वृद्धाश्रम भाग १
उपन्यास से एक अँश- "क्या होता है वृद्धाश्रम..?" एक बुजुर्ग दंपत्ति चाहता है कि जीवन के उत्तरार्ध में वह अपने पौत्र-पौत्रियों के साथ पुनः अपना बचपन जी ले.. अपने बनाये घरौंदे में खेले.. पर अफसोस कि अब ये सपने अधुरे से लग रहे हैं...आज हमारे देश में शिक्षा पर बहुत जोर दिया जा रहा है.. माता पिता अपने बच्चों को किताबी ज्ञान से परिपूर्ण कर देते हैं.. अनेकानेक मुसीबतों का सामना कर के धनार्जन कर अपने पाल्यों की ख्वाहिशें पूरी करते हैं.. जिन प्रश्नों का उत्तर बड़े बुजुर्गों के सान्निध्य में प्राप्त हो जाता है, उन प्रश्नों में बच्चे अकेले उलझ जाते हैं.. उँची उपाधियाँ प्राप्त करने के बाद भी जब बच्चे संस्कार जैसे तत्व से पृथक रहते हैं..ऐसे परिवेश में आवश्यकता होती है वृद्धाश्रम की.. जहाँ कुछ पल के लिए हमारे बुजुर्ग अपनी ब्यथा को एक दूसरे से बाँट सके..!" सुरभी-"थोड़ा खिसक जा यार.. खड़े हो कर थक गई मैं..! इतनी भीड़ में भी जगह मिल गइ तुझे? मैं तो तबसे धक्के खा रही हूँ.!" शैली-"हाँ यार बड़ी मुश्किल से यहाँ तक पहुँची हूँ मैं...पीछे नजर दौड़ाया तो यही एक सीट खा...