गान सुनाएँ
चीं चीं चीं चीं गान सुनाएँ, चिड़िया यूँ हीं हंँसाती l प्रकृति के सब रागों में वो , सुंगधित गूंँज धड़काती l चीं चीं चीं चीं गान सुनाएँ, चिड़िया यूँ ही हंँसाती l पानी पीकर झूमें नाचे, तराशी सारी पाखी हैं l सरगम साज सजे हैं हरदम , जैसे गाएँ साखी हैं l पवन वेग में उड़ती जाएँ, सुनहरी पंखे फुदकाती l चीं चीं चीं चीं गान सुनाएँ, चिड़िया यूँ ही हँसाती l साथी साथ उड़े गूँजे रे, बलखाती शर्माती हैं l पावन सपनें पंख पंख में, सब हरदम ले चलती हैं l धुन में अपनी उड़ती जाएँ, प्रेम रंग ही बरसाती l चीं चीं चीं चीं गान सुनाएँ, चिड़िया यूँ ही हंँसाती l कूँ - कूँ कर पीड़ा भूलाते, मीठी वाणी रस घोले l कहे सदा हमें अपने सपन, सींचो ऊँचे विचार को ...