एक शख्स
उठती नहीं आँखे किसी और की तरफ एक शख्स का दीदार इतना पसंद आगया | हमे क्या पता था हमे मोहब्बत हो जाएगी हमे तो तेरा मुस्कुराना पसंद आया था | सिर्फ खवाब होते तो क्या बात होती तुम तो ख्वाहिश बन गये वो भी बेइंतेहा | चुपके से आकर इस दिल में उतर गये हो साँसों में मेरी खुशबू बनके बिखर गये हो | कुछ तो चला है यूँ आपका जादू मोहतरमा सोते जागते भी अब तो हमेशा नजर आते हो | बर्दाश्त नहीं तुमे किसी और के साथ देखना बात शक और विश्वास की नहीं , बात तो हक की है | लगती होगी पायल सबपे अच्छी मुझे तो तेरे पेरो में काला डोरा अच्छा लगता है | तुमरे जिस्म की तलब नहीं है मुझे , में तुम्हारी रूह को अपने लब्जो के अहसास से छुना चाहता हूँ || ~~~~~ सौरभ अनजाने मुसाफिर के अनसुने अल्फाज