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एक शख्स

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उठती नहीं आँखे किसी और की तरफ एक शख्स का दीदार इतना पसंद आगया | हमे क्या पता था हमे मोहब्बत हो जाएगी हमे तो तेरा मुस्कुराना पसंद आया था | सिर्फ खवाब होते तो क्या बात होती  तुम तो ख्वाहिश बन गये वो भी बेइंतेहा | चुपके से आकर इस दिल में उतर गये हो  साँसों में मेरी खुशबू बनके बिखर गये हो | कुछ तो चला है यूँ आपका जादू मोहतरमा सोते जागते भी अब तो हमेशा नजर आते हो | बर्दाश्त नहीं तुमे किसी और के साथ देखना  बात शक और विश्वास की नहीं , बात तो हक की है | लगती होगी पायल सबपे अच्छी  मुझे तो तेरे पेरो में काला डोरा अच्छा लगता है | तुमरे जिस्म की तलब नहीं है मुझे , में तुम्हारी रूह को अपने लब्जो के अहसास से छुना चाहता हूँ || ~~~~~ सौरभ  अनजाने मुसाफिर के अनसुने अल्फाज

अनजाने मुसाफिर के अनसुने अल्फाज

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दिलो में रहता हूँ  तो धड़कने बेकाबू कर देता हूँ  मैं इश्क़ हूँ  वजूद की धज्जियां उदा देता हूँ || ~~~~~ सौरभ 

बगीचा

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हां मालूम है मुझे वो बगीचा सूना है आज  मगर कोई तो आएगा टहलने के लिए  खुदा ने मुझे भी दी है माथे पे लकीरे  कोई तो आएगा मुझे झेलने के लिए  मेरी जान जब तुम इश्क़ का कारोबार करके बेज़ार हो जाओ  वापस मत आजाना दिलो से खेलने के लिए  नफरत की आंधी में फ़ना कर दूंगा  मेरे अहसासो से खेलने के लिए  ~ सौरभ सक्सेना अनजाने मुसाफिर के अनसुने अल्फाज