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Showing posts with the label Manisha Thakur

"भारतीय परिधान"

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सारी दुनिया में अनोखा, भारतीय परिधान हम भारतीयों के संस्कृति की यही पहिचान  ।। भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में ,अलग परिधान का पहनावा भारतीय संस्कृति ,लगती हो इक सुंदर छलावा  ।। उत्तर से लेकर दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक सुंदर परिधानों से सुसज्जित,देश के हर कोने तक ।। परिलक्षित होता , हमारा भारतीय परिधान पवित्र धरा में युगों-युगों से रहा यही विधान  ।। भिन्न-भिन्न संस्कृति का भारत देश हमारा सारी दुनिया में अपना वतन है ये प्यारा  ।। "अनेकता में एकता " का नाम है भारत हर भाषा में अंकित , देश की  इबारत  ।। सारी दुनिया में अनोखा ,भारतीय परिधान हम भारतीयों के संस्कृति की यही पहिचान  ।।                    मनीषा ठाकुर (कर्नाटक)

"विरह की बेला"

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जब होती अपनों से विरह की बेला आंखे भी अपनी बोली कह जाता दूर जाने के ख्याल से बेबस मन चाहते हुये भी कुछ कह न पाता दिलासा देता  नाजुक दिल भी  सहमा-सहमा सा सिर्फ रह जाता भविष्य के संजोय सपनो के लिए  जब अपना कोई दूर होता अनचाहे ख्यालों से ,फिर जाने क्यूं? मन भी जार-जार घबराता अरमानों के सच्चे रास्ते चल निरंतर आगे बढ़े, वही मंजिल को पाता जिंदगी में बिन त्याग ,समर्पण के इंसा को कुछ भी नहीं मिल पाता जीवन में आता जब विरह की बेला मन के संघर्ष को हमसे मिलवाता कठिन परिस्थितियों से जो जीत गया वही मुकद्दर का सिकंदर कहलाता जीवन का भाव है मिलना , बिछुड़ना समझ लिया जिसने ,वही मंजिल को पाता                           मनीषा भुआर्य ठाकुर (कर्नाटक)

"प्रायश्चित"

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इंसान को जब अपने  अनजाने भूल का खेद हुआ अंतर्मन  से क्षमा मांग उसका हृदय जो व्यथित हुआ  न चाहता था दुख देना  अहम में अपने चूर हुआ भूल पर भूल वो करता गया उसे कभी न संताप हुआ आया फिर एक दिन ऐसा दुख दूसरो का सहन न हुआ कर्म का पहिया घूमे ऐसे हृदय को जो महसूस हुआ अहम के छलावे से जो किया वह आज ग्लानि से पूर्ण हुआ फिर मन में संकल्प लिया  इंसान को  तब प्रायश्चित हुआ.............                            मनीषा ठाकुर (कर्नाटक)

"राम नवमी"

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                                                         रामनवमी                           दिवस है पावन                               हिंदू पर्व का                             जन्मोत्सव है                            सातवें अवतार                             श्री राम का                             रघुकुल के                           हैं वीर शिरोमणि...

"करुणा"

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                     🍂🍂🍂🍂🍂🍂                             करुणा भाव                          की अनुभूति रखें                             करुणामयी                             द्रवित मन                       व्यथा सुन, जो हुआ                             परजन की                            करुणा तब                           हृदय में उनके                 ...

"नवरात्रि"

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नवरात्रि के , नौ दिन है पावन लगा लिये मां ने ,सुंदर आसन ।। पूजा निशदिन होगी , मंदिर हो या घर लेकर मनौती आयेंगे , माता हम तेरे दर  ।। माता को अर्पित करु, प्रसाद उन्हें जो भाये कृपा करो हमपे माता,खड़े हैं शीश झुकाये ।। प्रथम दिन शैलपुत्री ,द्वितीय दिन ब्रह्मचारिणी शूल धारण करने वाली, तुम हो मां शूलधारिणी ।। तृतीय दिन चंद्रघंटा, चतुर्थ दिन कुष्मांडा चंड-मुंड का नाश करे, तुम हो मां चामुंडा ।। पंचम दिन स्कंदमाता , षष्ठम दिन कात्यायनी सम्यक रूपिणी ब्रह्मांड की ,तुम हो मां भवमोचनी ।। सप्तमी दिन कालरात्रि,अष्टमी दिन महागौरी सुंदरता की देवी पूजे, तुम हो मां कौमारी ।। नवमीं दिन उपासना करे भक्त, माता सिद्धिदात्री कल्याण करने वाली मैय्या ,तुम हो मां जगद्धात्री ।। जय हो नवदुर्गा मैय्या, कृपा करो हमपे मैय्या रक्षा तुम ही करने वाली, तुम हो दयानिधि मैय्या ।।          🙏💐🌹जय दुर्गा मां🌹💐🙏 (मातारानी आप सभी की मनोकामना पूर्ण करे)                                       ...

हास्य.......शायद कही खो गया है??

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हास्य मतलब हंसना हमारे जीवन में बहुत आवश्यक है। वर्तमान में इंसान शायद हंसना ही भूल गया है। दिनभर की भागदौड़,जीवन की व्यस्तता और आधुनिक जीवन शैली ने जैसे मनुष्य के होंठो की हंसी ही छीन ली हो। इंसान करे भी क्या?? इस आधुनिक जीवन में एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ ही ऐसी है। जो उसे मशीन बनाते जा रही है। और इन सबमें वो खुद के लिए ही जीना भूल गया है। बीते समय में लोग कितना खुश रहते थे कम साधन में भी एकजुट होकर जीवन यापन करते और आवश्यकता पड़ने पर निस्वार्थ हो एक- दूसरे की मदद भी करते थे। इसके विपरीत वर्तमान में लोगों को किसी की परवाह ही नहीं उनके पास वक्त ही नहीं है दूसरो के लिए।बहुत विरले लोग ही हैं जो दूसरों की खुशी में खुश होते हैं व दुख में साथ देते हैं।                             जिंदगी के उतार-चढ़ाव में हमें हर पल को निभाना है। कभी रोना तो कभी हंसना है, मुस्कुराता हुआ चेहरा हमें जीवन जीने की कला सिखाता है ,हिम्मत देता है ,हमारे जीवन को एक नई ताजगी से भर देता है। इसलिए हास्य से परिपूर्ण जीवन भी बहुत जरूरी है।अप...

"अभिमान"

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मत कर इंसा , तू इतना अभिमान सत्यता कुछ और है ,इसे तू पहचान ।। मानवजन्म  मिला है ,ईश्वर की कृपा से अंहकार में क्यूं लीन रहे, स्वयं की मूर्खता से ।। इस जीवन में जो हमे ,भौतिक सुख मिला रह जाता सिर्फ़ ढेर , जैसे हो रेत का टीला ।। निस्वार्थ सेवा ,कर्म,त्याग व कुशल व्यवहार वास्तव में जीवन का है, यह अनमोल उपहार ।। खाली हाथ आए हैं, खाली हाथ ही है जाना कर्मों का पिटारा ही ,जिंदगी का  है खजाना ।। सेवा, प्रेम, प्रभुभक्ति से जीवनसुख है पाना निभाकर स्वयं के कर्तव्य ,भवसागर तर है जाना मत कर इंसा , तू इतना अभिमान सत्यता कुछ और है, इसे तू पहचान ।।                                  ✍️मनीषा भुआर्य ठाकुर (कर्नाटक)

"समुद्र तट"

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                              समुद्र तट                            चंचल लहरों से                              रीझता मन                              नीला अंबर                           प्रतिबिंब है देखें                              सिंधु में जब                                   मनभावन                          दृश्य परिलक्षित                      ...

"दादी के किस्से"

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दादी के किस्से ,हमें बहुत है भाते उनकी कहानियों में ,हम ऐसे खो जाते  कभी रुलाते तो, कभी हमको हसाते  सुनहरी यादों की, बचपन की वो बाते ।। दादी ,कहानियों को ऐसे कहती सुनने की जिज्ञासा, हमारी भी बढ़ती रोचकता से भरी, उनकी किस्से जो होती  मीठी वो यादें ,मुझे आज भी भली लगती ।। दादी, नाना-नानी से, किस्से खूब सुनें बचपन की प्यारी यादें,जैसे कहानियों में बुने दादी का आशीर्वाद ,सदा हम पर रहे बैठेंगे दादी संग, उन किस्सों को फिर से सुनने ।। 💖बहुत याद आती है बचपन की वो प्यारी यादें..........                                                      मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)                

क्षणभंगुर जीवन" (हाइकु काव्य)

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                     🍂🍁🍁🍁🍁🍁🍂                               क्षणभंगुर                          जीवन हुआ तो क्या                             हमें है जीना                             जिंदादिली से                          हर क्षण को जीये                              साहस यही                            सुख-दुख तो                        आते-जाते पड़ाव         ...

"दहेज के तर्ज़ पर विवाह"

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दूल्हा चला करने, शुभ विवाह निकला घोड़े के सवारी पे बन- ठन के मदमस्त हो खुद में, न किसी की परवाह खुश है दूल्हे का पिता ,चेहरा भी ऐसे दमके ।। मिल गई पढ़ी-लिखी सुंदर कन्या भारी-भरकम दहेज, नोटों के साथ उच्च शिक्षित,अफसर बेटे के लिए मांगा है जो सुयोग्य कन्या का हाथ ।। ताउम्र रहेगा खुश, मेरा बेटा निजी जरूरतें भी पूरी हो पाई अब न कोई चिंता रह गई  कर आए बेटे के ,खर्चों की भरपाई ।। दहेज लोभियों को, मुबारक हो ऐसी शादियां आंसू भी नजर न आए ,पिता की भरी अखियां मेहनत के पैसों को ,संजोकर जो रखा था भविष्य की खातिर, खरीदने बेटी की खुशियां ।। आख़िर बेबस एक पिता ने  दहेज की तर्ज़ पर बिटिया को बिदा किया..........               मनीषा भुआर्य ठाकुर (कर्नाटक)

एक छोटी सी मेरी कविता

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                    एक छोटी सी मेरी कविता                     भावनाओं को मेरी कहती                                 सुख-दुख सारे पलों को                     अनुभवों के धागों में बुनती                                 निडरता ,साहस,धैर्य ,प्रेम से                      अपनें कल्पनाओं को गढ़ती                                अंकितकर अपने अहसासों को                     जीवन की परिभाषा, मैं कहती                                ...

"गौरैया"

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अंगना है हमारे ,गौरैया का बसेरा चीं -चीं की सुर से ,होता है सबेरा ।। आम के वृक्ष को, अपना नीड़ बनाया गौरैया के झुंड ने ,अपना कुटुंब बसाया ।। गोरैया चिड़ियों का ,चीं-चीं सुर से चहकना डाल से डाल, यू मस्त होकर फुदकना ।। अंगना में फुदकर आए ,चुगने जो दाना देखकर नन्ही चिड़िया, मिले खुशी का खजाना।। गौरैया के मधुर स्वर से ,दिल खुश हो जाता सुरमयी संगीत से ,आंगन मेरा खिलखिलाता ।। "गौरैया ओ गौरैया" ऐसे ही चहचहाना मेरे अंगना को छोड़ ,तू दूर हमसे ना जाना ।। गौरैया  ही हमारी प्रकृति, सुंदर नन्ही चिड़िया मधुर स्वर से चहकती, फुदके बगिया- बगिया ।। "गौरैया ओ गौरैया" सदा ऐसे ही चहचहाना संरक्षण तुम्हारी करके "प्रकृति" को है बचाना ।। ( २० मार्च विश्व गौरैया दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं)                              मनीषा भुआर्य ठाकुर✍️( कर्नाटक)

"तुम हो तो हम है"

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                   तुम हो तो हम हैं                              जिंदगी में क्या गम है ।                    साथ चलेंगे ,साथ चले हैं                              प्यार हमारा क्या कम है ।।                    मुश्किलों में साथ तू है                               हर खुशियों में तू है ।                    आंसू जब, आंखो में आये                               दर्द बांट ले वो तू है ।।                    जीवन के हर इक लम्हों को       ...

"जैसे को तैसा"

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किसान बीज बोए रे जैसे फसल लगन की, वो पाए वैसे अपने फसलों को, लहलाते देख खुश होए, रब मिल गया जैसे ।। कायदा जग का, मिले "जैसे को तैसा".................. मजदूर ने जब पसीना बहाया खुशियों के संग ,अपना जीवन बिताया न रह पाया, बड़ी हवेली तो क्या हुनर से अपने ,अमीरों का घर तो बसाया  कायदा जग का, मिले "जैसे को तैसा"................. माता-पिता दिये जैसे संस्कार संतान के जीवन को मिले आकार कर्तव्य समझ अपना,अंतिम क्षणों तक मात-पिता का करे सेवासत्कार  कायदा जग का ,मिले "जैसे को तैसा".................... इंसान करे दुनिया में कर्म जैसा परिणाम मिलता ,उसको वैसा अपने निस्वार्थ सेवा, सत्कार्यो से प्राप्त करें , सच्चा सुख जीवन से कायदा जग का ,मिले "जैसे को तैसा".......................                             मनीषा भुआर्य ठाकुर

जीवन में एक दिन

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         हर इंसान के जीवन में वो एक दिन ऐसा आता है,जो उसके लिए यादगार बन जाता है। किसी के जीवन में कभी दुख ही दुख आते हैं, तो वह सुख की कल्पना मात्र वी से ही खुश हो जाता है और जब खुशी उसके जीवन में दस्तक देती है तो उस सुनहरे दिन को वो कभी भूल नहीं पाता। जबकि इसके विपरीत कई बार ऐसा होता है, जब किसी इंसान के जीवन में अचानक दुख आता हैं तो वह अपने आप को संभाल नहीं पाता और ना चाहते हुए भी वह टूट जाता है।ऐसी विपरीत स्थिती में अपने को संभालना एक चुनौती ही होती है। इसलिए हमारे जीवन में सुख दुख दोनों पलों का समावेश होना चाहिए। ताकि हम इन दोनों पलों में "जीवन की महत्वता" को समझ सके व जीवनपथ पर आगे बढ़ते चले। जीवन में वह दिन, खास बन जाता है सुख-दुख हर स्थिति को इंसा जी पाता है ।। हिम्मत के सहारे, खुद को संभाल पाता है जीवन के भवसागर को ,वह तर जाता है ।।                    .............. मनीषा भुआर्य ठाकुर

एकतरफा प्रेम

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                    ❤️                 दिल में प्रेम               बयां न कर पाए                 जज़्बात वह                 जाहिर कर               अपना इश्क गर                 खफा हो जाए                          प्रेम ये ऐसा               लगे अंजाना डर                  खो न दू उसे                                           दिल में बसा                 एकतरफा प्रेम              ...

"यादगार वो अमरूद का पेड़"

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अमरूद का पेड़ देखकर मुझे अपना बचपन याद आ जाता है।कई बार कुछ चीजे हमे अपने बचपन की ओर खींच ले जाती है।और हम उन मीठी मीठी यादों में खो जाते हैं। अक्सर छुट्टियों के समय हम अपनी नानी-नाना के गांव जाया करते थे। मेरे नाना के घर के आंगन में ही बहुत बड़ा अमरूद का पेड़ था, जिसकी शाखाएं पूरे आंगन में फैली हुई थी। जैसे ही हम घर पहुंचते सबसे पहले हम सब भाई बहन उस अमरूद के पेड़ पर ही चढ़ते और मीठे-मीठे अमरूद तोड़कर खाते। और खूब मस्ती करते। हमारा सारा दिन उस अमरूद के पेड़ के आसपास ही बीतता। कभी पेड़ पर चढ़ते, तो कभी पेड़ के नीचे बैठकर मिट्टी के खिलौने बनाते। नाना-नानी के घर जाने से हम हमेशा खुश होते कि अमरूद के पेड़ पर चढेंगे खूब मस्ती करेंगे। एक तरह से वो अमरूद का पेड़ घर का एक सदस्य था। मेरी मां का बचपन भी उस अमरूद के पेड़ के छांव में बीता। उस पेड़ से जुड़ी कई यादगार क़िस्से मां आज भी बताती है। कहीं ना कहीं उनकी बचपन की यादें और हम भाई-बहनों के बचपन की यादें एक साथ ही जुड़ी हुईं हैं। कितना सुंदर और प्यारा मासूम सा वो बचपन का दिन ,जो जीते जी मेरे स्मृति पटल पर हमेशा रहेगा। वक्त के साथ-साथ व...

"जिंदगी के सफ़र"

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जिंदगी के सफ़र में                 मिलते हैं,प्यार के मौसम, साथ हैं ,इस डगर में                 चले जीवनसाथी जो हम ।।                        🌸 तय करते ,हर पड़ाव को                  पल-पल की खुशी और गम, जीते हम ,जिंदगी को ऐसे                  सुलझ जाए ,मुश्किलें हरदम ।।                         🌸 दूर-दूर तक रास्ते हैं                   आकाश से परे, हमारा प्यार, सुख-दुख से भरा जीवन हैं                  साथ निभाए,हम-तुम हर बार ।।                          🌸 हार जाती है, जिंदगी भी                 ...