Posts

Showing posts with the label पत्र

का बा एक पत्र

Image
आदरणीय लोक गायिका जी,           आपने जब कभी"का बा" गाया, अनायास ही मुझे वर्षा कालीन असंख्य पीले टर्राते हुए उन मेंढकों का स्मरण हो आया जो सुना है मादा मेंढ़की को रिझाने,लुभाने अपना रंग रूप बदलते फिरते हैं l          तर्कसंगत तथ्यों, पंक्तियों के लिए सराहना करती हूँ परंतु इन्हें गाने और बनाने के पीछे जो भी आपने तर्क दिए उन से पूर्णतः असहमत हूं, यूं मानिए बिल्कुल असंगत से लगते है l        इन गीतों में जिन घटनाओं का जिक्र है,वह जब घटित हो रही थी तब काश ! आपने इससे संबंधित एक भी गीत गाया होता तो शायद परिस्थितियां कुछ अलग सी,  कुछ संतोषप्रद सी होती जब आपके गीतों से लोग जागृत हो लोग एकजुट हो जाते, पीड़ित  मरहम और न्याय दोनों समय पर पाते और तब हुक्मरानों के कानों पर जूं नहीं बिच्छु रेंगता "बिच्छु"l       पर  अफसोस कि तब यह आपके लिए यह जन चेतना का विषय नहीं था, इनसे पीड़ितों की पीड़ा की तड़प आपको झकझोरना तो दूर , छू कर भी न जा सकी और तब आप सिर्फ ननद-भोजाई और देवरा- पियवा के गीत गाने में इस क...

भारत के वीर सैनिकों के लिये पत्र

Image
भारत देश की रक्षा में तत्पर वायु, थल व जल सेना के वीर जवानों    आपका अभिनंदन     हमेशा से ही युद्ध पर शांति को वरीयता दी जाती रही है। युद्ध में हमेशा ही बहुत कुछ खोना पङता है। देश हो या इंसान, युद्ध के बाद अक्सर बहुत पीछे पहुंच जाते हैं। अक्सर विचार का विषय यही है कि क्यों ये युद्ध होते हैं। क्या मनुष्य शांति से रह नहीं सकता। पर हर बात के दो पक्ष होते हैं। विश्व में सभी का चिंतन एक सा नहीं होता। चाहे सतयुग का समय हो या आज का समय, मनुष्य के रूप में दानव हमेशा रहे हैं। वे अपनी शक्ति से मानवता को नुकसान पहुंचाते हैं। फिर शांति स्थापित करने के लिये बहुधा युद्ध आवश्यक होता है। शांति हमेशा शक्ति से ही स्थापित होती है।    यदि रामायण और महाभारत की कहानियों में कुछ भी सच्चाई है तो इतिहास इस बात का गवाह है कि अक्सर मानवता की रक्षा के लिये बड़े बड़े युद्ध हुए हैं। पर इन युद्धों का सबसे ज्यादा दुष्परिणाम जिसे उठाना पङता है, वे सैनिक और उनके परिवार के लोग ही हैं। युद्ध में कितनी भी क्षति हो, देश जल्द अपनी राह चल देता है। पर वीर सैनिकों और उनके परिवार को जो क्षति होती है...