अग्निवीर बनेंगे बुढ़ापे का सहारा
"नहीं सरोज! तुम इस तरह से ऑंसू नहीं बहा सकती। तकलीफ होगी हमारे बेटे को। याद है ना तुम्हें? हमसे बिछड़ने से पूर्व एक ही बात कहता था कि मेरे पीछे आप लोग आंसू मत बहाना।" रिटायर्ड कर्नल रंजीत सिन्हा ने अपनी पत्नी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। "मैं आंसू नहीं बहा रही। आज करण की याद कुछ अधिक ही आ रही थी तो सोचा!उससे कुछ बातें कर लूं। बातें करने में इतनी सुध - बुध ही ना रही। देखिए ना! इतनी देर हो गई है, आपकी शाम की चाय का वक्त भी हो चला है और मैं अपने बेटे की यादों में ही खोई रह गई।" रिटायर्ड कर्नल रंजीत सिन्हा की पत्नी सुजैन सिन्हा ने अपने आंखों की कोरों में आए आंसुओं को पोंछते हुए कहा। "तुम चाहो तो करण से कुछ देर और बातें कर सकती हो। मैंने तुम्हें उससे बातें करने से कभी नहीं रोका है। मैं तो सिर्फ तुमसे इतना कहना चाहता था कि उससे बातें करते समय अपनी आंखों को गीली मत करना वरना हमारे बच्चे की आत्मा को सुकून नहीं मिलेगा। इस देश का मस्तक फक्र से ऊंचा करते हुए शहीद हुआ है हमारा बेटा। एक फौजी और उसका पिता होने के नाते भी मेरा सीना यह सुनकर चौडा़ हो जाता है कि मेर...