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♥️जीवनसाथी♥️

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मेरे जीवन साथी इस रिश्ते को बयां कैसे करूं अरदास यही है मौत आये,तो तेरी बाहों में मरूँ सारे रिश्ते तो रिश्तेदार हो गए सभी अपने अपनो में खो गए सबकुछ जो मुझ पर न्यौछावर कर दे वो सिर्फ तुम ही हो। सब तो किसी मतलब से साथ होंगे प्यार तो करेंगे पर उसके भी दाम होंगे जो बेमतलब ही मुझ पर प्यार लुटा दे वो सिर्फ तुम ही हो। बाकी के हर रिश्ते में सिर्फ प्यार होगा मनमुटाव में जीत उनकी, मेरा हार होगा जिस पर गुस्सा होऊं, हक़ से लड़ झगड़ सकूँ वो सिर्फ तुम ही हो। सुख दुख गम ख़ुशी जीवन मे जब भी आएंगी सारे रिश्तें नाते दो पल साथ निभा चली जाएंगी पर जो निःस्वार्थ भाव से साथ मेरा देगा वो सिर्फ तुम ही हो मेरे जीवनसाथी इस रिश्ते को कैसे बयां करूं अरदास यही है मौत आये तो, तेरी बाहों में मरूं      ♥️♥️♥️                                     🖊️🖊️🖊️                                 थ्रीमा विनोद साहू

एक जासूस

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सीरत और अयान एक सच्चे और प्यारे बंधन में बंध ही गए सब खुश थे । दो दिल दो अनजान दो परिवार एक जो हो गए । पर सीरत की दीदी तन्वी की  जासूसी काम कर गयी। और अब तन्वी भी सुनिश्चित हो गयी कि सीरत सही जगह सही इंसान के साथ हैं। आखिर ये अरेंज वाला लव अपनी मंजिल तक पहुँच ही गया। चलिए आपको इस हैप्पी एंडिंग की फुल स्टोरी बताते हैं , और सुनाते हैं तन्वी के जासूसी किस्से... बात हैं नवम्बर की सुर्ख सर्दियों की जब अयान का परिवार पहली बार सीरत को देखने के लिए उनके घर आये थे , शादी ब्याह के मामले में अक्सर हम अति उत्साहित होते हैं सीरत भी थी  पर दर्जन भर से ज्यादा लड़के उसे देख कर जा चुके थे पर बात बन ही नही रही थी । ऐसा नही हैं कि सीरत में कुछ कमी थी , वो बला की खूबसूरत थी गोरा रंग ,सुरमई आंखे गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ , स्वभाव से भी सौम्य , हर कार्य मे निपुण और पोस्ट ग्रेजुएट थी। फिर भी एक कमी थी शायद,,  जी कमी सीरत में नही सीरत के परिवार में थी, या यूं कहें कि कमी समाज का ठेका लिए लोगो की सोच में थी। सीरत बहुत छोटी थी तभी किसी बीमारी के चलते उसकी मां चल बसी , एक बड़ी बहन और एक छोटा...