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Showing posts with the label प्रीति वर्मा

🌿🌿..लड़की होना आसान है क्या.. 🌿🌿

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माना लड़कों सा जिम्मेदार होना मुश्किल है पर लड़की होना आसान है क्या..?? बचपन से ही अपनी ख्वाहिशों,अपने सपनों का गला घोंटना आसान है क्या..?? कभी जो कर बैठी कोई नादानी समझाने की जगह लोग मुंह फेर ले  और जिंदगी भर उस गलती पर जली़ल करें ये सहना आसान है क्या..?? समाज में सभी के तानों का आहार बन जाना  तो कभी अपने आत्मसम्मान को दूसरो के द्वारा गिरा देखना आसान है क्या..?? कभी बचपन में ही बड़े हो जाने का अनुभव कर जाना  तो कभी घर की जिम्मेदारियों का बोझ ढोते हुए लड़की की तरह भी नहीं जी पाना आसान है क्या ..?? जीवन के हर मोड़ पर खरा उतरना, हर पल किसी और के लिए खुद को लुटा देना आसान है क्या..??  कभी बेटी ,कभी बहन ,कभी पत्नी ,कभी माँ   इन सारे रिश्तों को एक साथ लेके जीना आसान  है क्या..??      बड़ी होते ही सबकी नसीहतों के साथ-कहीं अकेले नहीं जाना,ढंग के कपड़े पहन ,कभी नहीं सुनी ग़र किसी की बात  तो कहा ये लड़की तो हाथ से निकल गयी ब्याह करा दो इसका सुनना आसान है क्या..?? घर की इज्ज़त, बाप की इज्जत बचाने को बिना कुछ सवाल किए बे-मन के रिश्तों में भ...

..🌿🌿दहेज में बिकी बेटी🌿🌿..

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एक नन्ही सी कली बन , धरती पर खिली जब  लोग जब कहते कितना भी उड़ ले पराई है पराई तू,  मैं रोती चीखती और कहती झूठी है तेरी बातें और झूठा तू  मेरी नादानी देख आंसू पोंछ आंचल में मां छुपा लेती थी तब।।    उम्र की दहलीज पे कदम बढ़ने लगी  शादी की चिंता सबके मन में खलने लगी  दहेज के लिए पैसे भी नहीं ये बात सुनकर   रिश्ते भी दरवाजे पर दस्तक देना बंद होने लगी।।  बाबा ने संजोए कुछ पैसे मां ने उधारी से सामान घर भर लाई   किसी के गले में हार बनते ही टूट कर बिखर गई    ताने सुनाये गये दहेज में क्या लाई है पैरों से रौन्दी गई   फिर भी सबने कहा दहेज में बस इतना लाई।।    एक गरीब बाप की बेटी थी मैं दहेज के हाथों बिकी थी मैं सपने हजारों बिखरे पड़े थे देख अपनी बेबसी चुपचाप मौन खड़ी थी मैं।।   बचपन से सब कहते थे लड़की का है ये जीवन सास तुम्हारी मां होगी, ननद तुम्हारी बहन   बाप का फर्ज निभाएगा ससुर   पति संग होगा सुखी जीवन बसर।। कैसा ये निर्मम समाज है कोई बनके इंजीनियर, प्रोफेसर, एडवोकेट, कोई जज, आईपीए...

❤️ अनोखी दोस्ती ❤️

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चलो आज एक नए सफर पर जाते हैं तुम्हें दोस्ती का एक अनोखा किस्सा सुनाते हैं, जो वो है बनारस का मिठ्ठा पान  तो हूं मैं भी बिहार की तीखी पकवान। एक अनजाने सफर में एक अनजानी सी मुलाकात  थोड़ी सी नोंक झोंक और थोड़ा सा प्यार, रेलगाड़ी की तरह चली दोस्ती हमारी खट्टी-मीठी यादों से बनी जिंदगी ये प्यारी। वो प्यारा सा शक्ल वाला लड़का अपनी दिल की शहजादी को गंवा के बैठा था, फिर भी हंसते हुए ख़ामोशी से महफिंल में अपने दिल को मजबूत किए बैठा था।  हर सुख दुःख में, साथ साथ जीया करते हैं हार हो या जीत एक दुसरे का हमेशा साथ दिया करते हैं, कभी वो हमसे कभी हम उससे रूठ जाया करते हैं, फिर हम उसे और कभी वो हमें मना लिया करते हैं। एक दूसरे की खुद से ज्यादा परवाह किया करते हैं। ये बात बस कल की ही लगती है। देखो ना हम तुम अपनी दोस्ती पर कितना इतराया करते हैं। दोस्त वो है जिससे दोस्ती निभानी नहीं पड़ती जिसे कोई भी बात समझानी नहीं पड़ती रूठ भी जाए तो भी नहीं करता नज़रन्दाज़ इसलिए ये रिश्ता होता है बेहद खास।

"अस्तित्व नारी की"

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खुदा की बन वो परछाई आयी धरती पर जो नारी कहलायी कभी मां की ममता तो कभी बहन का प्यार लेकर आई वो खुशियों का भंडार।। जन्म दायिनी जननी बनके, तारा जिसने इस जग को अपनी भूख भी न्योछावर करदे, बच्चे की भूख मिटाने को मोल क्या इनका कोई चुकाएं परमात्मा भी जिनके आगे सर को झुकाएं।। शक्ति  है,वरदानी है हर घर की वो कहानी है प्रेम की मूरत , प्रतिष्ठा है , निष्छल सा स्वभाव भी है तन पर खुद के वस्त्र ना रहे ,पर सबका ध्यान वो रखती है छोड़ अपनी ख्वाहिशों को, सब रंग में वो यूं ढलती है ।। शब्द कहां उसकी व्याख्या को,हर शब्द भी निशब्द हो जाती है उंगली जो उठें चरित्र पर उसके ,बिना उफ्फ किए ही रह जाती है ना खुद की सोचती है कभी ,अपनों में ही वो रम जाती है जीवन देती जिसको दुध पिलाके,उसका विष भी पी जाती है।। सम्मान भी है, अभिमान भी है, हो अपमान तो वो तुफान भी है। रातें जिसकी निंद गंवाए, लोड़ी सुन बच्चे सो जाए  हृदय जिसकी बस आशीष ही दे,बदले में चाहे लाख दुत्कार मिलें जो गिरे एक भी आंसू इसकी , उसमें भी दुआ बरस जाती है।।   और क्या लिखूं उस व्यक्तित्व पर मैं, शब्द भी मेरे साथ नहीं , देती हूं कलम को ...

🌿🌿...कोशिश कर और चलता जा तू...🌿🌿

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आज नहीं तो कल निकलेगा हर मुश्किल का हल निकलेगा बस कोशिश करता जा तू मत डर कर हिम्मत और चलता जा तू ।। देख खुदको और पहचान तू उगते सूरज की है मुस्कान तू कोयले की खान से सोना बनकर निकलता जा तू मत डर कर हिम्मत और चलता जा तू।। मन का विश्वास जगा, रगों में साहस भर लें  भले ही चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसल लें मत हार हिम्मत चढ़ ,गिर ,फिर चढ़ता जा तू मत डर ,कर हिम्मत  और चलता जा तू।। मोतीयों का गहरे पानीयों में मिलना आसान नहीं होगी  सोचता क्या है मुट्ठी तेरी हर बार  खाली तो नहीं होगी आज मुश्किल भले ही बहुत है ,पर कल ये कम तो होगी मत डर ,कर हिम्मत एक दिन तो किसी फ़कीर की किस्मत भी राजा सी होगी।। जब जीवन संघर्ष ही है तो छोड़कर मत भाग तू खुदको देख क्या कमी है फिर उसको सुधार तू यही वो खेल था जो तूने जाना नहीं खिलौनों को खेलना है उनको सजाना नहीं सागर से यूँ ही नदियाँ नहीं मिलती,पत्थर को काट कर ही तो ये आगे है बढ़ती फिर क्यूं बैठा  ऐसे हैरान तू ,मत डर ,कर हिम्मत और चलता जा तू।।

🌿..मेरे पिता मेरा जीवन..🌿

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मेरे पिता मेरे जमीर है, पिता ही जागीर है जिसके पास ये है वह दुनिया में सबसे अमीर है कहने को तो सब ऊपर वाला देता है पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर हैं।। माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तित्व हैं माँ के पास अश्रुधारा तो पिता के पास संयम का तीर है जन्म अगर दिया है माँ ने पैरों पर चलना सिखाया  तो पिता ने पैरों पर खड़े होना सिखाकर दुनिया में पहचान दिलाया ।। पिता संघर्ष की आँधियों में हौसलों की दीवार है परेशानियों से लड़ने को वो दो धारी तलवार है बचपन में खुश करने वाला बिछौना है तो कभी परिवार की हिम्मत और विश्वास है मेरे पिता ही मेरी पहचान है।। क्या लिखूं उनके लिए मेरे शब्द ही कम पड़ जाते हैं अपनी सारी जिंदगी भी लुटा दें उनपर ,तो भी उनका कर्ज कहा चुका पाते हैं ऊंगली पकड़ कर वो चलना सिखाते हैं गिरने पर अगर चोट लग जाए तो हमसे ज्यादा परेशान वो हो जाते हैं वो पिता ही है जो अपने दर्द  छुपाकर हर फर्ज निभाते।। बेटी की शादी, बेटों को मकान बहुओं की खुशियां, दामादो का मान कुछ ऐसे ही सफर में गुजारे वो हर शाम मुझको हिम्मत देने वाले वो मेरे है अभिमान।। बेटीयों के भाग्यविधाता हैं पिता और...

🌿🌻बंधन अनकही 🌻 🌿

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बंधन प्रित की हो या धागे की हर रंग में दिखे इसके रूप नए कभी मां की ममता में झलके कभी बहनों के स्नेह  में दमके कभी प्रिये के स्पर्श मात्र से  हर गिरह  धागे के सुलझे।। बंधन विलुप्त है संबंधो में, समझते हुए अपनों के मन के भावों में, देखते हुए उनके चक्षु के ख्वाबों में, सुनते हुए उनकी हृदय की बातों में, पढ़ते हुए उनके विवेक से ओतप्रोत विचारों में।। कुछ यूं मुझमें टूट रहा है,बहुत कुछ यूंही छूट रहा है रिश्तों में अनकही सी दूरी है, डोर संवादों की, कहीं तो अधूरी है सब व्यस्त हैं अपने अपने कामों में बंद हो गये है सारे रिश्ते किताबों में।। प्रेम बंधन के रस में सारे आसमान में कितने तारे, लेकिन चाँद अकेला है उस चंदा की हूँ मैं चकोरी, उस पर हक तो मेरा है  हसरत है मेरी ये तुझसे, मुझ संग स्वपन सजा ले तू या फिर कफ़न ओढ़ा दे मुझको, मेरी याद मिटा दे तू ।। बंधन कैसा तेरा मेरा,जैसे रात के बाद हो सवेरा मेले ठेले की रवानी ,जैसे हो दादी नानी की कहानी कभी अपनों सी तो, कभी सुनहरे सपनों सी हाय, ये बंधन भी कैसी हो गई , अनसुलझी पहेली सी ।।

...🌿वो सर्द की रातें 🌿...

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एक ठिठुरती सर्द शाम की अनोखी है ये दास्तान जिसमें कुछ अनमोल यादों की सरगोशियां शामिल हैं बेहिसाब जब लोग दुबके रहते हैं रजाइयों में और  मां के नुस्खे काम आते हैं हल्दी दूध के प्याले में।। कोई तुम्हें देखता होगा जी भरकर पर अफसोस,ये कब जान पाओगे तुम इन खामोशी सी सर्द रातों की बेचैनी  कब समझ पाओगे तुम।। मौसम कितना भीगा सा  सुहाना सा है, इस सर्द की रात में बारिश की बूंदों ने मन के सारे घावों पर  मरहम लगा सा दिया है।। सभी मौसम होते हैं खास ठण्ड की हैं कुछ अलग ही बात, गरम गरम चाय और पकौड़े हो साथ कप कप करके ठंडी बजती ओस की बुँदे घास पर सजती कोहरा सजता हैं बड़ा दमदार पहाड़ों पर सजता ये सदाबहार।। दिन कब ढल जाये पता ना चले रात की गहराई में हम आसमां तले इक्कट्ठी करके ढेर सारी लकड़ी आग जला कर सब अन्ताक्षरी खेले हर साल बीते ऐसी ही सर्द की छुट्टियाँ जब मिल बैठे भाई बहन और सखा सखियाँ।। ठण्ड में साँसों से हैं धुँआ निकलता भीनी भीनी धुप में जन्मो का सुख हैं मिलता चाय का प्याला भी खूब अपना सा लगता आग की गर्मी में ही मौसम  है जचता ।। कोई चिथड़े में लिपटा ,कोई घर में है सिमटा...

🌿..लौह पुरुष की लौह हुंकार..🌿

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बापू के अनुयायी रहे जो खेड़ा के रण से रखे कदम भर हुंकार बरदौली में बोले न दे लगान की रत्ती भर हम।। अत्याचार के शासन का दृढ होकर जिसने दमन किया उस युग शिल्पी को ही सबने लौहपुरुष का नाम दिया।। खुशबू से जिसकी महक उठा था सारा हिन्दुस्तान वो थे वल्लभ भाई पटेल अपने भारत की शान प्रतिभाशाली, व्यक्तित्व के थे वो ऐसे धनवान भारत की आजादी के बने वो नायक महान।। देश भक्ति थी जिसके रग रग में. सबल बने, भारत इस जग में. एकीकरण के स्वप्न को जिसने. कर निश्चय ,बदल दिया यथार्थ में ।। हृदय कोमल,आवाज में सिंह सी दहाड़ लिए भारतीय राजनीति के प्रखण्ड के वो विद्वान बने शत् शत् नमन हो ऐसे महान व्यक्तित्व को बन बैठे भारत की आन बान और शान है जो ।।

🌿काश ऐसा होता🌿

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काश कोई पन्ना पढ़ पाता मेरी भी जिंदगी का कितने जज़्बात पिघला कर दफ़न किए है मैंने कि काश कोई समेट ले आके मेरे भी जज़्बातों को  कि सुखे पत्तों की तरह बिखर रहे हैं ये हाथों से छूट कर मेरे !! मोहब्बत ज़ता कर वो इस कदर बेरूखी दिखा गया हाय!! जीते जी वो मुझे मौत के मंजर दिखा गया जहां मेरी हर दुआ बेअसर हो रही थी वहां आंखों में मेरी बस आंसूओं की बौछार पड़ी थी!! चाहती तो बहुत थी वो ना जाए दूर मुझसे पर रोकने का हक उसने खत्म कर दिया था  मेरे दामन को भी उसने इस क़दर दाग दार किया  कि उसकी शर्म गिरी थी निचे और वो बेख़ौफ़ आगे बढ़ता गया था!!  एक मोहब्बत की आरज़ू ने मुझे क्या से क्या बना दिया कि मेरे हाथों में लगी मेहंदी भी रंगत छोड़ने लगी उसके दिए तौहफे से मैं इस क़दर हैरान थी की सारी दुनिया मेरी बेबसी के मज़े लेने लगी!! बस एक यही अधूरी आरज़ू है मेरी की काश कोई मेरा भी अपना हो जाए हाथों में जिसके मेरा हाथ रह जाए उसे भी मुझसे मोहब्बत हो जाए बेइंतहा और उसके सद़के में मेरी जान चली जाए!!

🌿चलो जिंदगी को एक नई मोड़ दें ....🌿

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प्यार की होड़ में दौड़कर देखिए  झूटे बंधन सभी तोड़कर देखिए श्याम रंग में जो मीरा ने चूनर रंगी वो ही चूनर ज़रा ओढ़कर देखिए तुम अगर साथ दो हाथ में हाथ में हाथ दो सारी दुनिया को हम छोड़ दें चलो जिंदगी को हम एक नई मोड़ दें!! देखिए मस्त कितनी बसंती छटा  रंग से रंग मिलकर के बनती हवा  सिर्फ़ दो अंक का प्रश्न हल को मिला  जोड़कर नाता तुमने दिया है घटा एक हैं अंक हम एक हो अंक तुम आओ दोनों को यूं जोड़ दें चलो जिंदगी को हम एक नई मोड़ दें!! आओ मेंहदी महावर की शादी करें उम्र भर साथ रहने का आदी करें फूल से पंखुरी अब न होगी अलग  सारे उद्यान में ये उत्साह करें हमको जितना दिखा सिर्फ़ तुमको लिखा अब ये पन्ना यहीं मोड़ दें चलो जिंदगी को एक नई मोड़ दें!! प्रीति वर्मा

❤️🌻 मेरे अल्फ़ाज़ 🌻❤️

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बरसात भी नहीं पर बादल गरज रहे हैं,सुलझी हुई हैं ज़ुल्फ़ें और हम उलझ रहे हैं!! मदमस्त एक भंवरा क्या चाहता कली से ,तुम भी समझ रहे हो हम भी समझ रहे हैं!! अब भी हसीन सपने आंखों में पल रहे हैं,पलकें हैं बंद फिर भी आंसू निकल रहे हैं!! नींदें कहां से आएं इस दर पे करवटें हैं,वहां तुम बदल रहे हो यहां हम बदल रहे हैं!! डाली से रूठ कर के जिस दिन कली गयी थी,बस उस ही दिन से अपनी क़िस्मत छली गयी थी!! अंतिम मिलन समझ कर उसे देखने गयी ,तो था प्लेटफ़ॉर्म खाली गाड़ी चली गयी थी!!

🌻❤️..सुन सको तो सुनो..❤️🌻

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ये बारिशों की खामोशी कुछ अधूरे कुछ पूरे, ख्वाबों के ताने-बाने सुन सको तो सुनो!! बिरह की लाखों कहानियां लिए आती ये बादल, झूलों पर बच्चों की किलकारियां सुन सको तो सुनो!! मोतीयों सी माला पिरोये ,श्याम के प्रेम रंग में रंगी मीरा के भाव को सुन सको तो सुनो!! वो बागों में पंछीयों की अठखेलियां, रंग-बिरंगी फूलों की खुशबूओं से महकती ये वादियां सुन सको तो सुनो!! गीता की ज्ञान राम की सीता सी ,श्याम और रूक्मिणी की मिलन भाव को सुन सको तो सुनो!! राह में भटके राहगीरों को रास्ता मिल जाने की खुशी, मां-बहनों की दिल से निकली दुआओं की अर्जी सुन सको तो सुनो!! प्रीति वर्मा

🍀🍀...सावन आया...🍀🍀

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देखो  सावन आया है, हरियाली जो लाया है!! चटक - मटक फूलों पर भी, भंवरो ने इठलाया है!! कवियों की कविताओं ने गांव-गांव महकाया है,हर घर के आंगन में नन्हें बच्चों ने शोर मचाया है!! रंग-बिरंगी पतंगें भी आसमान को छूती है,सागर की मझधारें भी अपनी तरंगों में झूमती है!! हरी साड़ियां , हरी चूड़ियां पहनकर दुल्हन घर आती हैं, हरे-भरे रंगों की तरह आंगन की तुलसी बन जाती है!! देखो-देखो सावन आया खुशियों की सौगात है लाया, हरा-भरा है इसका नाम हरियाली जो साथ लाया!! प्रीति वर्मा

💐💕..मेरे हमराही..💕💐

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जो मैं बन जाऊं पतझर कभी  ,तो तुम मेरा सावन बन जाना मेरी जीवन की नैया के ,तुम खैवया बन जाना!! हो जीवन की कोई भी कठिनाई, हंस कर काट लेंगे हम बस तुम साथ रहना हमराही, हर ग़म आपस में बांट लेंगे हम!! कोई सहारा कहां दिखता है ,जब वक्त बुरा चलता है  हो हमसफ़र निभाने वाला ,तो दुनिया का भी सर झुकता है!! गर रूक्मिणी मैं बन ना सकूं, बस अपने हृदय में इतना स्थान देना श्याम मेरे तुम बन जाना और  राधा मुझको बना लेना!!

🍀...🛖मेरा गांव🛖...🍀

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मेरा गांव सबसे प्यारा,अटल पटर इसका गलियारा!! मंदिर नदियां पनघट सारे,सबके घरों में रंग बिरंगे फूल है प्यारे!! मेले ठेले के पकोड़े कोई कैसे इसको भूले, बच्चों के वो गूली डंडे पेड़ पे लगाए जो सावन में झूले!! हो छठ दिवाली या फिर होली,बन जाती है बच्चों संग बूढ़ों की भी अपनी टोली!! दादी नानी की कहानी बच्चे हैं जिसकी दिवानी,वो खेल खिलौने गुड़िया रानी सबकी अपनी एक कहानी!! वो गांव के खेतों में दोस्तों संग घूमना, शहरों में तो ये सब है एक सपना!! क्यूं हम शहरों की हवाओं में रंगने लगे हैं,चलो एक बार फिर अपने गांव वापस चलते हैं!! प्रीति वर्मा

🍀❤️तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई❤️🍀

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मेरी बहन मेरा हिस्सा है तू,आधा अधुरा ही सही पर मेरा किस्सा है तू!!  हां भले ही खून का रिश्ता नहीं हमारा,पर हकीकत में तू ही तो है मेरा सहारा!! लफ्ज़ कम पड़ जाएंगी इस रिश्ते को बयां करने के लिए, पर तू मेरी जान बहुत जरूरी है मेरी जिंदगी के लिए!! तुझसे लड़ते भी है तुझसे प्यार भी बहुत करते हैं, हां बस तू हवा में ना उड़ जाए इसलिए तुझसे कहते नहीं है!! तुझसे जुड़ी नोक झोंक सारी उम्र याद रहेगी, जिंदगी के हर मोड़ पर तेरी ये बहन तेरे साथ खड़ी रहेगी!! तू हमेशा सलामत रहे दिल ये तुझे दुआ देता है, खुशियां हमेशा तेरे दामन में रहे बस यही आरज़ू करता है!! बड़ी तो हूं तुझसे पर कभी कभी तू मेरी नानी बन जाती है,सुन बहन तुझसे दूर होके तेरी याद बहुत आती है!! प्रीति वर्मा

💁‍♀️.❤️भाभी - ननद का अनोखा रिश्ता.❤️🙍‍♀️

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छोड़ कर बाबूल का आंगन वो आई घर में तेरे,नई उम्मीदें नए सपने लिए आंखों में नए-नए रिश्तों से बंधने!! वो खुश  हैं तो आंगन में लक्ष्मी वास करें,घर में कलह क्लेश का त्याग करें!! बहन बनकर अपनाओ उन्हें कल तुम्हें भी तो किसी के आंगन जाना है,उनकी ही तरह तुम्हें भी किसी का आंगन महकाना है!! छोटी-छोटी बातों पर लड़ती रहे बहनों जैसी ,पर जब भी सहारे की जरूरत हो बन जाती है मां  जैसी!! कहते हैं सब भाभी- ननद का रिश्ता होता ईष्या से भरपूर ,पर मैं कहती हूं गौर से देखो तो ये रिश्ता है एक नाजुक फूल!! ममता भरी है आंचल में उनके बस भूखी है सम्मान की ,वो भी बेटी है किसी बाबूल की तो क्यूं उड़ाते हैं लोग मजाक इस बात की!! वो तुलसी बन आई है आंगन में तेरे उसे भी उतना ही सम्मान मिले ,जब भी छोड़ो तुम बाबूल का आंगन सबसे ज्यादा वहीं तुम्हें याद करें!! जिस भाई की कलाई पर बांधते हो राखी और लाख दुआएं देते हो उनके खुशियों की, फिर क्यूं भूल जाते हो ये हमसफ़र है उनकी उम्र भर की!! गंगा की पवित्रता पर भी सवाल तो उठते रहते हैं,उसी तरह भाभी- ननद के रिश्ते को भी हर रोज कलंकित करते हैं!! बहुत हुआ ये खींचा तानी अब व...

.🌸बस इतनी सी पहचान मेरी..🌸

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. मैं कश्ती हूं समंदर की ,तुम मेरे हो पतवार प्रिय!! मैं सीता सी शती ,तुम मर्यादा पुरुषोत्तम राम प्रिय!! मैं द्रौपदी की लज्जा सी ,तुम कान्हा की सुर्दशन वाण प्रिय!! मैं ब्रह्मा के कमंडल से निकली गंगा, तेरा भगीरथी नाम प्रिय!! मैं तो बस मिट्टी की मूरत ,तुम उसमें बसे मेरे प्राण प्रिय!! मैं मीरा सी दासी तेरी, तुम मेरे बने आराध्य प्रिय!! मैं विष्णु की निंद्रा सी, तुम लक्ष्मी की प्रेम परिधान प्रिय!! मैं दक्ष की अग्नि में जली सती, तुम  मेरे वैराग्य शिव प्रिय!! मैं वीणा की संगीत सी, तुम शिव की सातों राग प्रिय!! मेरे रोम रोम में बस तुम ही बसे, मेरा अस्तित्व तुम ही अभिमान प्रिय!! प्रीति वर्मा

💕..हां मैं बेटी हूं अपना फर्ज निभाने आई हूं💕

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एक माली की भरी बगिया में एक  नन्ही फूल बन आई थी, चहकती चिड़िया सी कभी इस कभी उस डाल पर इठलाई थी, हां मैं बेटी हूं अपना फर्ज निभाने आई हूं!! बचपन बिता आई जवानी खेल खिलौने से अब दूर हुई, मां के जैसे ही अब  मैं भी चूल्हे पर रोटी सेंकने को मजबूर हुई!! संस्कार सिखाए सबने मगर सहनशीलता की परिभाषा कोई समझा नही पाया, क्या होता है दर्द एक बेटी का उफ ये कोरा समाज कभी समझ नहीं पाया!! लोहे सी टपके आग से सोना बन जब निकली ख्वाब बहुत थे आंखों में,मगर हाथों में किताबों की जगह किसी गैर की नाम की मेहंदी रचा दी गई, हां मैं बेटी हूं अपना फर्ज निभाने आई हूं!! बाप की पगड़ी के मान की दुहाई देकर ना जाने कितनो ने ही दफ़न किए जज़्बात मेरे, मैं रोई भी ,गिड़गिडा़ई भी , मांगा हर दर पर जाके सहारा मगर किसीने  ना थामे हाथ मेरे, हां मैं बेटी हूं देखो बस फर्ज निभाने ही तो आई हूं!! बेटी हो तुम सब कहते हैं ,जला दो अरमान सब दिल के अपने,पराई हो तुम घर कहां तुम्हारा यहां फिर किसे  कहती हो तुम अपने,बस बेटी हो फर्ज निभाते जाओ ,उफ तक ना निकले जुबां से ये कर्ज चुकाते जाओ!! हां मैं बेटी हूं अपना फर्ज नि...