दस्तक
मस्त मोला ज़िन्दगी जी रही थी l तेरे आने से पहले दुनिया से रूबरू हो रही थी l ना जाने कहाँ से तू मुझसे टकरा गया था l देख के तुझ को दिल मेरा खोने लगा था l नज़रो पे मेरे हर लम्हा तू ही घुमने लगा था दिल पर दस्तक सी तू क्यों देने लगा था l साँसो मे मेरे तेरा नाम निकलने लगा था l रूह मे तू मेरी समाने लगा था l पतझड़ मे भी मुझे बहारों का मज़ा आने लगा था l बिन बरसात के ही मन मेरा तेरी यादो से भीगाने लगा था l ख्यालों मे भी अब तेरा ही ख्याल रहने लगा था l दुआओं मे भी ये दिल सजदे तेरे करने लगा था l दिल मे तू मेरे दस्तक देने लगा था l तू मेरे हर पल सामने रहे अब तो ये चाहने लगा था l आलिया खान दिल्ली