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नारी

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नारी अब तेरे लिए , खुले सभी हैं द्बार। आज सफलता मिल रही, नहीं रही अब हार। घर की चौखट लांघ के, उड़े आज आकाश। संस्कारों के नाम से, डालो मत तुम पाश।। चूनर ओढ़े लाज की,  उसे बना के पंख। सपनों को पूरा करे, बजे जीत का शंख।। कविता झा 'काव्या कवि' रांची, झारखंड

शिवरात्रि

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भोले नाथ देखो चले, सर्प गले संग भले। खुश गौरा होने लगी , तपस्या पूरी हुई।। आज घर आने वाले, भस्म अंग लगा डाले। लगते मनभावन, गौरा शिव की हुई।। माता मैना चिंता करे, नाजों पली बेटी डरे। काले - काले नाग देख, बेटी बावरी हुई।। चली गौरा भोला संग, ढ़ली देखो पिया रंग। शिवरात्रि आज आई, भक्तों में खुशी छाई।। *** कविता झा काव्या कवि रांची, झारखंड

हुनर की पहचान

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गांव से शहर आकर दयमंती अपने पति की सीमित आय में घर चलाते हुए अपनी छोटी छोटी इच्छाओं को दबाती। रमाकांत दिन रात मेहनत करता, पर अपनी तीन संतानों और अपनी पत्नी दयमंती की हर जरूरत पूरी कहां कर पाता था। हर महीने मकान मालिक को किराया देना, तीनों बच्चों के स्कूल की फीस, कॉपी किताबें , इतनी कम आमदनी में सारी जरुरतें कहां पूरी हो पाती थी। जैसे तैसे जिंदगी गुजर रही थी, फिर एक दिन मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा जब रात भर ड्युटी करने के बाद रमाकांत सुबह घर लौट रहा था तभी एक बच्चे ने सड़क किनारे लगे आम के पेड़ पर गुलेल चलाई जो रमाकांत की दाईं आंख पर जा लगी। वो दर्द से छटपटाता हुआ अपनी आंख से बहते खून को रोकने का अथाह प्रयास कर रहा था तभी कुछ भले लोगों की नज़र उस पर पड़ी और उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया।  जब दयमंती को अपने पति के साथ हुई दुर्घटना का पता चला वो दौड़ती हुई अस्पताल गई जहां डाक्टरों ने बताया कि उनकी ऑंख का ऑपरेशन जल्द से जल्द करना होगा,खून बहुत ज्यादा बह गया है जिससे दूसरी आंख की रोशनी भी जाने का खतरा है। दयमंती ने अपने सारे गहने बेच पति का इलाज करवाया। कुछ दिनों बाद रमाकांत अस्प...

स्वामी विवेकानंद जी

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एक थे स्वामी विवेकानन्द जी  असली नाम था उनका नरेन्द्र नाथ दत्त वो थे ऐसे युवा  जिसने साधु बन दुनिया को भारत की असली पहचान कराई पच्चीस की उम्र में ही लिया इन्होंने सन्यास छोड़ घर बार देश के आने लगे काम रामाकृष्ण परमहंस के शिष्य बन  पूरी दुनिया में सनातन धर्म का प्रचार किया हिन्दू हैं हम हिन्दी बोलने में क्यों आऐ शर्म  उनके विचारों पर आज के युवा भी बढाऐ अगर कदम तो किसमें है दम कि किसी  से पीछे रहे हम संघर्ष से न घबराऐं कभी हम जितना बड़ा संघर्ष जीत उतनी ही होगी शानदार  ऐसे थे उनके विचार  हम करते हैं ढेरों काम एक साथ  और कर नहीं पाते कुछ भी सही से एक समय में एक काम करना और  अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल देना बाकी सब भूल जाना तन मन सब झोंक कर  अपने लक्ष्य को पा लेना हो जाऐगा आसान  अगर चलेंगे स्वामी जी के दिखाऐ पथ पर उनके हर विचार बदल देंगे हमारा जीवन समस्या आती है और वो आती रहेंगी  उनका था कहना जिस दिन आपके सामने समस्या आए नहीं आप यकीन कर सकते हैं कि  आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं हम खुद को अकसर समझने लगते हैं कमजोर पर ऐसा सो...

पुराना मकान

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वो पुराना मकान अपनी जीर्णावस्था में भी टकटकी बांधकर ताक रहा है राहें आस का दीपक जलाए अपने बासिंदों का कर रहा इंतजार लौटेंगे फिर से इक दिन बनाएंगे इस मकान को फिर से घर खिलखिलाऐंगी दीवारें फिर से महकेगा घर आंगन बच्चों की किलकारियों से गूंजेगा फिर से हर कोना खिड़की का पलड़ा हवा संग कर रहा है बातें  कैसे इंतजार में बीती इस मकान की हर रातें कितना खुशहाल हुआ करता था वो परिवार  जो इस मकान में रहा करता था फिर न जाने क्यों मनमुटाव होता गया रोकने की कोशिश नाकाम रही सब धीरे-धीरे कर अलग होने लगे मुझे छोड़ नया आशियां बनाने लगे मेरा कसूर बस यही था  मैं पुराना जो हो चला था *** कविता झा'काव्या कवि' सर्वाधिकार सुरक्षित

नव वर्ष के आगमन की हो रही तैयारी ..

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नव वर्ष के आगमन की हो रही तैयारी ... बादल भी बरसने को तैयार हैं... प्रकृति को संवारने को बेकरार हैं... पत्ता पत्ता खिलेगा ...जब बारिश होगी झमाझम... कुछ कड़वाहट जो संजोए रखी थी बादलों ने इस वर्ष.... वो दूर होंगे ... बिसरेंगे पुरानी बातों को... जब बहेंगे नीर बादलों के बारिश बन... नव वर्ष के आगमन की हो रही तैयारी ... सजेगा धरती का हर कोना जब शुरू करेगा बादल इसे अपने अश्रु धारा से भिगोना... हर फूल हर डाली महकने लगेगी... पिंजरे में बंद चिड़िया भी चहकने लगेगी... प्रकृति का आनंद लेने के लिए... खुले गगन में उड़ने के लिए वो भी छटपटाने लगेगी... नीर अपने बहाने लगेगी... नव वर्ष की तैयारी में पुरानी बातें बिसराने लगेगी.. नव वर्ष के आगमन की तैयारी हो रही है चारों ओर.... देखो जरा सुनो... अन्तर्मन से मच रहा ये कैसा शोर.. इस वर्ष की कड़वाहट को नव वर्ष न लेकर जाएंगे तभी तो बादल भी आज बरसने को तैयार है.. कड़वाहट मन की सब निकालने को बेकरार है... मौसम में ठंडक आएगी... मन भी होगा ठंडा... तभी ठंडे रिस्तों में गर्माहट लाने की करेंगे तैयारी.. प्यार बनाए रखने के लिए पुरानी बातों को मन से है बिसराना.. लु...