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शेरोंवाली

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अपने भक्तों की सुनं ले पुकार ओ शेरोंवाली, कालयुग में ले ले अवतार ओ महारानी। सबके दुःख, दर्द तु ही है हारने वाली, भटक रहे हैं राह तु ही है दिखाने वाली, अपने भक्तों की सुनं ले पुकार ओ शेरोंवाली, कालयुग में ले ले अवतार ओ महारानी। तेरी कृपा से फुले ये दुनिया सारी, सबकी करती है मन्नत तु ही पुरी। तु है सबके जीवन को संवारने वाली, अपने भक्तों की सुनं ले पुकार ओ शेरोंवाली, कालयुग में ले ले अवतार ओ महारानी। बड़ रहें हैं अत्याचार नारीयों पर ओ भवानी, अब नहीं सुरक्षित यहां कोई नारी। तुने किया राक्षसों का विनाश ओ शेरोंवाली, हमारी भी लाज बचाने आ जाओ ओ शेरोंवाली, अपने भक्तों की सुनं ले पुकार ओ शेरोंवाली, कालयुग में ले ले अवतार ओ महारानी।। स्वरचित  मौलिक कुमारी गुड़िया गौतम (जलगांव) महाराष्ट्र

करोना

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ओ करोना तू कहां से आया, क्यों सबको कर दिया पराया, तेरा आना किसको रास न आया, सबकी  मुसकाराट तुने छीनी, ओ करोना तू हमें न रास आया, ये कैसा चक्रव्यूह है तूने फैलाया, ओ करोना तू कहां से आया, क्यों सबको कर दिया पराया। ये कैसा खेल है तूने राचया, फिजाओं में है ज़हर किसी ने घोला, मानव का अविष्कार ही बन गया अभिशाप, अपने ही अपने से खोफ खा रहे हैं, एक ही घर में होकर भाग रहे हैं, ओ करोना तू कहां से आया, क्यों सबको को कर दिया पराया, तेरे कारण कितने बच्चे यातीन हूऐ, तेरे कारण कितनी औरतें विधाव हुईं, न जाने कितनी मां औ ने अपने लाल खो दिये, फिर भी तेरा आतंक न हूआ ख़त्म, ओ करोना तू कहां से आया, क्यों कर दिया सबको पराया, ये कैसा खोफनाक मंजर हैं, हर तरफ़ चीखों का मंजर हैं, जलाने को न जगह है, कम पड़ रही भूमि है, पर अब तू सुन ले ध्यान से, हम हार नहीं मानेंगे तू कर ले, जितना करना है तुझे सितम तूझे एक दिन हार कर दीखयेगे।। कुमारी गुड़िया गौतम (जलगांव)

क्रांतिनायक सुभाष चन्द्र बोस

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२३जनवरी १८९७ को नेताजी ने जन्म लिया, इस महान धारणी में जन्म लेकर धारणी को धन्य किया। जानकीनाथ बोस एवं प्रभात देवी ने सुभाष नाम दिया, १९१३को कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। १९१६ में ब्रिटिश प्रोफेसर के साथ दुर्व्यवहार करने पर निलंबित किया, १९२०मे आई सी एस में ४ स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा दिखाया। १९२१मे अंग्रेज सरकार ने नेता जी को गिरफ्तार कर लिया, १९२३ में नेताजी को भारतीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। १३ अप्रैल १९३६को भारत में एक बार फिर गिरफ्तार किया, १९३८ में रवींद्रनाथ जी ने सुभाष जी को सम्मानित किया। सन १९३९ में 'फारवर्ड ब्लाक 'की नेता जी ने स्थापना किया, युवा पीढ़ी में आजादी के प्रति नेता जी ने अलख जगाया। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा!" का नारा लगाया। कांति की मशाल जलाकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाया। देश प्रेम की भावना सब भारतीय के मन में बसाया। अंग्रेजी सरकार से भी अपने साहस का लौहा मनवाया। आजाद हिंद फौज का गठन कर युवाओं को प्रेरित किया। जापान सेना के साथ मिलकर आजादी का मोर्चा हाथ लिया। अंग्रेजों से देश के कई भागों को नेताजी ने आजाद करव...

एक अटल विश्वास

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तुम्हें ये देश बुला रहा है, तुम्हारे विचारों को संजो रहा है। तुम्हें याद कर अब आंसु बहा रहा है। राम रहीम के बंदे आपस में लड रहे हैं। इन्हें फिर कोई ज्ञान देने आ जाओ न। तुम्हें ये देश बुला रहा है, अमन शान्ति का फिर पाठ पढ़ा जाओ न। अब तो सिर्फ़ भष्ट नेताओं का राज है। सुनते नहीं अब ये गरीबों की गुहार है। किसान का जीवन अब बेहाल है। फिर से देश को आबाद खुशहाल वतन बना जाओ न। तुम्हें ये देश बुला रहा है, एक बार फिर इस भुमी को धन्य कर जाओ न। अंतर मन को चीरकर कविता लिखी असंख्य। अब कविता दिन ब दिन विहीन हो रही है। फिर पत्थरों में जान फूंक जाओ न। फिर एक बार अटल विश्वास दिला जाओ न। फिर कोई मधुर तान सुना जाओ न। देश का परचम एक बार फिर से लहर जाओ न। मानव ( नशा) भटक रहा अपनी राह है। फिर कोई उपदेश मानव को दे जाओ न। राजनीति में प्रखर जीवन जिया विश्वास को न कभी भी डीगने दिया। अब तो चारों ओर आतंकवाद का मंजर हैं। इन्हें अपनी गुज से दाहला जाओ न। फिर मानवता का सबक सीखा जाओ न। फिर कोई सुमधुर गीत सुना जाओ न। फिर से कोई कविता सुना जाओ न। देश को एक नई राह दिखा जाओ न। फिर वही अटल विश्वास जगा जाओ न। देश करे ...

मदन मोहन मालवीय जी

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पच्चीस दिसंबर १८६१ को जन्में, नाम मदन मोहन मालवीय था। शिक्षा के क्षेत्र में रहा इनका योगदान। सीधा सादा जीवन रहा विचार बेहतरीन। हिंदी के उत्थन में रहा सदैव प्रयत्न। शलिनता विनम्रता उदारचित महान। शिक्षाविद, पत्रकार, संपादक समाज सुधारक वकील कुशल वक्ता आदि सब गुणों की खान। पच्चीस दिसंबर का महीना रहा बड़ा खास जिसे मना रहे सब जन। असफल कार्य को भी सफल बनाया, जो था असभव तुम बिन। ऐसे वीर सपूत पर गर्व करता सारा हिन्दुस्तान। ऐसे वीर सपूत थे भारत माता के संतान। काशी विश्वविद्यालय की स्थापना युवाओं के लिए रहा एक वरदान। शिक्षा का सबको मिला फिर दान। भारतीय के लिए रहे एक प्रेरणास्रोत। खुद की बनाई एक अलग पहचान। देश वासियों के लिए थे उनकी जान। हम सबको है तुम पै अब अभिमान। कैसे न करें जनता अब तुम्हारा ही गुणगान। है तुम्हारा चरित्र ऐसा महान। हम सब करते हैं तुम्हारा ही बखान। कभी भी न भुलेंगे हम सब तुम्हारा ये एहसान। ऐसे वीर सपूत को गुड़िया का शत शत है नमन।। स्वरचित अप्रकाशित मौलिक कुमारी गुड़िया गौतम जलगांव महाराष्ट्र