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Showing posts with the label प्रांशु गुप्ता

जुदाई ( वीर की अंतिम विदाई)

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************************** यह कैसी जुदाई है भर आंखों में आंसू एक मां गर्व से मुस्कुराई है लिपट के तिरंगे से उसके लाल की आज शव घर में आई है देख बाबा ने उसके गर्व से अपनी छाती फूलाई है बिछड़ रहा है वो लाल उनसे जिसे रख कंधे पर उन्होंने ये दुनिया दिखाई है यह कैसी जुदाई है सौंप दिया था जिसे पहले ही भारत मां के चरणों में उस भाई का उसका छोटा भाई कर रहा अंतिम विदाई है  और सात फेरों में बंद कर साथ जन्मों तक  साथ निभाने की जिसने कसम खाई है उस वीर वधू ने आज अपने सर से लाल चुनर हटाई है पर होने न दिया लज्जित उसने उसके बलिदान को अपनी कोख में पल रहे बच्चे को भी भारत मां को समर्पित करने की आश जगाई है यह कैसी जुदाई है सब कुछ खोकर भी उस परिवार ने मातृभूमि से अपनी प्रीत ना भूलाई है अपने अपने दर्द को  रख अपने सीने में सब ने एक दूसरे की आश बनधाई है हो रही है विदाई उस वीर की जिसने अपनो के खातिर अपनी जान लुटाई है  जाने ये कैसी जुदाई है  तड़प भरी है सब के सीनो ने मगर सब ने गर्व से मुस्कुरा के अंतिम पुष्प चढ़ाई है  कर नमन उस वीर को भारत मां ने भी अपनी बाहें फैलाई है *******...

तेरे आने का इंतजार

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सात वचनों  में बांधकर तू मुझे अपने घर लाया था मैंने भी तेरे सारे गमों और खुशियों को तहे दिल से अपनाया था तेरे मां बाबा को अपना मां बाबा बनाया था तुझसे जुड़े हर रिश्ते की डोर में खुद को बांध पाया था जानती थी तू इस देश का सिपाही है मुझसे किये वादों से पहले तूने इस देश की रक्षा करने की कसम खाई है कि मेरे हाथों की मेहंदी भी ना उतरी थी  जब सरहद से आया तेरा बुलावा था उस पल तुझसे दूर रहने की मैं सोच भी ना पाई थी  तेरे साथ सातों जन्म बिताने की कल ही तो मैंने कसम खाई थी कि इन हाथों की मेहंदी भी ना उतरी और तेरे जाने का वक्त आया था फिर तेरे इंतजार में मैने पल पल तेरी याद में अपना हर एक पल बिताया था मां की बूढ़ी आंखों में भी तेरा इंतजार झलकता था उनका एक लाडला बेटा उनकी आंखो में हरदम तारे की तरह चमकता था बाबा के टूटे चश्मे में भी तेरा इंतजार दिखता था जब उनकी छड़ी  हाथों से छूट जाए एक तेरा ही तो सहारा उन्हें दिखता था पर जब देखती थी मां बाबा को ऐसे तब यह सोचती थी कि तेरे आने के इंतजार ने क्या सच में उनसे ज्यादा मुझे तड़पाया था  हां बेशक मेरे पायलों की रुनझुन तेरे कानों...

अनकहा प्यार (मां)

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************************ कोई कहानी कोई किस्सा नहीं हकीकत है ये एहसासों की वो अनकहे प्यार की खूबसूरती जो होती बयां लफ्जों से नहीं उसकी एक झलक दिखा सकूं अपनी कविता में  बस आशा है इतनी ************************ ______________________ कि वह पल मुझे आज भी याद है! जब खबर तेरे आने की हुई थी!! सच कहती हूं कभी सोचा ना था,, तेरे रूप रंग की काया, मन में अभी कोई तस्वीर भी ना बनाया था ! पर फिर भी उस पल में न जाने कितने एहसास उमड़े थे! तेरे आने की तुझे पाने की खुशी इतनी थी , एक पल में मानो सदियां बीत गए थे! संभाले संभलती न  थी वो खुशी,, पर धीरे-धीरे पल बिता दिन बिता,, और वो एहसास और गहरे होते गए!  तुझे खुद में महसूस करने लगी थी!! अब मैं तेरी काया अपने मन में गड़ने लगी थी!! और उस दिन जब तुमने अपने नन्हे पैरों से हल्की सी लात मारी थी,, वो पल भी याद है मैं कितनी चौक पड़ी थी! मोनो एकाएक मेरे हृदय में प्रसन्नता की हजार लहरें दौड़ पड़ी थी!! मुझे यकीन है तुम भी सुनते थे,, जो मैं अकेले में तुमसे हजारों बातें किया करती थी! सोचती क्या ऐसा भी कुछ होता है,, मन एहसासों और जज्बातों से भर जाता...

वृद्ध आश्रम

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संस्कारों की नीव टूट रही है रिश्तो की डोरी छूट रही है जाने कहां खो गए वो रीत पुराने अब तो अपनों से अपने ही हैं बेगाने ना दिलों में वो स्नेह सम्मान बचा ना वो हंसता खेलता परिवार बचा ना अब बुजुर्गों की डांट सुनने को मिलती है ना अब पोता पोती दादी के हाथ पलती है जाने कहां से आया यह चलन वृद्धा आश्रमों का जो मानवता को भी शर्मसार करती है जाने कैसे खत्म हो रहा वह प्यार जाने कैसे बेटा बेटी करते अपने मां-बाप का त्याग यह संस्कृति हमारी तो नहीं जाने कहां से आई है दो अक्षर क्या पढ़ लिए मानवता ही भुलाई है जिसने सिचा हमें अपने प्यार से खुद जलकर हमें राहों में रोशनी दिखाई है उनके प्यार और संस्कार को भूलती है  जाने कहां से आया यह चलन वृद्ध आश्रमों का जो मानवता को भी शर्मसार करती हैं अपनी संस्कृति का जरा ज्ञान रखो दिल में बड़ों का सम्मान रखो हमारे बुजुर्ग वो नीव है  जिनके सहारे आबाद हमारी जिंदगी है यह वृद्धा आश्रमों का चलन हमारा नहीं यह तो  विदेशी संस्कृति है हमने तो सीखा है हरदम प्यार और सम्मान करना वृद्ध आश्रमों में नहीं अपने माता-पिता को अपने घर मंदिर में ईश्वर सा स्थापित करना प्...