसे के पेड़ लगे हैं बस आओ और हिला कर पैसे ले जाओ,जल्दी जाकर बर्तन धुलो,फिर रेनो को घुमा कर लाओ उसके बाद देखती हूं क्या करना है _आंख मटकाते मिसेज नंदा ने कहा। नन्ही सरला ने कोई रास्ता न देख घर में प्रवेश किया ,रसोई में रात के जूठे  बर्तन मुंह पसारे इंतजार कर रहे थे कि कब कोई हाथ लगा कर उन्हें साफ करे। लगता है रात को पार्टी हुई थी ,बहुत बर्तन थे।धीरे धीरे कर सरला बेचारी बर्तन धो रही थी ,तभी मिसेज नंदा का बेटा कांच का ग्लास जोर से पटक कर चला गया जिससे वह चटक गया। सरला ने किसी तरह बर्तन धुले...

निशीडाक

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प्रणव  ....... रात के अंधियारे में गूंजती आवाज। प्रणव बाबू की नींद खुली,घड़ी देखी रात के 12.30 बज रहे थे।अभी पहली ही नींद थी ,झुंझलाहट हुई।आवाज फिर से आई ,प्रणव ओ प्रणव । बगल में महुआ अपने बच्चे के साथ बेसुध दो रही थी। हवेली में सुदीपा से झगड़ा हुआ,और वे आज ही  महुआ और अपने बच्चे को लेकर गांव के अपने फार्म हाउस आ गए थे। कल तक दो चार नौकर भी हवेली से उनके पास रहने को आने वाले थे। अमावस की अंधियारी रात थी ,सन्नाटा चरम पर था ,कुत्ते रह रह कर भौंक रहे थे। ऐसे में कौन महिला इतने समय आकर मेरा नाम पुकार रही है। कहीं सुदीपा तो नही।मुझसे गुस्सा थी ,हो सके वही गलती का अहसास कर आई होगी बड़बड़ाते हुए वे उठे और  दरवाजा खोल दिया। सामने देखा तो_ लाल साड़ी पहने,बाल चेहरे पर बिखेरे  एक युवती वहां दरवाजे पर खड़ी थी। तुमि के,.....? कि होलो(तुम कौन हो,और तुम्हे क्या हुआ है)_प्रणव दा ने कहा। वह युवती पीछे मुड़ी ,और बिना बोले रोते सुनसान सड़क पर दौड़ पड़ी। प्रणव दा को लगा शायद वह मदद के लिए आई हो?और कहीं ले जाना चाहती हो। उन्होंने उसका पीछा किया , दाडा, दाडा (रुको)। बहुत दूर सुनसा...

मेरी दुनिया थी तू भाग_5

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     रितु ,सुयश के साथ कार में बैठ गई ।सुयश ने  उसी कॉफी शॉप के सामने कार रोकी। रितु ने जैसे देखा उसका दिमाग गरम हो गया,उसने कहा प्लीज डॉक्टर सुयश अगर आपको यहीं चलना है, तो आप मुझे घर पर ही ड्रॉप कर दीजिए और कॉफी मैं बहुत अच्छा बनाती हूं ,आप मेरे घर पर ही अपनी बात  कह भी सकते हैं। सुयश समझ गए कि इस कॉफी शॉप से शायद रितु की कोई गहरी याद जुड़ी है,उन्होंने कार आगे बढ़ाया और दूसरे कैफे में पहुंचे। बिना लाग लपेटे कॉफी की चुस्की लेते हुए डॉक्टर सुयश ने कहा_रितु मैम,आप ज्यादातर गुमशुम रहती हैं,केवल बच्चों के बीच ही खुश रहती हैं। रितु ने कहा _हां ,मुझे बच्चे पसंद हैं। मैने सुना आपकी एक बेटी थी _,सुयश ने बात को आगे बढ़ाया। जी सही सुना,मेरी एक छोटी बेटी थी ,जो अब इस दुनिया में नहीं है 10 साल हो गए ,उसे मुझसे बिछड़े हुए। आपने दूसरी शादी का नहीं सोचा ,आपको अकेलेपन से डर नहीं लगता _डॉक्टर सुयश ने कहा। कहां है अकेलापन ,रितु हंसी।मुझे तो लगता है 24 घंटे भी कम हैं मेरे लिए,क्लास,और फिर बच्चों के बीच कैसे समय निकल जाता है ,पता ही नहीं चलता। और आप मुझसे जो पूछ रहे हैं,अब ...

मेरी दुनिया थी तू भाग_4

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      रिया ओ रिया _वह चिल्ला रही थी।राधा भी खाना छोड़ दौड़ती हुई कमरे की ओर भागी।दोनों ने हिलाया डुलाया लेकिन कोई हरकत नहीं ।राधा ने कहा _अब रिया बेबी नहीं रही मैडम। रितु बुत बनी हुई थी।राधा ने उसकी खुली आंखों को बंद किया ,और नमित को फोन मिलाया। नमित शहर से दूर ग़ज़ल के साथ पार्टी कर रहा था। बहुत मुश्किल से कई बार फोन करने के बाद उसका फोन उठा तो,राधा ने रोते हुए बताया रिया बेबी अब नहीं रहीं आप आजायिए साहब,मैडम भी गुमशुम हो गई हैं। नमित ने कहा वो  सुबह से पहले  नहीं आ पाएगा ,वैसे तो सभी रस्में सुबह ही होंगी कह कर फोन काट दिया। राधा अवाक रह गई ,उसे आश्चर्य हो रहा था कि क्या बड़े  लोगों में जज्बात भी खत्म हो जाते हैं। मैं रिया की कुछ नहीं थी,लेकिन उसकी भोली मुस्कुराहट,उसका प्यार दिखाना सबकुछ कितना चुम्बकीय था,एक अनजान आदमी भी उस प्यारी बच्ची से प्यार कर बैठता ,और उसके अपने पिता को  उसकी मृत्यु पर भी कोई दुख नहीं। आस पास के लोग ,दूर के रिश्तेदार भी खबर सुन पहुंच गए। सुबह देर से नमित पहुंचा तो सभी रिश्तेदारों ने पूरी तैयारी कर ली थी उसे दफनाने की।आत...

मेरी दुनिया थी तू भाग_3

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       शाम को मानस घर आया,रिया की हालत देख उसे रितु से सहानुभूति हो रही थी । उसने बताया कि नमित ने तुम्हारे बारे में झूठी खबर  फैलाई थी कि, तुम किसी को भी देखकर अपना आपा खो देती हो,हिंसक हो जाती हो।और  ये सब सुना उसने ऑफिस के स्टाफ में अपने लिए सहानुभूति बटोरी हुई है, मैं भी इसी कारण कभी घर नहीं आया _मानस कह रहा था। रितु कुछ न बोली। मानस ने आगे कहा_ नमित ने करीब दो साल पहले पर्सनल सेक्रेटरी की पोस्ट का विज्ञापन दिया था ,जिसमें कई लड़कियां इंटरव्यू देने आईं थीं,उसमें गजल नाम की भी लड़की थी ,जो बुद्धि और खूबसूरती में बेमिसाल थी ,उसका चयन हुआ,और उसके बाद  से नमित का झुकाव ग़ज़ल की तरफ होता गया।आज भी नमित उसी के साथ गया है।बिजनेस मीटिंग तो एक बहाना होता है जो महज 2,3 घंटों में खत्म हो जाता है ,और 2,3 दिन ये लोग सैर सपाटा करेंगे। रितु उन बातों को सुन अंदर ही अंदर  हिल गई ,उसके पांव तले से जैसे किसी ने जमीन ही सरका दी हो।उसके बाद मानस ने क्या कहा क्या नहीं ,उसे कुछ सुनाई नहीं दिया। थोड़ी देर बाद मानस ये कहता हुआ उठ खड़ा हुआ , रितु ये बात तुम नमि...

मेरी दुनिया थी तू भाग_2

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         रितु की सारी उम्मीद टूट चुकी थी,अकेली हो गई थी,कोई भी रिश्तेदार कितने दिन आपकी मदद कर सकता है, नमित को अब उसकी और बिटिया की कोई फिक्र ही नहीं थी,व्यवसाय चल निकला था,वह उसी में व्यस्त रहता। रितु कुछ कहती भी,तो जवाब होता तुम पढ़ी लिखी हो,ड्राइव कर सकती हो,पैसा है जाकर रिया को दिखाओ, मैं काम करूं कि, तुम्हारी राम कहानी सुनूं,मेरे पास समय नहीं है। रितु आहत होती ,जाकर भगवान के पास रोती,फिर सारी ऊर्जा इकट्ठी कर , उस मासूम का मुंह देखती और उसकी परवरिश में लग जाती। रिया बड़ी हो रही थी ,लेकिन वह ठीक से न बोल पाती ,न चल पाती और दैनिक क्रिया का भी कोई समय नहीं था ,इसलिए रितु को उसके बस चेहरे के भाव देख कर ही अंदाज लगाना होता था। उसने फिजियोथैरेपिस्ट की सहायता ली।पैर ,हाथ की मालिश करती, उसकी मांसपेशियां कड़ी रहती जिससे उठाने बैठाने में दिक्कत होती।स्पीचथेरेपिस्ट के पास गई लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ । जब रितु थोड़ी देर के लिए रिया को आया के सुपुर्द कर कहीं चली जाती  तो उसके आते ही रिया उसके सीने से चिपक जाती।अगाध प्रेम था मासूम रिया का रितु के लिए । रितु ...

मेरी दुनिया थी तू भाग_1

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      वक्त ,एक बहुत छोटा शब्द ,लेकिन  इसके वृहद मायने,वक्त कभी किसी के लिए रुकता नहीं, न ही पीछे मुड़ने का मौका ही देता है। जो वक्त का दामन पकड़ कर नहीं चलते वे पीछे रह जाते हैं। सब कुछ था उनकी ज़िंदगी में, लेकिन धीरे धीरे करके समय बदलता गया। वो लम्हा जब प्यार था ,पता नहीं प्यार किस आंधी में उड़ गया । परसों उसकी शादी है दूसरी ,25सालों का दम घोटू सफर सालों पहले खत्म हुआ था।लेकिन वो खुश नहीं थी भी और नहीं भी ,बीते दिनों की यादें नश्तर चुभो रही थी। अनमनी सी वो यादों के भंवर में खो गई। कॉलेज का प्यार था नमित,दोनों की खुशनुमा शाम कॉलेज के कैंटीन में गुजरती ।सभी उनके प्यार को देख रश्क करते ,लेकिन उन प्यार के पंक्षियों को किसी की परवाह नहीं थी।वे कॉफी के साथ भविष्य के सपने बुना करते। बी कॉम के बाद दोनों ने कैट (CAT) की परीक्षा दी।दोनों का ही दाखिला आईआईएम बैंगलोर में हुआ। एमबीए की पढ़ाई करते करते उन्हें देशी विदेशी कंपनियों में नौकरी के ऑफर मिलने लगे। रितु और नमित ने फैसला किया था ,अपना खुद का व्यवसाय करने की, लेकिन बिना पूंजी के  कारोबार सोचना ही असम्भव था। इस...

विधवा पुनर्विवाह

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आज  जब हम  इतिहास के पन्ने पलटते हैं तो पाते हैं कि पहले के समाज में कई कुरीतियां व्याप्त थीं ,बाल विवाह,सती प्रथा, पर्दा प्रथा ,सारे कायदे कानून महिलाओं को घर की देहरी में रखने को बने थे। स्त्रियों की स्थिति बद से बदतर थी ,उन्हें अनपढ़ ही रखा जाता था और बचपन में ही उनका विवाह  किसी प्रौढ़ या उम्र में 10,12 साल बड़े व्यक्ति से कर दिया जाता था । बीमारी ,बड़ी उम्र के कारण पति की मृत्यु जब हो जाती थी तो उनकी विधवाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध सती होने के लिए विवश किया जाता।इस सामाजिक कुरीति को हटाने का कार्य राजा राम मोहन राय ने किया उन्होंने इस प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई , समाज को जागरुक करने के लिए हिंदी ,बंगला ,और अंग्रेजी में पुस्तक लिख कर बंटवाई ,उनके सतत प्रयास का नतीजा हुआ कि 4 दिसंबर 1829 को इस प्रथा को रोकने के विलियम बेंटिक की अगुआई में कानून बना। सती प्रथा तो किसी तरह रुकी,शिक्षा के कारण लोगों की सोच बदली ,परंतु आज भी कही कहीं कुछ छिट पुट घटनाएं सुनाई दे ही जाती हैं,इसमें सबसे चर्चित कैस था रूपकुंवर का । सती प्रथा रूक तो गई परंतु सफेद कपड़े में लिपटी इन रंगह...

विवाह या लिव इन रिलेशन

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हमारे यहां हर एक रीति रिवाज एक संस्कार की श्रेणी में आते हैं,हिंदू धर्म में जन्म से मृत्यु तक 16 संस्कार माने गए हैं।जिसमें विवाह को बहुत पवित्र माना गया है । कहते हैं जोड़ियां स्वर्ग से बन कर आती हैं,सात वचन से अग्नि के सामने वर वधू आजीवन एक दूसरे का साथ निभाने का वचन देते हैं,और इस कारण दोनों एक दूसरे की कमियों को स्वीकार कर दांपत्य के अपने कर्तव्य का पालन कर अन्य दायित्यो का निर्वहन करने में गुरेज नहीं करते  आज जमाना बदल गया है,सामाजिक मूल्य खत्म हो चुके ,घरों को जोड़ने वाली दादी,नानी,अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। चाचा चाची, ताऊ, ताई वाला संयुक्त परिवार अब टुकड़े टुकड़े में बंट संवेदनहीन हो चुका,अब आंगन में मां,दादी के बाल नहीं झाड़ती,चाचा चाची के पास बच्चे मां से डांट के बाद बच्चों को अपने आंचल में नहीं छुपाते। अब बच्चे आया ,और शहरी बच्चों को संभालने वाली तथाकथित नैनी के पास पलते हैं।माता पिता  का पैसों के पीछे दौड़,सामाजिक दिखावा,और तनाव से आपस में लड़ना ,चीखना चिल्लाना ,बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव छोड़ रहा है ,जिसका परिणाम उनकी शादी जैसे पवित्र बं...