Posts

Showing posts with the label शिखा अरोड़ा

मज़दूर दिवस

Image
मज़दूर की मेहनत को न कोई देखे, जब तब मिलते यहां उसको धोखे। कहते कुछ, होता कुछ , साथ उसके, वेतन पर भी ठेकेदारों की नजर उसके। मदद के नाम पर भी लुटता मज़दूर, बदहाली में जीने को रहता मजबूर । कभी पैसा मांगे दारोगा मजदूरी का, फायदा उठाते कितना उसकी लाचारी का । एक दिन का भी तो आराम न मिलता, छुट्टी पर मज़दूर का वेतन कटता। बच्चों की परवरिश कैसे वो करें, कैसे वो रिश्वतखोरों की जेबें भरें। रोज कमाता चूल्हा तब जलाता वो, बिन मेहनत के कहां रोटी पाता वो। धूप छांव में भी मेहनत करता रहता, भूख की तपन में भी झुलसता रहता । मेहनत से मज़दूर की बनती इमारत, कर्म ही होता जहान में उसकी इबादत । ख्वाहिश उसकी न होती बड़ी-बड़ी, परीक्षा होती उसके भाग्य की घड़ी घड़ी। हर गम को मज़दूर पी जाता हंसकर , रह जाता है वो बस श्रम में उलझकर। झोपड़ी को तो उसकी बना रहने दो, दर्द से कितना भरा वह ये कहने दो। मेहनत का जो मेहनताना उसको मिला, समझना मज़दूर के संघर्ष का हैं वो सिला। श्रम के मज़दूर की कीमत को पहचानो , उसको भी अपने जैसा एक इंसान मानो।। शिखा अरोरा (दिल्ली)

महिलाओं को नमन हमारा

Image
महिलाओं को नमन हमारा, बनती हैं वो सबका सहारा | ममता की मूरत वो होती , प्रेमिका सी चंचल वो होती , पत्नी की हया लगती प्यारी, महिमा उनकी सब पर भारी | महिलाओं को................... फुलवारी सी खिलती नारी , हर रूप में यहां मिलती नारी , धर्म कर्म की रक्षा नारी करती, संस्कारों की पहचान हैं नारी | महिलाओं को................... आकाश के जैसी होती हैं वो , पानी सी निर्झर बहती है वो , धरती को समा ले वो खुद में , सम्मान ऊंचा रखती हैं वो | महिलाओं को................... दो कुलों का मान वो बढ़ाती , नर की भी शान वो बढ़ाती , सृजन नया करती है वो , देश की वो आन बढ़ाती | महिलाओं को................... ऊंची उड़ान है वो भरती , सीमा पर भी है वो लड़ती , हौसले होते बुलंद उसके , रिश्ते सारे बखूबी निभाती | महिलाओं को................... ज्ञान विज्ञान की शिक्षा देती सबको , श्रृद्धा अर्चना से मनाती रब को , तोड़ कर सारे बंधन को नारी , आईना नया दिखाती जग को | महिलाओं को................... जितने रुप चाहोगे नारी में , रंग उतने मिलेंगे इस क्यारी में , है नौ देवियों के रूप का संगम , मिलती अप्सराओं की सुंदरता, होती मन की भाव...

अंतिम विदाई लता मंगेशकर जी को

Image
परमपिता परमेश्वर में लीन हो गई ,  स्वर कोकिला परमात्मा में विलीन हो गई | पचास वर्षों तक एकछत्र किया राज ,  पदम् भूषण का पहनाया गया ताज | स्वर सम्राज्ञी उतरी थी वो धरा पर ,  सादगी की थी मिसाल वसुधा पर | विदेशों में भी उनकी बनी पहचान थी ,  अनमोल हीरा, देश का वो मान थी | सिनेमा जगत को नया आयाम दिलाया,  शारदे माँ की अनुकंपा से ऐसा स्वर पाया | लता जी की वाणी का जादू ऐसा छाता था,  हर कोई आवाज का दीवाना बन जाता था | लता दीदी जैसी कृतियाँ अमर रहती सदा,  साहित्य, सुर-ताल से मिलन की रखती अदा | संगीत की झंकार रूह मे उनके बसती ,  अलौकिक छटा से महफ़िल थी सजती | अपूर्णीय क्षति हिंदुस्तान को हो गई  ,  स्वर की देवी, नगमों की मल्लिका खो गई | तिरंगा भी शान में तुम्हारी तो हैं झुका ,  धड़कनों से देश नमन आपको करेगा सदा,  नाज़ भारत को आप पर बना रहेगा सदा | तुमको खोकर सारा जग हो गया बैचेन ,  अश्रुपूरित आज हो गए यहां सब के नैन | श्रद्धासुमन आपको अर्पित शिखा करती आज ,  तुम ही तो थी लता दीदी सुरों की सरताज | अंतिम विदाई  आज आपकी कर दी सब...

स्वामी विवेकानंद

Image
12 जनवरी 1863 कोलकाता में जन्मा था,  पिता ने नरेंद्र नाथ दत्त नाम इनको दिया था | कुशाग्र अपनी बुद्धि से बनाई थी पहचान , हाजिर जवाबी थे बड़े स्वामी विवेकानंद महान | युवाओं में बनी अलग पहचान थी उनकी , वाणी में जैसे कोई जादूगरी थी उनकी | रामकृष्ण परमहंस थे धन्य ऐसा शिष्य पाकर , रामकृष्ण मिशन स्थापना की आगे जाकर | सज्जन थे बड़े, सनातन धर्म के रक्षक थे वह , जिज्ञासु प्रवृत्ति , ऊर्जावान युवक थे वह | सारे विश्व ने देखा इनका संबोधन, दिया था मान , " मेरे अमरीकी भाइयों और बहनों " से शुरू हुआ था , शिकागो में सनातन को संबोधित कर पाया सम्मान | " उठो , जागो और तब तक न रुको जब तक  लक्ष्य की प्राप्ति न हो " यह कथन था इनका | हिंदू दर्शन, वेद , शास्त्रों का ज्ञान भरपूर इनको , सत्यता , व्यावहारिकता का प्रतीक जानो इनको |  इतिहास इन्होंने एक नया गढ़ दिया था , युवाओं के मन में उर्जा का संचार किया था | इनके पद चिन्हों पर थोड़ा भी चल पाए तो , विश्व में मिलकर संस्कृति की धरोहर बचाएं तो | विवेकशील, धेर्यवान बन जाए कुछ उनके जैसे , आओ सच्चें श्रद्धासुमन अर्पित करें उनको ऐसे |  शत शत न...

बुद्धि बनाम सुंदरता

Image
सुंदरता एक दिन ढल जाएगी,  बुद्धि भला कहाँ जा पाएगी,  तुम सुंदर तन का क्या करोगे,  जब बुद्धि ठेंगा यहाँ दिखाएगी | बुद्धि पास तेरे होगी तो बंदें,  चल जाएंगे व्यापार व धंधे,  जो सुंदरता पर मरोगे तुम,  मद में तो हो जाओगे अंधे | मयखाने में नशा होती हैं शराब .  इंसानों की होती आदत हैं खराब,  सुंदर तन पर आदमी हैं मरता,  बुद्धि पर रहता हैं यहाँ हिज़ाब | अक्लमंदी अगर साथ हो तुम्हारे,  वो ही तेरे सारे कारज सम्भारें ,  सुंदर तन की जरुरत कितनी,  दिल को बताती हैं ये हमारे | बड़े बड़े सूरमा यहाँ हार गए,  अक्ल छोड़ सुंदरता को ताड़ गए,  बुद्धि से जब काम लिया नहीं,  चापलूस उनके उन्हें ही मार गए | बुद्धि का होना उतना जरूरी,  सुंदरता होती जितनी मगरूरी ,  जिनको हो जाए इनकी पहचान,  जिंदगी बन जाए उनकी कस्तूरी || शिखा अरोरा (दिल्ली)

अन्नदाता

Image
मन का दीप जलाकर रखना,  उम्मीद का साथ बनाकर रखना, अन्नदाता  फसलें फिर लहराएंगी,  हिम्मत अपनी जुटा कर रखना | वृक्षारोपण तुम बस करते रहना   प्रेमांकुर जग में तुम बोते रहना , छाया मिलेगी तुम्हेँ भी एक दिन , जल बस तुम सदा इनमें देते रहना | सपने सारे तुम भी पूरे करना ,  ख्वाब न अपने अधूरे रखना,  कर्म तुम अपना करते चलों , आश्वासन अपना बनाए रखना | अनाज का दाम मिलेगा पूरा,  सरकार का ध्यान होगा पूरा, कोशिश अपनी छोड़ना नहीं , काम को अपने तुम करना पूरा | माना संघर्षों की राह बड़ी कठिन ,  राह में होगी निराशा भी सब दिन, विचलित तुमको पर होना नहीं हैं , मंजिल तुझे यहाँ मिलेगी एक दिन || शिखा अरोरा (दिल्ली)

जीवन के विभिन्न रंग

Image
जिंदगी अपने विभिन्न रंग हैं दिखाती ,  कभी हमें हंसाती तो कभी ये रुलाती | कभी इठलाती, कभी बलखाती,  नादानी हमसे कई सारी कराती |  रिश्तो में कई जख्म भी हम भरते,  जीवन को अनदेखा भी करते | जिंदगी हो जाती तब बेमानी ,  जरूरतमंद को जब अनदेखा करते | कभी रूठती हैं हमसे, कभी मनाती,  न जाने कितने रंग यह दिखाती | हर रंग जीवन का हैं अलग , चाहे तुम ढूंढो जाकर फलक |  इसकी प्यारी सी एक झलक , मिले हमें तो मिल जाए तख्त | राजा हो या रंक हो कोई , साधु हो या गृहस्थ हो कोई | जीवन के रंग सबके अपने ,  कर्मों से मिल भर जाते सपने | फूलों की बगिया मिलती किसी को , तो कांटो की राह मिले यहाँ किसी को |  उन्नति के शिखर पर तो वहीं पहुंचे,  जख्मों को किसी के जो न खरोंचे | हर रूप जिंदगी का हैं सजता,  रंग सपनों में हर किसी के भरता |  रंग- बिरंगी यह हैं दुनिया देखो,  जीवन कितना संगीन हैं देखो || शिखा अरोरा (दिल्ली)

आने वाले नए साल में

Image
आने वाले नए साल में,  जहान सारा खिलखिलाएगा | आह्वान होगा नूतनता का ,  आगाज होगा नवीनता का | नए-नए अब वादे होंगे ,  फौलादी यहांँ इरादे होंगे | कोरोना भी अब हारेगा,  सूरज भी लालिमा धारेगा | टीकाकरण सबका हो जाएगा ,  बीमारी को दूर भगाएगा | फूलों से बगिया महकेगी ,  आसमान में चिड़िया चहकेगी | प्रदूषण हो जाएगा बेअसर ,  पेट्रोल का दाम हो जाएगा कमतर | बचपन खिलकर मुस्कुराएगा ,  बस्तों का बोझ कम हो जाएगा | विद्यालय कॉलेज फिर खुल जाएंगे ,  लोग फिर अपने काम धंधे पर जाएंगे | बदली भी घुमड़ घुमड़ आएगी ,  तारों की बारात नजर आएगी | मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा , चर्च सब ,  एक साथ मिलकर गाएंगे | सपने सबके सच हो जाएंगे ,  नया वर्ष हम खुशी-खुशी मनाएंगे || नव वर्ष 2022 की सभी को अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएंँ 💐💐💐💐 शिखा अरोरा (दिल्ली)

एक कप चाय

Image
अदरक,  तुलसी चाय का स्वाद अनोखा,  एहसास जैसे गर्मी में हवा का झोंका | सुबह सवेरे चाय का प्याला जो मिल जाए , सारे बदन में ताजगी का अहसास करा जाए | सर्दियों में तो और भी भाती चाय हैं हमको , रजाई , पकौड़ों के साथ चाय लुभाती हमको | ग्रीन टी पी लो या ले लो तुम ब्लैक टी , प्रचलित आजकल बहुत है लेमन टी | दूध शक्कर वाली चाय का स्वाद नहीं मिलता,  गुड़ वाली चाय से मन किसी का नहीं भरता | एक प्याली चाय जो शाम को मिले तो , सारे दिन की थकान को हर ले वो | थके हारे जब लौटे हम घर पर , चाहे एक कप चाय कोई दे दे झटपट | एक प्याली चाय से ताजगी इतनी भर जाती ,  बच्चों के साथ मिलकर मस्ती चढ़ जाती | धमाचौकड़ी फिरर खूब हम मचाते,  जब अदरक तुलसी लौंग की चाय पाले |  इलायची डले तो हो जाए सोने पर सुहागा , मेहमान भी आए चाय पीने बोल रहा है कागा | रिश्ते मजबूत बना देती एक कप चाय , मेहमानवाजी में मुख्य रोल निभाती चाय | जीवन में मिठास का रंग भर देती , तन मन में अनोखी स्फूर्ति भर देती चाय || शिखा अरोरा (दिल्ली)

तेरी मेरी मधुर कहानी

Image
यौवन ने ली अंगड़ाई थी, घरवालों को चिंता जताई थी , लड़की होती पराया धन , माता ने गुहार लगाई थी | तभी तुम आए संपर्क में हमारे , मैं बनू तुम्हारी दिल ये पुकारे , घरवालों के मिलन की आई बारी ,  उस पर मेरे नैना भी थे कजरारे | दिल पर नैनो का कुछ जादू हुआ ऐसा,  तुमने न देखा घर में आता हुआ पैसा,  घरवालों की पसंद को साफ किया इंकार ,  बोले तुम भाए नहीं कोई तुम्हें मुझ जैसा| हम दोनों बन गए एक दूजे के कायल,   नैनो ने कर दिया था हमें ऐसा घायल , आया दिसंबर का था जब यह महीना , पहनकर मैं तुम्हारे घर आई पायल | प्रथम प्यार की मधुर सी जो बनी कहानी,  लिख रही हूंँ आज मैं यहाँ अपनी जुबानी,  सुख-दुख, उतार-चढ़ाव बहुत आए जीवन में , सनम मैं आज भी हूँ तेरे ही दिल की रानी | पिया आज भी तुम रहते मेरे अंतर्मन में , मिलन की प्यास आज भी रहे तन मन में ,  प्रथम मिलन की बेला जैसा ही खुमार , अधरों पर खिलती मुस्कान तेरे ही आंगन में | जीवन यूँ ही संग तेरे चलता हमारा रहे सदा,  आती दिल से निकल कर बस यही दुआ ,  कहानी हमारी कुछ इसी तरह बढ़ती रहे , आंगन खुशियों से रहे यूंँ ही ...