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ग़ज़ल

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फूल किसका है पात किसका है ? रात किसकी है प्रात किसका है? जिसकी छाया में उम्र कटती है मेरे सर पर वो हाथ किसका है? होके तन्हा भी जीना पड़ता है उम्र भर मिलता साथ किसका है? जिसने बख्शा है छीन लेगा वो होता तन का लिबास किसका है? मेरी आंखों में तेरी आंखों में जो भी रहता प्रकाश किसका है? वक्त के साथ उड़ गई रौनक चांद सा चमके गात किसका है? मुफलिसों का कोइ "किंजल्क" नहीं यहां होता अनाथ किसका है?           🌺🌺🌺🌺🌺                 --किञ्जल्क त्रिपाठी "किञ्जल्क"                        आजमगढ़ (उ.प्र)

तुम्हारी याद आई

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सीवानों  में  नाच रहा है  देख  घटा  को  मोर -- तुम्हारी याद आयी   दूर  क्षितिज  से  चलती  पुरुवा  दिल  देती  झकझोर --    तुम्हारी याद आयी         🌴🌺🌺🌴 श्यामल-घट ले  उड़ते  बादल  गांव - गांव  दे  फेरी  आधी रात  छतों पर  बरसें   आकर  चोरी - चोरी  रिमझिम  बूंदों की  पायल ने  किया  बहुत  है  शोर--    तुम्हारी याद आयी        🌴🌺🌺🌴 दुर्दिन  में  एकाकी  पन  मैं  कैसे  झेल रहा हूँ  दिल को  झूठ  दिलासा  देकर  दिल से  खेल रहा हूँ  डगर-डगर मैं  नगर  तलाशूं कहां  गयी  चितचोर--    तुम्हारी याद आयी        🌴🌺🌺🌴 घटा  बरस कर  जोर जोर से  जैसे  मुझपर  हंसती  थी  रजनी की  काली  अलकें  ये  बनकर  व्...

खूबसूरत हंसी मैं प्यार का वो पल लिख दूं।

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खूबसूरत  हंसी मैं प्यार  का वो पल लिख दूं। तेरे चेहरे को किसी झील का कंवल लिख दूं। करीब  आओ    तेरी  फूल   सी  हथेली  पर किसी गुलाब की डंठल से मैं ग़ज़ल लिख दूं। करूं  जो  बात  किसी  से  मैं  सादगी  की तो किसी मंदिर के कलश का मैं तुझे जल लिख दूं। बंद  कर  ले  मुझे  आंखों  के  आशियाने  में चाहता खुद को तेरी आंख का काजल लिख दूं। संगेमरमर  की  दीवारों  को  देख  दम घुटता कहो तो फूस का तुझको कोई महल लिख दूं। मेघ  यादों  के  तुम्हारे  ये  दिल  पे  छाए  हैं तुझे आंखों  से बरसता हुआ बादल लिख दूं। सियाह   रात  की  चुप्पी  जो  तोड़  देती  है तेरे  पांवों  की  खनकती हुई पायल लिख दूं। गमों  की मार  से आहत  ये  दिल  हमारा है नाम कैसे ये तेरे मैं दिल-ए- घायल लिख दूं। फागुनी  रात में "किंजल्क" से मिली आकर कोई  कह  दे कि उ...

ग़ज़ल

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खूबसूरत  हंसी मैं प्यार  का वो पल लिख दूं। तेरे चेहरे को किसी झील का कंवल लिख दूं। करीब  आओ    तेरी  फूल   सी  हथेली  पर किसी गुलाब की डंठल से मैं ग़ज़ल लिख दूं। करूं  जो  बात  किसी  से  मैं  सादगी  की तो किसी मंदिर के कलश का मैं तुझे जल लिख दूं। बंद  कर  ले  मुझे  आंखों  के  आशियाने  में चाहता खुद को तेरी आंख का काजल लिख दूं। संगेमरमर  की  दीवारों  को  देख  दम घुटता कहो तो फूस का तुझको कोई महल लिख दूं। मेघ  यादों  के  तुम्हारे  ये  दिल  पे  छाए  हैं तुझे आंखों  से बरसता हुआ बादल लिख दूं। सियाह   रात  की  चुप्पी  जो  तोड़  देती  है तेरे  पांवों  की  खनकती हुई पायल लिख दूं। गमों  की मार  से आहत  ये  दिल  हमारा है नाम कैसे ये तेरे मैं दिल-ए- घायल लिख दूं। फागुनी  रात में "किंजल्क" से मिली आकर कोई  कह  दे कि उ...

ऋतुरानी बरखा का एक चित्र प्रस्तुत है

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सीवानों  में  नाच रहा है  देख  घटा  को  मोर -- तुम्हारी याद आयी   दूर  क्षितिज  से  चलती  पुरुवा  दिल  देती  झकझोर --    तुम्हारी याद आयी         🌴🌺🌺🌴 श्यामल-घट ले  उड़ते  बादल  गांव - गांव  दे  फेरी  आधी रात  छतों पर  बरसें   आकर  चोरी - चोरी  रिमझिम  बूंदों की  पायल ने  किया  बहुत  है  शोर--    तुम्हारी याद आयी        🌴🌺🌺🌴 दुर्दिन  में  एकाकी  पन  मैं  कैसे  झेल रहा हूँ  दिल को  झूठ  दिलासा  देकर  दिल से  खेल रहा हूँ  डगर-डगर मैं  नगर  तलाशूं कहां  गयी  चितचोर--    तुम्हारी याद आयी        🌴🌺🌺🌴 घटा  बरस कर  जोर जोर से  जैसे  मुझपर  हंसती  थी  रजनी की  काली  अलकें  ये  बनकर  व्...

तेरी चाहत थी मुझे लग रहा जमाने से

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आज की एक ताजा ग़ज़ल आप सभी मित्रों को समर्पित है--- भूल  पाता  नहीं हूं  तुझको  मैं भुलाने से। तेरी   चाहत थी  मुझे  लग रहा जमाने से। आ  गई  याद  तेरी  शरबती  निगाहों  की मेरी दहलीज के दीपक के टिमटिमाने से। तेरे  आने  से  मेरे  घर  में   बहारें    आईं खिल  गए  फूल  सभी  तेरे  मुस्कुराने से। प्यार का दिल में उजाला है भर दिया तुमने फायदा क्या है दिया अब कोई  जलाने से। बढ़  गए  जब से ये  सैयाद  इस जमाने में उड़  गए   सारे  परिंदे  ये  आशियाने   से। लूटने  की  ये  हविस  छोड़  दो मेरे यारों मजा आता है बहुत खुद को भी लुटाने से। तुमसे मिलकर ये महफिलों  सी जिंदगी थी मेरी आज  वीरानियां  हैं उसके उजड़ जाने से। किसी मजहब में भी इंसानियत नहीं आती दाढ़ी,  पगड़ी  ये  और  चोटियां  बढ़ाने से। सुबहें  रोशन  हैं  मेरी  ...

एक ग़ज़ल आपकी नजर में

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दिल की चिड़िया मेरे ये चहक सी गई। बात दिल की ये दिल तक पहुंच सी गई। आपके उन गुलाबों को ले  सो गया रात सारी  हमारी  महक सी     गई। मेरे  जज्बात  इतने ये  उड़ने  लगे चाल मेरी ये  जैसे  बहक  सी गई। क्या करें कि किसी की अमानत हो तुम बात ये ही  गले  में अटक सी गई। ख्वाब में रात मुझसे तूं  टकरा गई तेरी चूड़ी करों  में खनक  सी गई। कैसे 'किंजल्क' तुझको भुला पाएगा मेरे आगोश में तूं सिमट सी गई।         💐💐💐💐       किञ्जल्क त्रिपाठी "किञ्जल्क" आजमगढ़ (उ.प्र)