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Showing posts with the label नरेश शर्मा

मेरा बेटा अग्निवीर है

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"अंकुर अब मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ  बनने वाली हूँ।  और तुम आही नहीं रहे हो। मेरा क्या होगा ? मुझे बहुत डर लग रहा है । तुम कब आओगे  ? " रचना ने अंकुर को फौन पर  बताया।      रचना अब तुम चिन्ता क्यौ कर रही हो अगले महीने तो हमारी शादी हो ही  जायेगी। अब चिन्ता करने की कोई बात नही है। मैने अपनी छुट्टियौ की एप्लीकेशन भी देदी है वह जल्दी ही मन्जूर होकर आजायेगी। अब तुम बिल्कुल फिकर मत करना।  और मै अपनी मम्मी को भी खत लिखकर बतादूँगा। वह तुमसे मिलकर किसी अच्छे डाक्टर को दिखादेगी। ऐसी बात मै मम्मी को फौन पर नही बता सकूँगा। " अंकुर ने इतना कहकर फौन रख दिया।      आज अंकुर बहुत खुश था उसने यह बात गाँव मे रहने वाले अपने चाचा के लड़के को बतादी और उसको मम्मी से बात करने के लिए बोला।                अंकुर ने  रचना के माँ बनने की खबर के लिए एक खत अवश्य माँ को भेज दिया था।       खत पहुँचने में तो सात आठ दिन का समय लग ही जाता है और फिर अंकुर के गाँव में पोस्ट आफिस भी न...

सड़क सुरक्षा

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जब जब सड़क पर तुम अपना बाहन लेकर जाओ। सड़क सुरक्षा के नियमौ का पालन जरूर करते जाओ।। अगर है दुपहिया वाहन तो हेलमेट जरूर लगाना। अगर बैठे हो तुम कार में तब सीट बैल्ट लगाना।। हमेशा बाये चलो देखभाल  कर ओबरटेक करना। शराब पीकर बाहन नहीं चलाओ मौबाइल बन्द रखना।। सड़क किनारे बने सूरक्षा संकेतौ का भी ध्यान करना होगा। तभी हमारा जीवन सुरक्षित बरना बेमौत हमें मरना होगा। चौराहौ  पर खडे़ सिपाही इनके संकेतौ को मानो। इससे रहेंगे हम सब सुरक्षित इन बातौ को पहचानो। जब देखौ चौराहे पर रैड लाईट हमको रुकना होगा। सड़क सुरक्षा नियमौ का हमेशा हमें पालन करना होगा।।  सड़क किनारे कोई घायल हो उसे फर्स्ट एड दिलवाओ। कानून के डरसे तुम  अब बिल्कुल मत घबराओ।। नरेश शर्मा 

ऐसेअन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस

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आओ हम सब मिलकर आज योग दिवस मनाते है। हम अपनी सब बीमारी योगासन कर दूर भगाते है।। लेकर अपनी अपनी चटाईयां धरती पर बैठ जाते है। इसमे ना कोई खर्चा आता यह सबको समझाते है। आओ हम सब ---------1 योगासन करने से स्वास्थ्य हमारा अच्छा हो जायेगा। योगासन करने से देश का हर बच्चा स्वस्थ हो जायेगा।। आओ हम सब मिलकर योग की अलख जगाते है।। आओ हम सब-------2 सूर्योदय से पहले उठकर योगक्रिया तुम करते जाओ। कपालभाटी करो अनुलोम बिलोम तुम करते जाओ।। हमारे ऋषिमुनि भी नित योगक्रिया करना सिखलाते है। आओ हम सब------3 नित योगक्रिया करने से हमारी बडी़  बीमारी कट जाती है। सेहत का राज छिपा योग में जीवनमें खुशियां छा जाती है।। इसीलीए हम मिलकर इन्टरनेशनल योग दिवस मनाते है। आओ हमसब-----4 योगासन की महत्वा अब सारा जग जान गया है। प्राणायाम योगासन का फायदा सारा जग जान गया है।। अब हम सब मिलकर योगासन का शंखनाद करवाते है। आओ हम सब मिल------5

दिग-भ्रमित युवा

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ए मेरे देशके युवाओ तुम अग्निवीर का सम्मान करो। जिस देश में जन्म लिया उस जन्मभूमि का मान करो।। तुम्है सैना मे जाने को कैसा अवसर दिया है इस सरकार ने। तुम्है कुछ कर दिखलाने का  अवसर दिया है इस सरकार ने।। ए मेरे देश के युवाओ ऐसा अवसर तुम मत चूको। आतंकियौ के बहकावे में आकर देश की सम्पत्ति मत फूको।। तुमको यह सब किसने सिखलाया कि अपना देश जलाना है। देश को अन्धेरे मे धकेलकर इन आतंकियौ का मन बहलाना है।।  हम सब को क्या होगा हासिल अपना ही देश जलाने से। हम सब पीछे रह जायेगे इन सब के बहकाने में आने से।। अगर इस तरह तुम ही द्रग- भ्रमित होकर रह जाओगे। तो इस अपनी जन्मभूमि का जो कर्जा है कैसे अदा करपाओगे।। तुम संस्कार हीन क्यो हुए अपने  पथ से बिचलित होते  जाते हो। तुम्है मिले जो संस्कार बचपन में उनसे अलग थलग होते जाते हो।। अब भी है समय तुम छोडो़ यह रस्ता अच्छे रस्ते पर आजाओ। सब तरफ से मिलेगी माँफी तुम्है अपना भाग्य जगा जाओ।। मंजिल उनको ही मिलती है जिनके सपनों में जान होती है। पंख दिखाने के होते है केवल  हौसलौ में ही उडा़न होती है।। रचनाकार:- नरेश शर्मा " पचौरी "

मातृ पितृ दिवस

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मात पिता के लिए साल में केवल एक एक दिन। कैसे जियेगे बच्चे बिन मात पिता के साल के बाकी दिन।। मात पिता वह होते है जो हर पल साथ हमारे रहते है। हम अपने मात पिता हमेशा दिल अपने में रखते है।। हम पूजाय मात पिता को कभी भुला नही सकते है।। मा जन्मदायिनी है तो पिता हमारा पालन कर्ता है। मा छाया करती है तो हमारी रक्षा करता है।। मात पिता एक दूजे के पूरक  है दोनौ को पूजा जाता है। जब एक नही रहता तब दूजा दोनौ का धरम निभाता है।। माय पिता की पूजा हर रोज करो यही हमारा धरम है। मात पिता को कोई कष्ट न हो यही हमारा सतकर्म है।। मात पिता की सेवा करने से कष्ट तेरे सब कट जायेगे। मात पिता की सेवा करने से स्वर्ग यही मिल जायेगा।।

सर्कस

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 मेरे राजन को क्या हुआ है ? मुझे भी तो कोई बताओ। कहाँ मेरा राजा बेटा ? मेरा तो वही सहारा है। वह सूबह मुझसे कहकर  गया था कि मै कल सुबह आऊँगा क्यौकि आज रात को  हमारे सर्कस का सो है। वह बता रहा था कि उसमें  कोई मन्त्रीजी आरहे है वह हमें इनाम देंगे। माँ मै अब तुझे अच्छे डाक्टर को दिखाऊँगा।  क्या हुआ है मेरे लाल को कोई तो बताओ ? तुमने इतनी भीड़ क्यौ लगाई है क्या मेरे राजा ने कोई बडा़ इनाम जीता है। " राजन की रोती हूई सबसे पूछ रही थी।      लेकिन सब चुप थे कोई भी कुछ बोलने को तैयार नही था।      राजन  अपनी माँ इकलौता बेटा था उसके पापा की बचपन में ही मौत होगयी थी।  राजन को उसकी माँ ने महनत मजदूरी करके पाला था।    राजन अब अठारह साल का जवान छोरा था। उसने अपने गाँव मे ही मजदूरी करके अपनी माँ का पेट भरता था। अब उसकी माँ को भी सन्तोष था कि बेटा बडा़ होगया है।  कमाने लगा है अब इसकी शादी और होजाय जिससे बहू व पोतौ का मुँह देख कर मुझे भी सन्तोष आजायेगा।      परन्तु ईश्वर को तो कुछ और ही मन्जूर था।  ...

नशा की ओर बढ़ते कदम

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" नही पापा अब यह नहीं चलेगा। आपने मम्मी को आज तक बहुत मार पीट लिया। अब एक शब्द भी बोला तो मुझे आपके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट लिखानी होगी। " अमर ने यह कहते हुए अपने पापा का हाथ पकड़ लिया। "शाबास यह तू बोल रहा है? अभी तक कुछ करता तो नहीं और चला मुझे नसीहत देने ।देखो तो आज चींटीं के भी पर निकल आये है। " रामलाल अपनी आँखें लाल करता हुआ बोला " आपने आज तक मम्मी को  दिया ही क्या ? यदि मम्मी नही कमाकर लाती तो हम सब  भाई बहिन रेलवे स्टेशन पर भीख माँग रहे होते । आपको तो हर रोज शराब चाहिए। यदि उसके लिए पैसे नही मिले तो आप मम्मी को किस तरह मारते थे।  अब मै भी कुछ कमाने लगा हूँ । आज के बाद मम्मी काम नही करेगी।। " अमर ने जबाब दिया।  आज सरला खचश भी थी और दुःखी भी थी। दुःखी इसलिए थी कि वह बेटे द्वारा अपने ही बाप का अपमान होते नहुं देखना चाहती थी। सरला बोली," बेटा अमर यह तेरे पापा है पापा के लिए ऐसा नही बोलते है हाँ मै मानती हूँ इन्हौने तुम्हारे बारे में कभी नही सोचा। लेकिन इनके हौने पर हम सुरक्षित है हमसे कोई आँख उठाकर बात नही कर सकता है। " " नही मम्मी अब यह ...