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सपनो का घर

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एक घर हो प्यारा सा, घर मेरा सपनो का घर हो उसमे एक सुन्दर सा, मेरी मां का मंदिर हो! उसमे रहे मेरी मैया,हर पल उस घर मे विराजे, पूजा करूं आरती उतारूं,घंटा ध्वनि हर पल बाजे! करूं एक करूण पुकार मां से अपनी,मेरा ऐसा घर हो! घबरा जाऊं जब किसी मुश्किल से,आंचल मे वो छुपा ले, मै रख दूं सर गोद मे उसकी, और वो मुझको सुला दे! जोत जलती रहे सदा उस घर मे नाम की तेरी,ऐसा मेरा घर हो! तेरे बिना ना मै कुछ भी मैया,कृपा अपनी बरसा दे, मै हूं भिखारी तेरे दर की,भक्ति मुझे दिला दे! आंखे बंद करूं तो तू ही तू हो, खोलूं तो तू हो,मां मुझे एक ऐसा सपनो का घर दिला दे!                                श्वेता अरोडा

"नवरात्रि"

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नवरात्रि के , नौ दिन है पावन लगा लिये मां ने ,सुंदर आसन ।। पूजा निशदिन होगी , मंदिर हो या घर लेकर मनौती आयेंगे , माता हम तेरे दर  ।। माता को अर्पित करु, प्रसाद उन्हें जो भाये कृपा करो हमपे माता,खड़े हैं शीश झुकाये ।। प्रथम दिन शैलपुत्री ,द्वितीय दिन ब्रह्मचारिणी शूल धारण करने वाली, तुम हो मां शूलधारिणी ।। तृतीय दिन चंद्रघंटा, चतुर्थ दिन कुष्मांडा चंड-मुंड का नाश करे, तुम हो मां चामुंडा ।। पंचम दिन स्कंदमाता , षष्ठम दिन कात्यायनी सम्यक रूपिणी ब्रह्मांड की ,तुम हो मां भवमोचनी ।। सप्तमी दिन कालरात्रि,अष्टमी दिन महागौरी सुंदरता की देवी पूजे, तुम हो मां कौमारी ।। नवमीं दिन उपासना करे भक्त, माता सिद्धिदात्री कल्याण करने वाली मैय्या ,तुम हो मां जगद्धात्री ।। जय हो नवदुर्गा मैय्या, कृपा करो हमपे मैय्या रक्षा तुम ही करने वाली, तुम हो दयानिधि मैय्या ।।          🙏💐🌹जय दुर्गा मां🌹💐🙏 (मातारानी आप सभी की मनोकामना पूर्ण करे)                                       ...

"मुबारक हो नौ रात्री"

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तर्ज:- मुबारक हो सबको समां ये सुहाना.... मुबारक हो मैया, ये तुमको नौ रात्रि, मैया आ जाना, आ जाना,आ जाना, मैया जी के माथे पे, बिंदिया भी सोहे, मैया जी के कानों में, झुमकी भी सोहें, सिंदूर को लगा के, झाले पहन कर, मैया आ जाना, आ जाना आ जाना, मैया जी के कंठ में, हरवा भी सोहे, मैया जी के हाथों में, कंगना भी सोहें, माला को सजा के, चूड़ी पहन कर, मैया आ जाना, आ जाना आ जाना, मैया जी के पावों में, पायल भी सोहें, मैया जी के पैरों में, बिछिया भी सोहें, पायल को छनका के, मेंहदी रचा के, मैया आ जाना, आ जाना आ जाना, मैया जी के अंग में, चुनरी भी सोहे, मैया जी के संग में, लंगूरे भी आयें, दीपक लगा कर मैया, भोग लगाऊँ, मैया आ जाना, आ जाना आ जाना, मुबारक हो मैया, ये तुमको नौ रात्रि, मैया आ जाना, आ जाना आ जाना ।     भजन रचना-रजनी कटारे           जबलपुर (म.प्र.)

तुम मेरे आराध्य हो शिव

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तुम मेरे आराध्य हो शिव,  तुम मेरे भगवान करती हूँ विश्वास मैं,  मन से करती हूँ आराधना!  सच है कि दुनिया को  तुम नजर नहीं आते हो मगर सच यह भी है कि  सब साथ छोड़ देते हैं जब, कुल दुनिया में बस- एक तुम ही नज़र आते हो!  तुम भूल जाओ मुझे कभी,  हर पल तुम्हें पुकारती हूँ मैं किसी पल में तुम्हें मैं भूल न जाऊँ,  मन में मूरत सजा कर करती हूँ मैं तेरे नाम की साधना!  चाहत नहीं कि दुनिया हो कदमों में!  हे शिव! सुन लेना मेरी प्रार्थना,  जन्म-जन्म रखना मुझे अपने चरणों में! हे शिव! तुम करना कृपा, मेरे शीश पर हाथ धरना रहना सदा मेरे सहाय,  सफल करना मेरी साधना!   सारा जग जब हो विरुद्ध,  बेटी तुम्हारी अकेली है जग में, याद इतनी सी बात तुम रखना, कठिन डगर हो, दुर्गम सफर हो,  साथ मेरे बस एक तुम चलना,  हर पीडा सह लूंगी, हर कष्ट पर चुप रह लूंगी, मेरे शीश पर हाथ तुम रखना!

'नवचेतना'

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हे! शिवशंकर भोलेनाथ निराधार के आधार तुम्हीं हे!नीलकंठ महादेव करो भक्तों का उद्धार तुम्हीं शीशनवाये करे यहीं प्रार्थना बारम्बार हम प्रभु हे!जगतपालनकर्ता भवसागर से कर दो पार तुम्हीं। त्रिदेवों में देव,देवों में महादेव, डमरू त्रिशूलधारी नृत्य, प्रलय, योग, ध्यान के देवता रूद्र त्रिनेत्रधारी  योगी स्वरुप जटाएँ धारण करे गंगा का वेग अनादि अनंतकाल तक रहे सदा सृष्टि के संचारी। हे!अंतर्यामी तेरी महिमा के करते गुणगान हे!महाकाल तुम्हीं भविष्य दृष्टि का दो ज्ञान मैं मूरख मुझ पर कृपा अपनी बरसाओ  हे!उमापति मुझ दे दो नवचेतना का वरदान। 🙏🏻जय महाकाल 🙏🏻 स्वरचित शैली भागवत 'आस'

शिवरात्रि

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शिव ही शक्ति ,शिव ही भक्ति, शिव सबका संसार हैं,शीश झुकाकर , चरणों में बैठो, शिव ही तारणहार हैं, शिव-शक्ति का विवाह पर्व हैं, आज बड़ा सुंदर दिन है, मन में सबके शिव हैं बैठे, करते बेड़ा पार हैं, अर्ध-चंद्र जटा में गंगा, गले में सर्पों का हार है, डम-डम बाजे शिव का डमरू, शिवरात्रि का त्यौहार है, सच्ची भक्ति मन की श्रद्धा, सबसे बड़ा उपवास है, शिव कैलाशी, हिम के वासी, रखते सबकी लाज हैं, शीश झुकाकर चरणों में बैठो, शिव ही तारणहार हैं। शिव शक्ति विवाह की शुभकामनाएं। आरती आचार्य 

शिव

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हर नाद समाहित शिवम् शिवम्!  हर शब्द प्रवाहित शिवम् शिवम्!!  सिर पर पावन गंगाधारी है!!  न  मन मे कोई अहम्अहम्!!  हर नाद समाहित शिवम् शिवम्!  हर शब्द प्रवाहित शिवम् शिवम्!!  प्रभु अपरजित चंद्रधारी!  कण कण मे समाहित त्रिपुरारी! न मन मे कोई भरम् भरम्!!  हे सत्य सुंदरम् शिवम् शिवम्!!  हर नाद समाहित शिवम् शिवम्!  हर शब्द प्रवाहित शिवम् शिवम्!!  नागो की माला विषधारी!  कानों में कुंडल त्रिपुरारी!!  त्रिनेत्र खुले, प्रलयंकारी!  अब न है, कोई वहम वहम!!  हर नाद समाहित शिवम् शिवम्!  हर शब्द प्रवाहित शिवम् शिवम्!!  नंदी है  प्रतिक्षित द्धार खडे!  शिव, असुरों का संहार करे!!  तन पर भस्म राख मले!!  है   मशान रमे अलंकारी!!  हर नाद समाहित शिवम् शिवम्!  हर शब्द प्रवाहित शिवम् शिवम्!!  है  डम डम डमरू नाद करे!!  है त्रिशूल पे काशी हृदय बसे!!  कैलाश पति,  हे महादेव भोले!  है आदिशक्ति  प्रिये हृदयश्वरी!  हर नाद समाहित शिवम् शिवम्!  हर शब्...

"महाशिवरात्रि"

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चेतनता की रात - महाशिवरात्रि है आई,  शिव सा ओज,माँ सी स्निग्धता है लाई। चतुर्दिक गूंजित ध्वनि,मन में है समाई। लगे जयकारे महाकाल शिव शम्भो वाले, हर हर महादेव जो बोले,उसका बेड़ा पार हो जाए।  भक्तों के श्री मुख से स्वर भजन के निकले, पल-पल भोले का जयकारा भक्ति में सब डूबे  शिव भक्तों का लग रहा मेला, बाजत ढोल मंजीरा,गीत चले अलबेला।  जाप,भजन कर्ण प्रिय मधुर रस घोले,  भूख-प्यास कछु वेग न आवे,  आठो पहर चले शिव जगराता। आबाल वृद्ध सब मस्त हुए हैं  न कोई चिंता न फिक्र, अलमस्त हुए हैं।  जागो-जागो उठो सब,कर्म-पथ पर चलो सब।  पी लो सब जागरण का पीयूष- प्याला। माँ संग लेकर आए ,शिव शंकर हैं आला।  बजावें डमरू,रचें नृत्य शाला। भय का नाश हो निर्भीकता का वास हो। मुश्किलों से त्राण हो,मुक्त जीवन प्राण हो। रचयिता - सुषमा श्रीवास्तव  मौलिक कृति उत्तराखंड।

पीबी कालेज स्थित शिव मंदिर में शिव प्रार्थना

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1898से गुरु-शिष्य प्रार्थना स्थल पर शिव स्तुति करते हैं शिवाकांत शम्भो शशांकार्ध मौले, महेशान शूलिन जटा जूट धारिन। त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूप, प्रसीद-प्रसीद प्रभो पूर्णरूप। परात्मानमेकं जगदबीजमाद्यम, निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम। यतो जायते पाल्यते येन विश्वम, तमीशंभजे लीयते यत्र विश्वम। न भूमिर्न चापो न वहिर्न वायु:, न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा। न ग्रीष्मो न शीतं न देशो न वेषो, न यस्यास्तिमूर्ति स्त्रिमूर्तिम तमीडे। अजं शाश्वतं कारणं कारणानां, शिवं केवलं भासकं भास्कनाम। तुरीयं तमःपारमाद्यन्तहीनं, प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम। नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते, नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते। नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य, नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्य। प्रेषक : डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र .

शिवरात्रि

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पावन ये घड़ी आई, मंगल की बेला छाई। विवाह है गौरा संग, सभी गण आइए।। धूनी रमी अंग-अंग, छाने लगा प्रेम रंग। रुद्र जाते हैं मगन, नगाड़े बजाइए।। वर माला लिए हाथ, चली सखी संग साथ। अंखियन लाज सजी, फेरे तो लगाइए।। शिव-रात्रि आई आज, पूरे होंगे सब काज। शिव-गौरा का जो साथ, आशीर्वाद पाइए।। मनीषा अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश

शिवरात्रि

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भोले नाथ देखो चले, सर्प गले संग भले। खुश गौरा होने लगी , तपस्या पूरी हुई।। आज घर आने वाले, भस्म अंग लगा डाले। लगते मनभावन, गौरा शिव की हुई।। माता मैना चिंता करे, नाजों पली बेटी डरे। काले - काले नाग देख, बेटी बावरी हुई।। चली गौरा भोला संग, ढ़ली देखो पिया रंग। शिवरात्रि आज आई, भक्तों में खुशी छाई।। *** कविता झा काव्या कवि रांची, झारखंड

जगदंबा

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जय जगदंबा जी की जय  जगदंबा मां बहुत है आशीष  बरसाती है माँ जगदंबा सृष्टी की  जननी कहलाती है जगदंबा बहुत  ही कृपा बरसाती है शक्ति बहुत  अपने भक्तो को देती बहुत भक्तो  को हरदम मुसीबत से बचाती है  सभी की नैया पार लगाती मां  जगदंबा बहुत ही भक्तो पर खुशिया बरसाती है माँ जगदंबा  जय जगदंबा मां आपकीं जय

जगदंबा

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जय जय माँ जगदंबा  जय जय आपकी जय  जय हो आपकीं जय जयकार करती हो मां तो आप तो बड़े  चमत्कार चमत्कार करती हूँ जय जय जय जय जय जय  मां आप ही शेरोवाली कहलाती  ओर खप्परवाली आप ही महाकाली आप ही हो शक्तिशाली  मेरी मात भवानी मेरी मात तू हर  पल करती चमत्कार चमत्कार  आशीर्वाद मुझपर मां बनाये रखना जय जय जय जय जय जय जगदंबा जय जय जय जय

शिवजी

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शिवजी आपकीं जय जयकार  मै करू बारम्बार आपकीं  जय जयकार जयकार जयकार  शिवजी आप ही सृष्टि के रचयिता  आप ही दुनिया चलानेवाली  आप हम भक्तो के रक्षक आप ही  भगवान बेड़ा पार लगानेवाले  शिवजी जय जयकार जयकार  जय जय जय जय जय जय जय

नमो नारायणी🙏🙏

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 नमो नमो भगवते, नमो नमो आदिशक्ति। नमो नमो नारायणी, नमो नमो मंगल मूर्ति, चन्द्र पाए आपसे धवल चाँदनी सूर्य तेरे ललाट से तेज धारते। अद्भुत  अनुपम ममतामयी, जगत की जननी धात्री।  अष्ट भुजा धारणी, पाप नाशिनी कष्ट विमोचनी आदिशक्ति स्वीकार करो मेरी भक्ति, भर दो उर में मेरे शक्ति। सारे दुखों से पार पा जाऊँ, नमो नारायणी नमस्तुभ्यं भगवति। अन्जू दीक्षा, बदायूँ , उत्तर प्रदेश

जागो जागो जगतार

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 जागो जागो जगतार जागो मां अंबिका भवानी आए भक्त तेरे द्वार ठाणे करते पुकार सुन लो विनती हमारी माता रानीll लेवो शक्ति अवतार करो दुश्मन संघार अब दुख हरो महारानीl  जागे नैनों में ज्वाल ढेर दुष्ट तत्काल किरपा करो कल्याणी।। करते स्तुति तुम्हारी जाते तन मन बलिहारी होओ प्रसन्न महारानी। दुखी जनता अपार करो सब का बेड़ा पार बरसाओ अमृत सुखदानी। आशा कह रही पुकार हरो दुख हमार दे दो आशीष वरदानी।। स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर

आदिशक्ति

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हे आदिशक्ति जगत की जो, हर स्त्री में जिसका अंश समाया है।  ।।1।। उसके ही असितत्व को आज हमने, इस धरा पर नगण्ड पाया है।। ।।2।। पूजते उसको सदा हम,  मूर्ति जो पत्थर की है।  ।।3।। दिया नही सम्मान उसको,  जो हमारी गर्भधर है।   ।।4।। है शक्ति शिव की ब्रह्म बाणी, विष्णु की जो प्रिया है।   ।।5।। उतपत्ति और पालन प्रलय की  एक ही बस बो धुरी है।    ।।6।। लौटादो असितत्व उसका, सहनशक्ति में जो धरा है।   ।।7।। रह न पाएगी पृथक बो, रागिनी से ज्यों स्वरा है।     ।।8।। नारी तू स्वयंब सिद्धा, तू ही शक्ति स्वरूपा है।     ।।9।। करवद्य करती है विनय , आज फिर ये अक्षरा है।।     ।।10।। शीला द्विवेदी  (अक्षरा)

नव दुर्गे

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कितना  सुंदर पर्व हैं आज मां नव दुर्गा घर घर आयीं होके शेर सवार आज। नयनों से  में तेज पुंज है, अद्भुत  तेज ललाट, ममतामयी माँ का ह्रदय,  मिटा देता अपने भक्तों के त्रास।  हर तरफ भरे धन धान्य मां, देती मान सम्मान माँ,  देती सुख सौभाग्य।   नव दुर्गा नव रत्न हैं, हो जाएंगे प्रसन्न  बस भाव से करना जतन है सब के कष्ट हर लेगी मंगल मूर्ति, हर तरफ होगई सुख शान्ति माँ कर देगी सबके पूरे करें काज।  जो भी आके सिर को झुकाए, मन की सभी मुरादें पाए, कोई न लौटा खाली हाथ। भरके  मन में विश्वास, जो आए माता के पास,  कर देती निरोग निर्मल, हर थी सभी विकार, हो जाता जीवन अमृत, वो जब रख देती सिर पर हाथ। आओ पापनाशिनी, कष्ट विमोचनी,   ह्रदय में तेरे आगमन पे उल्लास, करो भक्त के मन मन्दिर में आप निवास। जय माता दी, आप सबको नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं मां, हम सभी पर कृपा दृष्टि बनाएं रखें।,🙏🙏💐💐🙏🙏  अन्जू दीक्षित, बदायूँ उत्तर प्रदेश।

......भजन.....

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मोरी माई के भवन बड़ी भीर भगत  जन दरस करें लाल लाल चोला मैया के अंग सोहे लाल फूलन  के हार मैया के माथे मुकुट है सो है कुंडली की झंकार  नैनन में मैया के कजरा सो है कृपा की भरी रसधार चम चम चमके मैया को हरवा कंगन की खन कार पांव में मैया के पायल बाजे सिंहा पे असवार  हात जोर आशा विनती कर रही  सबको करो बेडा पार डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर

हे राम मेरे

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हे राम मेरे,हे राम तेरे बिन ना होते काम मेरे। तु बिगाडी बनाता है मेरी तुम ने ही हरे सब कष्ट मेरे।। मै मोह माया मे फसी हुई ना तेरा नाम ध्याती हु। तुम ने दे करके शारण मुझे, है सारे कष्ट निवारे मेरे।। मुझे तुझपे भरोसा है रघुवर ,इस लिए मै नाम धयाती हु। तु हर संकट हर लेता है, तु दुर है करता कष्ट मेरे ।। मुझको एक तेरा सहारा है, बेगाना ये जग सारा है। जब जब भी मन मेरा डोला ,तुमने ही सवारे काम मेरे।। कौई की मुसीबत आती है, पहले तुझसे टकराती है। मेरी रक्षा करता है हर दम, मुझ पर है बहुत एहसान तेरे।। हे राम मुझ पर दिया करो,मोह माया से मुझे दुर करो।  एक तेरी शारण मे आने से कट जाएगे सब कष्ट मेरे।। मेरे तन मन मे तेरा वास रहे, तु हर दम मेरे पास रहे।  मै तुझको पूजती हु रघुवर,ऐसे ही निकले प्रान मेरे। । सब रिश्ते छोड़कर जाते है कहा हर दम साथ निभाते है।  पर तुम ना छोड़ना साथ मेरा, रहना हर पल तु साथ मेरे। । कौई गलती हो जाए तो , मन मे दुभीदा आ जाए यो। तुम मार्ग दर्शक बन जाना, सही कर देना सब कर्म मेरे।।   लेखक  ऋतु शर्मा