जिंदगी
इस जिंदगी की ,एक ही परिभाषा है, कभी धूप , कभी छाँव ,कभी आशा है, रुकना मंजूर नहीं, इसे चलना दूर नहीं, किसी के बंदिशों में, कभी मजबूर नहीं, कभी मम्मी के गोद में , खेलती जिंदगी, कभी पापा के कंधों पर ,झूलती जिंदगी, कभी परिवार को , तुतलाकर हंसाना है, जिंदगी और कुछ न ,बस इक फँसाना है ।। कभी स्कूलों के झरोखे से झांकती जिंदगी, कभी दोस्तों संग सुख दुख,बांटती जिंदगी, कभी छुटियों में सुकूँ को, तलाशती जिंदगी, कहीं दूर नहीं बस नौनिहाल, भागती जिंदगी, खूबसूरत जिंदगी के लिए , हंसना -हँसाना है, जिंदगी और कुछ न बस ख्वाबों का घराना है ।। जब उम्र में बड़ी हुई जिम्मेदारियों में पली हुई, प्यार, मोहब्बत, धोखे के संग संग में ढली हुई, तब पिता का भी अरमान , हो जाती है जिंदगी, पूरे परिवार का स्वाभिमान, हो जाती है जिंदगी, इसी उम्र में एक नया , रिश्ता भी बन जाता है, जिंदगी की खूबसूरती में चार चांद लग जाता है, नये - नये रिश्तों को निभाने, लगती ये जिंदगी, रूठने ,मनाने और, कमाने लगती ये जिंदगी ।। जिंदगी में हार कभी, जीत कभी, अवसाद है, जिंदगी में जो हार माना नहीं ,सदियों...