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मेरे पीहर वाली बात नही

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इस बार की होली में मेरे पीहर वाली बात नही इस बार की होली में दिल मे वो जज्बात नही रँग चढ़े चाहे तन पर मेरे, चाहे खेलूँ पिचकारी से इस बार की होली में लेकिन सखियों की मीठी बात नही। पकवान बनाऊँ कितने ही चाहे, मैं अपने इन हाथों से पर मेरे हाथ के खाने में, मेरी माँ के हाथ का स्वाद नही चाहे बनाऊँ खीर या हलवा या फिर मीठी-मीठी गुजिया पर मेरे हाथों की उन गुजियों में, मेरे पीहर का प्यार नही। माना कि सब कुछ है आज, बनकर माँ का आशीर्वाद पति मिला भगवान के जैसा, बच्चों का भी मिला है साथ लेकिन फिर भी क्यों लगता है, जैसे कहीं कुछ छूट गया है सिर्फ नही मेरा बचपन, अब अल्हड़पन भी रूठ गया है। बहने छूटीं, भाई छूटे, छूट गया भाभियों का साथ वो गलियाँ छूटीं, रस्ते छूटें और छूट गया वो शहर भी आज फिर भी यादों में बसते वो पल जो बीते थें अपनों के साथ आज की होली पता नही क्यों, मुझे दिलाए सबकी याद। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 लेखिका-कोमल भलेश्वर

यूँ ही थामे रखना तुम मेरा हाथ

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यूँ ही थामे रखना बस तुम मेरा हाथ कभी ना छोड़ना तुम मेरा साथ चाहे हो हजारों मुश्किलें चाहे हो गम हजार बस थामे रखना हर पल मेरा हाथ देखना मंजिलें भी तब होगी आसान बढ़ाएंगे कदम जब दोनों एक साथ यूँ ही थामे रखना बस तुम मेरा हाथ! चाहे दुश्मन हो सारा जमाना चाहे छोड़ दे हर कोई मेरा साथ चाहे जिंदगी भी ले इम्तिहान बस तुम ना छोड़ना मेरा कभी हाथ देखना जमाना भी होगा तब हमारे ही पीछे लड़ेंगे जब हर मुश्किल से दोनों एक साथ बस यूँ ही थामे रखना बस मेरा तुम हाथ!

14फरवरी, पुलवामा अटैक

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14 फरवरी, हाँ वो प्यार का सबसे खास दिन सबसे यादगार  मनाने का हम तो बस सोचते ही रह गए प्यार के इस सबसे प्यारे दिन में असली मुहोब्बत तो हमारे पुलवामा अटैक के शहीद निभा गए। हमने तो मुहोब्बत बस इंसानों से की कुछ ने प्रेमिका से की तो, कुछ ने अर्धांगनी से की कुछ अपनी माँ को ही सच्ची मुहोब्बत बतला गए लेकिन सबसे अलग मुहोब्बत तो हमें हमारे शहीद ही सिखा गए इनकी मुहोब्बत का कर्ज जो पूरे देश पे है कभी कोई उसे उतार नही सकता जो मुहोब्बत इनकी भारत माता के लिए वैसी मुहोब्बत कोई करके दिखा नही सकता भूल के इनके बलिदानों को  मैं कैसे वैलेंटाइन डे मनाऊँ देख के इनकी  मुहोब्बत सच्ची मैं  हर दम अपना शीश झुकाऊँ आज भी सोचती हूँ तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं कैसे इनके घरवाले इनकी मौत को स्वीकार कर पाते हैं कितनी ही सुहागनें आज के दिन विधवा हो गई थी जब पुलवामा अटैक में हमारे सैनिकों को वीर गति प्राप्त हुई थी लोग कश्मीर की वादियों में घूमने को जाते हैं लेकिन हमारे सैनिक देश की रक्षा को जाते हैं इनके एक दिन का भी कर्ज हम उतार नही सकते ईश्वर के बाद यही पूजनीय हैं ज्यादा सबसे। कोमल भलेश्वर

आखिरी खत

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आज आखिरी साँसे चल रही हैं जीवन की बहुत सी बातें अभी भी करनी है तुमसे लेकिन अब बूढ़ी जुबान लड़खड़ाने लगी हैं इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं आज न जाने वो लम्हा क्यों याद आ रहा है जब पहली बार तुम देखने आए थे थे तो तुम अजनबी तब  लेकिन अपने नजर आए थे चलो आज जाने से पहले वो पल फिर से जी लेते हैं इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं आज चेहरा बिल्कुल मुरझा गया है बहुत सी बीमारियों से घिर चुका है लेकिन आज भी याद आता है मेरा तुम्हारे जीवन मे आना तुम्हारी दुल्हन बनकर तुम्हारे घर को महकाना चलो आज जाने से पहले वो पल फिर से जी लेते हैं इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं आज पल दो पल की ही साँस बची हैं न जीने की अब कोई आस बची है लेकिन आज अपना जीवन देख रही हूं अपनी पीढ़ियों में तुम्हारा और मेरा अंश देख रही हूं सभी के चेहरे पर चलो आज जाने से पहले इनमें खुद को ढूँढ लेते हैं इसीलिए आखिरी खत तेरे लिए लिख देते हैं आज वो पल भी फिर से याद आ रहा है जब आपका प्यार नए जीवन के रूप में आया था तब ओर भी गहरा हुआ था रिश्ता हमारा जब हम दोनों ने ही खुद को सम्पूर्ण माना था चलो आज जाने से पहले उन रिश्तो...

कुछ खट्टी कुछ मीठी सी यादें

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कुछ खट्टी तो कुछ मीठी सी ये यादें तेरी मेरी मुहोब्बत की हैं यादें देखो ना एक हुए हो गए कई साल फिर भी मुझको महकाए तेरे प्यार  की सौगातें आज भी बस कल की ही बात लगती है जब तुम मुझको देखने आए थे बैठे थे घर के सभी बड़े भी साथ और तुम चाहकर भी मुझको देख ना पाए थे। यूँ तो करवाचौथ हर साल आता हम दोनों के प्यार का रँग ओर भी गहराता है लेकिन पहला करवाचौथ कुछ अलग और खास था जब तुम लाए थे साड़ी और कोई नही पास था। आज भी तो वो कल की ही बात लगती है जब तुम और हम छुपकर मिला करते थे याद है आज भी वो पल मुझे जब  तुम मेरे लिए चूड़ियाँ लिया करते थे। क्या तुम्हें याद हैं वो हरे काँच की चूड़ियाँ जो तुम लाए थे मेरे लिए शान से फिर लिया था मेरा हाथों में हाथ अपने और पहनाई थी बहुत प्यार से। क्या तुम वो खट्टी मीठी याद है आती क्या जब हम मिले थे शादी से दो दिन पहले चोरी से आई थी मिलने तुमसे पिछली गली में जिसे याद करके दिल आज भी चहके। तुम हमें हर रात एक गीत सुनाया करते थे और हम भी उस गीत में खो ही जाया करते थे आज भी याद है मुझे वो पूरी पूरी रातें जब थे तुम दूर मगर बन गए थे साँसे। फिर वो खूबसूरत लम्हा भी आया ...

अखबार की सुर्खियाँ

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तेरी मेरी प्यार की कहानी अखबार की सुर्खियां बन गई जो न भूल पाए कोई भी इश्क की वो दास्ताँ बन गई हर अखबार के मुख्य  समाचार में हम हैं चाहे अंग्रेजी हो या हिन्दी हर तरह के अखबार में हम हैं तेरे मेरे इश्क की बात आज हर जुबान पे चढ़ी क्योकि आज ही के दिन वो आज के अखबार पे लिखी जिसे देखो दबी जुबान से हमारा नाम लिए जा रहा है कोई कहता हीर राँझा हमे  तो कोई लैला मजनूं बता रहा है क्योंकि आज ही के दिन कहानी हमारी अखबार में छप गई इतनी सी तो बस खता की थी हमने तेरे साथ घर से दबे पाँव चले गए कुछ नही कहा हमने जमाने को लेकिन फिर भी उसके दुश्मन हम बन गए क्योंकि मेरा तेरे साथ भागना अखबार की हैडलाइन बन गई इसीलिए अखबार की सुर्खियां इश्क की दास्ताँ बन गई

जासूसी

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हाँ,मुझे शक है अपनी बीवी पे!ऐसा नही कि प्यार नही करता उससे!लेकिन ये शक है कि जाता ही नही है मेरे दिमाग से!वो इतनी सुंदर और मैं बिल्कुल साधारण,फिर कैसे प्यार कर सकती है वो मुझसे?आखिर क्यों शादी की उसने मुझसे?मैं जानना चाहता हूँ,क्या सचमे में प्यार करती है वो मुझसे? राहुल एक कामयाब बिज़नेसमैन,किसी भी चीज की कमी नही थी उसे!दौलत,शोहरत,नाम सब था उसके पास!बस एक कमी थी तो सुंदरता की!साधारण सी सूरत,लम्बा कद और गहरी भूरी आँखे थी उसकी!उसकी पत्नी निहारिका गजब की सुंदरता भरी थी उसमें!गोरा रंग,नीली आँखे,भूरे बाल,ऐसा लगता जैसे ऊपर वाले ने बहुत फुर्सत से बनाया है उसे!कोई एक बार जो देखले तो जिंदगी भर ना भूल पाये,ऐसी सुंदरता पाई थी उसने!पैसे के दम पर ही राहुल ने निहारिका को पाया था!उसकी सौतेली माँ को पूरे दो करोड़ देकर शादी की थी निहारिका से!निहारिका ने भी उसे हमेशा  दिल ओ जान से चाहा! लेकिन राहुल के मन मे हमेशा यही शक रहता कि कहीं निहारिका उसे छोड़कर किसी ओर से शादी ना करले!राहुल बहुत बेचैन रहता,यहाँ तक कि अपने दोस्तों से भी निहारिका को दूर ही रखता!उसका शक धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा था!उसे हर प...

तेरे इश्क़ में

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सुनो ना आज एक बात करती हूँ तुमसे आज अपने इश्क का इजहार  करती हूँ तुमसे जीत ही लिया आज तुमने मुझे  प्यार से हार अपनी  तेरे इश्क़ में स्वीकार करती हूँ चाहे होती थी बातें या फिर होती थीं मुलाकातें नही किया था माफ़ हमने कभी तेरी गलती को आज मैं सभी के सामने ये स्वीकार करती हूँ तेरे इश्क़ में तेरी हर गलती को अब माफ़ करती हूँ कदम जो बढ़ा लिए वो पीछे नही करेंगे दूर हूँ चाहे लेकिन साथ तेरे ही जिएँगे आज अपनी हर तड़प का इकरार करती हूँ तेरे इश्क़ में हर वादा चलो मैं आज करती हूँ बहुत सी बातें थीं मन में और बहुत से थे सवाल भी दिया तुमने हर सवाल का जवाब  और मेरा रखा ख्याल भी आज मैं भी दिल का तेरे ख्याल रखती हूँ तेरे इश्क़ में  आज खुद को निसार करती हूँ। जानती हूँ ये भी नही किस्मत में साथ तेरा ये भी मानती हूँ मैं नही किस्मत में पाना तुझे मैं तुझे तेरी मुहोब्बत के सँग ही स्वीकार करती हूँ तेरे इश्क़ में खुद को हर बार मैं बर्बाद करती हूँ ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

दहलीज

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न्याय होगा तब जब हम मिलकर आवाज उठाएंगे अब अपनी बेटियों को घर में नही छुपाएँगे अब वो भी लेंगी खुली हवा में साँस हैवानों से डरकर उनके पँख नही काटेंगे घुटन भरी जिंदगी अब गवारा नही हमें उड़ना है आसमान में अपनी जिंदगी खुद सवारेंगे आओ चलो मिलकर करें ये प्रण कभी भी किसी से डरकर नही करेंगे खुद को  ध्वस्त अगर कोई  लेगा हमारी बहादुरी के इम्तिहान तो कर देंगे सब पस्त चाहे फिर जाए हमारी जान आओ चलो मिलकर इस दहलीज को लाँघते हैं रस्मों रिवाजों को छोड़ पीछे हवा में चिड़िया की तरह चहकते हैं आओ तोड़े समाज के झूठे बनाए हुए नियम जो औरत को कम हैं आंकती और करती घरों में बंद अब छोड़ के चूल्हा चोंका हम भी आगे आएंगी  दहलीज को ससुराल की लांघ कर नॉकरी पर भी जाएँगे नही डरेंगे किसी भी गंदे और वहशी इंसान से अब मदद के लिए हम किसी से नही बुलाएँगे अब उठाकर हथियार खुद ही चलाना है हम नही हैं पुरुष से कम ये उनको भी दिखलाना है लेकिन नही लांघेंगे अपने संस्कारों की दहलीज सिर्फ लाँघनी हमने झूठी रस्मों की दहलीज 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ॐ नमः शिवाय 🙏🙏🙏🙏🙏

बचपन

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आज ना जाने क्यों ये बचपन बहुत याद आता है! वो शुरुवात जीवन के सफर की सोच कर मन भर जाता है! कैसे जिया हमने अपना बचपन बड़े प्यार से सोच कर आँखों में समुंदर उतर आता है। वो प्यारी सी गुड़िया,गुड़िया की शादी शादी में सखियों का बनना बाराती वो सहेली का गुड्डा भी बहुत मन को भाता है आज ना जाने क्यों ये बचपन बहुत याद आता है! आज भी याद आती हैं वो गलियाँ वो मुहोल्ला जहाँ मिलकर हम मचाते थे हो -हल्ला ना कोई थी चिंता ना कोई शिकायत वो एक-दूसरे के साथ छुपन-छुपाई का खेल बहुत याद आता है! आज भी याद आता है मुझे पेड़ वो शहतूत का जो था मेरे पड़ोस में मेरे हमउम्र दोस्त का वो याद कर वो अंताक्षरी मेरा मन भर आता है आज ना जाने क्यों वो बचपन मुझे बहुत याद आता है! आज भी याद है मुझे माँ के हाथों की वो रोटी थी उसमे माँ की ममता और साथ में सब्जी आलू की आज भी याद आती है मुझे पापा की वो डाँट जिसको सुनते ही हो जाते थे हमारे खट्टे दांत कभी कभी मन करता बच्ची फिर बन जाऊँ छोड़ के दुनियादारी उस जादुई दुनिया में जाऊँ फिर से करूँ इतनी शरारत कि माँ मेरे पीछे भागे डराकर मुझे डंडे से फिर स्नेह के बाँधे धागे 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺...

संकल्प

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सुना है उसके घर में भी एक बेटी है जो अक्सर दूसरे की बेटी को खिलौना समझकर खेलता है सुना है अपनी बेटी को गंदी नजरों से भी बचाता है दूसरों की बेटी को देख जिसका मन मचलता है उम्मीद की एक किरण थी मेरे पास कि उसकी बेटी उसे इंसानियत सिखाएगी लेकिन अफसोस हुआ देख कर कि उसकी बेटी भी उसे बदल नही पाएगी यही सोचती हूँ बनकर एक औरत मैं  बेटियों के बाप से भी दूसरों की बेटियों की  इज्जत अपनी बेटियों जैसी क्यों नही हो पाएगी देती थी बद्दुआ रब ऐसे लोगों का घर बेटी से भर दें जो देखे गंदी नजरों से दूसरे की बेटियों को रब उनके घर भी एक बेटी जरूर दे लेकिन आज देख कर अफसोस हुआ बहुत क्यों आदमी इतना हैवान हो गया घर में होती हैं बेटियाँ इनकी और बेटी की उम्र के कपड़े उतार रहा अब अपने देश को इन भेड़ियों से बचाना होगा जो डाले बेटियों पर बुरी  नजर उन्हें बाहर लाना होगा बदनामी के डर से नही लड़ना  हमे छोड़ना हमें ऐसे लोगों को फाँसी तक लाना होगा तभी उम्मीद की एक किरण को हर जगह फैलाएंगे जब हम सब मिलकर ऐसे पापियों सजा दिलवाएंगे चलो मिलकर करते हैं संकल्प हम सब कि हवस का भूखे भेड़ियों को उनकी औकात दिखाएंगे ...

खुबसूरत शैतानी शीशा भाग-३२

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अनीश पूजा को घर छोड़कर सीधे नीरज के सामने प्रकट हो  जाता है और अब उसका आमना-सामना सीधे नीरज से होता है।दोनो ही क्रोध की आग में जल रहे हैं और एक -दूसरे को घूर रहे हैं।अब अनीश गुस्से में नीरज से पूछता है कि पूजा को मारने लिए क्यो भेजा गया था उस चुड़ैल शकीला को? क्योंकि तुम गलत रास्ते पर जा रहे हो अनीश,इसीलिए मुझे शकीला को भेजना पढ़ा।समय रहते सुधर जाओ वरना अभी नीरज इतना ही कह पाया था कि तभी बीच मे ही उसकी बात काटते हुए अनीश बोला तो वरना क्या??बोलिये पापा वरना क्या करेंगे आप? अब नीरज का क्रोध ओर भी ज्यादा बढ़ जाता है और वो बोला तुम जानते हो यहाँ के जितने भी भूत,चुड़ैलें ,पिशाचनियाँ हैं वो सब मेरे ही अधीन है फिर तुम तो एक चुड़ैल के बच्चे ही हो सिर्फ।इसीलिए मेरी आज्ञा की अवहेलना मत करो नही तो पछताओगे। उसकी बात सुनकर अनीश का क्रोध ओर भी ज्यादा बढ़ जाता है और क्रोध से उसकी आँखे लाल होकर चमकने लगती है!अब वो नीरज से कहता है आप के पास जितनी भी शक्तियाँ हैं वो मेरी माँ की ही आपको मिली है इसीलिए इतना घमंड अच्छा नही।रही बात मेरी शक्तियों की तो समय आने पर आपको पता चल जाएगा कौन किस पर भारी है।आप ...

खुबसूरत शैतानी शीशा भाग-३१

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पूजा अनीश के बालों में से जहरीला कीड़ा निकाल देती है जिससे उसके हाथों में डंक लग जाता है।जिससे उसके हाथ मे अब असहनीय पीड़ा होने लगती है।अनीश उसे एक पत्थर पर  बिठाता है और डाँटता है।अनीश अब उसे गुस्से में कहता है क्या जरूरत थी इस तरह कीड़े को हाथ से हटाने की?तुम्हे पता है ये जँगल है यहाँ ऐसे जहरीले हजारो कीड़े होंगे।ये कहकर अनीश आसपास कोई पत्ते ढूंढता है।काफी देर तक ढूंढने के बाद उसे वो पत्ते मिल जाते हैं।अब अनीश उन्हें तोडकर पूजा के हाथ पर रगड़ देता है।काफी देर रगड़ने के बाद अब पूजा के हाथ से जहर निकल जाता हैं और अब उसका दर्द भी कम हो जाता है।अब पूजा को कुछ राहत महसूस होती है और वो वही पर रखे एक बड़े पत्थर पर लेट जाती है। अनीश उसे ऐसे निढाल पड़े देख डर जाता है और जाकर उठाता है।अनीश कहता है पूजा उठो बताओ क्या हुआ?कोई दिक्कत है क्या? पूजा अनीश को इस तरह चिंता करते देख उठ कर बैठ जाती है और कहती है कोई दिक्कत नही है बस नींद आने लगी थी शायद थकावट की वजह से। अनीश अब समझ जाता है कि हो न हो उस जहरीले कीड़े का जहर पूजा के शरीर मे रह गया हैमअब अनीश अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करता है और अपना एक...

अँधेरे रास्ते की वो मुलाकात

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थे अँधेरे रास्ते वो थे हमारे वास्ते चले थे दोनो एक साथ ना थे उम्र के भी फासले एक एक पल था बहुत रूमानी  जिसमें जिक्र था बस इश्क का रूहानी  बातों ही बातों में करीब आ रहे थे हम दोनों प्यार की बरसात में नहा रहे थे वो चाहते थे जाना छोड़ उस अँधेरी रात में हमने भी जताया हक कहा ना जाओ इस अँधेरी रात में आज की इस रात को यादगार बनाना है आज हम दोनों ने बस इश्क़ में नहाना है लिया एक कप चाय का प्याला उसने अपने हाथ में घुल गया हवा में इश्क़ उनके रूहानी साथ में एक एक पल में हमने सदियाँ थी गुजारी लग रहा था ऐसा जैसे जान जाएगी हमारी कुछ इस तरह से हमने खुद को सौंपा था उन्हें जैसे जून की गर्म धरती को भिगोए बरसात की बूँदें बस ठान लिया था ये रिश्ता उम्र भर निभाएंगे ना कभी मझधार में  उनको  छोड़ कर जाएँगे तभी रूहानी इश्क़ ने की बात उस अजनबी की बताया प्यार नही सब है उसके लिए दिल्लगी एक एक मोहरे का था नाम बताया मेरे दिल पे उसने था एक बाण चलाया हम तो बस खामोश से होकर ही रह गए वो ना जाने कितने राज हमको बता गए जो हमने समझा था कि ये इश्क़ था रूहानी वो तो बस एक रात की थी सारी कहानी उस एक मुलाकात ...

खुबसूरत शैतानी शीशा भाग-३०

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अनीश अब नीरज यानि अपने पिता से बात करके फिर से कठोर हो जाता है और उसे रात की  नींद के लिए पछतावा होने लगता है।अब वो सोचता है कि काश रात उसे उस पीहू की लोरी सुनकर नींद न आई होती तो आज पीहू को मारकर अपनी माँ की मौत का बदला ले चुका होता!अब अनीश खुद से ही बातें करता हुआ कहता है कोई बात नही ये काम कल रात नही  हुआ तो आज रात जरूर कर दूँगा यही सोचकर अनीश अब तैयार होकर अपने कमरे से बाहर आता है।अनीश देखता है कि कौशल्या और पीहू आपस में कुछ नीरज की ही बात कर रहे हैं इसीलिए वो अब छुप कर सुनने की कोशिश करता है। कौशल्या कह रही है पता नही नीरज के किये की सजा हम सब कब तक भुगतेंगे?इस लड़के ने जो किया तेरे साथ वो बहुत नही था जो अब अपने बेटे को भी यहाँ भेज दिया था हम सभी से बदला लेने। पीहू इस बात पर रोने लगती है और कहती है माँ उस बच्चे का क्या कसूर जो नीरज और छाया ने अपने स्वार्थ के लिए पैदा किया था!उस समय चाहे उसकी शक्तियों से डरकर मैंने उसे छोड़ दिया लेकिन आज जब वो मर चुका है तो पता नही क्यों बहुत दुख हो रहा है।काश कि वो भी अर्नव की तरह मेरा ही बेटा होता।ये कहकर वो रोने लगती है और कौशल्या...

खुबसूरत शैतानी शीशा भाग २९

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अनीश अब अर्नव बनकर घर आ जाता है तो देखता है कि पीहू और राघव उसी का इन्तेजार कर रहे हैं।पीहू अर्नव को देख कर खुश हो जाती है और उसे अपने पास बुलाकर कहती है यहाँ आ हमारे पास बैठ,देख तेरे लिए तेरी पसन्द का पोहा बनाया है। अनीश जो कि अर्नव के रूप में है वो आकर पीहू के पास बैठ जाता है और पीहू उसे अपने हाथों से पोहा खिलाने लगती है। अब अनीश मन मे सोच रहा है कि इस प्यार पर सिर्फ मेरा हक था,जो आपने उस अर्नव को दे दिया।चुड़ैल का बच्चा था तो क्या ,जन्म तो तुमने ही दिया था मुझे!अब मैं ऐसी तबाही करूँगा कि कुछ नही बचेगा!नही आऊँगा तुम्हारी इस ममता के दिखावे में। पीहू उसे इतनी खामोशी के साथ अपने हाथों से पोहा खाते हुए देखती है तो पूछती है क्या हुआ अर्नव,क्या सोचने लगे? कुछ नही माँ,बस आपके प्यार के बारे में सोच रहा था। पीहू उससे पूछती है “क्या सोच रहे थे बेटा,कोई कमी लगी क्या माँ के प्यार में”? अनीश अचानक से बोल देता है हाँ लगी।लेकिन जब पीहू उसे गम्भीरता के साथ देखती है तो वो बात को बदलते हुए कहता है यही कि माँ कितने दिन हो गए आप मेरे साथ नही सोए। पीहू उसकी बातों से मुस्कुराने लगती है और कहती है ठ...

खुबसूरत शैतानी शीशा भाग-२८

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स्वामी केशवदास जी और बाकी सभी भी उसी दिशा में जा रहे हैं जिधर वो सभी है।कुछ ही देर में  वो सभी वहाँ पहुँच जाते हैं और देखते हैं कि अनीश वहाँ पर मरा हुआ पड़ा है और उसके सामने अर्नव एक त्रिशूल लिए खड़ा है,जिस पर अनीश का रक्त भी लगा हुआ है। पीहू इस नजारे को देखती है तो खुश हो जाती है और दौड़कर उसे अपने गले लगा लेती है और कहती है शुक्र है मेरा बच्चा बिल्कुल ठीक है। बाकी सभी भी इस नजारे को देखकर बहुत प्रसन्न हो जाते हैं।अब अर्नव आगे आता है और स्वामीजी को प्रणाम करता है और सभी खुशी-खुशी घर आ जाते हैं। केशवदास जी को कोई फ़ोन आ जाता है और वो  बाहर से ही वापिस अपने आश्रम चले जाते हैं। राघव घर आकर अर्नव से पूछता है कि उसने इतने शक्तिशाली शैतान को मारा कैसे है? अर्नव बताता है कि वो तो मुझे जान से मारकर मेरा खून पीने ही वाला था लेकिन तभी मेरी नजर वहां से कुछ दूर रखे हुए त्रिशूल पर चली गई,तो मैं दौड़कर वहाँ गया और उसे उठा कर अनीश के सीने में मार दिया। अब सभी को सारी बात जानकर  तसल्ली होती है और पीहू अब पूजा को कहती है जाओ बेटा थोड़ी देर अर्नव के साथ उसके रूम में जाकर बातें करलो,फिर ...

पिता

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आज एक बार फिर आप याद आ रहे हो मेरे हर पल में मुझको रुला रहे हो पिता क्या होता है ये अब जाना हमने जब आ गए उनकी उम्र में तब माना हमने जब थे मेरे पास तो नही जान पाई आपका प्यार अब जब जानी हूँ तो आप नही हो साथ मेरे बचपन को अधूरा छोड़ गए जरूरत थी जब बहुत तो क्यों चले गए बहुत सी बातें करना चाहती हूँ आपके साथ फिर से गोदी में भी चढ़ना चाहती हूँ काश कि एक बार ईश्वर आ जाए मुझे सिर्फ एक बार आपसे मिला जाए जब देखती हूँ औरों को पिता से बातें करते तब सच मे बहुत याद आती है पापा तुम्हारी बस एक बार आप भी लौट आओ वापिस मैं फिर से छोटी बच्ची बनना चाहती हूँ तुम्हारी आज भी याद है कैसे डाँटते थे आप उस समय नही अच्छा लगता कभी भी  आज एक बात कहती हूँ मैं आपको पापा अब सबसे ज्यादा डाँट ही याद आती है तुम्हारी! बहुत अमीर लगते थे मुझे आप तब क्योंकि हर ख्वाहिश को पूरा करते थे आप तब आज सोचती हूँ कुछ अपने लिए नही कमाते थे अपनी सारी जमा पूँजी बस हम पर ही लगाते थे! आज हो गई बड़ी आपकी बेटी ये शरारती अपने घर और गृहस्थी में लगा लिया है मन लेकिन आज भी भीग जाती हैं ये पलकें जब देखती हूँ आपकी घर मे लगी ये तस्वीर! यूँ तो ...

प्रदूषण

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क्या है ये प्रदूषण क्या कोई बताएगा क्या अपने तर्कों से मुझे समझाएगा मुझे समझ नही आता ये प्रदूषण या ये स्वछता अभियान मेरे लिए तो ये धरती है एक कूड़ा दान मैं हूँ विधाता का बनाया हुआ रूप अनोखा कोई  कहे मानव मुझको कोई कहे इंसान लेकिन मेरे अंदर नही बची कोई मानवता जानवर तो क्या ओर मनुष्यों का भी रखता नही मैं कोई मान बहुत समझाते  मुझे सब कि पेड़  नही काटने हैं इनके बिना हम सब की तंग सारी साँसे हैं नदियों को भी हमे सदा रखना चाहिए शुद्ध नही तो पानी के बिना कई पीढियां होंगी अशुद्ध लेकिन मैं मनुष्य किसी की बात नही मानता हूँ फैलाता गंदगी चारों ओर पेड़ भी काटता हूँ नही रखता मैं चारों तरफ की स्वच्छ जलवायु चाहे उसके बदले में कम हो सबकी आयु मुझे अच्छा लगता है कार में से कागज फैंकना मुझे अच्छा लगता है समुंदर किनारे गंदगी फैलाना नही भाता मुझे अपना देश स्वच्छ बनाना चाहे उसके बदले में प्रदूषित हो सारा जमाना मैं मानव हूँ समझदार सिर्फ पैसे कमाने में घर मे हर सामान महंगा लेकर आने में नही रखना मुझे पानी शुद्ध चाहे फिल्टर पड़े लगवाना चाहे कितना पढ़ लिख जाऊँ लेकिन प्रदूषण है फैलाना। ॐ नमः शिवाय...

खुबसूरत शैतानी शीशा भाग-२७

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अब स्वामी केशवदास और बाकी सभी शाम तक उस जँगल  में पहुँच जाते हैं और रात से पहले ही उन्हें हर हालत में अर्नव को खोजना है।वो सभी जँगल में प्रवेश करते हैं और इधर-उधर देखते हैं।जँगल बहुत बड़ा और भयानक है इसीलिए अर्नव को ढूंढना नामुमकिन सा लग रहा है।पीहू बहुत चिंतित होकर स्वामीजी से कहती है कि इतने बड़े जँगल में हम अर्नव को कहाँ ढूंढेंगे? स्वामी जी कहते हैं तुम चिंता न करो पुत्री मैं ध्यान लगाकर अभी सही दिशा का पता करता हूँ।ये कहकर वो आँखे बंद कर लेते हैं। दूसरी ओर,अनीश और आदित्य अर्नव को बातों में उलझा कर जँगल के ठीक मध्य में ले जाते हैं।वो अर्नव से ये कहकर ले कर आये हैं कि आज अनीश का जन्मदिन है इसीलिए किसी एडवेंचर पर चलते हैं।वो एक जीप में गए हैं पार्टी का सभी सामान मौजूद है।जँगल बहुत भयानक है और चारो ओर कोहरा छाया है।अब वो तीनो एक स्थान पर गाड़ी रोक लेते हैं और वही पर पार्टी कर रहे हैं।अर्नव पर उन्होंने सम्मोहन शक्ति से सम्मोहित करके अपने वश में किया हुआ है।इसीलिए उसे कुछ नही पता कि क्या हो रहा है उंसके साथ।अनीश की भयानक होती जा रही है।उसकी आँखों मे खून उतर आया है।वो अब धीरे-धीर...