🌵🌻समाज के पिशाच🌻🌵
🌵🌻🌵🌻🌵🌻🌵🌻🌵🌻🌵🌻🌵🌻🌵🌻🌵🌻🌵🌻🌵 कहने को तो अब वक़्त बदल रहे है दुनियादारी के नाम चलन बदल रहे है फिर भी बदलते नहीं सोच भेडियो की समाज के पिशाच बने सरेआम घूम रहे है लड़कियों की नज़र उठ जाये तो खैर नहीं हर कदम पर लाखो हिदायते मिल रहे है पर उनका क्या जो अपनी गंधी नज़रे लिए चलते राह में भी बहन बेटियों को देख रहे है क्यों लड़की ही बदनामी के खाते में आए किस लिए समाज इन्हे ये दाग़ देते आरहे है क्यों नहीं बंद करते ऊन औलादो को अपने जो आए दिन किसीके ज़िन्दगी बर्बाद कर रहे है लाख मना करने पर भी नहीं सुनते बात कभी दिल के बहाने हर दिन ज़ज़्बातो से खेल रहे है जो मान गयीं लड़की तो तोड़ जाते है इस कदर की अब हर साँस पे मौत की इंतजार कर रहे है दुनिया में हर किसीका परिवार ख़ास होते है हर कोई अपने शख्सियत की मिसाल दे रहे है फिर क्यों नहीं सोचते ऊन परिवारों की तकलीफ जो घुट घुट कर पल पल ज़िन्दगी की काट रहे है अपनी बच्ची को खरोच भी लगे तो गँवारा नहीं पर दूसरे की बेटियों को जिन्दा जलाये जा रहे है शगुन के नाम पर चाहिए इन्हे करोड़ो की दौलत क्यों बेटियों के स्वगुणो को नज़रअंदाज़ कर रहे है दुनिया के कुछ खोखली स...