Posts

Showing posts with the label कौशल पाण्डेय

जिंदगी

Image
इस जिंदगी की  ,एक ही परिभाषा है, कभी धूप , कभी छाँव ,कभी आशा है, रुकना मंजूर नहीं, इसे चलना दूर नहीं, किसी के बंदिशों में, कभी मजबूर नहीं, कभी मम्मी के गोद में , खेलती जिंदगी, कभी पापा के कंधों पर ,झूलती जिंदगी, कभी  परिवार को , तुतलाकर हंसाना है, जिंदगी और कुछ न ,बस इक फँसाना है ।। कभी स्कूलों के झरोखे से झांकती जिंदगी, कभी दोस्तों संग सुख दुख,बांटती जिंदगी,  कभी छुटियों में सुकूँ को, तलाशती जिंदगी, कहीं दूर नहीं बस नौनिहाल, भागती जिंदगी, खूबसूरत जिंदगी के लिए , हंसना -हँसाना है,  जिंदगी और कुछ न बस ख्वाबों का घराना है ।। जब उम्र में बड़ी हुई जिम्मेदारियों में पली हुई, प्यार, मोहब्बत, धोखे के संग संग में ढली हुई, तब पिता का भी अरमान , हो जाती है जिंदगी, पूरे परिवार का स्वाभिमान, हो जाती है जिंदगी, इसी उम्र में एक  नया , रिश्ता भी बन जाता है, जिंदगी की खूबसूरती में चार चांद लग जाता है, नये - नये रिश्तों को निभाने, लगती ये जिंदगी, रूठने ,मनाने और, कमाने लगती ये जिंदगी ।।  जिंदगी में हार कभी,  जीत कभी, अवसाद है, जिंदगी में जो हार माना नहीं ,सदियों...

क्या करूँ...

Image
नजर न लड़ती ,क्या करूँ,  रात न कटती, क्या करूँ, जुदा होकर तुम्हीं बताओ, किसकी चलती,क्या करूँ,  नज़्म , शेर और गज़लें मेरी, तुम पर खुलती, क्या करूँ, महक तेरी अब तन से मेरे, नहीं निकलती ,क्या करूँ, सावन जब आये आंगन में विरह मचलती ,क्या करूँ, याद तुम्हारी पड़ी है पीछे, टाले ना टलती, क्या करूँ, राह देखता सुबह और शाम, तुम नहीं टहलती क्या करूँ, तुम बिन हिम की ठंडक भी , आग सी जलती, क्या करूँ, नाम पुकारे शब भर "कौशल" पर वो न मिलती,क्या करूँ ।।         कवि कौशल गोंडवी

किसान

Image
है स्वेद जल से जो विभूषित, इस धरा का जो मान है, सत्य की जीवन कला है, और धरा का जो ज्ञान है, कटु वचन की है जिसकी व्यथा, घात प्रतिघात की जिसकी कथा, एक दृढ़ संकल्प है जिसके मन में, है सूर्य की तपती किरण जिसके तन में, इस जहां का जो मान और सम्मान है, ऐसा है अपना किसान ऐसा है अपना किसान।। है जो संसार में निर्बल, पर जग निर्माण में है सबल, सैकड़ों नींदें हैं जिसकी कुर्बान, इस सृष्टि का है जो भगवान, संकटों से भरा जिसका मुश्किल सफर है, धरती बिछौना और आसमान जिसका घर है, कर्मों से जो छोड़ता है इतिहासों में निशान, ऐसा है अपना किसान ऐसा है अपना किसान।। शोषणो के प्रहार में जो जिया हो, घूँट विष का हरपल जो पिया हो, लोकतंत्र में पल पल जो छला गया, फांसीयों में हरपल जिसका गला गया, मुश्किलों में भी जो हल चला रहा, उम्मीदों में हर पल जो पला रहा, फिर भी माँ भारती पर  है जो कुर्बान, वो है अपना किसान , वो है अपना किसान ।। कौशल पांडेय(एम●ए●,प्रथम वर्ष)