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Showing posts with the label Ekta Shrivastava

नारी की महत्ता

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एक छोटी सी प्रस्तुति आज के दिवस पर:- कोई एक दिवस थोड़ी होता है नारी का जानते है हम अब मिल ही रहा ये दिन तो चलो इसे उत्सव सा मनाते हम। सब कहते है कि औरत का अपना कोई घर नही होता हम कहते है औरत के बिना कोई घर ,घर ही नही होता।। ईंट-पत्थर जोड़ के मकान तो मिस्त्री द्वारा बनाया जाता है लेकिन उस मकान को घर केवल स्त्री द्वार ही बनाया जाता हैं।। एक औरत सबसे सफल जानते हो कैसे बनती है जिसका हाथ मजबूती से दूसरी औरत थाम के रखती है।। नर हो या नारी नही होता है कोई किसी पे भी भारी एक दूजे के पूरक है वे,दोनो का ही जीवन होता है एक दूजे का आभारी।। जननी,शक्ति,संपत्ति,सम्रद्धि और लक्ष्मी सबमें ही तो नारी है फिर क्यों उसको समझें अबला और कहें ये तो बेचारी है।। ना वस्तु समझो, न देवी की ही तरह सिर्फ पूजो उसे कदम से कदम चलने का साहस और सुरक्षित खुला जहां दो उसे। दे सको तो वो नज़रिया दो उसे जहां वो खुल के सांस ले सके खुद को कभी कमतर न समझे , ये दुनिया उसे सिर्फ खूबसूरत लगे।। एकता श्रीवास्तव, इंदौर✍️

आखिरी खत

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वो आखिरी मुलाक़ात थी उसकी कह रही थी अब न मिल सकूँगी!! राज़ गहरे है इस दिल में ; जो अब यहीं दफ़न कर दूंगी!! न देखना कभी मुड़कर भी मुझे ;मिल जाऊं गर कभी भरी भीड़ में तुझे!! प्यार था !! हाँ था ..तुझसे!!!..... लेक़िन ज़माने को बतला सके इतना ऐतबार भी तो न था।। हर कोशिश सिर्फ़ मेरी थी  तेरा तो इक इक़रार भी न था!! मुड़कर जब भी देखेगा तू तन्हा ही बस ख़ुद को पायेगा!! होगा सारा समंदर तुझमें  लेक़िन प्यासा ही तू रह जायेगा!! भड़का के प्यार के शोले कदम पीछे हटा गया ख़ुद में कितना तन्हा था वो दूर होकर ये बतला गया!! अब न सोचूंगी तुझे न कभी कोई जिक्र होगा तेरा बात वफ़ा की आएगी तब तेरी जुवां पर नाम होगा बस मेरा!! भेज रही हूं तुझे अपना ये हाले दिल ...जानती हूं न कह सकेगा तू!! चाहत तो दोनों ने ही की थी इज़हार भी हम दोनों का था मुकरना तो तेरी फ़ितरत थी बस हम ही नासमझ सके!! तेरा साथ तो पलभर का था हम अंजामे मुहब्बत कर बैठे!!  भेज रही हूँ हाले दिल अपना..... हिम्मत हो तो तू भी कह देना आख़िरी ख़त लिख कर मुझे!!     एकता श्रीवास्तव  ✍️

आ गया है नववर्ष

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लो आ गया नववर्ष लेकर नई उमंगे खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!! भरलो मुट्ठी प्रेम की  और छोड़ दो सारी रंज़े  खोल दो दिल की गांठो को और बांध लो खुशी के लम्हे!! क्या खोया और क्या पाया है इसकी चिंता छोड़ो बड़े भाग मानस तन पाया उसकी कीमत समझो!! लो आ गया नववर्ष लेकर नई उमंगे खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!! जो सोचा था कल कर लेंगे उसको आज ही करना टालमटोल की ये आदत से तौबा अब कर लेना!! बेवजह ही लुटा आना कुछ प्यार अपनो पर भी देखना मिलेगा तुम्हें भी भरपूर कभी न कभी!! लो आगया नववर्ष लेकर नई उमंगे खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!! सपनों के आसमान को पाना चाहते हो तुम अगर  तो थाम लेना नेकी का हाथ और चलना सच्चाई की डगर पर!! जो संकल्प लेते हो हर वर्ष वो इस बार ज़रूर पूरे कर लेना कल में नही तुम आज में ही जीने की आदत विकसित कर लेना!! लो आ गया है नववर्ष लेकर नई उमंगे खुशहाली की चादर ओढ़े लेकर नई तरंगे!! खोलो मन के द्वार ज़रा इसमें आध्यात्मिक तेज़ भर लेना  चरित्र की शक्ति ही सबसे बड़ी है ये संस्कार बच्चों में भर देना!! आत्मसम्मान से जीने की प्रेरणा ख़ुद में समाहित कर लेना दर्प,कायरता से ह...

बाल दिवस

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गर्मी की छुट्टियों में दादी-नानी की कहानियां थी,परियों और जादूगरों का फ़साना था, बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!! बारिशों में कागज़ की नाव थी तो सर्दियों में मुँह से धुंआ निकाल कर कश लगाना था!! गर्मियों में आम के पेड़ पर चढ़कर कच्चे आम बगीचे से लूटने का अपना ही ज़माना था!! बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!! नवरात्रों में कन्याभोज में शामिल होकर सबसे ज्यादा पैसे इक्कठे करने की होड़ मचाना था!! मेहमानों के अचानक से घर आ जाने पर मिठाइयों और पकवानों पर ललचाती नज़रों से अपनी बारी का इंतजार करना था!! बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!! दुनियां का सबसे हसीन और खूबसूरत पल बचपन ही होता है ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर यही तो बचपन का मंत्र होता है!! ना आज की चिंता थी ना थी कल की कोई फिकर कट्टी और बट्टी में ही हो जाती थी शामों- सहर!! बचपन का वो हर मौसम कितना सुहाना था!! 14 नवम्बर को करते थे चाचा नेहरू जी का बर्थडे सेलिब्रेट पूरे स्कूल में उत्सव का माहौल हो जाया करता था क्रिएट!! ख़ुद के जन्मदिन का रहता था हमें तो साल भर वेट  नए-2 कपड़े और खिलौनों का कितना रहता था क्रेज़!! अच्छे से याद ह...

पिता

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पिता घर की छत होता है,एक विशाल बरगद का वृक्ष होता है!!  परिवार की कल्पना उसके पंख होता है!! बेटी के सपनों में भी पिता के जैसा ही  एक हमसफ़र होता है!! पिता एक फूलों की बगिया होता है , जिसकी खुशबू से महकता सारा ये जग होता है!! कवि की कल्पना सा होता है पिता का प्यार , बच्चों के मन में बसा एक सपना जैसा होता है!! वो जब होता है तब किसी को एहसास नही होता है और जब वो नही होता है तब घर का हर एक कोना उदास होता है!! पिता के होने से कोई गम न होता है!! उसके ना होने पर उदास सा ये मन हर वक़्त होता है।। पिता वो संघर्ष होता है जिसके होते उसकी सन्तान का न कोई बाल भी बांका कर सकता है!! कद्र करलो उनकी, क्योंकि उनके जाने के बाद तो हर शख्स सिर्फ़ उनकी तस्वीर को देख कर ही रोता है।। अपनी औलाद के सपनों को पूरा करते-2 कब पिता की सुबह से शाम हो जाती है,  और ये एहसास हमें तब होता है जब हमारी ज़िंदगी की सांझ हो जाती है!! ज़िम्मेदारी का हर बोझ अपने कंधे पर उठाता है, ये पिता है ज़नाब जो हर वक़्त मुस्कुराता है!! किसी ने ऐशोआराम मांगा किसी ने ज़माने भर की दौलत मांगी ,  और एक हम थे जिसने ख़ुदा से बस अ...

शुभ दीपावली

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दीपावली पर्व है हर्ष का, उल्लास का!! रोशनी से जगमगाता तिमिर को  करता प्रकाश सा!! तमस से प्रभा बनाता!! घने अंधकार को मिटाता!! दीप्तवान हो सर्वस्व में छटा निराली है दिखाता ।। मन के आंगन में उमंग की रंगोलियां सजाता!! गुझिया सी मिठास जिव्हा पर लाता!! बुराइयों को उड़ाकर आतिशबाजी के संग!! फुलझड़ियों की लड़ी जीवन में सजाता!! रोशनी से जगमगाता तिमिर को  करता प्रकाश सा!! सुख और समृद्धि का वास हो सदा!! इसी  प्रार्थना के साथ एकता की तरफ से  आप सभी को दीपावली की अनेकानेक शुभकामनाएं!!  एकता श्रीवास्तव✍️

चलो इस बार कुछ नया करते है!!

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चलो इस बार कुछ नया करते है!! इस बार दीवाली की सफ़ाई के साथ-2 मन की सफ़ाई भी करते है!! घर के जाले तो सबने साफ कर ही लिये होंगे चलो अब मन में लगे जाले साफ करते है!! एकता श्रीवास्तव✍️

न रखो उम्मीद किसी से

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ना रखा करो उम्मीद दूसरों से  टूट जाती है जब पूरी नहीं होती!! मिलता है फिर गम और यह सोच-सोच कर  उदास होते हैं फिर हम!! यह जानते हैं हम कि जो दिया है वह बापिस लौटकर आएगा जरूर  तो फिर क्यों इतनी बेचैनी ,इतना गुस्सा और इतना गुरुर !!  करो ना वही जो तुमको हो पसंद  खुद से खुद को मिलाकर लिख डालो इबारत सच्चे प्यार की!! ना मिलता ना मिले, किसी से चाहत का इकरार  तुम दे दो यह सोच कर कि आएगा जरूर लौटकर बेहिसाब!! एकता श्रीवास्तव✍️

🤗करले ख़ुद से प्यार तू वंदे🤗

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मत चाहो किसी को इतना कि उसे ख़ुद पर गुरुर हो जाये  फिर राह तको तुम उसकी और वो तुमसे दूर हो जाये!! इंतज़ार करते -2 तुम थक जाओ उसका  लेकिन उसको तुम पर तरस न आये!!  करले वंदे तू खुद से प्यार इतना कि दिल न कोई तेरा तोड़ पाए चाहत बन जा तू ख़ुद की ही की मन ही मन तू सबको भाए!! कर निर्धारित एक लक्ष्य को जिससे तेरा भविष्य बन जाए मत सोना तू चैन की नींद जब तक तुझे वो लक्ष्य हांसिल न जाए!! मत पड़ इस दुनियादारी के मोह-मायाजाल में जिससे तू सिर्फ दुःख को पाए जो तेरा है वो कहीं नही जाएगा और जो तेरा नही वो तुझे कहाँ से मिल जाये!!  कर्म का हिसाब सबको चुकाना पड़ता है यहाँ जो जैसा बोयेगा वो वैसा ही तो पाये!! पुण्य की गठरी बांध लें वंदे साथ तेरे बस वो ही जाये!! मेरा-तेरा छोड़ यहीं पे इस धरा का सब यहीं धरा पर रह जाये!! करले ख़ुद से प्यार तू वंदे कि तू सबके मनको भाए अगले जनम तू क्या बने ये कौन जान पाए!!             एकता श्रीवास्तव ✍️

नई मां

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!! आज फिर दूध उबल कर गैस से नीचे गिर गया!! हे प्रभू अब फिर माँ डाँटेगी कि इस लड़की का ध्यान रहता किधर है,1 लीटर दूध आता है उसमें से तीन पाव ही बच पाता है गिरने के बाद।                        क्या करूँ खो जाती हूं मैं भी अपने सुनहरे भविष्य की मीठी यादों में,सब इंस्पेक्टर के पद पर चयन हो गया था उसका रैंक भी बहुत अच्छी आयी थी,आखिर 2 साल की अथक मेहनत के बाबजूद उसे ये सफलता जो मिल रही थी, मन तो बस सरकारी नॉकरी की चाहत लिए बैठा था।इससे पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और एग्जाम देती आयी है लेकिन... वही रिजर्वेशन नही होने के कारण रह जाती है हर बार अच्छे नंबर लाने के बाबजूद भी।                          इस बार तो कोई भी नही  रोक सकता मुझे ये नॉकरी पाने से।।हाहाहाहा।।।।      अरे बीनू!!!! ये अकेले में किससे बात कर के हंसे जा रही हो।।पागल वागल तो नही हो गयी हो न।।।ये स्वर उसकी माँ के थे( सौतेली) ।।             ...

मुस्कुरा दो

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मुस्कान हर ग़म का मरहम होती है, रोते चेहरे का हर दर्द हर लेती है!! गिरकर जब उठो तो मुस्कुरा दो, जीतते -2 यदि कभी हारो तो मुस्कुरा दो!! कोई बेवजह आपसे झगड़े तो छोड़कर गुस्सा, बस हल्का सा मुस्कुरा दो!! तोड़कर दिल जब कोई आपका चला जाये , तो रोकर नही देकर उसको मुस्कान उसका हर ग़म भूला दो!! हाँ माना कि थोड़ा मुश्किल होता हैं  दर्द में मुस्कुराना, लेकिन जो काम आसान हो उसमें भी कहाँ मज़ा आता है!! इंसान हैं हम कुछ न कुछ मक़सद से तो आये हैं यहाँ तो ढूंढो उस मक़सद को और ठान लो पूरा करने को उसे!! न दे सको यदि किसी को कुछ तो दे दो एक मुस्कान  दूसरे की खुशी के लिए ही सही, कभी-2 बेवज़ह यूँ ही मुस्कुरा दो!! *एकता श्रीवास्तव*✍️

दूर बहुत दूर चले जाएंगे

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बड़े अदब से कह गये थे वो अलविदा हमें कभी वापिस लौटकर न आएंगे हम!!! हम भी अब उनकी दुनिया से दूर बहुत दूर चले जायेंगे!! ढूंढ़ लो जितना ढूंढ़ सकते हो तुम  तुम्हारे खोज़ने पर भी नज़र न आयंगे!!! हम भी अब उनकी दुनिया से दूर बहुत दूर चले जायेंगे!! इंतज़ार बहुत किया था हमने फिर उनका    कभी न साथ छोड़ने का वादा जो किया था उनसे!!!               गुरूर हो गया था उन्हें ख़ुद पर क्योंकि ज़रूरत से ज्यादा जो  चाहते थे हम उन्हें टूट कर चकनाचूर हो जाएगा उनका ये गुरुर इक दिन!!! जिसदिन हम  उनकी दुनिया से दूर बहुत दूर चले जायेंगे!! ज़रूरत से ज्यादा न तरसाओ किसी चाहने वाले को क्योंकि जब ये चाहने वाला ही न रहेगा तो उनका ये गुरुर किस काम का!!! एहसास होगा उन्हें तब जब मिलेगा उन्हें भी कोई उन्ही के जैसा  फिर टूटेगा दिल उनका भी उस दिन याद बहुत हम आएंगे!!! क्योंकि..... हम भी अब उनकी दुनिया से दूर बहुत दूर चले जायेंगे!! आसानी से जो मिल जाये उसकी कद्र कहां करते हैं लोग  बिछड़ने पर ही आपकी एहमियत समझते है लोग!! फिर सिवाए पछतावे  के  कहां कुछ...

ख़्याल रखने वाला

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दिल से निकलती है दुआ अक्सर उनके  लिए  जो बेवजह ख़्याल रखा करते है हमारा!! पहले सोचा करते थे कि जन्मदाता के अलावा भी हो सकता है क्या ऐसा कोई ?? किन्तु हां अब समझ में आ चुका है की माता - पिता के अलावा केवल एक सच्चा मित्र   जीवनसाथी ही होता है जो रखता है  वक़्त बेवक़्त आपका  ख़्याल!! जो मिलता है बडी खुशनसीबी से  अगर है आपके पास भी ऐसा हमसफ़र तो नाज़ करें उस पर!! भुलाकर उसकी सारी गलतियां याद करें केवल उसके साथ को!!  उसके प्यार को जो कभी दिखता नही है किंतु महसूस होता है हर वक़्त प्राणदायी वायु की तरह!! एकता श्रीवास्तव✍️

करवा चौथ

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बालों में गजरा ,आंखों में कजरा,भर के मांग में सिंदूर!! लगा के हाथों में मेहन्दी,चली लगा के पाँव में महावर!!  बिंदी,चूड़ी ,कंगना, झुमका!! नथनी, बिछिया ,पायल!!  साड़ी लहंगा चुनरी!! करके 16 श्रृंगार,  चली है सजनी अपने पिया के द्वार!! दिन भर रहकर निर्जिला उपवास, करवा माता की करे उपासना,और करे  इंतज़ार चौथ के चाँद  का। आज थोड़ा तरसाएगा , इंतज़ार भी करवाएगा!!  ये है करवा चौथ का चांद , आज जल्दी नज़र न आएगा!!  सजा के थाली में पूजन के समान, लेके प्यार भरे अरमान!!  पाने अखंड सौभाग्य को करती है पूजा सुहागने  करवा चौथ की!! मिले अखण्ड सौभाग्य सभी को   यही है करवा माँ से प्रार्थना!! एकता श्रीवास्तव

देश की बेटी लवलीना

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पूरब से आई है देखो मेरे भारत मां की लाडली !! असम के गोलाघाट मैं जन्मी दो जुड़वा बहनों लिचा और लीमा में सबसे छोटी लवलीना!!   टिकेन पिता का नाम है माता है मामोनी!! बचपन से ही थी होनहार देश की खातिर कर गुजरने को वह थी हमेशा तैयार!! पिता टिकेन ने बेटी की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए है बहुत संघर्ष किया!!  विद्यालय से ही उसने बना ली थी एक अलग ही पहचान और अपने माता-पिता का नाम रोशन किया!!  आई नजर में प्रसिद्ध कोच के उन्होंने इस का हुनर पहचान लिया!!  देकर ट्रेनिंग इस हीरे को कोहिनूर बना दिया!!  भारत की बेटी है देखो विश्व पटल पर छा गई !! देश का नाम रोशन करके हमारी एक और बेटी आ गई !! सुनो गौर से दुनिया वालों बेटी को कम मत आंकना, जब - जब आएगी बारी बेटी की तुम बस उसका हाथ थामकर हौसला बढ़ाना!!  कर लो विश्वास तुम बेटी पर वो नहीं कभी किसी से कम!!  कल भी न थी, वह न आज भी है और ना कल रहेगी किसी से कम!!  गर्व है हमें अपनी लवलीना बेटी पर भारत की यह मुक्केबाज धूल चटा कर आ गई है ले करके अपने सर पर ताज!!! जय हिंद जय भारत माँ जय हो मेरे देश की बेटियों...

देश की बेटी मीराबाई चानू को सलाम

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देश की माटी की रखी लाज, लेकर आ गई देश की बेटी एक और ताज!!  21 साल के इंतजार को किया खत्म, सजा दिया भारत मां के माथे पर रजत मुकुट!! रियो ओलंपिक में ना पाई थी उसने सफलता ,लेकिन विश्व चैंपियनशिप में लहराती रही अपना परचम!! कसकर कमर ,कड़ी मेहनत के साथ लगातार करती रही प्रयास, टोक्यो ओलंपिक में कराई अपना और देश का सपना साकार!! 49 किलो भार वर्ग में 26 वर्षीय मीराबाई चानू जो है पद्मश्री से सम्मानित,  राष्ट्रमंडल खेलों में जीते उसने कई पदक!!! दिखा गई देश को और विदेश को की बेटियां ही रखती है लाज,  पैदा होते ही उनके,ना बनाओ मुंह कब क्या करिश्मा दिखा जाए यह महिला शक्ति कोई नहीं जानता!!  पूरा विश्व आज नारी शक्ति की महिमा के आगे शीश नवाता, तिरंगा भी आज शान से लहराता और कहता जाता धन्य हो मीराबाई चानू धन्य हो भारत माता और धन्य हो तेरी जन्म दात्री!!  जिसने हमें यह गर्व का क्षण दिया मीराबाई चानू तुझे सलाम भारत माता की जय देश की बेटियों की जय!! एकता श्रीवास्तव इंदौर✍️

पागल हुई नदी

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उछलती कूदती, मदमस्त सी ,लहराती चलती थी वो ,कभी नादान, कभी शोख ,कभी चंचल चितचोर सी लगती थी वो । आ जाये जो भी पनाह में उसकी कहते न थकता था पागल सी हुई है नदी शायद ऐसा लगता था। कितना कुछ मिलता - जुलता सा था तेरा और मेरा सफर, तेरी मंजिल सागर था और मैं बेमंज़िल मुसाफिर ॥  साथ तेरे जो आता था बस तुझे में ही मिल जाता था और इक  मैं हूँ जो हाथ गर किसी का थाम लूं तो मरकर ही छूट पाता था!! नदी और जिंदगी है एक पक्की सहेली  सी, लगती है अक्सर एक पहेली सी!!! कुछ हद तक सुलझी तो कुछ अनसुलझी सी!!  जितना ज्यादा जानना चाहोगे इसकी गहराइयों को तुम ,उतना ही उलझता सा पाओगे खुद को तुम !! अचानक से आई विपदा कर जाती है पागल सा नदी को, वहीं अकस्मात प्राप्त हुआ धन मदमस्त कर जाता है। जिंदगी को !! चलते जाना ,बस चलते ही जाना, यही तो सिखाती है इक नदी!!! राह में आये चाहे कितनी भी बाधाएं, नहीं घबराना डट कर करते जाना हर एक मुसीबत का सामना!!  तोड़ कर हर बंधन चट्टानों से टकराती है।  नदी हो या जिंदगी हमें हर हाल में जीना ही तो सीखाती है!! भूलकर अतीत के कड़वे अनुभव,भविष्य का मुँह मत ताक तू , ज...

"पिता एक उम्मीद"

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पिता घर की छत होता है, माँ की ज़िंदगी होता है,पूरे परिवार की कल्पना उसके पंख होता है!! बेटी के सपनों के राजकुमार में भी पिता के जैसा ही एक हमसफ़र होता है!! पिता एक लेखक की रचना जैसा होता है उसके मन में बसा एक सपना जैसा होता है!! वो जब होता है तब किसी को एहसास नही होता है और जब वो नही होता है तब घर का हर एक कोना उदास होता है!! पिता के होने से हर गम भी ख़ुशी सा होता है!! उसके ना होने पर उदास सा ये मन हर वक़्त होता है।। आज जिनके पास पिता है वो कद्र करलो उनकी, क्योंकि उनके जाने के बाद तो हर शख्स सिर्फ़ उनकी तस्वीर को देख कर ही रोता है।। अपने हर सपने को पूरा करते-2 कब पिता की ज़िन्दगी की शाम हो जाती है, और ये एहसास हमें तब होता है जब हम पिता बनते है!! ज़िम्मेदारी का हर बोझ अपने कंधे पर उठाता, ये पिता है ज़नाब जो हर वक़्त मुस्कुराता है!! मेरी हर बात को मुँह से निकलते ही पूरी करने वाले मेरे पिता को शत-शत नमन।। नाम :- एकता श्रीवास्तव ✍️

वज़ूद

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आज बहुत ख़ुश थी वो बड़े दिनों के बाद सम्मान जो मिल रहा था उसे अपनी लिखी रचनाओं पर। मन तो मानों आसमान पर पंख लगा कर उड़ रहा था उसका ,इंतज़ार था उसे तो बस मंच से उसका नाम पुकारे जाने का।  अभी तक शानू की बहू ही तो थी वो,जिसे देखो बस इसी नाम से पुकारता था उसे,हां इसमें कोई बुराई नही थी किन्तु उसका अपना वज़ूद ग़ुम हो चुका था ।।सभी लोग उसका असली नाम भूल चुके थे ।। उसका अस्तित्व और उसका नाम जो उसके माता- पिता ने बहुत सोच समझकर रखा था।। किरण  सूरज की वो किरण जो आसमान पर छा जाती है,अंधेरा दूर भगाती है। अंधकार मिटाती है।। कितना प्यारा नाम था।। लेकिन आज उसका वज़ूद धूमिल पड़ चुका था।हर वक़्त ताने उलहाने , उसकी ज़िन्दगी बद से बद्तर हो चुकी थी लेक़िन इसका जिम्मेदार कौन था????  आखिर कई बार इस सवाल का जवाब वो अपने आप से मांग चुकी थी ।।नही मिलता था।।।।।।। बरसों बाद जब उसे साहित्य अलंकरण पुरुस्कार से नवाज़ा जा रहा था वो दिल को थाम के अतीत के गलियारे में गोते लगा कर आ चुकी थी।। सहसा ही एक आवाज़ आयी।। " इस वर्ष का सर्वश्रेष्ठ साहित्य पुरुस्कार दिया जाता है श्रीमती किरण श्रीवास्तव जी को "  पू...

हैप्पी मानसून

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मंद-2 चल रही है पुरबैया , मानों उड़ रहा है प्रकृति का आँचल।। बीत गई रैना अपने छोड़ कर दो नैना।। लेकर आ गयी फिरसे ख़ूबसूरत मनमोहक नज़ारा।। चिड़ियों की चहचहाहट ,गुंजन करता वृक्षों का झुरमुट सारा।।। ओढ़ कर बरसाती चादर, लेकर उमस का तूफ़ान।। लो फिरसे आ गया मानसून अब संभालो अपने को मेरी जान।।  एकता श्रीवास्तव